इकाई- 5
खेल के मूलभूत कौशल
कबड्डी
कबड्डी दो दलों के बीच में खेला जाता है और इसका लक्ष्य विरोधी खिलाड़ियों को स्पर्श करना होता है और बिना पकड़ में अपने कोर्ट के हिस्से में वापस आना है। कबड्डी से शक्ति, गति और दल भावना विकसित होती है। यह कई देशों में एक लोकप्रिय खेल है और यह एशियाई खेलों में भी खेला जाता है।
कबड्डी - 1रेडिंग फुटवर्क
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| जंपिंग जैक्स, हाई नीज, बट किक्स, जॉगिंग ड्रिल्स | रेडिंग फुटवर्क (आक्रामक पद संचालन) | हैमस्टिंग स्ट्रैच, पिंडली स्ट्रेच, पैरों को मोड़कर बैठना, पैरों की अँगुलियों को स्पर्श करना | पद-संचालन एवं पूर्वानुमान |
|
आक्रामक पद-संचालन
सीखने के विभिन्न चरण-रेडिंग पद-संचालन तकनीक का प्राथमिक उद्देश्य रेडर को रेड के समय रक्षक खिलाड़ी से बचना और सुरक्षित अपने पाले में लौटना होता है।
1. स्टांस (प्रारंभिक मुद्रा)•अपने पैरों को समानांतर या अलग-अलग करके तिरछी स्थिति में रखिए, जिससे शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से वितरित हो।
•अपने पैरों के घुटनों को मोड़कर सिर को ऊँचा करके, थोड़ा आगे की ओर झुककर और कोहनियों को थोड़ा मोड़कर संतुलन बनाए रखिए।
2. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)• विभिन्न दिशाओं में चपलता, पूर्वानुमान, अभिविन्यास क्षमता और कौशल के साथ आक्रामक पद संचालन का क्रियान्वयन कीजिए।
• इसमें आगे, दाएँ-बाएँ और पीछे की चाल सम्मिलित हैं, लेकिन किसी को छूने के उद्देश्य से।
3. फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)• निष्पादन के बाद शरीर का संतुलन बनाइए और शरीर की दिशा मध्य रेखा की ओर परिवर्तित कीजिए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
शटल रन के लिए 30 फीट (9.15 मीटर) की दूरी पर दो समानांतर रेखाएँ बनाइए। प्रारंभिक रेखा के विपरीत 30 फीट की दूरी पर दो डिब्बे रखिए। खिलाड़ी 'तैयार और दौड़ो' के संकेत पर जितना शीघ्र हो सके, डिब्बे की ओर दौड़ना प्रारंभ कर देंगे। वे एक डिब्बा उठाएँगे और इसे प्रारंभिक रेखा के पीछे रखने के साथ वापस दूसरा डिब्बा उठाने के लिए शीघ्रता से दौड़ेंगे, फिर दूसरे डिब्बे के साथ आरंभ रेखा की ओर दौड़ेंगे। जो खिलाड़ी गतिविधि को पूरा करने में सबसे कम समय लेगा, वह 'विजेता' होगा।
चर्चा कीजिए कि आपने डिब्बे तक शीघ्रता से दौड़ने, डिब्बा उठाने, मोड़ लेने और वापस लौटने के लिए किस प्रकार के पद-संचालन का उपयोग किया?
अनुभूति
रेड के प्रकार•अग्रणी पैर से रेड
•विपरीत पैर से रेड
•स्वाभाविक दौड़ से रेड
कबड्डी - 2
हैंड-टच
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| कलाई घुमाना, कंधे के व्यायाम, जॉगिंग ड्रिल्स | हैंड-टच (हस्त-स्पर्श) | छाती का खिंचाव, कंधे को गोल घुमाना, क्रॉस बॉडी शोल्डर स्ट्रैच | प्रतिक्रिया-समय, गति-समय एवं स्मृति | |
हैंड टच (हस्त-स्पर्श)
सीखने के विभिन्न चरण-
हस्त-स्पर्श तकनीक का प्राथमिक उद्देश्य रक्षक खिलाड़ियों (रक्षक खिलाड़ी) को छूना और एक सफल रेड के पश्चात अपने पाले में वापस आना है।
1. स्टांस (प्रारंभिक मुद्रा)•तिरछी (डायगनल) या समानांतर स्थिति में खड़े हो जाइए।
•आगे वाले पैर की अंगुलियाँ लक्ष्य की ओर होनी चाहिए और पीछे वाला पैर थोड़ा तिरछा मध्य रेखा की ओर होना चाहिए, घुटनों को मोड़कर रखिए।
•दृष्टि लक्ष्य की ओर हो तथा निष्पादन करने वाला हाथ छूने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए।
2. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)•लक्ष्य को निर्धारित कीजिए और लक्ष्य की ओर बढ़िए।
•कवर और कॉर्नर पर आक्रमण करते समय हाथ की दिशा लंबवत या तिर्यक हो सकती है। हाथ की गति में परिवर्तन करते हुए आक्रमण कीजिए।
•दिशा बदलते हुए दाएँ और बाएँ दोनों ओर आक्रमण कीजिए।
•चैन के सामने तिरछी स्थिति रखते हुए हस्त स्पर्श का प्रयास कीजिए।
2.फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)
हैंड टच प्रयास पूरा करने के बाद शरीर का संतुलन बनाइए और शरीर की दिशा को मध्य रेखा की ओर परिवर्तित कीजिए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
दो दल 'अ' और 'ब' बनाएँ और दोनों दलों को 10 मीटर की दूरी वाली रेखाओं पर खड़ा कीजिए। दोनों रेखाओं के केंद्र में एक छोटी गेंद रखें। प्रत्येक खिलाड़ी को एक-एक चेस्ट नंबर (दोनों टीमों में एक ही संख्या रहेगी) प्रदान करें। जब कोई संख्या पुकारी जाए तो दोनों टीमों से उस संख्या वाले खिलाड़ी दौड़कर आएँगे और बीच में रखी गेंद को केवल हाथों की सहायता से अपने पाले में ले जाने का प्रयास करेंगे। जिस दल का खिलाड़ी सफलतापूर्वक गेंद अपनी ओर ले आएगा, उसे एक अंक मिलेगा और खेल समाप्ति पर जिस दल के अंक अधिक होंगे, वह दल विजेता होगा।
आपने अपनी संख्या स्मरण रखने के लिए तथा शिक्षक के संख्या बोलने पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए क्या किया?
कबड्डी - 3टो-टच
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन |
|---|---|---|---|
| ऐड़ी घुमाव (एंकल रोटेशन), पैरों की अँगुलियों पर चलना, लंजिंग | टो-टच (अग्रपाद-स्पर्श) | टखना खिंचाव, पिंडली खिंचाव, जाँघ की पेशियों में खिंचाव | आँखो-पैरों का समन्वय |
टो-टच (अग्रपाद-स्पर्श)
टो-टच तकनीक का मुख्य उद्देश्य एक रक्षक को छूना और रेड करने के बाद सुरक्षित रूप से अपने पाले में वापस आना है।
टो-टच (अग्रपाद-स्पर्श) के प्रकार•सामान्य मुद्रा में ही अग्रपाद-स्पर्श।
•एक पद पीछे लेकर अग्रपाद-स्पर्श।
•दौड़ते हुए अग्रपाद-स्पर्श।
•पीछे धकेलकर अग्रपाद-स्पर्श।
•चकमा देते हुए अग्रपाद-स्पर्श।
सीखने के विभिन्न चरण - 1. एप्रोच (पहुँच)रेडर को लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एक कदम पीछे लेकर या पीछे की ओर कदम को खींचते हुए बढ़ना होता है।
•शरीर की मुद्रा समानांतर या तिरछी हो सकती है।
शरीर का भार आगे वाले पैर से पीछे वाले पैर पर स्थानांतरित होना चाहिए।
•शरीर झुकी हुई स्थिति में और मध्य रेखा की ओर झुकना चाहिए।
•घुटने और टखने के जोड़ सीधे होने चाहिए।
•भुजाएँ लचीली और स्वतंत्र होनी चाहिए।
2. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)
• रेड के समय पैर की गति सीधी, तिरछी या वक्र होनी चाहिए।
• झुकने की स्थिति में पैर को आगे की ओर ले जाकर मध्य रेखा की ओर ले जाना।
3. फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)• क्रिया पूरी करने के बाद शरीर का संतुलन पुनः बनाइए और शरीर की दिशा मध्य रेखा की ओर परिवर्तित कीजिए।
• आगे बढ़ने वाले पैर के पंजे की दिशा वापसी के समय मध्य रेखा की ओर होनी चाहिए।
• ऊपरी शरीर को झुकी हुई स्थिति में होना चाहिए और खिलाड़ी को मध्य रेखा की ओर शीघ्रता से बढ़ना चाहिए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
कोर्ट में चार अलग-अलग आकार (त्रिभुज, वर्ग, वृत्त आदि) बनाएँ। प्रत्येक खिलाड़ी को एक चेस्ट संख्या दी जाएगी। जब शिक्षक संख्या बोलेगा, तो खिलाड़ी बॉक रेखा तक दौड़ेगा। जैसे ही खिलाड़ी बॉक रेखा तक पहुँचने वाला होगा, शिक्षक यादृच्छिक रूप से एक आकार का नाम पुकारेंगे। खिलाड़ी को तुरंत दौड़कर उस आकार को 'टो स्पर्श' करना होगा और फिर मध्य रेखा पर वापस आना होगा। समय की उपलब्धता के आधार पर प्रत्येक खिलाड़ी को समान अवसर दिया जाएगा। जिस खिलाड़ी का समय सबसे कम होगा, वही विजेता होगा। शेष विद्यार्थी प्रत्येक रेड को बहुत ध्यान से देखेंगे।।
• प्रत्येक विद्यार्थी यह चर्चा करेगा कि शिक्षक द्वारा आकार का नाम पुकारे जाने की प्रतीक्षा करते समय उनके मन में क्या चल रहा था।
• यह चर्चा कीजिए कि किन विद्यार्थियों ने ऊपर दिए गए शरीर की गति और क्रियान्वयन के सुझावों का उपयोग किया।
किक
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन |
|---|---|---|---|
| लेग स्विंग, लेटरल लेग किक्स, वॉकिंग लंजेज, हाई नीज | किक | जाँघ की पीछे की मांसपेशियों का खिंचाव (हैमस्ट्रिंग स्ट्रैच), स्टैंडिंग क्वाड स्ट्रैच, हिप फ्लेक्सर स्ट्रैच | विभिन्न विधियों से किक करना |
किक
कबड्डी में किक रेडर द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक प्रमुख आक्रामक कौशल है। किक तकनीक का मुख्य उद्देश्य रक्षक को पैर से स्पर्श करना और रेड के बाद सुरक्षित रूप से अपने पाले में वापस आना है।
सीखने के विभिन्न चरण -
1. एप्रोच (पहुँच)
• पहुँच लक्ष्य की विविधता और तय की जाने वाली दूरी पर निर्भर करती है।2. स्टांस (प्रारंभिक मुद्रा)
• मुद्रा तिरछी या समानांतर होनी चाहिए। • पीछे वाले पैर की स्थिरता बनाए रखिए। • कंधों की रेखा मध्य रेखा की ओर होनी चाहिए। • ऊपरी शरीर झुकी हुई स्थिति में होना चाहिए। • भुजाएँ लोचशील और शरीर को संतुलित रखने के लिए आराम की स्थिति में होनी चाहिए।
3. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)
• बिना घुटने को मोड़े किक कीजिए, अपने लक्ष्य की दूरी और स्थिति को ध्यान में रखिए।
•पार्श्व पैर पाईवोट मुद्रा में होगा।
4.फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)• किक मारने के बाद, रक्षकों (डिफेंडर्स) द्वारा पकड़े जाने से बचने के लिए किक मारने वाले पैर को तुरंत आगे लाइए।
• रक्षक कवर्स और चेन से बचने के लिए झुककर मध्यरेखा की ओर चलिए।
5.विविधता किक की निम्नलिखित प्रकार की विविधताएँ प्रयोग की जा सकती हैं- •बैक किक • साइड किक •कर्व किककौशलोन्मुखी क्रिया
दोनों दलों को बोनस लाइन के पीछे कोनों पर हाथ फैलाकर खड़ा करें। दोनों दलों को कोर्ट के विपरीत किनारों पर पंक्ति में खड़ा किया जाएगा। सीटी बजने पर पहला खिलाड़ी शुरुआत करेगा। उद्देश्य यह है कि सभी खिलाड़ी बारी-बारी से विरोधी पाले में जाएँ, फैले हुए हाथ को किक करें और न्यूनतम समय में वापस लौट आएँ। सबसे पहले समाप्त करने वाला दल विजेता होगा।
• प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए रेडर ने किक में किस प्रकार की विविधता जोड़ी?
रक्षात्मक कौशलकुछ रक्षात्मक स्थितियाँ नीचे दी गई हैं-
| किनारे वाले खिलाड़ी (कॉर्नर्स) | दल के वे खिलाड़ी जो कबड्डी के पाले में सबसे दाएँ और बाएँ कोनों (कॉर्नर्स) पर खड़े होते हैं। किनारे वाले खिलाड़ियों का उत्तरदायित्व रेडर को पकड़ने के लिए पहल करना है। रेडर जब बाएँ ओर सक्रिय होता है तो दाएँ किनारे वाला खिलाड़ी पकड़ने का प्रयास करता है और रेडर जब दाएँ तरफ सक्रिय होता है तो बाएँ किनारे वाला खिलाड़ी उसे पकड़ने का प्रयास करता है। |
| मध्य या केंद्र खिलाड़ी (सेंटर) | मध्य में खेलने वाले खिलाड़ी को सेंटर कहते हैं। सामान्यतः इस जगह पर दल का मुख्य रेडर रहता है। |
| इन-प्लेयर्स (सहायक खिलाड़ी) | 'इन' की स्थिति कॉर्नर्स और कवर खिलाड़ियों के बीच होती है। 'इन' की एक प्रमुख दायित्व कॉर्नर रक्षकों को लॉबी या पाले के बाहर जाने से बचना होता है। ये सामान्यतः टीम के रेडर होते हैं और रक्षा में भी सहायता करते हैं, जैसे प्रतिद्वंद्वी टीम के रेडर को पकड़ना। |
| घेराव वाले खिलाड़ी (कवर्स) | जो रक्षक 'इन' और 'सेंटर' के बीच में स्थित होते हैं, उन्हें कवर कहा जाता है। सामान्यतः टीमें अपने ऑल-राउंडर खिलाड़ियों को इस पोजीशन पर तैनात करती हैं। |
कबड्डी - 5
टखना-पकड़
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| ट्रंक ट्विस्ट, पार्श्व वार्ड और फॉरवर्ड लंजेज, बर्पीज एक्सरसाइज, पुश-अप्स | टखना-पकड़ | ट्राइसेप्स स्ट्रैच, शोल्डर्स स्ट्रैच, हैमस्ट्रिंग स्ट्रैच, काफ स्ट्रैच | प्रतिक्रिया समय | |
टखना-पकड़
रक्षात्मक टखना-पकड़ (एंकल होल्ड) तकनीक का मुख्य उद्देश्य रेडर का टखना पकड़कर अपने ही पाले में 30 सेकेंड तक रोक कर अंक अर्जित करना है।
कौशल सीखने के विभिन्न चरण -
1.शारीरिक स्थिति
•प्राथमिक मुद्रा में पैरों को चौड़ा होना चाहिए।
•ऊपरी शरीर हल्का-सा रेडर की ओर झुका हुआ होना चाहिए।
•शरीर का भार आगे वाले पैर पर अधिक होना चाहिए और उसके पैरों की अँगुलियाँ रेडर की ओर होनी चाहिए।
•शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए घुटने थोड़े से मुड़े हुए और लोचशील होने चाहिए।
•हाथ टखने पकड़ने के लिए स्वतंत्र रहने चाहिए।
•दृष्टि रेडर की कमर से नीचे के भाग पर केंद्रित होनी चाहिए, जिससे पैर की गतियों का अवलोकन किया जा सके।
2.एप्रोच (पहुँच)
•टखना पकड़ (एंकल होल्ड) करने से पहले, रक्षक खिलाड़ी को रेडर के पैर को ध्यान से देखना चाहिए और उसके अगले पैर की गतियों का अनुमान लगाना चाहिए।
•आगे के पैर को मोड़ते हुए, ऊपरी शरीर को पूरी तरह से रेडर के पैर की ओर झुकाइए, साथ ही दोनों हाथों को रेडर के टखने की ओर लाइए।
3. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)
•भीतरी हाथ को रेडर के टखने के जोड़ पर रखना चाहिए, जबकि दूसरा हाथ रेडर के टखने पर सशक्त पकड़ बनाने के लिए सहारा देता है।
4.फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)•टखना पकड़ने के बाद रक्षक खिलाड़ी को शरीर का संतुलन और सशक्त पकड़ बनाए रखें। रेडर को अपने कंधे की दिशा में अंदर की ओर उठाइए और रेडर के पैर को पीछे खींचते हुए शरीर का भार पीछे स्थानांतरित कीजिए। छोटे-छोटे कदम लेते हुए रेडर को अंतिम रेखा की ओर घुमाइए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
पाले में चार अलग-अलग आकार बनाइए और प्रत्येक आकार के ठीक पीछे एक रक्षक खिलाड़ी खड़ा कीजिए। प्रत्येक रेडर खिलाड़ी का एक चेस्ट नंबर होगा। जब किसी रेडर की संख्या पुकारी जाएगी तो उसे बॉक रेखा की ओर दौड़ना होगा। जैसे ही रेडर बॉक रेखा के करीब पहुँचे, शिक्षक किसी भी आकार का नाम पुकारेंगे। रेडर को तुरंत उस आकार की ओर दौड़कर टो-टच करना होगा। उसी समय, रक्षक खिलाड़ी को रेडर का टखना पकड़ने का प्रयास करना होगा। रेडर का उद्देश्य टखना पकड़ (एंकल होल्ड) से बचकर सुरक्षित लौटना होगा। प्रत्येक सफल टखना-पकड़ के लिए रक्षक खिलाड़ी को एक अंक मिलेगा। सभी खिलाड़ियों को समान अवसर दिए जाएँगे।
प्रत्येक रक्षक खिलाड़ी चर्चा करेगा कि जब खिलाड़ी टो-टच करने आ रहा था, तब उसके मन में क्या चल रहा था? सभी रक्षक खिलाड़ी यह चर्चा करेंगे कि किस रक्षक खिलाड़ी ने टखना पकड़ (एंकल होल्ड) की सही तकनीक का उपयोग किया, जैसे कि शरीर की स्थिति और निष्पादन वाले भाग में बताया गया था।
कबड्डी - 6
जाँघ-पकड़
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन |
|---|---|---|---|
| फॉरवर्ड बैकवर्ड लंजेज, जंपिग जैक | जाँघ-पकड़ | जाँघ की पीछे की मांसपेशी खिंचाव (हेम्स्ट्रिंग), पिंडली खिंचाव, पैरों को मोड़कर बैठना, पैरों की अँगुलियों को छूना, टॉर्सो ट्विस्ट | हाथों की पकड़ शक्ति |
जाँघ-पकड़
रक्षात्मक जाँघ पकड़ तकनीक का प्राथमिक उद्देश्य रेडर को इस प्रकार पकड़ना है कि रेडर अपनी 30 सेकंड की साँस, रक्षा पक्ष के पाले में रेड के समय छोड़ दे।
सीखने के विभिन्न चरण-
1.शारीरिक स्थिति
•सुविधायुक्त तिर्यक स्थिति रखिए।
•आगे वाले पैर की अंगुलियाँ सामने की लॉबी की ओर होनी चाहिए।
•पीछे वाले पैर की अंगुलियाँ अंतिम (समापन) रेखा की ओर होना चाहिए।
•दोनों पैरों के घुटने हल्के मुड़े हुए होने चाहिए।
•दृष्टि लक्ष्य रेडर पर केंद्रित होनी चाहिए।
•ऊपरी शरीर रेडर की दिशा में थोड़ा-सा झुका हुआ होना चाहिए।
2.एप्रोच (पहुँच)
•जाँघ-पकड़ से पहले, रक्षक खिलाड़ी को रेडर के पैरों को ध्यान से देखना चाहिए। रेडर के मार्ग का विश्लेषण करने के बाद रक्षक खिलाड़ी को रेडर के अगले फुटवर्क का अनुमान लगाना चाहिए।
•ऊपरी शरीर को हल्का-सा रेडर के कूल्हे के जोड़ की ओर झुकाइए। कंधों को रेडर के कूल्हे के जोड़ की सीध में रखिए।
•रक्षक का आगे वाला पैर रेडर के स्टांस के बीच में रखा जाना चाहिए।
3. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)
•रेडर के निचले पैरों तक पहुँचने के बाद, रक्षक खिलाड़ी को अपनी कोहनी की पकड़ से रेडर की जाँघ सुदृढ़ता से पकड़ लेनी चाहिए।
•अंदर वाला हाथ रेडर के घुटने के जोड़ के नीचे रखा जाना चाहिए।
•कंधे को रेडर के कूल्हे के जोड़ पर लगाएँ।
4. फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)
एक बार रेडर को पकड़ने के बाद, रक्षक खिलाड़ी को संतुलन और मजबूत पकड़ बनाए रखनी चाहिए। रेडर को ऊपर उठाते हुए उसे अंतिम रेखा की ओर घुमाना चाहिए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
चार भिन्न-भिन्न भार वाले विद्यार्थियों के दो दल बनाएँ। प्रत्येक टीम से एक खिलाड़ी शिक्षक के संकेत पर शुरुआत करेगा और अपने साथी को जाँघ पकड़कर उठाएगा तथा फिर उसे प्रारंभिक बिंदु तक लाएगा। इसके पश्चात वापस जाकर टीम के दूसरे खिलाड़ी को लाएगा। दोनों टीमों का अभ्यास तब पूरा होगा, जब अंतिम खिलाड़ी को उठाकर प्रारंभिक बिंदु तक पहुँचा दिया जाएगा। जो टीम अपने अंतिम खिलाड़ी को सबसे पहले प्रारंभिक बिंदु तक पहुँचा देगी वह टीम विजेता होगी। यही गतिविधि अन्य खिलाड़ियों द्वारा भी दोहराई जा सकती है।
•विभिन्न भार वाले साथियों को उठाने में अंतर पहचानें।
•क्या आपको अपने साथी को अलग तरीके से पकड़कर उठाने में कोई बदलाव अनुभव हुआ?
कबड्डी - 7
घुटना-पकड़
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| डीप लेग स्क्वैट, सिंगल लेग स्क्वैट | घुटना-पकड़ | जाँघ की आगे मांसपेशियों (क्वाड्रिसेप्स) और जाँघ की पाछे की मांसपेशियों (हैमस्ट्रिंग) में खिंचाव | सही तकनीक | |
घुटना-पकड़
घुटना-पकड़ एक रक्षात्मक कौशल है, इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य रेडर का घुटना पकड़कर अपने पाले में लौटने से रोकना है। घुटना-पकड़ तकनीक जाँघ पकड़ के समान होती है। सामान्यतः यह एक द्वितीय सहायक खिलाड़ी द्वारा उपयोग की जाती है।
कौशल-सीखने के विभिन्न चरण -
1.शरीर की स्थिति
•शरीर को सुविधा के अनुसार तिरछी स्थिति में रखिए।
•आगे वाले पैर (लीडिंग लेग) की अँगुलियाँ लॉबी की ओर होनी चाहिए।
•पीछे वाले पैर (रियर लेग) की अँगुलियाँ अंतिम रेखा के समानांतर होनी चाहिए।
•दोनों पैरों के घुटने हल्के मुड़े होने चाहिए।
•दृष्टि लक्ष्य (रेडर) पर होनी चाहिए।
•ऊपरी शरीर का थोड़ा-सा झुकाव रेडर की दिशा में होना चाहिए।
2. एप्रोच (पहुँच)
•घुटना-पकड़ से पहले रक्षक खिलाड़ी को रेडर के पैरों की गति को ध्यान से देखना और समझना चाहिए तथा रेडर के अगले फुटवर्क का अनुमान लगाना चाहिए।
•ऊपरी शरीर को रेडर के घुटने के जोड़ की ओर झुकाना चाहिए।
•दोनों हाथों को रेडर के घुटने की सीध में रखना चाहिए।
•रक्षक खिलाड़ी का आगे वाला पैर (लीडिंग लेग) रेडर के उस घुटने के पार्श्व में होना चाहिए, जिसे पकड़ना है।
3. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)•रेडर के शरीर के निचले भाग तक पहुँचने के बाद, रक्षक खिलाड़ी को अपनी कोहनी, कलाई और हथेली की पकड़ से रेडर के घुटने को सुदृढ़ता से पकड़ लेना चाहिए।
4. फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)•रेडर को पकड़ने के बाद, रक्षक खिलाड़ी को संतुलन और सशक्त पकड़ बनाए रखनी चाहिए।
•रक्षक खिलाड़ी रेडर को अपनी ओर खींचते हुए अंतिम रेखा की ओर ले जाना चाहिए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
कबड्डी खेलते समय पालन किए जाने वाले नियम-
•रेडर केवल हस्त स्पर्श तकनीक का उपयोग करके ही रक्षक खिलाड़ियों को स्पर्श कर सकता है।
•रक्षक खिलाड़ी केवल घुटना पकड़ तकनीक का उपयोग करके रेडर को अंक बनाने से रोकेगा।
•यह सुनिश्चित कीजिए कि प्रत्येक रक्षक खिलाड़ी को घुटना पकड़ तकनीक करने के पर्याप्त अवसर मिलें।
•यह चर्चा कीजिए कि किन रक्षकों ने घुटना-पकड़ के लिए सही तकनीक को अपनाया, जैसा कि शारीरिक स्थिति और निष्पादन भागों में बताया गया है।
कबड्डी - 8
कलाई-पकड़
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| कलाई घुमाना, पाम स्ट्रेचिंग, शोल्डर रोटेशन, जंपिंग जैक | कलाई-पकड़ | कलाई तल प्रसारण, आड़े शरीर कंधे का खिंचाव | प्रतिक्रिया और रणनीति | |
कलाई-पकड़
कलाई-पकड़ तकनीक का मुख्य उद्देश्य रेडर को कलाई से पकड़कर अपने पाले में लौटने से रोकना है, जिससे रक्षात्मक दल अंक प्राप्त कर सकें।
सीखने के विभिन्न चरण-
1.कलाई-पकड़ के प्रकार
•ऊपर से कलाई पकड़ना
•नीचे से कलाई पकड़ना
2. एप्रोच (पहुँच)•कलाई-पकड़ से पहले रक्षक को रेडर के हाथों की गति को ध्यानपूर्वक देखना और समझना चाहिए।
•रक्षक को स्वतंत्र और आरामदायक स्थिति में होना चाहिए तथा श्रृंखला में हाथ पकड़कर खड़ा नहीं होना चाहिए।
•रक्षक की हथेलियाँ प्याले के आकार में होनी चाहिए, अँगूठा अलग फैला हो और बाकी अँगुलियाँ एक-दूसरे से सटी हुई हों, जिससे सशक्त पकड़ बनाई जा सके।
•रक्षक को शरीर को थोड़ा आगे की ओर झुकाना चाहिए।
3. एक्सीक्यूशन (निष्पादन)
•जैसे ही रेडर रक्षक की पहुँच में आए, वह तुरंत उसकी कलाई को बलपूर्वक पकड़ ले।
•सही निष्पादन के लिए रक्षक तुरंत दूसरे हाथ की सहायता से रेडर को अंतिम रेखा की ओर खींचें।
•रक्षक को अपने शरीर के भार से रेडर की गति को रोकना चाहिए।
कौशलोन्मुखी क्रिया
खिलाड़ी एक-दूसरे की कलाई पकड़कर विपरीत दिशा में खींचेंगे। इसे मध्य रेखा से बॉक रेखा तक प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास रूप में किया जा सकता है।
प्रत्येक के लिए उपयुक्त रक्षात्मक कौशल पर चर्चा कीजिए-
1. हैंड-टच
2. टो-टच
3. किक
कबड्डी - 9
कमर-पकड़
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| लीपिंग और स्किप्पिंग जंप्स, हिप और पेल्विक मसल स्ट्रैच | कमर-पकड़ | बो पोज, आड़े शरीर कंधे का खिंचाव, क्राउच लेग स्ट्रैच | सशक्त पकड़ | |
कमर-पकड
सीखने के चरण-1.शारीरिक स्थिति
•तिरछी शारीरिक मुद्रा (स्टांस) में खड़े हों।
•रक्षक खिलाड़ी द्वारा रेडर के बाहरी कंधे को पीछे से पूरी तरह घेरना चाहिए।
•घुटने थोड़े मुड़े हुए होने चाहिए।
•ठोड़ी ऊपर रखिए और दृष्टि लक्ष्य पर हो।
2. एप्रोच (पहुँच)
•कमर पकड़ने से पहले रक्षक खिलाड़ी को रेडर के पैरों को ध्यान से देखना चाहिए और अगले फुटवर्क का पूर्वानुमान लगाना चाहिए।
•संतुलित और चौड़ी शारीरिक स्थिति के साथ रेडर की पीठ को घेरने के लिए आगे बढ़ें या एक कदम और आगे बढ़ाएँ।
•ऊपरी शरीर को रेडर की ओर झुकाइए।
3. होल्डिंग एंड एक्सीक्यूशन (पकड़ और क्रियान्वयन)
•रेडर और रक्षक खिलाड़ी के बीच कोई खाली जगह नहीं होनी चाहिए।
•रेडर की कमर को बाहरी कंधे से घेरने के लिए स्वतंत्र हाथ का उपयोग कीजिए।
•भीतरी हाथ का उपयोग सशक्त पकड़ बनाने के लिए कीजिए।
4.फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)
जैसे ही रेडर पकड़ में आए, रक्षक खिलाड़ी का प्राथमिक लक्ष्य रेडर को मध्य रेखा की ओर जाने से रोकना होता है। इसके लिए रक्षक खिलाड़ी को सशक्त पकड़ बनाए रखनी चाहिए। स्थिति और आवश्यकता के अनुसार रेडर को अपने पाले में जाने से रोकने के लिए निम्नलिखित विधियों में से किसी का भी उपयोग कर सकते हैं-
•रेडर को अंतिम रेखा की ओर खींचना।
•रेडर को उठाकर अंतिम रेखा की ओर घुमाना।
•रक्षक खिलाड़ी रेडर के पीछे से आगे की ओर पकड़ की दिशा परिवर्तित कर सकता है।
•रक्षक खिलाड़ी रेडर को पकड़कर पीछे हट या रोल कर सकता है।
कौशलोन्मुखी क्रिया
सभी खिलाड़ियों को अपने सामने वाले खिलाड़ी की कमर पकड़कर एक श्रृंखला बनानी होगी। श्रृंखला के सबसे आगे एक अकेला प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी होगा, वह अंतिम खिलाड़ी को छूकर उसे आउट करने का प्रयत्न करेगा। सभी खिलाड़ी विरोधी के हमले से बचते हुए अंतिम खिलाड़ी की रक्षा करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन कमर की पकड़ नहीं छूटनी चाहिए। अगर अंतिम खिलाड़ी आउट हो जाता है तो वह अपनी स्थिति परिवर्तित कर लेगा और खेल पुनः प्रारंभ होगा।
ऐसी पकड़ की चर्चा कीजिए, जिससे विरोधी न हिल सके और न ही श्रृंखला के अंतिम खिलाड़ी को छू सके।
कबड्डी - 10
श्रृंखला-पकड़
| ऊष्मीकरण | कौशल | शीतलीकरण | मुक्त चिंतन | |
|---|---|---|---|---|
| मेंढक कूद (फ्रॉग जंप), छाती और पीठ में खिंचाव | श्रृंखला-पकड़ | सिर के ऊपर भुजा खिंचाव, टार्मो ट्विस्ट, क्रॉस लेग टो-टच | सुरक्षा उपाय | |
श्रृंखला-पकड़
श्रृंखला-पकड़ विधि का मुख्य उद्देश्य रेडर को रेड के बाद भागने या अपने पाले में लौटने से रोकना है, जिससे रक्षात्मक टीम अंक प्राप्त कर सके।
सीखने के विभिन्न चरण - 1. श्रृंखला कैसे बनाई जाती है?•दूसरे खिलाड़ी की कलाई या हथेली को पकड़कर श्रृंखला बनाई जाती है।
2. एप्रोच (पहुँच)•श्रृंखला बनाइए - श्रृंखला सहायक खिलाड़ियों की सहायता से बनाई जानी चाहिए।
•रेडर के मार्ग और बाहरी कंधे को देखिए तथा रेडर के रास्ते और हमले को ध्यानपूर्वक देखिए, जिससे उसके अगले फुटवर्क का अनुमान लगाया जा सके।
•रेडर की ओर बढ़ते समय पकड़ बनाए रखिए।
3. स्टांस (प्रारंभिक मुद्रा)•पैर खुले रहेंगे।
•श्रृंखला में सम्मिलित खिलाड़ियों के कंधें एक-दूसरे के समानांतर और पास होने चाहिए।
•श्रृंखला बनाने के समय पकड़ सशक्त होनी चाहिए।
•अपना सिर रेडर के आक्रमण की दिशा की ओर रखिए।
4.एक्सीक्यूशन (निष्पादन)
•श्रृंखला में सम्मिलित रक्षक खिलाड़ी रेडर के पास आकर उसे घेरेंगे।
•श्रृंखला को रेडर के पेट के आस-पास से घेरना चाहिए।
•श्रृंखला बनाने वाले हाथ से विपरीत हाथ का उपयोग पकड़ में सहयोग करने के लिए किया जाएगा जिससे पीछे से रेडर की जाँघ पकड़कर उसे उठाया जा सके।
5.फॉलो थ्रू (पूरक क्रिया)
इसमें में दो विधियाँ प्रयोग करते हैं।
•पैरों को फैलाकर खड़े होकर रेडर को उसी स्थान पर उठाना।
•श्रृंखला का उपयोग करके रेडर को मध्य रेखा से दूर धकेलकर उसकी दिशा परिवर्तित करना।
कौशलोन्मुखी क्रिया
कोहनी-पकड़ चुनौती- दो दलों का गठन कीजिए। दोनों दलों को आमने-सामने लगभग छह मीटर की दूरी पर खड़ा कीजिए। प्रत्येक दल से एक-एक खिलाड़ी मध्य रेखा पर आएँगे और एक-दूसरे खिलाड़ी की कोहनियों को लॉक करेंगे। दोनों खिलाड़ी किसी लोकगीत की एक या दो पंक्तियाँ गाते हुए वृत्ताकार घूमेंगे। पहले चक्कर के समाप्त होते ही दोनों खिलाड़ी एक-दूसरे को अपनी ओर खींचने का प्रयत्न करेंगे। जो खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को अपनी ओर खींचने में सफल होगा, उसे एक अंक मिलेगा। सभी खिलाड़ियों को बारी-बारी से खेलने का अवसर मिलेगा।
चर्चा कीजिए कि श्रृंखला की पकड़ के समय एक-दूसरे के सिर से टकराने से कैसे बचा जा सकता है।
•नीचे दिए गए चित्र में बिंदुओं को जोड़कर पाले को चिह्नित कीजिए।
•जूनियर लड़कों और लड़कियों के लिए पाले के माप का पता लगाकर उसे लेबल कीजिए।
•कबड्डी के आधारभूत नियमों का पता लगाइए और इस संबंध में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
शिक्षक-आकलन
स्पर्श (हाथ और पैर से स्पर्श)
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| विद्यार्थी हाथों और पैरों की अँगुलियों से स्पर्श करने का प्रयास करते समय संतुलन बनाना सीख रहा/रही है। | विद्यार्थी हाथ और पैर से सरल स्पर्श कर सकता/सकती है, लेकिन गति और सटीकता में कठिनाई होती है। | कभी-कभार हाथ और पैर को पूर्ण नियंत्रण के साथ स्पर्श करता/करती है। | विद्यार्थी चुस्त है और शीघ्रता से आकलन करके स्पर्श करने के बारे में जागरूक है। | आत्मविश्वास के साथ हाथों और पैरों से गति करता/करती है। चपलता और योजना के साथ विरोधियों से बचता/बचती है। |
टखने, घुटने एवं जाँघ-पकड़
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| विद्यार्थी रेडर के पैर, घुटने या टखने पर पकड़ को नियंत्रित करने में पहले से अच्छा हो रहा/रही है। | पकड़ने का प्रयत्न करता/करती है, लेकिन कभी-कभी पकड़ की शक्ति और समय में कठिनाई होती है। | शक्ति और कौशल के साथ पकड़ का उपयोग करते हुए विद्यार्थी रेडर की गति धीमी कर देता/देती है। | सशक्त समयबद्ध पकड़ के साथ रेडर को सफलतापूर्वक रोक देता/देती है। | रेडर को सुरक्षित करने के लिए रणनीति और नियंत्रण का उपयोग करता/करती है। सशक्त और सटीक पकड़ के साथ उसे विश्वासपूर्वक से निष्पादित करता/करती है। |
कलाई और कमर-पकड़
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| विद्यार्थी रेडर की कमर या कलाई पर पकड़ को नियंत्रित करने में पहले से अच्छा हो रहा/रही है। | कमर और कलाई को पकड़ने का प्रयत्न करता/करती है, लेकिन पकड़ की शक्ति और समय में सुधार की आवश्यकता है। | शक्ति और कौशल के साथ पकड़ का उपयोग करते हुए विद्यार्थी रेडर के लिए भागना मुश्किल बना देता/देती है। | रेडर की गतियों को दृढ़ता से और सफलतापूर्वक रोकता/रोकती है। | रेडर को भागने से रोकने के लिए ठोस और सुनियोजित पकड़ का उपयोग करता/करती है। |
आत्म-संकट को समझना
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| विद्यार्थी को अपनी भावनाओं को पहचानने में कठिनाई होती है और वह शायद ही कभी अपनी समस्या को स्वीकार करता/करती है। | कभी-कभी उसे कठिनाई का अनुभव होता है, लेकिन उसका कारण पता लगाना मुश्किल हो जाता है। | विद्यार्थी यद्यपि स्वयं को नियंत्रित करने में कठिनाई का अनुभव करता/करती है। और इसके कारणों के प्रति जागरूक है। | उसे अपने संकट की अच्छी समझ होती है और वह कुछ सीमा तक भावनाओं को नियंत्रित कर सकता/सकती है। | भावनाओं को सफलता पूर्वक नियंत्रित करता/करती है और कठिनाई के कारणों को पूरी तरह से समझता/समझती है। |
