Skip to content
Screenshot 2025-06-19 095714

अध्याय-2 तीन बुद्धिमान


तीन बुद्धिमान

Screenshot 2025-06-19 095724

एक समय की बात है कि एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। वह प्रायः अपने बेटों से कहता-“मेरे बेटो! हमारे पास न तो रुपया-पैसा है और न ही सोना-चाँदी। इसलिए तुम्हें एक दूसरे प्रकार का धन संचित करना चाहिए- हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए। रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।"

समय बीता और कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे। बेटे मिलकर बैठे, उन्होंने सारी स्थिति पर विचार किया और फिर बोले- "हमारे लिए यहाँ कुछ भी तो करने को नहीं। आओ, घूम फिरकर जगत देखें। आवश्यकता होने पर हम चरवाहों या खेत में श्रमिकों का काम कर लेंगे। हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे।"

अंततः वे तैयार होकर यात्रा पर चल दिए।

उन्होंने सुनसान-वीरान घाटियाँ लाँघीं और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों को पार किया। इस तरह वे लगातार चालीस दिनों तक चलते रहे।

Screenshot 2025-06-19 095801

उनके पास जितना खाने-पीने का सामान था, अब तक समाप्त हो गया था। वे थककर चूर हो गए थे और उनके पैरों में छाले पड़ गए थे किंतु सड़क थी कि समाप्त होने को नहीं आ रही थी। वे आराम करने के लिए रुके और पुनः आगे चल दिए। अंत में उन्हें अपने सामने वृक्ष और मकान दिखाई दिए - वे एक बड़े नगर के पास पहुँच गए थे।

तीनों भाई बहुत प्रसन्न हुए और शीघ्रता से पग बढ़ाने लगे।

जब वे नगर के बिलकुल निकट पहुँच गए तो सबसे बड़ा भाई अचानक रुका, उसने धरती पर दृष्टि डाली और बोला-

"थोड़ी ही देर पहले यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है।"

वे थोड़ा और आगे गए तो मझला भाई रुका और सड़क के दोनों ओर देखकर बोला-

"संभवतः वह ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता हो।"

वे कुछ और आगे गए तो सबसे छोटे भाई ने कहा-

"ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।"

"बिलकुल सही!" दोनों बड़े भाइयों ने कहा और वे तीनों फिर आगे बढ़ चले। कुछ समय पश्चात् एक घुड़सवार उनके पास से निकला। सबसे बड़े भाई ने उसकी ओर देखकर पूछा-

"घुड़सवार, तुम किसी खोई हुई वस्तु को ढूँढ़ रहे हो न?" घुड़सवार ने घोड़ा रोककर उत्तर दिया-

"हाँ।"

"तुम्हारा ऊँट खो गया है न?" सबसे बड़े भाई ने पूछा।

"हाँ।"

"बहुत बड़ा-सा?"

"हाँ।"

"वह एक आँख से नहीं देख पाता है न?" मझले भाई ने पूछा।

"हाँ।"

"एक छोटे-से बच्चे के साथ उस पर महिला सवार थी न?" सबसे छोटे भाई ने सवाल किया।

घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा और बोला-

"आह तो तुम्हारे पास है मेरा ऊँट! तुरंत बताओ, तुमने उसका क्या किया?

"हमने तुम्हारे ऊँट का मुँह तक नहीं देखा", भाइयों ने उत्तर दिया।

"तो तुम्हें उसके बारे में सभी बातें कैसे पता चलीं?"

"क्योंकि हम अपनी आँखों और बुद्धि से काम लेना जानते हैं", भाइयों ने उत्तर दिया। "शीघ्रता से उस दिशा में अपना घोड़ा दौड़ाओ। वहाँ तुम्हें तुम्हारा ऊँट मिल जाएगा।"

"नहीं", ऊँट के स्वामी ने उत्तर दिया, "मैं उस दिशा में नहीं जाऊँगा। मेरा ऊँट तुम्हारे पास है और तुम्हें ही उसे मुझे लौटाना पड़ेगा।"

"हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं", भाइयों ने चिंतित होते हुए कहा।

लेकिन घुड़सवार उनकी एक भी सुनने को तैयार नहीं था। उसने अपनी तलवार निकाल ली और उसे ज़ोर से घुमाते हुए तीनों भाइयों को अपने आगे-आगे चलने का आदेश दिया। इस प्रकार वह उन्हें सीधे अपने देश के राजा के भवन में ले गया। इन तीनों भाइयों को सुरक्षा कर्मियों को सौंपकर वह स्वयं राजा के पास गया।

"मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिए जा रहा था", उसने कहा, "और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी। किसी कारण उनका ऊँट पीछे रह गया और वे रास्ते से भटक गए। मैं उन्हें ढूँढने गया तो मुझे रास्ते में तीन व्यक्ति मिले जो पैदल चले जा रहे थे। मुझे पूरा विश्वास है कि उन्होंने मेरा ऊँट चुराया है और मेरी पत्नी तथा बेटे को मार डाला है।"

"तुम ऐसा क्यों समझते हो?" जब वह व्यक्ति अपनी बात कह चुका तो राजा ने पूछा।

"इसलिए कि मैंने उन लोगों से इस संबंध में एक भी शब्द नहीं कहा था फिर भी उन्होंने मुझे यह बताया कि ऊँट बहुत बड़ा था और एक आँख से नहीं देख पाता था तथा उस पर एक महिला बच्चे के साथ सवार थी।"

राजा ने थोड़ी देर सोच-विचार किया और फिर बोला-

"जैसा कि तुम कहते हो तुम्हारे बताए बिना ही तुम्हारे ऊँट के विषय में उन्होंने सभी कुछ इतनी अच्छी तरह से बताया है तो अवश्य उन्होंने उसे चुराया होगा। जाओ, उन चोरों को यहाँ लाओ।"

ऊँट का स्वामी बाहर गया और तीनों भाइयों को साथ लेकर झटपट अंदर आया।

"चोरो, तुरंत बताओ!" राजा उन्हें धमकाते हुए बोला। "तुरंत उत्तर दो, तुमने इस आदमी का ऊँट कहाँ छिपाया है?"

"हम चोर नहीं हैं, हमने इसका ऊँट कभी नहीं देखा", भाइयों ने उत्तर दिया।

तब राजा बोला- "इस व्यक्ति के कुछ भी बताए बिना तुमने ऊँट के विषय में सब कुछ बिलकुल सही बता दिया। अब तुम यह कहने का कैसे साहस करते हो कि तुमने उसे नहीं चुराया?"

"महाराज, इसमें तो आश्चर्य की कोई बात नहीं है।" भाइयों ने उत्तर दिया। "बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है। इसीलिए ऊँट को देखे बिना ही हमने बता दिया कि वह कैसा है।"

राजा हँस दिया।

"किसी को भी देखे बिना ही उसके विषय में क्या इतना कुछ जानना संभव हो सकता है?" उसने पूछा।

"हाँ, संभव है”, भाइयों ने उत्तर दिया।

"तो ठीक है, हम अभी तुम्हारी सच्चाई की जाँच कर लेंगे।"

राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। मंत्री तुरंत महल के बाहर चला गया। लेकिन शीघ्र ही वह दो सेवकों के साथ लौटा जो एक बहुत बड़ी-सी पेटी लाए थे। दोनों ने पेटी को बहुत सावधानी से द्वार के पास ऐसे रख दिया कि वह राजा को दिखाई दे सके और स्वयं एक ओर हट गए। तीनों भाई दूर से खड़े उन्हें देखते रहे। उन्होंने इस बात को ध्यान से देखा कि पेटी कहाँ से और कैसे लाई गई थी और किस ढंग से रखी गई थी।

"हाँ, तो चोरों, हमें बताओ कि उस पेटी में क्या है?" राजा ने कहा।

"महाराज, हम तो पहले ही यह विनती कर चुके हैं कि हम चोर नहीं हैं", सबसे बड़े भाई ने कहा। “पर यदि आप चाहते हैं तो मैं आपको यह बता सकता हूँ कि उस पेटी में क्या है। उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है।"

"उसमें अनार है", मझला भाई बोला।

"हाँ, और वह अभी कच्चा है", सबसे छोटे भाई ने कहा।

Screenshot 2025-06-19 104714

यह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों से पेटी खोलने के लिए कहा। पेटी खुल जाने पर उसने उसमें झाँका। जब उसे उसमें कच्चा अनार दिखाई दिया तो उसके आश्चर्य की कोई सीमा न रही।

आश्चर्यचकित राजा ने अनार निकालकर वहाँ उपस्थित सभी लोगों को दिखाया। तब उसने ऊँट के मालिक से कहा-

"इन लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये चोर नहीं हैं। वास्तव में ये बहुत ही बुद्धिमान लोग हैं। तुम इनके बताए रास्ते पर जाकर अपने ऊँट को खोजो।"

राजा के महल में उस समय उपस्थित सभी लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। किंतु सबसे बढ़कर तो स्वयं राजा चकित था। उसने सभी तरह के अच्छे और स्वादिष्ट भोजन मँगवाए और लगा इन भाइयों की आवभगत करने।

"तुम लोग बिलकुल निर्दोष हो और जहाँ भी जाना चाहो जा सकते हो। किंतु जाने से पहले तुम मुझे सारी बात विस्तार के साथ बताओ। तुम्हें यह कैसे पता चला कि उस व्यक्ति का ऊँट खो गया है और तुमने यह कैसे जाना कि ऊँट कैसा था?"

सबसे बड़े भाई ने कहा-

"धूल पर उसके पैरों के चिह्नों से मुझे पता चला कि कोई बहुत बड़ा ऊँट वहाँ से गया है। जब मैंने अपने पास से जानेवाले घुड़सवार को अपने चारों ओर नजर दौड़ाते देखा तो उसी समय मेरी समझ में यह बात आ गई कि वह क्या खोज रहा है।"

"बहुत अच्छा!" राजा ने कहा। "अच्छा, अब यह बताओ कि तुम में से किसने इस घुड़सवार को यह बताया था कि उसका ऊँट एक ही आँख से देख पाता है? उसका तो सड़क पर चिह्न नहीं रहा होगा।"

"मैंने इस बात का अनुमान ऐसे लगाया कि सड़क के दायीं ओर की घास तो ऊँट ने चरी थी, मगर बायीं ओर की घास ज्यों की त्यों थी", मझले भाई ने उत्तर दिया।

"बहुत उत्तम!" राजा ने कहा, "तुम में से यह अनुमान किसने लगाया था कि उस पर बच्चे के साथ एक महिला सवार थी?"

"मैंने", सबसे छोटे भाई ने उत्तर दिया, "मैंने देखा कि एक स्थान पर ऊँट के घुटने टेककर बैठने के चिह्न बने हुए थे। उनके पास ही रेत पर एक महिला के जूतों के चिह्न दिखाई दिए। साथ ही छोटे-छोटे पैरों के चिह्न थे, जिससे मुझे पता चला कि महिला के साथ एक बच्चा भी था।"

"बहुत अच्छा! तुमने बिलकुल सही कहा है", राजा बोला "लेकिन तुम लोगों को यह कैसे पता चला कि पेटी में एक कच्चा अनार है? यह बात तो मेरी समझ में बिलकुल नहीं आ रही।"

Screenshot 2025-06-19 105525


सबसे बड़े भाई ने कहा-

"जिस तरह दोनों व्यक्ति उसे उठाकर लाए थे, उससे बिलकुल स्पष्ट था कि वह थोड़ी भी भारी नहीं है। जब वे पेटी को रख रहे थे तो मुझे उसके अंदर किसी छोटी-सी गोल वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि सुनाई दी।"

मझला भाई बोला-

"मैंने ऐसा अनुमान लगाया कि चूँकि पेटी उद्यान की ओर से लाई गई है और उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है तो वह अवश्य अनार ही होगा। कारण कि आपके महल के आसपास अनार के बहुत-से पेड़ लगे हुए हैं।"

"बहुत अच्छा!” राजा ने कहा और उसने सबसे छोटे भाई से पूछा-

"लेकिन तुम्हें यह कैसे पता चला कि अनार कच्चा है?"

"इस समय तक उद्यान में सभी अनार कच्चे हैं। यह तो आप स्वयं ही देख सकते हैं”, उसने उत्तर दिया और खुली हुई खिड़की की ओर संकेत किया।

राजा ने बाहर देखा तो पाया कि उद्यान में लगे अनार के सभी वृक्षों पर कच्चे अनार लटक रहे थे।

राजा इन भाइयों की असाधारण पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि से चकित रह गया।

“धन-संपत्ति या सांसारिक वस्तुओं की दृष्टि से तो तुम धनवान नहीं हो लेकिन तुम्हारे पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है", उसने प्रशंसा करते हुए कहा और उन्हें अपने दरबार में रख लिया।

पाठ से

Screenshot 2025-06-19 110034

मेरी समझ से


(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने ताराScreenshot 2025-06-20 111707 बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1)लोककथा में पिता ने अपने बेटों से 'धन संचय करने' को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?

  • खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना
  • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना
  • ऊँट का व्यापार करना
  • गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना

(2) तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

  • बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है।
  • समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।
  • किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है।
  • ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।
  • (3) राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?

  • भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।
  • राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।
  • राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।
  • भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।
  • Screenshot 2025-06-19 111557

    (4) लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?

    • दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
    • अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
    • राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।
    • ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

    (ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें।

    Screenshot 2025-06-19 112055

    पंक्तियों पर चर्चा

    पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

    (क) “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।"

    (ख) “हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।"

    (ग) "हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।"

    Screenshot 2025-06-19 115402




    Screenshot 2025-06-19 115526

    मिलकर करें मिलान


    इस लोककथा में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनके भाव या अर्थ से मिलते-जुलते वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 के वाक्यों को स्तंभ 2 के उपयुक्त वाक्यों से सुमेलित कीजिए-

    स्तंभ । स्तंभ 2

    1.कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे।

    2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे।

    3.घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा।

    4.बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते।

    5.लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था।

    1.घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा।

    2.थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया।

    3.लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था।

    4.बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं।

    5.हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा।




    Screenshot 2025-06-19 121332

    सोच-विचार के लिए

    लोककथा को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

    (क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?

    (ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है- तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।

    (ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?

    (घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?

    (ङ) पिता ने बेटों को "दूसरे प्रकार का धन" संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?

    (च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

    (छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?

    Screenshot 2025-06-19 140526

    अनुमान और कल्पना से


    अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

    (क) यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?

    (ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।

    (ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?

    (घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।

    Screenshot 2025-06-19 140951


    Screenshot 2025-06-19 141019

    शब्द से जुड़े शब्द

    नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'बुद्धि' से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-

    Screenshot 2025-06-19 141200


    Screenshot 2025-06-19 141602

    लोककथा को सुनाना

    Screenshot 2025-06-19 141609

    लोककथा के लिखित रूप में आने से पहले कहानियों का प्रचलन मौखिक रूप में ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता था। इसमें कहानी सुनने-सुनाने और याद रखने की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। कहानी कहने या सुनाने वाला इस तरह से कहानी सुनाता था कि सुनने वालों को रोचक लगे। इसमें कहानी सुनने वालों को आनंद तो आता ही था, कथा उन्हें याद भी हो जाती थी।

    अब आप अपने समूह के साथ मिलकर इस लोककथा को रोचक ढंग से सुनाइए। लोककथा को प्रभावशाली और रोचक रूप में सुनाने के लिए नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जो लोककथा को और भी आकर्षक बना सकते हैं-

    कथा सुनाना

    • स्वर में उतार-चढ़ाव- लोककथा सुनाते समय स्वर में या आवाज में उतार-चढ़ाव से उत्साह और रहस्य का निर्माण करें। जब लोककथा में कोई रोमांचक या रहस्यमय पल हो तो स्वर धीमा या तीव्र कर सकते हैं।
    • भावनाओं की अभिव्यक्ति- भावनाओं को प्रकट करने के लिए स्वर का सही चयन करें, जैसे- खुशी, दुख, आश्चर्य आदि को स्वर के माध्यम से दर्शाएँ।
    • लोककथा के पात्रों के लिए अलग-अलग स्वर- जब लोककथा में अलग-अलग पात्र हों तो हर पात्र के लिए अलग स्वर (ऊँचा, नीचा, तेज, धीमा आदि) का उपयोग किया जा सकता है ताकि उन्हें पहचाना जा सके।
    • हाथों और शरीर का उपयोग- जब आप लोककथा में किसी घटना का वर्णन करें तब शारीरिक मुद्राओं और चेहरे के भावों का उपयोग किया जा सकता है।
    • हास्य का प्रयोग- जब कोई हास्यपूर्ण या आनंददायक दृश्य हो तो चेहरे की मुसकान और हँसी के साथ उसे प्रस्तुत करें।
    • विवरणात्मक भाषा का उपयोग- लोककथा में वर्णित स्थानों और पात्रों को इस प्रकार प्रस्तुत करें कि श्रोता उनकी छवि अपने मन में बना सकें।
    • रोचक मोड़ एक-दो बार लोककथा के रोमांचक मोड़ों पर थोड़ी देर के लिए रुकें या श्रोताओं में उत्सुकता होने दें, जैसे- "क्या आप जानना चाहते हैं कि आगे क्या हुआ?"
    • संवादों को स्पष्ट और प्रासंगिक बनाना- पात्रों के संवाद इस तरह से प्रस्तुत करें कि वे मौलिक लगें।




    Screenshot 2025-06-19 144604

    कारक

    Screenshot 2025-06-19 153504

    नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए-

    "भाइयों जवाब दिया।"

    यह वाक्य कुछ अटपटा लग रहा है न? अब नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए-

    "भाइयों ने जवाब दिया।"

    इन दोनों वाक्यों में अंतर समझ में आया? बिलकुल सही पहचाना आपने! दूसरे वाक्य में 'ने' शब्द 'भाइयों' और 'जवाब दिया' के बीच संबंध को जोड़ रहा है। संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले शब्दों के ऐसे रूपों को कारक या परसर्ग कहते हैं। कारक शब्दों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-

    ने, को, पर, से, के द्वारा, का, में, के लिए, की, के, हे, हो, अरे


    नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए -

    1. "हमने तो तुम्हारे ऊँट.......... देखा तक नहीं", भाइयों .............परेशान होते हुए कहा।

    2. "मैं अपने रेवड़ों .......... पहाड़ों ........... लिये जा रहा था", उसने कहा, "और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे...........साथ एक बड़े-से ऊँट ............मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।"

    3. राजा .............उसी समय अपने मंत्री .............बुलाया और उसके .............कान कुछ फुसफुसाया।

    4. यह सुनकर राजा............पेटी ............. पास लाने आदेश दिया। सेवकों ......... तुरंत आदेश पूरा किया। राजा .............सेवकों. ........... पेटी खोलने ..................लिए कहा।



    Screenshot 2025-06-19 165251

    सूचनापत्र


    कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार हैं जिसका ऊँट खो गया है। आप अपने ऊँट को खोजने के लिए एक सूचना कागज पर लिखकर पूरे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।

    सूचनापत्र















    पाठ से आगे

    Screenshot 2025-06-19 170039

    आपकी बात



    1. लोककथा में तीन भाइयों की पैनी दृष्टि की बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृष्टि का प्रयोग किसी समस्या को हल करने के लिए किया है? उस समस्या और आपके द्वारा दिए गए हल के विषय में लिखिए।

    Screenshot 2025-06-20 114219

    2. लोककथा में बताया गया है कि भाइयों ने "बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डाली।" यदि आपने ऐसा किया है तो आपको अपने जीवन में इसके क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

    3.लोककथा में भाइयों को यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयाँ आईं, जैसे- भूख, थकान और पैरों में छाले। आप अपने दैनिक जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? लिखिए।

    4.भाइयों ने बिना देखे ही ऊँट के बारे में सही-सही बातें बताईं। क्या आपको लगता है कि अनुभव और समझ से देखे बिना भी सही निर्णय लिया जा सकता है? क्या आपने भी कभी ऐसा किया है?

    5.जब ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर शंका की तो भाइयों ने बिना गुस्सा किए शांति से उत्तर दिया। क्या आपको लगता है कि कभी किसी को संदेह होने पर हमें भी शांत रहकर उत्तर देना चाहिए? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है? ऐसे में आपने क्या किया?

    6. राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी देखकर बहुत आश्चर्य व्यक्त किया। क्या आपको कभी किसी की सोच, समझ या किसी विशेष कौशल को देखकर आश्चर्य हुआ है? क्या आपने कभी किसी से कुछ ऐसा सीखा है जो आपके लिए बिलकुल नया और चौंकाने वाला हो?

    7.लोककथा में पिता ने अपने बेटों को यह सलाह दी कि वे समझ और ज्ञान जमा करें। क्या आपको कभी किसी बड़े व्यक्ति से ऐसी कोई सलाह मिली है जो आपके जीवन में उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से किसी को ऐसी सलाह देंगे?

    8. भाइयों ने अपने ऊपर लगे आरोपों के होते हुए भी सदा सच्चाई का साथ दिया। क्या आपको लगता है कि सदा सच बोलना महत्वपूर्ण है, भले ही स्थिति कठिन क्यों न हो? क्या आपको किसी समय ऐसा लगा है कि आपकी सच्चाई ने आपको समस्याओं से बाहर निकाला हो?

    Screenshot 2025-06-20 095646

    ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना

    "बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम किसी वस्तु को अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने वस्तुओं को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।"

    इस लोककथा में तीनों भाई आसपास की प्रत्येक घटना, वस्तु आदि को ध्यान से देखते, सुनते, सूँघते और अनुभव करते हैं अर्थात् अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते हैं। ज्ञानेंद्रियाँ पाँच होती हैं- आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। आँख से देखकर, कान से सुनकर, नाक से सूंघकर, जीभ से चखकर और त्वचा से स्पर्श करके हम किसी वस्तु के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं। आइए, अब एक खेल खेलते हैं जिसमें आपको अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का उपयोग करने के अवसर मिलेंगे।

    (क) 'हाँ' या 'नहीं' प्रश्न-उत्तर खेल

    चरण-

    1. एक विद्यार्थी कक्षा से बाहर जाकर दिखाई देने वाली किसी एक वस्तु या स्थान का नाम चुनेगा। कक्षा के भीतर से भी कोई नाम चुना जा सकता है।

    2.विद्यार्थी वापस कक्षा में आएगा और उस नाम को एक कागज पर लिख लेगा। लेकिन ध्यान रहे, वह कागज पर लिखे नाम को किसी को न दिखाए।

    3.अन्य विद्यार्थी बारी-बारी से उस वस्तु का नाम पता करने के लिए प्रश्न पूछेंगे।

    4.प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल 'हाँ' या 'नहीं' में दिया जाएगा।

    उदाहरण के लिए- Screenshot 2025-06-20 100014
    • क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा में होता है?
    • क्या यह खाने-पीने की चीज है?
    • क्या यह लकड़ी से बनी है?
    • क्या यह बिजली से चलती है?

    5. सभी विद्यार्थी अधिकतम 20 प्रश्न ही पूछ सकते हैं। इसलिए उन्हें सोच-समझकर प्रश्न पूछने होंगे ताकि वे उस वस्तु का नाम पता कर सकें।

    6. यदि 20 प्रश्नों के अंदर विद्यार्थी वस्तु का सही अनुमान लगा लेते हैं तो वे जीत जाएँगे।

    7. अब दूसरे विद्यार्थी को बाहर भेजकर गतिविधि दोहराएँगे।

    8. गतिविधि के अंत में सभी मिलकर इस खेल से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में चर्चा करें।

    (ख) गतिविधि 'स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना'

    1. एक थैले या डिब्बे में (सावधानीपूर्वक एवं सुरक्षित) विभिन्न वस्तुएँ (जैसे फल, फूल, मसाले, खिलौने, कपड़े, किताब, गुड़ आदि) रखें।

    2.विद्यार्थियों को आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल स्पर्श, गंध या स्वाद का उपयोग करके वस्तु की पहचान करनी होगी और उसका नाम बताना होगा।

    3. बारी-बारी से प्रत्येक विद्यार्थी को बुलाकर उसकी आँखों पर पट्टी बाँधें।

    1. 4.उसे डिब्बे से एक वस्तु दी जाए। विद्यार्थी उसे छूकर, सूंघकर, चखकर पहचानने का प्रयास करेंगे।
    2. 5. सही पहचान करने के बाद विद्यार्थी बताएँगे कि उन्होंने उस वस्तु को कैसे पहचाना।
    3. 6. एक-एक करके सभी विद्यार्थियों को अलग-अलग वस्तुओं को पहचानने का अवसर मिलेगा।
    4. 7. अंत में सभी वस्तुओं को कक्षा में दिखाएँ और उनके बारे में चर्चा करें कि किस वस्तु को पहचानना आसान या कठिन लगा।
    Screenshot 2025-06-20 101540

    आज की पहेली

    Screenshot 2025-06-20 120030

    आपने पढ़ा कि तीनों बुद्धिमान भाई किस प्रकार अपने अवलोकन से वे बातें भी जान जाते थे जो अन्य लोग नहीं जान पाते। अब आपके सामने कुछ पहेलियाँ प्रस्तुत हैं जहाँ आपको कुछ संकेत दिए जाएँगे। संकेतों के आधार पर आपको उत्तर खोजने हैं-

    1. कौन है यह प्राणी?
    1. 1. इसकी लंबी पूँछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है।
    2. 2. इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होते हैं जिन्हें यह चुपके से पकड़ता है।
    3. 3.यह प्राणी अपने परिवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है।
    4. 4. इसके पास तेज आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।


    2. रंगीन डिब्बे

    एक मेज पर चार रंगीन डिब्बे बराबर-बराबर रखे हैं लाल, हरा, नीला और पीला। बताइए पीले डिब्बे के बराबर में कौन-सा डिब्बा है? यदि

    1. 1. लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है।
    2. 2. हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है।
    3. 3. पीला डिब्बा लाल डिब्बे के पास नहीं है।
    4. 4. हरा डिब्बा लाल डिब्बे के पास है।


    Screenshot 2025-06-20 102426

    खोजबीन के लिए


    नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं-

    • सुनो लोककथा
    • https://www.youtube.com/watch?v=JEti31XNpmA

    • दुनिया की छत
    • https://www.youtube.com/watch?v=PehlQ71udFg

    • भूल चूक लेनी देनी
    • https://www.youtube.com/watch?v=GjYW-CZIDEA