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भाग 1




जीव रूपों के साथ कार्य करना



जीव रूपों में पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी सजीव सम्मिलित हैं। इनमें मानव, पशु, पक्षी, मछलियाँ, पौधे, कीड़े, जीवाणु (बैक्टीरिया) एवं विषाणु (वायरस) सम्मिलित हैं। जीव रूपों से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से आप सजीवों के साथ विभिन्न विधियों से कार्य करना सीखेंगे। आप पौधे उगाने, परिसर की जैव विविधता को अंकित करने, औषधीय पौधों का सर्वेक्षण करने, पालतू पशु-पक्षियों की देखभाल करने तथा प्रकृति-पत्रिका से संबंधित परियोजनाएँ करने जैसे कार्य कर सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने सहपाठियों के सहयोग से कौन-से नवीन एवं रोचक कार्य कर सकते हैं?

इस भाग में परियोजनाओं के दो उदाहरण दिए गए हैं- पौधशाला और विद्यालय पर्यावास उद्यान । आप इन परियोजनाओं में से किसी एक का चयन कर सकते हैं या अपने शिक्षक की सहायता से अपनी रुचि की अन्य परियोजना भी तैयार कर सकते हैं।

परियोजना 1
पौधशाला

यह परियोजना आपको पौधों की वृद्धि के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ प्रदान करने में और पौधों के प्रवर्धन की विभिन्न विधियों को सीखने में आपकी सहायता करेगी। आप अपने विद्यालय में पौधशाला विकसित करते समय इन कार्यों को करेंगे।

परियोजना के अंतर्गत आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम हो सकेंगे -

पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक परिस्थितियों की पहचान करने में
पौधशाला-निर्माण करने में
पौधों के प्रवर्धन की विभिन्न विधियों का उपयोग करने में
पौधों की वृद्धि का अवलोकन करने में
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पौधे विभिन्न विधियों के माध्यम से प्रजनन करते हैं और वे स्वयं का प्रवर्धन करते हैं। छोटे-छोटे बीज अंकुरित होकर एक विशाल पेड़ में या पुष्पीय पौधों के रूप में विकसित हो जाते हैं। यद्यपि कुछ पौधों को प्रत्यक्ष रूप से मूल पौधे की शाखाओं से या कंदों (जैसे आलू) से भी उगाया जा सकता है।

मनुष्यों की भाँति पौधों को भी जीवित रहने हेतु और वृद्धि के लिए उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता होती है। विज्ञान में आपने समझा होगा कि पौधों को अपने विकास के लिए वायु, सूर्य-प्रकाश, पोषक तत्व एवं जल की आवश्यकता होती है। ये सभी कारक पौधों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। अर्थात जैसे हमें अपनी वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है, ठीक वैसे ही पौधों को भी विकास हेतु उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता होती है।

आइए, इसे एक उदाहरण के द्वारा समझते हैं। क्या आप गर्म, ठंडे, आर्द्र और शुष्क क्षेत्र या ऐसे स्थान पर रहते हैं जहाँ भिन्न-भिन्न ऋतुएँ होती हैं? यदि आप ठंडे और शुष्क क्षेत्र में रहते हैं तो आपने लोगों को यह कहते सुना होगा - "यह कितना शुष्क है।” शुष्कता के कारण त्वचा में खुजली और नाक में जलन हो सकती है। यही कारण है कि अँगीठी या ताप-मशीन (हीटर) का उपयोग करते समय लोग प्रायः वायु में नमी बनाए रखने के लिए कमरे में जल का एक कटोरा रखते हैं।

विचारणीय बात यह है कि आर्द्रता अथवा शुष्कता का कारण क्या होता है? जैसा कि हमने पढ़ा है कि वायु में अनेक घटक होते हैं जिनमें जलवाष्प भी समाहित है। जब वायु में जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है तो मौसम में आर्द्रता (नमी) का अनुभव होता है जबकि जलवाष्प की मात्रा कम होने पर वायु में शुष्कता का अनुभव होता है।

जिस प्रकार कम आर्द्र या अधिक आर्द्र मौसम हमें प्रभावित करता है, ठीक वैसे ही यह पौधों को भी प्रभावित करता है, विशेषकर उनकी वृद्धि के चरण में। इसी प्रकार अत्यधिक तापमान व्यक्तियों के लिए भी हानिकारक हो सकता है। पौधों को वृद्धि के लिए 'अनुकूलतम तापमान' की आवश्यकता होती है। यद्यपि विभिन्न पौधों के लिए आदर्श तापमान भी भिन्न होता है। यही कारण है कि कुछ पौधे केवल विशेष ऋतुओं में ही अच्छी तरह से विकसित होते हैं।

क्या आपने देखा है कि नदियों के आस-पास, तालाबों के तट पर और जल-स्रोतों (जैसे - कुएँ, नल) के समीप शुष्क स्थानों की तुलना में अधिक पौधे उगते हैं? और ऐसा होने का कारण यह है कि वहाँ उन्हें मृदा से अनुकूलतम तापमान एवं आर्द्रता प्राप्त होती है। पौधशाला (चित्र 1.1) में आपको पौधों के अनुकूलतम अस्तित्व और विकास के लिए उपर्युक्त उल्लिखित परिस्थितियों के निर्माण की आवश्यकता होगी।

Screenshot 2025-11-20 103819 क्या आप जानते हैं?

आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु जिले में धूप से तपती भूमि पर एक बरगद का पेड़ "थिम्मम्मा मर्रिमनु” आपको चमत्कार का आभास कराता है। यह एक ऐसा बरगद का पेड़ है जो अकेले ही लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका आकार एक छोटे से गाँव के समान है।

कल्पना कीजिए कि यह पेड़ इतना विशाल है कि उसकी शाखाओं के नीचे एक पूरा छोटा गाँव आराम से बस सकता है। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि एक बीज से इतना विशाल पेड़ बन गया है? बरगद का पेड़ पक्षियों, पशुओं और मनुष्यों को छाया, ऑक्सीजन और आश्रय प्रदान करता है। यह हमें प्रकृति और पौधों की देखभाल करना सिखाता है।

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पौधशाला अनेक कारणों से महत्त्वपूर्ण है, जैसे- मूल पौधों की प्रजातियों का संरक्षण करना, पौधों की नवीन प्रजातियों का विकास करना, व्यापक स्तर पर पौधों को उगाना आदि। यद्यपि पौधशालाएँ खेतों की तुलना में छोटे स्थानों पर तैयार की जाती है। अतः इनमें कीटों से सुरक्षा करना, भारी वर्षा या भीषण गर्मी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करना अपेक्षाकृत सुगम होता है।

पौधशालाओं में पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ तैयार जा सकती हैं। पौधशालाओं में पौधों को आवश्यकतानुसार किसी भी समय उगाया जा सकता है, न कि केवल उस ऋतु में जब वे सामान्यतः उगाए जाते हैं। लोग अपने घरों, उद्यानों एवं कृषि-क्षेत्रों के लिए पौधे खरीदने के लिए भी पौधशालाओं में जाते हैं।

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मैं क्या कर पाऊँगा/पाऊँगी?

परियोजना कार्य करने के पश्चात आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम हो सकेंगे-

1. अंकुरित बीजों और नवोदित पौधों की आवश्यकताओं का वर्णन करने में।

2. विभिन्न पौध प्रवर्धन विधियों का उपयोग करते हुए नए पौधे उगाने में।

3. पौधों की प्रारंभिक वृद्धि के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ प्रदान करने में।

4. विद्यालय में पौधशाला विकसित करने में।




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मुझे किन वस्तुओं की आवश्यकता होगी?

आपको पौधशाला विकसित करने के लिए निम्नलिखित औजारों, उपकरणों एवं सामग्रियों की आवश्यकता होगी (चित्र 1.3 देखें)-

बागवानी के साधन - बागवानी फावड़ा, कुदाल, खेत जुताई के उपकरण, कलम काटने हेतु चाकू, छँटाई कैंची अथवा धारदार या नुकीली मशीन (शार्प कटर), जल देने की कैन और बागवानी के लिए दस्ताने।

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पौधशाला-सामग्री - बीज-पात्र, नारियल-भूसी, दलदली काई (स्पैगनम मॉस), खाद, बीज अंकुरण पत्र या गत्ता (45 सेंटीमीटर × 28 सेंटीमीटर)।

अन्य सामग्रियाँ - छाया-जाल, बाँस या लकड़ी का खंभा (8 फीट ऊँचा), पी.वी.सी. पाइप, तिरपाल, ईंटें, मापन फीता, पौध नामपट्टिका, प्राथमिक उपचार पेटी, चूना पाउडर, ज्यामिति मापक, पेंसिल, रबर बैंड, प्लास्टिक का पात्र (ट्रे) एवं जल।

Screenshot 2025-11-20 104353 मैं स्वयं और दूसरों को कैसे सुरक्षित रखूँ?

पौधशाला में कार्य करने के समय कुछ आवश्यक सावधानियाँ रखनी चाहिए -

  1. 1. कार्य करने के लिए सदैव उचित औजारों और उपकरणों का उपयोग करें।

  2. 2. बागवानी के औजारों और सामग्रियों का उपयोग करते समय सभी दिशानिर्देशों का पालन अवश्य करें। भारी उपकरण, जैसे- कुदाल, फावड़ा, गैती (भूमि खोदने के

  3. उपकरण) का उपयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए। आप यह भी ध्यान रखें कि धारदार औजारों (चाकू, कैंची) का सावधानीपूर्वक उपयोग करें। अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सावधानियाँ रखें।
  4. 3. अपने हाथों में सही आकार के दस्ताने पहनें जिससे औजारों और उपकरणों पर आपकी मजबूत पकड़ बनी रहे।

  5. 4. यदि किसी साधन के उपयोग को लेकर संदेह हो तो सदैव दूसरों से सहायता लें।

  6. 5. मिट्टी में कार्य करने के पश्चात सावधानीपूर्वक हाथ धोएँ क्योंकि इसमें रोग उत्पन्न करने वाले अनेक सूक्ष्म जीव होते हैं।

  7. 6. भारी वस्तुएँ उठाते समय उचित विधि अपनाएँ, जैसे- भारी वस्तु उठाते समय अपनी पीठ को नहीं बल्कि अपने घुटनों को मोड़ें।

  8. 7. उपयोग के बाद औजारों को रैक पर टाँगे या निर्धारित स्थानों पर में रखें।



Screenshot 2025-11-21 095110 अंतर्जाल (इंटरनेट) सुरक्षा- अंतर्जाल का उपयोग करते समय अपने शिक्षक से सहायता लें। बिना जाँच किए कुछ भी अपलोड या डाउनलोड न करें। अपनी या किसी अन्य की व्यक्तिगत सूचना कहीं भी साझा न करें।

Screenshot 2025-11-20 104801 आरंभ करने से पहले मुझे क्या जानने की आवश्यकता है?

पौधशालाएँ विभिन्न प्रकार की होती हैं, जैसे- सब्जियाँ, फल, पेड़, फूलों वाले पौधे, सजावटी पौधे उगाने के लिए आदि।

विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार की पौधशालाएँ होती हैं। पौधशाला विकसित करने की प्रक्रिया तो एक समान ही होती है परंतु पौधों के प्रकार भिन्न होते हैं। कृषि-क्षेत्रों में बैंगन, टमाटर, प्याज आदि सब्जियों और केले जैसी फलदार उपजों के लिए भिन्न पौधशालाएँ होती हैं। शहरी पौधशालाओं में गुलाब, गेंदा और सजावटी पौधे उगाए जाते हैं जिन्हें घरों में सजावट के लिए रखा जा सकता है। इसी प्रकार तटीय-क्षेत्रों में नारियल के और पहाड़ी क्षेत्रों में आम जैसे पौधों के लिए पौधशालाएँ स्थापित की जाती हैं।


पौधशालाओं का निर्माण भूमि पर या घर की छतों पर किया जा सकता है। घरों में स्थान की उपलब्धता के आधार पर इनका आकार बड़ा या छोटा हो सकता है। इनमें से किसी एक पौधशाला का भ्रमण आपको अपनी पौधशाला को अच्छे से तैयार करने में सहायता करेगा।

यदि आपके विद्यालय परिसर में कोई पौधशाला उपलब्ध नहीं है तो मार्गदर्शन के लिए आप किसी कृषक या माली को अपने विद्यालय में आमंत्रित कर सकते हैं।

गतिविधि 1- समीपवर्ती पौधशाला का भ्रमण

पौधशाला भ्रमण के समय आप यह अवलोकन करेंगे कि वहाँ वायु, सूर्य-प्रकाश, जल, नमी, तापमान एवं पोषण जैसे आवश्यक कारकों को कैसे बनाए रखा जाता है?

अपने भ्रमण का और विशेषज्ञ के साथ संवाद का विवरण नीचे दी गई रूपरेखा में लिखें।

  1. 1. भ्रमण की तिथि................
  2. ................

  3. 2. भ्रमण की गई पौधशाला का नाम .........................
  4. ................

  5. 3. पौधशाला के प्रकार (जैसे- सब्जी, फल, फूल वाले पौधे, सजावटी पौधे) .........................
  6. ................

  7. 4. संवर्धित पौधों के प्रकार (जैसे- सब्जी, फूल वाले पौधे, फलदार, आदि) ..........................
  8. ................

  9. 5. पौधशाला में प्रयुक्त उपकरण और औजार .........................
  10. ................

  11. 6. प्रबंधन पद्धतियाँ (जैसे- जल देना, कीट-नियंत्रण, पोषक तत्व आदि।) .........................
  12. ................

विशेषज्ञ से पूछने के लिए कुछ प्रश्न उदाहरणार्थ दिए गए हैं। आप वार्तालाप के लिए अपने स्वयं के प्रश्न भी तैयार कर सकते हैं।

  1. 1. पौधशाला में साधारणतः कौन-कौन से पौधे उगाए जाते हैं?
  2. ........................


  3. ........................

  4. 2. पौधशाला में पौधों के प्रवर्धन के लिए किन विधियों का उपयोग किया जाता है?
  5. ........................


  6. ........................
  7. 3. क्या वर्षभर एक ही प्रकार के पौधे उगाए जाते हैं या ऋतु के अनुसार इनका परिवर्तन होता है? यदि हाँ, तो किस ऋतु में कौन-कौन से पौधे उगाए जाते हैं?
  8. ........................

  9. ........................


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  1. अवलोकन करें कि पौधशाला में पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कैसे प्रदान की जाती हैं? पौधशाला में कार्य करने वाले कर्मचारियों से आप निम्नलिखित विशिष्ट प्रश्न पूछ सकते हैं-

  2. 1.आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि पौधों को सही मात्रा और अवधि में सूर्य का प्रकाश मिले?
  3. ....................

  4. ....................

  5. 2. पौधों को छाया प्रदान करने के लिए आप कौन-सी विधियाँ अपनाते हैं?
  6. ....................

  7. ....................

  8. 3. पौधों के लिए आदर्श तापमान बनाए रखने के लिए आप क्या उपाय करते हैं?
  9. ....................

  10. ....................

  11. 4. आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि पौधों को सही मात्रा में जल मिले?
  12. ....................

  13. ....................

  14. 5. अधिक से अधिक आर्द्रता कैसे बनाए रखी जाती है?
  15. ....................

  16. ....................

  17. 6. क्या पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए और भी कुछ आवश्यक होता है?

  18. .....................

  19. .....................


  20. 7. आप बाहरी कारकों जैसे- कीटों, पशु या मानव गतिविधियों से पौधों को क्षति से कैसे बचाते हैं? (जैसे- क्या आपने पौधों की क्यारियों के बीच मार्ग बनाए हैं और सुरक्षा के लिए बाड़ लगाई गई है?)
  21. .....................


  22. .....................


  23. 8. पौधों को पौधशाला से घर के उद्यान या खेतों तक कैसे पहुँचाया जाता है?
  24. .....................

  25. .....................

विशेषज्ञ के सुझाव पर तय करें कि आप अपनी पौधशाला में कौन-कौन से पौधे उगाएँगे? विशेषज्ञ की सहायता से इन पौधों से संबंधित महत्त्वपूर्ण सूचना तालिका 1.1 में लिखिए।

तालिका 1.1- पौधशाला विकसित करने के लिए आवश्यक सूचना

क्रम संख्या पौधे का नाम पौधशाला में उपयोग की जाने वाली पौधों की प्रवर्धन विधि (बीज, तना आदि संबंधी) पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए कैसी परिस्थितियाँ प्रदान की जा रही हैं? पौधे को विशेष देखभाल की आवश्यकता है (हाँ/नहीं) यदि हाँ, तो क्या किया जाना चाहिए?
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मुझे क्या करना है?

अब जब आपने यह सीख लिया है कि पौधों की वृद्धि के लिए क्या आवश्यक होता है तो आप पौधशाला स्थापित करने की योजना बनाना प्रारंभ करें। आप क्यारियों में और बीजांकुरण पात्र में बीज बोएँगे, तने की कलम से नए पौधे उगाएँगे और उनका विद्यालय में उपयोग करेंगे या दूसरों को भी देंगे। आप पौधशाला थैली (नर्सरी बैग) भी तैयार करेंगे। पौधों को क्यारियों से या पात्र से स्थानांतरित करने के बाद आप इन्हें नर्सरी बैग में रखकर विद्यालय के किसी अन्य भाग में भी लगा सकते हैं (चित्र 1.5 देखें)।

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गतिविधि 2- पौधशाला-योजना निर्माण और संरचना-निर्धारण

आपने गतिविधि 1 के समय उन पौधों की पहचान कर ली है जिन्हें आप उगाएँगे।

जब आपको पौधशाला की योजना बनानी है (चित्र 1.6) तो उसके लिए सर्वप्रथम एक उपयुक्त स्थान का चयन करें।

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चयनित क्षेत्र को मुख्यतया कम-से-कम 2-3 घंटे की धूप मिलनी चाहिए। इस स्थान में अधिक जल का ठहराव या जलभराव नहीं होना चाहिए।

150-200 वर्ग फीट का क्षेत्रफल पर्याप्त होगा। यदि विद्यालय-परिसर में भूमि उपलब्ध नहीं है तो आप किसी भी अनुपयोगी स्थान का, अनुपयोगी मार्ग का या वाहन पार्किंग स्थान का उपयोग कर सकते हैं या आप गमलों का उपयोग करके पौधशाला बना सकते हैं (चित्र 1.7)।

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एक बार भूमि का चयन हो जाने के पश्चात पौधशाला के क्षेत्रफल की गणना करें।


  1. 1. पौधशाला के लिए उपलब्ध स्थान कितना है?
  2. .....................

  3. .....................

  4. 2. स्थान का चयन करते समय किन कारकों पर विचार किया गया था?
  5. .....................

  6. .....................


पौधशाला की संरचना या रेखाचित्र बनाएँ जिसमें आयाम (लंबाई और चौड़ाई) दिए गए हों। अपने रेखाचित्र में अधिक से अधिक विवरण दर्शाएँ, जैसे- पगडंडियाँ, जलस्रोत, क्यारियों की संरचना आदि।



















गतिविधि 3- भूमि तैयार करना और छाया-जाल लगाना

आपने पौधशाला की संरचना तैयार कर ली है। अब आपको भूमि तैयार करने और पौधों हेतु सूर्य के तीव्र प्रकाश को कम करने के लिए छाया-जाल लगाने की आवश्यकता है। आपको छोटे पौधों को अधिक तापमान से सुरक्षित रखना होगा ताकि उन्हें गर्मी से बचाया जा सके।

  1. 1. सर्वप्रथम चयनित क्षेत्र को स्वच्छ करें। इसके लिए अवांछित पौधों, मलबे, पत्थरों आदि को हटाएँ।

  2. 2. पौधशाला की सीमा को चूना पाउडर से चिह्नित करें। पगडंडियों, पौधों की क्यारियों जैसे अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानों को भी चिह्नित करें (चित्र 1.8)1
  3. Screenshot 2025-11-20 112500

  4. 3. क्षेत्र और निर्मित रूपरेखा के आधार पर बाँस या लकड़ी के खंभों का उपयोग करते हुए पौधशाला पर हरे रंग की छाया-जाल को ठीक से लगाएँ (चित्र 1.9)।

  5. Screenshot 2025-11-20 112739
  6. 4. पौधों की आवश्यकता के अनुसार उचित छायांकन प्रतिशत (50 प्रतिशत या 75 प्रतिशत) वाली छाया-जाल का चयन करें। यदि हरी छाया-जाल उपलब्ध न हो तो आप छाया प्रदान करने के लिए पेड़ों की टहनियों का या पुराने वस्त्रों का भी उपयोग कर सकते हैं। (चित्र 1.10 देखें)। यदि आप पौधशाला को छत पर या कंक्रीट की सतह (फर्श) पर बना रहे हैं तो छाया-जाल हेतु खंभे लगाने के लिए रेत से भरे टिन धातु के बक्से या प्लास्टिक के ड्रम (बड़े आकार के डिब्बे) का उपयोग कर सकते हैं।
  7. Screenshot 2025-11-20 113458
  8. 5. पौधशाला में जीव-जंतुओं और व्यक्तियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए आपको अपनी पौधशाला में सुरक्षात्मक बाड़ लगानी चाहिए। इस बाड़ को बनाने के लिए अनुपयोगी पाइप, छड़, बाँस या पेड़ों से गिरी हुई शाखाओं का उपयोग करें। जब मूल संरचना तैयार हो जाए तब निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए-

    1. 1. आपने पौधों को छाया प्रदान करने के लिए किस प्रकार की छाया-जाल या वस्त्र का उपयोग किया है?


    2. .................

    3. .................
    4. 2. आपने छाया-जाल लगाने के लिए किन सामग्रियों का उपयोग किया (जैसे- बाँस, लकड़ी का खंभा, हल्के स्टील के पाइप आदि)?
    5. .................

    6. .................

गतिविधि 4- बीजों का अंकुरण

ऐसा आवश्यक नहीं है कि सभी बीज बोने के पश्चात अंकुरित हों ही। बीज अंकुरण दर से यह ज्ञात होता है कि कितने बीजों से पौधे बनने की संभावना है। पौधे बनने की संभावना को समझना आवश्यक होता है ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि पौधशाला में बोने के लिए कितने बीजों की आवश्यकता होगी।

यह गतिविधि आपको अंकुरण परीक्षण के महत्त्व को समझने में सहायता करेगी। बीज-अंकुरण के परीक्षण करने के लिए चित्र 1.11 में दिए गए चरणों का अनुसरण करें।





Screenshot 2025-11-20 114009 आवश्यक सामग्री
  1. (क) अनाज अथवा दालों के बीज
  2. (ख) ज्यामिति मापक
  3. (ग) पेंसिल
  4. (घ) रबर बैंड
  5. (ङ) प्लास्टिक का पात्र
  6. (च) जल
  7. (छ) बीज अंकुरण कागज (45 सेंटीमीटर × 28 सेंटीमीटर)

बीज अंकुरण कागज नमी को बनाए रखता है। इसे विशेष रूप से अंकुरण परीक्षण के लिए अभिकल्पित किया गया है। यदि बीज अंकुरण कागज उपलब्ध नहीं है तो आप गत्ते के फाक (कार्डबोर्ड शीट) का उपयोग भी कर सकते हैं।

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चरण 1- कागज पर 3 × 3 सेंटीमीटर के वर्ग चिह्नित करें।

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चरण 2- कागज को जल में भिगोएँ। अतिरिक्त जल को निकलने दें।

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चरण 3- बीज के 100 दाने गिनें और उन्हें चिह्नों के अनुसार समान दूरी पर रखें।

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चरण 4- कागज को धीरे से घुमाकर लपेटें। कागज पर रबर बैंड लगाएँ और इसे 3-5 दिनों तक रखें।

चरण 5– अंकुरित बीजों की गिनती करें।

चरण 6– निम्नलिखित सूत्र का उपयोग करते हुए अंकुरण प्रतिशत की गणना करें।


अंकुरण प्रतिशत = (अंकुरित बीजों की संख्या)/ ( अंकुरित करने के लिए बोए गए बीजों की कुल संख्या )× 100

चित्र 1.11- अंकुरण प्रतिशत की गणना के चरण


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अपने पौधों की वृद्धि को अभिलेखित कीजिए

आप बीजों के अंकुरित होने का वीडियो बना सकते हैं। आप विभिन्न समय पर बीजों की छवि स्मार्टफोन या कैमरे का उपयोग कर ले सकते हैं। अंतर्जाल पर किसी सर्च इंजन पर 'टाइमलैप्स फोटो ऐप्स' (Timelapse Photo Apps) की-वर्ड खोजें। अब आप इन छायाचित्रों को अपलोड करके एक ऐसा वीडियो बना सकते हैं जिसमें बीज क्रमबद्ध रूप से अंकुरित होते हुए और फिर नवोदित पौधों में विकसित होते हुए दिखें।

अब आप समझ गए होंगे कि अंकुरण दर यह अनुमान लगाने में सहायता करती है कि आवश्यक उपज प्राप्त करने के लिए कितने बीज बोए जाने की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि हमारा स्थान, परिश्रम और समय व्यर्थ न जाए। यदि आप बीज थैले की नाम पट्टिका को ध्यान से देखेंगे तो पाएँगे कि उन पर बीज की अंकुरण दर का उल्लेख किया गया है।

बीज अंकुरण दर के संबंध में अधिक जानने के लिए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

  1. 1. आपने बीज अंकुरण परीक्षण के लिए किस बीज का उपयोग किया था?
  2. .................

  3. .................

  4. 2. अंकुरण परीक्षण के लिए आपने कितने बीजों का उपयोग किया गया था?
  5. .................

  6. .................

  7. 3. बीजों को अंकुरित होने में कितने दिन लगे?
  8. .................

  9. .................

  10. 4. कितने बीज अंकुरित हुए?
  11. .................

  12. .................

  13. 5. अंकुरण दर क्या थी?
  14. .................

  15. .................

गतिविधि 5- पौधशाला में पौधों का संवर्धन

अब आप बीज अंकुरण दर के विषय में सीख चुके हैं।

आइए, अब पौधशाला में पौधे उगाएँ। बीज और कलम जैसी रोपण सामग्री में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन एवं आवश्यक पोषक तत्वों के रूप में भोजन संचित होता है। यह संचित भोजन अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि के समय नवांकुर द्वारा उपयोग किया जाता है।

स्मरण रखें जितने पौधों को आप उगाना चाहते हैं, उनकी अपेक्षा बीजों की संख्या अधिक होनी चाहिए।

गतिविधि 5- पौधशाला में पौधों का संवर्धन

अब आप बीज अंकुरण दर के विषय में सीख चुके हैं।

आइए, अब पौधशाला में पौधे उगाएँ। बीज और कलम जैसी रोपण सामग्री में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन एवं आवश्यक पोषक तत्वों के रूप में भोजन संचित होता है। यह संचित भोजन अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि के समय नवांकुर द्वारा उपयोग किया जाता है।

स्मरण रखें जितने पौधों को आप उगाना चाहते हैं, उनकी अपेक्षा बीजों की संख्या अधिक होनी चाहिए।

Screenshot 2025-12-03 122816 क्या आप जानते हैं?

पद्मश्री पुरस्कार एवं नारी शक्ति पुरस्कार से विभूषित राहीबाई सोमा पोपेरे को भारत की बीज माता के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने छोटे से घर में एक बीज बैंक का निर्माण किया। इसमें इन्होंने 43 से अधिक स्वदेशी फसलों की प्रजातियों एवं खाद्य स्रोतों का संरक्षण किया।

विभिन्न कारणों से स्वदेशी प्रजातियाँ लुप्त होने की अवस्था में हैं। ऐसी स्थिति में उनका कार्य महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

पौधशाला में उपयोग की जाने वाली कुछ सामान्य बीज-बुवाई विधियाँ नीचे दी गई हैं। आप अपने सहपाठियों और शिक्षकों के साथ चर्चा के आधार पर इन विधियों का उपयोग कर सकते हैं।


विधि 1- ऊँची क्यारी वाली पौधशाला में बीज बोना



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चरण 1- सब्जी अथवा फूल के पौधों के लिए ऊँची क्यारियाँ बनाना

पौधशाला की क्यारियों में खरपतवार और पत्थर नहीं होने चाहिए। ऊँची क्यारियाँ (चित्र 1.13) यह सुनिश्चित करती है कि जड़ से अतिरिक्त जल निकल जाए और जड़ों को श्वसन के लिए वायु मिलती रहे।

ऊँची क्यारियाँ तैयार करने के लिए निम्नलिखित चरणों का अनुसरण करें-
  1. 1. मिट्टी को खोदकर मुलायम करें।

  2. 2. बड़े पत्थर और कंकड़ हटाएँ।

  3. 3. खाद और मिट्टी (अनुपात 40:60) मिलाएँ और चिह्नित क्यारी क्षेत्र को भूमि से 15-20 सेंटीमीटर ऊपर उठाएँ।

  4. 4. क्यारी की लंबाई 3-5 मीटर और चौड़ाई 1-1.5 मीटर हो सकती है।

  5. 5. जल देने, निराई-गुड़ाई आदि के लिए आवश्यक मानवीय गतिविधि के लिए आप दो क्यारियों के बीच 0.30-0.40 मीटर की दूरी बनाए रख सकते हैं (चित्र 1.14 देखिए)।



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चरण 2- पौधशाला में ऊँची क्यारियों पर बीज बोना

अब आप पौधशाला में ऊँची क्यारियों पर बीज बोएँ। इसके लिए निम्नलिखित चरणों का अनुसरण करें -

  1. 1. यदि बीज बहुत छोटे हैं तो उन्हें बारीक रेत में अथवा मिट्टी में मिला दें। इससे बीज बोना सुगम होगा।

  2. 2. बीजों को ऊँची क्यारियों पर धीरे से बोएँ। बीजों पर मिट्टी डालें और मिट्टी को नम रखने के लिए सिंचाई बाल्टी से जल का छिड़काव करें।

इस गतिविधि के पश्चात निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

  1. 1. आपने ऊँची क्यारियों में कौन-से बीज बोए हैं?

  2. .....................

  3. .....................

  4. 2. आपने नवांकुरों के विकास के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध कराने के लिए क्या किया है?
  5. .....................

  6. .....................

विधि 2- अंकुर पात्र में बीज बोना

ऊँची क्यारियों का एक विकल्प अंकुर पात्र का उपयोग करना है (चित्र 1.15 देखिए)। यह सीमित स्थान उपलब्ध होने और व्यापक स्तर पर पौधे उगाने के लिए अत्यंत उपयोगी है। पात्र में ऐसे खाँचे होने चाहिए जो पौधों के आकार के अनुसार हों, Screenshot 2025-11-20 115718 जैसे- कोमल पौधों के लिए छोटे आकार के खाँचे और बड़े आकार के पौधों के लिए बड़े खाँचे। आप इस पात्र में नमी बनाए रखने के लिए नारियल की भूसी का उपयोग कर सकते हैं।

यदि अंकुर पात्र उपलब्ध नहीं हैं तो आप नारियल के खोलों का, पुराने चाय के प्यालों का अथवा इसी प्रकार की अनुपयोगी सामग्रियों का उपयोग कर सकते हैं।



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क्या आप जानते हैं?

मृदा की तुलना में पादप संपोषण (ग्रोइंग मीडिया) का लाभ यह है कि यह जड़ों के आस-पास नमी का सर्वोत्तम प्रबंधन करता है। यह रोगों के प्रसार को रोकने में सहायता करता है, साथ ही पौधों की वृद्धि के लिए पोषक तत्व भी प्रदान करता है।

नारियल की भूसी के अतिरिक्त कृमिलाभ (वर्मीकुलाइट) और मृत्तिकाभ (बेंटोनाइट) जैसे खनिजों का उपयोग भी पौधशालाओं में पादप संपोषण के रूप में किया जाता है।



बीज बोने के लिए अंकुर पात्र का उपयोग
  1. 1.नारियल की भूसी को जल में भिगोएँ - 1 किलो नारियल भूसी 5-8 लीटर जल को अवशोषित कर सकती है।

  2. 2. जब जल पूर्णतया अवशोषित हो जाए तो पात्र को भीगे हुए नारियल भूसी से धीरे-धीरे भरें।

  3. 3.बीज बोएँ (1-2 प्रत्येक खाँचे में) और पात्र को जलरोधी चादर से या बोरी से ढक दें। ढके हुए पात्र को 2-3 दिनों के लिए अलग स्थान पर रखें।

  4. 4. जब बीज अंकुरित होने लगे तो पौधों की वृद्धि के लिए पात्र को छाया-जाल वाली पौधशाला में रख देना चाहिए।

गतिविधि पूर्ण करने के पश्चात निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-
  1. 1. आपने बीज बोने के लिए कौन-सी विधि अपनाई? (यदि आपने एक से अधिक विधियाँ अपनाई हैं तो कृपया उन सभी का उल्लेख करें।)

  2. ..........................

  3. ..........................

  4. 2. नवांकुरों की वृद्धि हेतु अनुकूलतम परिस्थितियाँ प्रदान करने के लिए आपने कौन-से चरण अपनाए हैं

  5. ..........................

  6. ..........................

विधि 3- तने की कलम से पौधे उगाना

तने की कलम का उपयोग करते हुए भी पौधों का प्रवर्धन किया जा सकता है (चित्र 1.16)। आप ठोस लकड़ी (जैसे - गुलाब, बोगनवीलिया), अर्ध-ठोस लकड़ी (जैसे- डाइफ़ेनबैचिय क्रोटोन) और नरम लकड़ी (जैसे- दुरता, मत्स्याक्षी या अल्टरनेन्थेरा), के तनों का रोपण सामग्री के रूप में उपयोग कर सकते हैं।





सामग्री- पौधशाला थैलियाँ (5 × 4 इंच) आप दूध की पुरानी थैलियों (500 मिलीलीटर) का भी उपयोग कर सकते हैं। Screenshot 2025-11-20 120054 चरण 1- जल की निकासी के लिए थैली के तल पर 2-3 छोटे छिद्र करें और उन्हें मिट्टी और खाद मिश्रण (2 भाग मिट्टी + 1 भाग खाद) से भरें।
Screenshot 2025-11-20 120133 चरण 2- एक परिपक्व और स्वस्थ मूल पौधे का चयन करें। तने को लगभग 10-15 सेंटीमीटर की लंबाई में काटें। तने के निचले सिरे पर एक 45° कोण का तिरछा कट लगाएँ। इससे जड़ों को वृद्धि के लिए अतिरिक्त क्षेत्र प्राप्त होगा। प्रत्येक कलम 4-6 इंच लंबी होनी चाहिए और उसमें कम-से-कम 2-3 गाँठें होनी चाहिए।
Screenshot 2025-11-20 120218 चरण 3- तने की कटाई किए गए सिरे को जड़ वृद्धि चूर्ण में अथवा अम्ल में डुबोएँ और यह सुनिश्चित करें कि यह समान रूप से लेपित हो।

चरण 4- उचित अंकुरण (30-45 दिन) के पश्चात नए पौधे को एक बड़े थैले में या खेत में स्थानांतरित किया जा सकता है।

चित्र 1.16- तने की कलम से पौधे उगाना




पौधों के प्रवर्धन हेतु तने की कलमों के प्रकार
1. नरम कलम - झाड़ियों या पर्णपाती पेड़ों से प्राप्त नरम कलमें सामान्यतः 10-15 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। एक कलम में शीर्ष की दो से तीन पत्तियाँ रखी जाती हैं तथा शेष पत्तियाँ हटा दी जाती हैं। कुछ पत्तियों को रखना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि कलमों में पर्याप्त भोजन संचित नहीं होता है। नींबू, चेरी, सेब, आडू, आलूबुखारा, नाशपाती एवं खुबानी को साधारणतः आर्द्र कक्ष (जहाँ वातावरण में आर्द्रता हो) में नरम कलम के माध्यम से प्रवर्धित किया जाता है। इसके साथ ही कोलियस, गुलदाउदी, डहेलिया या डैलिया, तुलसी एवं गुलनार जैसे पौधों का प्रवर्धन हरित तना कलम विधि द्वारा किया जाता है।

2. अर्ध ठोस कलम- अर्ध ठोस कलमों को आंशिक रूप से परिपक्व, हल्की लकड़ियों जैसी टहनियों अथवा ऊतकों से प्राप्त किया जाता है। ये कलमें कोमल और रसीली होती हैं जिन्हें पेड़ों और झाड़ियों से ऋतुओं के अनुसार तैयार किया जाता है। इस विधि का उपयोग सामान्यतः आम, अमरूद, नींबू, कटहल जैसे फलों के पौधों के और गुलाब जैसे फूलों के पौधों के प्रवर्धन के लिए उपयोग किया जाता है।

3. ठोस कलम - परिपक्व पेड़ एवं पौधों के तनों से ठोस कलमों को लिया जाता है। साधारणतः इन्हें सुप्त ऋतु के समय तैयार किया जाता है। (सुप्त ऋतु को निष्क्रिय मौसम भी कहा जाता है। विशेष रूप से शीतकाल के समय जब तापमान कम होता है और भोजन कम उपलब्ध होता है। सामान्यतः इस ऋतु का प्रभाव पौधों और जंतुओं में ही दृष्टिगत होता है।) सामान्यतः इन्हें पिछले वर्ष पल्लवित हुई शाखाओं से प्राप्त किया जाता है। इस विधि का उपयोग प्रायः अंगूर, अंजीर, शहतूत, कीवी फल, अनार, शाहबलूत (चेस्टनट), आलूबुखारा, सेब एवं करौंदा जैसे पौधों के प्रवर्धन के लिए उपयोग किया जाता है।
  1. 1. आपने कलमों को बनाने के लिए किस प्रकार के पौधों का उपयोग किया था? क्या आपने ठोस, अर्ध-ठोस एवं नरम लकड़ियों की कलमों का उपयोग किया था?

  2. .........................

  3. ..........................


  4. 2. कलमों की वृद्धि हेतु परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने के लिए आपने क्या किया?
  5. .........................

  6. .......................

गतिविधि 6- पौधों के प्रवर्धन का अवलोकन

आपने पौधों के प्रवर्धन के लिए विभिन्न विधियों का उपयोग किया है। अब अपनी पौधशाला के लिए तालिका 1.2 में दर्शाए अनुसार बिंदुओं को अभिलेखित (रिकॉर्ड) करें।

तालिका 1.2 - पौधशाला के लिए अभिलेख विकसित करना

क्रम संख्या पौधशाला में उगाए गए पौधों के नाम उपयोग की गई पौधशाला विधियाँ उपयोग किए गए बीजों अथवा कलमों की मात्रा रोपण की तिथि अंकुरण अथवा पहली पत्ती निकलने की तिथि कोई अन्य अवलोकन
1.
2.
3.
4.
5.


Screenshot 2025-11-20 120456 पौधशाला के लिए डिजिटल उपकरण आपके पौधों की वृद्धि का ध्यान रखने में आपकी सहायता करने के लिए विभिन्न प्रकार के आधुनिक ऐप्स उपलब्ध हैं। आप 'प्लांट नर्सरी रिकॉर्डिंग ऐप्स' (Plant nursery recording apps), 'पेस्ट आइडेंटिफायर' (Pest identifier), 'प्लांट वॉटरिंग रिमाइंडर ऐप्स' (Plant watering reminder apps) आदि की-वर्ड्स का प्रयोग करके ऑनलाइन ऐप्स ढूँढ़ सकते हैं।


पौधरोपण करना ही पर्याप्त नहीं है अपितु पौधों की तब तक देखभाल करना आवश्यक होता है जब तक वे पूरी तरह से परिपक्व न हो जाएँ। नवोदित पौधे अत्यंत कोमल होते हैं। अतः उन्हें विशेष ध्यान की, सही मात्रा में जल की, प्रकाश की एवं वातावरण की आवश्यकता होती है। जब तक पौधा क्यारी या गमले में रोपाई के योग्य न हो जाए तब तक उसकी नियमित देखभाल आवश्यक होती है। पौधों को सही ऋतु में और उचित स्थान पर रोपित करना चाहिए जिससे वे भली-भाँति विकसित हो सकें।

गतिविधि 7– मूल्य की गणना

तालिका 1.3 में वस्तुओं और सामग्रियों पर खर्च होने वाला मूल्य लिखें जिससे आप पौधों के विक्रय मूल्य का उचित निर्धारण कर सकें।

तालिका 1.3- वस्तुओं और सामग्रियों की मूल्य-गणना
क्रम संख्या वस्तु/सामग्रियाँ इकाई मूल्य (प्रति ग्राम अथवा प्रति वस्तु का मूल्य) मात्रा कुल मूल्य टिप्पणी
1. बीज (जैसे - टमाटर) ₹ 10 प्रति ग्राम 5 ग्राम ₹50
2. अंकुर पात्र (50 प्रति पात्र)
3. पौधशाला थैले/थैलियाँ
4.
5.
6.


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मैंने दूसरों से क्या सीखा?

  1. 1. पौधशाला की यात्रा से या विशेषज्ञ के साथ संवाद से आपने सबसे लाभदायक जो तीन बातें सीखीं हैं, उन्हें लिखिए।

  2. .............


  3. 2. पौधशाला तैयार करते समय आपने सहपाठियों के साथ कौन-सी तीन बातें सीखीं हैं?

  4. ........................

  5. .......................

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मैंने क्या कार्य किया और इसमें कितना समय लगा?

यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि किसी गतिविधि को पूर्ण करने में कितना समय लगता है?

प्रत्येक गतिविधि को क्रियान्वित करने में आपने कितना समय व्यतीत किया, इसका आकलन अवश्य कीजिए। इसे नीचे दी गई समयरेखा पर चिह्नित कीजिए। यदि आपने पुस्तिका में सुझाई गई गतिविधियों से भी अधिक गतिविधियाँ की हैं तो कृपया उनकी संख्या और उसमें लगा समय जोड़िए।

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मैं और क्या कर सकता/सकती हूँ?

अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए आप निम्नलिखित कार्यों को कर सकते हैं-
  1. 1. आप एक गमले को सुंदर तरीके से सजाकर उसमें पौधे उगा सकते हैं। यह आगंतुकों के लिए एक अच्छा उपहार हो सकता है।

  2. 2. आप स्वतंत्रता दिवस पर या गणतंत्र दिवस पर या किसी विशेष दिन पर पौधरोपण अभियान आयोजित कर सकते हैं और अपने द्वारा तैयार किए गए पौधों को अपने विद्यालय या घर में लगा सकते हैं।

  3. 3. आप अपने घर में या विद्यालय में ऋतु के अनुसार पौधों को उगा सकते हैं।

  4. 4. आपके अनुसार पौधशाला का क्या महत्त्व है?

सोचिए और उत्तर दीजिए

  1. 1. आपको किन कार्यों को करने में आनंद आया?

  2. 2. आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

  3. 3. अगली बार आप इन्हें किसी भिन्न विधि से कैसे करेंगे?

  4. 4. इस परियोजना में आपने जो कार्य किए हैं उनसे संबंधित रोजगार के कुछ उदाहरणों की पहचान कीजिए। जैसे - माली, वनस्पतिशास्त्री, वन अधिकारी, कृषक, कृषि वैज्ञानिक। आप अपने आस-पास देखें और लोगों से इस विषय पर बात करें। इसके पश्चात अपना उत्तर लिखें।