परियोजना
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विद्यालय पर्यावास उद्यान
यह परियोजना आपको विभिन्न जीव समूहों के निवास करने और पनपने के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को समझने में सहायता करेगी। आप अपने विद्यालय में एक पर्यावास उद्यान (हैबिटेट गार्डन) विकसित करेंगे जो विभिन्न जीव समूहों (पक्षी, स्तनधारी, कीट, सरीसृप आदि) को आश्रय, जल, आहार एवं उपयुक्त परिवेश प्रदान कर आकर्षित करेगा।
परियोजना के अंतर्गत आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम होंगे -
अनेक जीव मनुष्यों के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहते हैं (चित्र 2.1, 2.2 और 2.3 देखिए)। इसके साथ ही पालतू पशुओं के अतिरिक्त अन्य जीव भी हमारे परिवेश में रहते हैं जिनमें कौवे, गौरैया, कबूतर, उल्लू, चील, चमगादड़, बंदर, लंगूर, गिलहरी, चूहे, तितलियाँ एवं पतंगे सम्मिलित हैं। ये हमारे साथ-साथ अपना जीवन जीते हैं और मानव-प्रधान वातावरण के अनुरूप स्वयं को अनुकूलित कर लेते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि खेतों और जंगलों के कस्बों और शहरों में परिवर्तित होने से पूर्व ये जीव कहाँ रहते थे? उनमें से कितने जीव मानव विस्तार से उत्पन्न परिवर्तनों के कारण स्वयं को नए परिवेश में समायोजित करने में सफल रहे हैं? जैसे-जैसे गाँव, कस्बे और शहरों की संख्या में वृद्धि होती जा रही है वैसे-वैसे प्राकृतिक पर्यावास सिकुड़ते जा रहे हैं। परिणामस्वरूप अनेक जीव अपरिचित क्षेत्रों में जाने को विवश हो रहे हैं। इस पर्यावास की हानि के कारण शहरी क्षेत्रों और खेतों में तेंदुए, भेड़िये और यहाँ तक कि बाघों के दिखने में वृद्धि हुई है। कल्पना कीजिए कि यदि आप अचानक अपने घर से विस्थापित हो जाए और उससे मिलने वाली सुरक्षा और आश्रय की सुविधाएँ आपसे छिन जाए तो क्या होगा? इसी चुनौती का सामना जीवों को करना पड़ रहा है।
जो जीव अपने पर्यावास में होने वाले परिवर्तनों के अनुकूल स्वयं को ढाल लेते हैं, वे हमारे साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं जबकि जो जीव नहीं ढल पाते हैं वे किसी अन्य अपरिचित क्षेत्रों में चले जाते हैं। उदाहरण के लिए, कबूतरों के प्राकृतिक पर्यावास में चट्टानें और पथरीली पहाड़ियाँ सम्मिलित हैं। यही कारण है कि उन्हें प्रायः ऊँची इमारतों की छतों पर बैठे देखा जाता है। साथ ही घरेलू गौरैया घने पेड़ों और झाड़ियों में रहना पसंद करती हैं परंतु शहरों के विस्तार एवं हरियाली क्षेत्रों में कमी के कारण गौरैयों की संख्या घटती गई। अंततः शहरी क्षेत्रों से गौरैया संपूर्णतः लुप्त होती गई हैं।
सभी जीवों को जीवित रहने के लिए भोजन और जल की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने के लिए पर्याप्त स्थान और रहने के लिए सुरक्षित आश्रय की भी आवश्यकता होती है। जहाँ वे शिकारियों से निर्भय होकर अथवा ऋतु से प्रभावित हुए बिना विश्राम कर सकें और अपने बच्चों को भी पाल सकें। स्थान, आश्रय, भोजन और जल की आवश्यकताओं की पूर्ति प्रत्येक प्राणी के पर्यावास की नींव तैयार करती है।
यद्यपि विभिन्न जीवों की विशिष्ट आवश्यकताएँ भिन्न-भिन्न होती हैं। उदाहरण के लिए, बड़ी चींटियाँ कुछ ही वर्ग सेंटीमीटर में अपना बसेरा बनाती हैं जबकि मकड़ियाँ अपने आकार से कहीं अधिक बड़े जाल बुनती हैं। इसी प्रकार जीवों के जलस्रोत भी भिन्न-भिन्न होते हैं, जैसे-तितलियाँ और चींटियाँ घास पर जमी ओस की बूँदें पी सकती हैं जबकि पक्षी प्रायः पोखरों से अथवा टपकते हुए नलों से जल पीते हैं। प्रत्येक जीव का आश्रय भी भिन्न होता है, जैसे-गिलहरियाँ पेड़ों पर सुरक्षित रहती हैं जबकि छिपकलियाँ सपाट ठोस सतहों पर आराम से रहती हैं ताकि कुछ शिकारी जानवर जैसे- साँप, बिल्ली आदि दीवारों पर चढ़कर उन तक न पहुँच सकें।
मानव बस्तियों के समीप विभिन्न प्रकार के भोजन सरलता से उपलब्ध होते हैं जिनमें मानव द्वारा छोड़ा गया अपशिष्ट भोजन, फूलों का रस, पत्तियाँ, कीड़े-मकोड़े एवं छोटे जीव सम्मिलित होते हैं (चित्र 2.4 देखिए)। इसके अतिरिक्त पक्षियों को ऐसे क्षेत्रों में घोंसले बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्रियाँ भी मिल जाती हैं। वे मजबूत घोंसले बनाने के लिए टहनियाँ, सूखी वनस्पतियाँ, घास आदि एकत्रित करते हैं (चित्र 2.5 देखिए)। घोंसलों की परत बनाने के लिए गौरैया प्रायः पंख अथवा कागज का उपयोग करती हैं जबकि कौवे अपने घोंसलों को मजबूत बनाने के लिए धातु के तारों का और रस्सियों का उपयोग करते हैं।
जब पर्यावास की आवश्यकताएँ पूरी हो जाती हैं तब पर्यावास में विश्राम और आनंद हेतु भी व्यवस्था की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, बुलबुल, कबूतर एवं मुनिया पक्षियों को ठंडे जल में नहाना अच्छा लगता है ताकि वे अपने पंखों को साफ कर सकें।
भारत में वन्यजीवों के लिए उपयुक्त पर्यावास का निर्माण और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की गई हैं। इन प्रयासों में विभिन्न वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों को विकसित करना सम्मिलित है, जैसे-
- (क) असम में काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडों की संख्या के लिए प्रसिद्ध है।
- (ख) राजस्थान में भरतपुर पक्षी अभयारण्य प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय स्थल है।
- (ग) केरल में पेरियार टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण के लिए समर्पित है।
- (घ) सिक्किम में फैंबोंग ल्हो वन्यजीव अभयारण्य के भीतर तितली बाड़ा तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित आवास प्रदान करता है।
- (ङ) मध्य प्रदेश में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान बारहसिंगा और अन्य वन्यजीवों के लिए एक महत्त्वपूर्ण आश्रयस्थल के रूप में कार्य करता है। ये भारत के अनेक संरक्षित क्षेत्रों में से कुछ उदाहरण हैं।
'अभयारण्य' शब्द का शाब्दिक अर्थ है- 'एक सुरक्षित स्थान जहाँ किसी की मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।' वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में अभयारण्य साधारणतः विस्तृत और सुव्यवस्थित क्षेत्र होते हैं जिनका प्रबंधन विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। ये विशेषज्ञ विभिन्न प्रजातियों की सुरक्षा और कल्याण को सुनिश्चित करते हैं। अभयारण्य की अवधारणा केवल व्यापक स्तर पर किए जाने वाले संरक्षण प्रयासों तक ही सीमित नहीं है अपितु आप अपने आँगन या पड़ोस के एक छोटे से उद्यान को भी लघु अभयारण्य के रूप में विकसित कर सकते हैं। ऐसे अभयारण्यों में पक्षियों, तितलियों, कीड़ों तथा अन्य छोटे जीवों को आश्रय, भोजन एवं एक सुरक्षित स्थान मिल सकता है। आप ऐसे स्थानों का विकास और देखभाल करके जैव विविधता संरक्षण में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस प्रकार हम अपने परिसर के स्थानीय वन्यजीवों की सहायता कर सकते हैं।
मैं क्या कर पाऊँगा / पाऊँगी?
परियोजना कार्य करने के पश्चात आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम होंगे-
- 1. विद्यालयी परिसर और उसके समीपवर्ती ऐसे जीवों के समूहों की पहचान करने में जिन्हें पर्यावास उद्यान की ओर आकर्षित किया जा सकता है।
- 2. जीवों के समूहों के स्थान, आश्रय, भोजन एवं जल की आवश्यकता की पहचान करने में।
- 3. विद्यालयी पर्यावास उद्यान में इन आवश्यकताओं को कैसे पूर्ण किया जा सकता है? इसका वर्णन करने में।
- 4. उपर्युक्त आवश्यकताओं के आधार पर अपने विद्यालय में पर्यावास उद्यान की रूपरेखा तैयार करने और उसे स्थापित करने में।
- 5. पर्यावास उद्यान की ओर आकर्षित होने वाले जीवों के समूहों का अवलोकन करने में।
मुझे किन वस्तुओं की आवश्यकता होगी?
आपको पर्यावास उद्यान स्थापित करने के लिए विभिन्न उपकरणों और औजारों की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही जीवों को आकर्षित करने के लिए पौधों के अतिरिक्त तत्वों की भी आवश्यकता होगी।
1. बागवानी उपकरण और सामग्रियाँ- (क) आपको बागवानी के लिए फावड़ा, कुदाल, खुरपी, सिंचाई के लिए बाल्टी तथा सुरक्षात्मक दस्तानों जैसे साधनों की आवश्यकता होगी।
- (ख)आपको बीज अथवा नवांकुर, फूलदार पौधे और उन्हें स्वस्थ रूप से विकसित करने के लिए खाद जैसी सामग्रियों की आवश्यकता होगी।
- (क) उद्यान में पगडंडियाँ बनाने के लिए कंकड़-बजरी, लकड़ी के टुकड़े अथवा ईंटें।
- (ख)पक्षियों के रहने, भोजन एवं स्नान हेतु स्थल बनाने के लिए अनुपयोगी लकड़ियाँ, गत्ते, पुरानी डोरियाँ एवं पुराने पात्र जैसी अपशिष्ट सामग्रियाँ।
- (ग)कीटों के लिए आश्रय बनाने हेतु पत्थर, चट्टानें, लकड़ी के लडे, अनुपयोगी गत्ते एवं खाद सामग्री।
- (घ)हथौड़ा और छोटी आरी जैसे औजार।
- (ङ)कीलें और बंधक (फास्टनर)।
मैं स्वयं और दूसरों को कैसे सुरक्षित रखूँ?
पर्यावास उद्यान बनाते समय निम्नलिखित सावधानियों का अनुसरण करें -
- 1. जीवों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहें, उनका ध्यान रखें और उन्हें कष्ट न होने दें।
- 2.जीवों के पर्यावास को हानि न पहुँचाएँ।
- 3.अपनी सुरक्षा के लिए उपकरणों और सामग्रियों को संभालते समय दस्ताने अवश्य पहनें।
अंतर्जाल सुरक्षा
- अंतर्जाल का उपयोग करते समय अपने शिक्षक से सहायता लें। बिना जाँच किए कुछ भी अपलोड या डाउनलोड न करें। अपनी व्यक्तिगत सूचना या किसी अन्य की कोई सूचना कहीं भी साझा न करें।
आरंभ करने से पहले मुझे क्या जानने की आवश्यकता है?
पर्यावास उद्यान विकसित करने के लिए आपको सर्वप्रथम विद्यालय और उसके आस-पास के जीवों की पहचान करनी होगी। इसके पश्चात आपको इन जीवों के रहने के स्थान, आश्रय, भोजन एवं जल की आवश्यकताओं को समझना होगा। अंत में ये जीव उद्यान की ओर तब आकर्षित होंगे जब उनकी आवश्यकताएँ पूरी होंगी।
गतिविधि 1- विद्यालय और आस-पास पाए जाने वाले जीवों की पहचान करना
विद्यालय परिसर में समय व्यतीत करें और आस-पास देखकर जीवों की पहचान करें।
इसके पश्चात समीप के किसी उद्यान के माली या विद्यालय के समीप रहने वाले समुदाय के सदस्यों से पूछें कि उन्होंने परिसर में कौन-से जीवों को देखा है।
आपके विद्यालय परिसर में कबूतर, कौवे, गौरैया, चील, पेरेग्रीन बाज़, बुलबुल, मैना, मुनिया, शकरखोरा, कठफोड़वा, उल्लू एवं अन्य पक्षी हो भी सकते हैं (चित्र 2.6)। परिसर में आपको गिलहरी, चूहे, चमगादड़, नेवलों के साथ कुछ अन्य छोटे जीव-जंतु भी देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही आपको छिपकलियाँ और मेंढक भी दिखाई दे सकते हैं। चींटियाँ, तितलियाँ, व्याध पतंग (ड्रेगनफ्लाइस), भृंग, इल्ली (कैटरपिलर्स), मच्छर एवं कुछ अन्य छोटे कीट भी परिसर में हो सकते हैं (चित्र 2.7)।
अपने परिसर में उपलब्ध उन जीवों की सूची बनाएँ जो पर्यावास उद्यान की ओर आकर्षित हो सकते हैं। आप किन जीवों को विद्यालय में रखना चाहेंगे तथा किन जीव-जंतुओं को नहीं रखना चाहेंगे, इसका निर्णय लें।
अपने उत्तर तालिका 2.1 में लिखिए।
तालिका 2.1- ऐसे जीव जिन्हें आप अपने विद्यालय के पर्यावास उद्यान में रखना चाहते हैं अथवा नहीं रखना चाहते हैं| आप अपने पर्यावास उद्यान में इन जीवों को रखना चाहते हैं | आप अपने पर्यावास उद्यान में इन जीवों को नहीं रखना चाहते हैं | ||
|---|---|---|---|
| 1. | तितलियाँ | 1. | मच्छर |
| 2. | शकरखोरा | 2. | साँप |
| 3. | |||
| 4. | |||
| 5. | |||
एक बार यह सूची तैयार हो जाए तो आगामी चरण में यह पहचानना होगा कि इन जीवों को अपने पर्यावास में किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है।
गतिविधि 2- विशेषज्ञ के साथ संवाद
आपके द्वारा पहचाने गए जीवों की आवश्यकता का आकलन करने के लिए किसी विशेषज्ञ से संवाद करना लाभदायक होगा। यह विशेषज्ञ कृषक, माली या किसी अन्य समुदाय का सदस्य हो सकता है जिसके पास उद्यान में कार्य करने का अनुभव हो और जो जीवों में रुचि रखता हो। यदि संभव हो तो आप किसी प्रकृतिविद् (जो लंबे समय से प्राकृतिक अवलोकन की समझ रखते हैं) से भी मिल सकते हैं। इसी प्रकार संरक्षणविद् (जो जीवों की सुरक्षा की आवश्यकता को समझाते हैं और सुझाव देते हैं), प्राणी विज्ञानी (जो जीवों के व्यवहार का अध्ययन करते हैं), कीट विज्ञानी (जो कीटों पर ध्यान केंद्रित करते हैं), तितली विज्ञानी (जो तितली एवं कीट-पतंगों पर अध्ययन करते हैं), वनस्पति विज्ञानी (जो पौधों का अध्ययन करते हैं) और किसी भी ऐसे वैज्ञानिक से भी मिल सकते हैं जो प्राकृतिक परिवेश का अध्ययन करते हैं।
विशेषज्ञों से प्रश्न पूछने के संबंध में विचार करें। नीचे कुछ प्रश्न उदाहरण के लिए दिए गए हैं। इनके अतिरिक्त आप अन्य प्रश्नों पर भी विचार कर सकते हैं।
1. विद्यालय के परिसर में उपस्थित जीवों में से कौन-से जीव हमारे विद्यालय के पर्यावास उद्यान की ओर आकर्षित होने की संभावना रखते हैं?
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2. हम उन जीवों का प्रवेश कैसे रोक सकते हैं जिन्हें हम अपने विद्यालय के पर्यावास उद्यान में प्रवेश नहीं करने देना चाहते हैं?
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3. पर्यावास उद्यान को कहाँ विकसित किया जाना चाहिए?
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अब विशेषज्ञों की सहायता से तालिका 2.2 और 2.3 सूचनाएँ अंकित करें। सुनिश्चित करें कि आपके आस-पास के क्षेत्र में पाए जाने वाले कम-से-कम दो प्रकार के पक्षियों, कीटों एवं छोटे स्तनधारियों से संबंधित जानकारी संकलित की गई हो।
तालिका 2.2- जीवों की आवश्यकता के अनुसार पर्यावास उद्यान| सजीव पशु-पक्षियों के नाम | आवश्यकताएँ | ||||
|---|---|---|---|---|---|
| सामान्यतः वे कौन-सा भोजन ग्रहण करते हैं? | जल और भोजन की व्यवस्था कैसे करें? | उन्हें किस प्रकार के आश्रय स्थल की आवश्यकता है | उन्हें किस प्रकार के स्थानों की आवश्यकता है | कोई अन्य (जैसे-विशिष्ट पौधे, फूल आदि जो उन्हें आकर्षित करने के लिए हों) | |
तालिका 2.3 – पर्यावास उद्यान से जीवों को दूर रखने के उपाय
| जीवों के नाम | हम इन्हें अपने उद्यान में क्यों नहीं चाहते ? (कारण बताइए) | हम इन्हें उद्यान में प्रवेश करने से रोकने के लिए क्या कर सकते हैं? |
|---|---|---|
विशेषज्ञों से मिली सूचना पर अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें। इसके आधार पर आप पर्यावास उद्यान से संबंधित सभी निर्णय ले सकेंगे।
मुझे क्या करना है?
अब आपको कुछ समय जीवों का अवलोकन करने में व्यतीत करना होगा जिससे आप उनके पर्यावास की संरचना को गहराई से समझकर उसका सही अनुकरण कर सकें।
क्या आप जानते हैं?
जुगनू एक प्रकार का कीट है जो प्रकाश उत्सर्जित करता है। कुछ दशक पूर्व हमारे देश के कुछ क्षेत्रों में पेड़ छोटी-छोटी रोशनी से जगमगा उठते थे परंतु अब वे दुर्लभ हो गए हैं (चित्र 2.8)।
जुगनू विभिन्न आवासों में रहते हैं परंतु अधिकांशतः ये गर्म और नम वातावरण में दिखाई देते हैं। इनकी अनेक प्रजातियाँ जंगलों, खेतों और उनके बीच के अनेक क्षेत्रों में पनपती हैं। इसके अतिरिक्त जैसे-जैसे प्रकाश प्रदूषण बढ़ता है वैसे-वैसे जुगनू एक-दूसरे को संकेत नहीं दे पाते हैं। इससे उनका जीवन-चक्र बाधित होता है और जुगनुओं की संख्या में कमी होती जाती है।
इस प्रकार जुगनू अपने बदले हुए आवास में स्वयं को ढाल नहीं पाते हैं। यह इन क्षेत्रों के किसानों के लिए एक गंभीर समस्या है। जुगनू कृषकों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे फसलों को हानि पहुँचाने वाले कीटों का सेवन करते हैं। उनकी संख्या के घटने से अब कृषकों को अपनी उपज की रक्षा के लिए रसायनों पर निर्भर रहना पड़ता है। जिसका पौधों और इनका सेवन करने वालों पर प्रत्यक्ष रूप से हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
ऐप्स का उपयोग करके पहचानना
आप पक्षियों, तितलियों एवं अन्य कीटों की पहचान करने के लिए स्मार्टफोन के माध्यम से ऐप्स का उपयोग कर सकते हैं। कुछ उपयोगी ऐप्स निम्नलिखित हैं-
- सीक बाय आईनेचुरलिस्ट (Seek by iNaturalist)- यह ऐप छायाचित्र (इमेज रिक्गनिशन) के माध्यम से कीटों, तितलियों, पक्षियों एवं जीवों की पहचान करने में सहायता करता है।
- प्लांटनेट (PlantNet)- यह ऐप स्थानीय पौधों की प्रजातियों की पहचान करने और संरक्षण में उनके महत्त्व को समझने में सहायता करता है।
- ईबर्ड (eBird)- इस ऐप का उपयोग पक्षियों के देखे जाने की सूचना अंकित करने और वैश्विक नागरिक विज्ञान डाटा बेस में योगदान देने के लिए किया जाता है।
- मर्लिन बर्ड आईडी (Merlin Bird ID)- इस ऐप का उपयोग ध्वनि या छवि (फोटो) द्वारा पक्षी प्रजातियों की पहचान करने के लिए किया जाता है।
- पिक्चर इंसेक्ट (Picture Insect) - कीटों की पहचान के लिए इस ऐप का उपयोग किया जाता है।
गतिविधि 3- प्राकृतिक पर्यावासों की पहचान करना
अपने पर्यावास उद्यान की अभिकल्पना (डिजाइन) करने से पूर्व अपने विद्यालय परिसर के प्राकृतिक पर्यावास का निरीक्षण करें। संभवतः आपने पूर्व में भी प्राकृतिक स्थानों का भ्रमण किया होगा। इस बार विशेषज्ञों द्वारा आपके साथ साझा की गई सूचनाओं पर विचार करें और विशिष्ट पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
जीवों के व्यवहार का अवलोकन करने के लिए आप समीपवर्ती खेतों या खुले क्षेत्रों, जल-निकायों, वनों (शहरी वन क्षेत्र सहित), उद्यानों, बड़े उद्यानों जैसे स्थानों पर जा सकते हैं।
प्रातः काल में यह अवलोकन करना सबसे उपयुक्त होता है। सामान्यतः प्रातःकाल में जीव सबसे अधिक सक्रिय होते हैं। अपने अवलोकनों को अंकित करने के लिए तालिका 2.4 का उपयोग करें।
तालिका 2.4- जीवों के पर्यावास और व्यवहार का अवलोकन| पर्यावास का विवरण | |||||
|---|---|---|---|---|---|
| जीव | संबंधित अवलोकन | ||||
| स्थान | जल | भोजन | आश्रय | कोई अन्य | |
इन अवलोकनों से हमें यह समझने में सहायता मिल सकती है कि जीव स्वयं को और अपने बच्चों को कैसे सुरक्षित रखते हैं। वह किस स्थान पर फलते-फूलते हैं और उन्हें जीवित रहने के लिए क्या चाहिए।
गतिविधि 4- जीवों की आवश्यकताओं की पहचान करना
अब आप जीवों की आवश्यकताओं के आधार पर अपने विद्यालय के पर्यावास उद्यान की अभिकल्पना करने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों के साथ अपने विचार-विमर्श और अपने अवलोकन के आधार पर सीखी गई बातों को व्यवस्थित रूप से लिखने के लिए तालिका 2.5 का उपयोग करें। दी गई तालिका आपको उन विभिन्न जीवों की आवश्यकताओं को पहचानने में सहायता करेगी जिन्हें आप अपने पर्यावास उद्यान में आकर्षित करना चाहते हैं। यदि आपके मस्तिष्क में अभी भी कोई प्रश्न हैं तो कृपया विशेषज्ञों से पुनः पूछें।
तालिका 2.5 में आपके मार्गदर्शन के लिए कुछ उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।तालिका 2.5- जीवों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना
| स्थान | भोजन | जल | आश्रय |
|---|---|---|---|
| गौरैया | |||
| पेड़ों, झाड़ियों, भूमि एवं भवनों के समीप पाई जाती हैं और झुंड में घूमती हैं। | कीट, अनाज, बीज, छोटे फलों को भूमि या पेड़ की छाल से चुनकर खाती है। | किसी भी जलस्रोत से जल ग्रहण करती है। | घनी झाड़ियों, बाड़ों या पेड़ों में घोंसला बनाती है। इसके साथ ही घरों की छतों के नीचे या स्ट्रीटलाइट जैसी मानव निर्मित संरचनाओं में भी घोंसला बनाती है। |
| अन्य सूचना - मिट्टी में गड्ढा खोदकर धूल से स्नान करने में इनकी रुचि होती है। ये अपने पंखों से कीचड़ झाड़ती हैं और उथले तालाबों में स्नान करती हैं। ये झुंड में चलती हैं और कभी-कभी झाड़ियों में मिलकर गाती हैं। | |||
| मकड़ियाँ | |||
| ये सूर्य के कम प्रकाश वाले स्थानों में पाई जाती है। ये प्रायः उन स्थानों में प्राप्त होती हैं जहाँ से कीड़े-मकोड़े चलते हैं। | अन्य कीड़े-मकोड़े जैसे चीटियाँ, मधुमक्खियाँ, मक्खियाँ, मच्छर | ओस से सुबह के समय जाले पर ओस की बूंदों से जल लेती है। | रेशम से जाले बनाती है, कभी-कभी पत्तियों और छोटे अपशिष्ट के टुकड़े भी जाले में फँस जाते हैं। |
| अन्य सूचना - यह घनी शाखाओं या झाड़ियों के नीचे जाल बनाती है जिससे पौधों से गिरने वाले कीट भी उसमें फँस जाते हैं। | |||
| तितलियाँ | |||
| ये फूलों वाले पौधों और जल से भरे खुले धूप वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं। ये कोमल होती हैं। इन्हें वायु से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। अतः ये पेड़ों और झाड़ियों में रहती हैं। ये वायुरोधी अवरोध (जैसे- पेड़-पौधे) के माध्यम से वायु से सुरक्षा प्राप्त करती हैं। | फूलों का रस, चीनी, चाशनी, सड़े हुए फल, कुचले हुए फल। | इन्हें बहुत कम जल की आवश्यकता होती है। ये गीली मिट्टी या फलों से नमी लेती हैं। ये तैर नहीं सकती हैं परंतु उथले तालाब के तट पर से जल पीना इन्हें प्रिय लगता है। | तितलियाँ पेड़ों, लंबी घास और चट्टानों में आश्रय लेती हैं। कभी-कभी पेड़ों की छाल के छिद्रों में भी आश्रय लेना इन्हें रुचिकर लगता है। इन्हें वायु से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। |
| अन्य सूचना - कभी-कभी तितलियाँ गीली मिट्टी पर समूह में एकत्रित होती हैं। | |||
| गिलहरियाँ | |||
| ये ऐसे खुले स्थानों में पाई जाती हैं जहाँ बहुत सारे पेड़ होते हैं। | फल, मेवे, बीज, अन्य जीव एवं पौधे । | इन्हें कम मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। | ये पेड़ों पर ऊँचे तने के समीप या शाखाओं के झुरमुट पर घोंसला बनाती हैं। कभी-कभी ये तने के खोखले स्थानों का भी सहारा लेती हैं। |
| अन्य सूचना - गिलहरियों को प्रायः अकेले घूमते हुए देखा जाता है। | |||
क्या आप जानते हैं?
- 1. घरेलू गौरैया जैसे कुछ पक्षी अपने शरीर को जोर-जोर से हिलाते हुए और अपने पंख फड़फड़ाते हुए अपने पंखों को सूखी मिट्टी या रेत से रगड़ते हैं। इससे उनके पंखों पर जमी धूल उड़ कर उनके पंखों से निकलकर नीचे गिरती है। पक्षी अपने पंखों में घुसे किसी भी प्रकार के छोटे कीटों को हटाने के लिए और अपनी त्वचा को स्वच्छ रखने के लिए ऐसा करते हैं। इसे धूल-स्नान (चित्र 2.10 क) के रूप में जाना जाता है।
- 2. पक्षी इसी प्रकार जल-स्नान भी करते हैं। वह अपने शरीर को हिलाते हैं। वे अपने पंख फड़फड़ाते हुए वर्षा के जल में या सतही तालाब में नहाते हैं। ऐसा करने में उन्हें प्रसन्नता भी होती है। वे अपने पंखों को स्वच्छ करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करते हैं कि वे उड़ने के लिए अच्छी प्रकार से तैयार हैं (चित्र 2.10 ख)।
- 3. तितलियाँ पोखरों में, नम मिट्टी के क्षेत्र में पशुओं के मल के परिसर में भी एकत्र होती हैं। इसे कीचड़-भराव (चित्र 2.10 ग) कहा जाता है। वे पोषक तत्वों और जल को अवशोषित करने के लिए ऐसा करती हैं।
गतिविधि 5- पर्यावास उद्यान की रूपरेखा तैयार करना
पर्यावास उद्यान बनाते समय स्पष्ट योजना का होना महत्त्वपूर्ण है। यह योजना उद्यान की रूपरेखा का मार्गदर्शन करती है, जैसे- उद्यान को कहाँ विकसित किया जाना चाहिए? इसमें क्या जोड़ा जाना चाहिए, इसमें कहाँ जोड़ा जाना चाहिए और इसका रख-रखाव कैसे किया जाना चाहिए?
पर्यावास उद्यान की रूपरेखा के लिए कुछ मार्गदर्शक प्रश्न निम्नलिखित हैं। आप अपने उद्यान की रूपरेखा तैयार करते समय तालिका 2.2 में दी गई सूचनाओं को ध्यान में रखें।
- 1. आप पर्यावास उद्यान कहाँ बनाएँगे (जैसे- विद्यालय परिसर के किसी खुले हुए अनुपयोगी स्थान पर अथवा बालकनी या छत पर)?
- .................................
- .................................
- 2. दिन के समय उस स्थान पर कितनी धूप आती है? (उदाहरण के लिए, क्या पूरे क्षेत्र में पूरी धूप आती है या कुछ भाग छायादार है? उस स्थान पर कितने घंटे सीधी धूप आती है?)
- .................................
- .................................
- 3. आपके पर्यावास उद्यान में जीवों को आकर्षित करने के लिए किन विशिष्ट तत्वों की आवश्यकता होती है? जैसे- फूलों वाले पौधे, धूप वाले क्षेत्रों में चट्टानें, तितलियों के लिए वायु को 'रोकने' वाले पौधे, उद्यान के नल के नीचे जल एकत्रीकरण आदि विशेषताओं पर विचार करें।
- .................................
- .................................
परिसर के चारों ओर पेड़ या झाड़ियाँ लगाना अच्छा होता है क्योंकि वे प्राकृतिक वायुरोधक होते हैं (पेड़ों की पंक्ति, बाड़, दीवार या पर्दा जो वायु से आश्रय या सुरक्षा प्रदान करते हैं)। ये जीवों के लिए आश्रय स्थल के रूप में कार्य करते हैं।
उद्यान को छत पर दीवारों के किनारों के समीप गमलों में भी विकसित किया जा सकता है। ये युक्ति भी वायुरोधक के रूप में भी कार्य करेगी।
जीवों के विश्राम करने के लिए उद्यान को एक शांत स्थान पर स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए अर्थात इसे मानवीय गतिविधियों से दूर होना चाहिए।
- 4.क्या उपर्युक्त में से कोई भी सुविधा विद्यालय में पहले से उपलब्ध है? यदि हाँ, तो वे कौन-कौन सी हैं?
- .................................
- .................................
- 5. क्या ऐसे कुछ अन्य पहलू भी हैं जिन पर चर्चा करने की आवश्यकता है?
- .................................
- .................................
- 6. आपके पर्यावास उद्यान में पशुओं, पक्षियों एवं कीड़ों को आकर्षित करने के लिए किस प्रकार के पौधे लगाने की आवश्यकता होगी (जैसे- मौसमी फूलों वाले पौधे)?
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- .................................
- 7. आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि आपके द्वारा अपने उद्यान में सिंचाई करते समय और निराई करते समय जीवों को कष्ट न हो (उदाहरण- उद्यान के किसी कोने पर रेत या ईंटों का मार्ग, कीचड़ भराव आदि)?
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सभी आवश्यक प्रमुख तत्वों को ध्यान में रखते हुए पर्यावास उद्यान की एक रूपरेखा बनाएँ। अपने उद्यान में धूल-स्नान, धूप सेंकने, जल-स्नान, आहार पात्र, सभी पौधों एवं पौधों के अतिरिक्त तत्वों के लिए स्थान दीजिए। यह दृश्य योजना (विजुअल प्लान) आपको पर्यावास उद्यान तैयार करने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में सहायता करेगी (चित्र 2.11)।
गतिविधि 1 का संदर्भ लें जहाँ आपने कुछ ऐसे जीवों की पहचान की थी जिन्हें आप अपने पर्यावास उद्यान में नहीं रखना चाहते। आप यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते हैं कि वे आपके उद्यान की ओर आकर्षित न हों? (उदाहरण के लिए, मच्छरों को उपयुक्त प्रर्यावास बनाने से रोकने के लिए यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी ठहरा हुआ जल न हो, साँपों के छिपने के स्थान बनने से बचने के लिए लकड़ी के ढेर और अप्रयुक्त डिब्बों को हटाकर क्षेत्र को स्वच्छ रख सकेंगे। इसके साथ ही प्राकृतिक निवारकों का उपयोग करें।)
1. पक्षियों के लिए घोंसले के डिब्बे- आपने 'घोंसले के डिब्बे' देखे होंगे। ये डिब्बे भिन्न- भिन्न आकार के होते हैं जिनमें पक्षी घोंसले बना सकते हैं। आप अपने शिक्षक की सहायता से अनुपयोगी परतदार लकड़ी (प्लाई) या बाँस का उपयोग करते हुए इन्हें बना सकते हैं। प्रवेश द्वार का आकार उन पक्षियों के आकार के अनुसार होना चाहिए जिन्हें आप आकर्षित करना चाहते हैं। (उदाहरण के लिए, गौरैया के लिए छोटा, उल्लू के लिए बड़ा)।
इसी प्रकार आपने पक्षियों को लोगों द्वारा रखे गए जल से भरे सतही पात्रों में जल पीते और नहाते देखा होगा। आप पक्षियों हेतु जल की व्यवस्था करने के लिए किसी भी अनुपयोगी पात्र का उपयोग कर सकते हैं। आप केवल यह ध्यान रखें कि ये पात्र ऊँचाई पर रखे हों ताकि पक्षी बिल्लियों या कुत्तों से सुरक्षित रहें।2. तितलियों के लिए अपशिष्ट पोखर और आहार-पात्र - तितलियों के लिए बहुत गहरा जल सुविधाजनक नहीं होता है। इनके लिए आप जल के पात्रों को पत्थरों अथवा कंकड़ों और रेत से भर सकते हैं। पोषक तत्व प्रदान करने के लिए जल के पात्र में एक चुटकी नमक और थोड़ी खाद भी मिलाएँ। सुनिश्चित करें कि पोखर वाले क्षेत्र में सदैव नमी बनी रहे।
पक्षियों के आहार-पात्र के समान ही तितली के लिए भी आहार पात्र बनाया जा सकता है। दोनों को ऊँचाई पर होना चाहिए परंतु तितलियों के लिए छोटा होना चाहिए। पक्षियों के लिए आप अनाज और बीज रख सकते हैं जबकि तितलियों के लिए आप सड़े हुए फल अथवा चाशनी में भिगोया हुआ स्पंज रख सकते हैं।
तितलियों के आश्रय के लिए आप छिद्रों के अतिरिक्त संकरे कटाव वाले संकीर्ण और लंबे लकड़ी के डिब्बे बना सकते हैं जिससे तितलियों को प्रवेश करने में सरलता हो परंतु अन्य पक्षी प्रवेश ना कर सकें। इन डिब्बों को तीव्र हवा से बचाते हुए सुरक्षित स्थान पर भूमि से ऊपर रखना चाहिए।
3. लाभकारी कीटों के लिए आश्रय- गुबरैला (लेडीबग) और भृंग जैसे कीटों के लिए आप लकड़ी के लडे, पुआल, चीड़ शंकु और ईंटों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से आश्रय बना सकते हैं। केवल इन सामग्रियों को लकड़ी की संरचना या टोकरे के भीतर परतों में रखें। सुनिश्चित करें कि कीटों के घोंसले के लिए कम दूरी पर छोटे-छोटे छिद्र बने हुए हों। यदि यह आश्रय आपके विद्यालय में हो तो आप इन्हें फूल वाले पौधों या खाद के गड्ढे के समीप भी रख सकते हैं। ध्यान रहे कि यह आश्रय भूमि से 1-3 फीट ऊपर रखे जाने चाहिए।
लकड़ी के लड्डे, पेड़ की सूखी शाखाएँ और सूखे पत्तों वाले खाद का ढेर भृंग, चींटियाँ और इसी प्रकार के कीटों को आकर्षित करते हैं। अतः इन्हें पर्यावास उद्यान के कोने में रखा जा सकता है।
गतिविधि 6- पर्यावास उद्यान का निर्माण
अब जब रूपरेखा तैयार हो गई है तो पर्यावास उद्यान का निर्माण करना प्रारंभ करें। पर्यावास उद्यान बनाने हेतु निम्नलिखित चरणों का अनुसरण करें-
- 1. आपके द्वारा चयनित क्षेत्र को चिह्नित करें। यदि भूमि उपलब्ध नहीं है तो गमले लगाने के लिए रोपण डिब्बे का उपयोग भी किया जा सकता है।
- 2. सर्वप्रथम चयनित क्षेत्र को स्वच्छ रखने के लिए अवांछित पौधों, मलबे, पत्थरों आदि को हटा दें।
- 3. उद्यान की सीमा को चूना पाउडर से चिह्नित करें। उद्यान में जितने संभव हो सके उतने उपलब्ध पेड़ या झाड़ियाँ सम्मिलित करें।
- 4. संरचना के अनुसार क्षेत्रों को चिह्नित करें।
- चित्र 2.12- धूप वाले क्षेत्र में समतल चट्टान पर धूप सेंकती हुई तितली
- 5. भूमि को खोदकर और मिट्टी को मुलायम कर रोपण खाँचे बनाकर और खाद डालकर मिट्टी तैयार करें (प्रत्येक 100 वर्ग मीटर रोपण क्षेत्र के लिए लगभग 20 से 30 किलोग्राम खाद डालें)। यदि आप गमलों का उपयोग कर रहे हैं तो 2 भाग मिट्टी, 1 भाग खाद एवं 1 भाग सूखी पत्तियों या नारियल भूसी के साथ पौधारोपण मिश्रण तैयार करें।
- 6. पर्यावास उद्यान के चारों ओर एक बाड़ बनाएँ।
- जैसे-जैसे आपके उद्यान में वृद्धि होती जाए वैसे-वैसे आप पौधे से संबंधित अन्य तत्वों का भी संयोजन कर सकते हैं। इनके कुछ उदाहरण चित्र 2.13 से 2.16 में दर्शाए गए हैं।
अब आपका पर्यावास उद्यान जीवंत एवं समृद्ध है। इसे सावधानीपूर्वक तैयार और पोषित करके आपने एक 'आत्मनिर्भर वातावरण' बनाया है जो एक प्राकृतिक आवास के समान प्रतीत होता है। जैसे-जैसे पौधों की वृद्धि होती है वैसे-वैसे स्वाभाविक रूप से विभिन्न कीटों और जीवों को आकर्षित करते हैं जिससे एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनता है।
एक ओर जहाँ फूलदार पौधे, तितलियाँ और छोटे पक्षियों को आकर्षित करते हैं वहीं पक्षी कीटों को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। कीटों की उपस्थिति मकड़ियों, चमगादड़ों, छिपकलियों एवं अन्य कीटों को भी आमंत्रित करती है जो 'खाद्य श्रृंखला' में अपनी भूमिका निभाते हैं। समय के साथ ये छोटे जीव बड़े पक्षियों को आकर्षित करते हैं जो आपके उद्यान की 'जैव विविधता' में वृद्धि करेंगे।
आपका पर्यावास उद्यान अब जीवों के लिए आश्रय, सुंदर हरा-भरा स्थान एवं पारिस्थितिकी संरक्षण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण चरण है।
गतिविधि 7- पर्यावास उद्यान के निवासियों का अवलोकन
अपने पर्यावास उद्यान को बढ़ने, फैलने और पनपने के लिए समय दें। एक बार जब यह विकसित हो जाए तो विद्यालय पर्यावास उद्यान में रहने वाले विभिन्न जीव-जंतुओं, जैसे- तितलियाँ, चींटियाँ, छोटे पक्षी, छिपकलियाँ एवं गिलहरियों का अवलोकन करें। आप समूहों में कार्य करें एवं अपने अवलोकनों की व्यवस्थित सूचनाएँ लिखित रूप में संकलित करें।- 1. जल-स्रोतों और आहार-क्षेत्रों के आस-पास जीवों के व्यवहार का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करें और अभिलेख (रिकॉर्ड) तैयार करें।
- 2. याद रखें कि तितलियाँ और पक्षी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सबसे अधिक सक्रिय होते हैं। अतः गुणवत्तापूर्ण अवलोकन के लिए विद्यालय समय से पूर्व पहुँचने का प्रयास करें।
- 3. यदि संभव हो तो फोटोग्राफ लें या ध्वनि (साउंड) रिकॉर्डिंग बनाएँ। आप जीवों के चित्र भी बना सकते हैं या अपने अवलोकन अभिलेख (रिकॉर्ड) में छायाचित्र (फोटो) सम्मिलित कर सकते हैं।
आप अपने अवलोकन का विवरण नीचे दी गई तालिका 2.6 में अंकित कर सकते हैं।
तालिका 2.6- पर्यावास उद्यान में आगंतुको के अवलोकन अभिलेख
............
| अवलोकन | दिनाँक | टिप्पणियाँ |
| कीट 1............ 2.............. 3.............. 4.............. 5.............. 6.............. |
1............ 2.............. 3.............. 4.............. 5.............. 6.............. |
अवलोकित संख्या............. कीट की अवस्था (जैसे- अंडा, लार्वा, वयस्क आदि)........... आपने इसका अवलोकन कहाँ किया?. .............. कीट की गतिविधि (जैसे- भोजन करना, आश्रय ढूँढ़ना, स्नान करना, कीचड़ में बैठना) ................... |
| पक्षी 1............... 2.............. 3............... |
1............... 2.............. 3............... | अवलोकित संख्या ............ आपने अवलोकन कहाँ किया? ............ पक्षी की गतिविधि (जैसे- भोजन करना, शिकार करना, आश्रय ढूँढ़ना, स्नान करना, जल में बैठना) |
| छोटे स्तनधारी 1............... 2.............. 3............... |
1............... 2.............. 3............... | अवलोकित संख्या आपने इसका अवलोकन कहाँ किया? ................. जीवों की गतिविधि (जैसे- भोजन करना, शिकार करना, आश्रय ढूँढ़ना, स्नान करना, जल में बैठना) ................. ................. । |
यदि आपके पर्यावास उद्यान को देखने के लिए बहुत से आगंतुक आ रहे हैं तो यह प्रेरणादायक होता है। यदि आगंतुक नहीं आ रहे हैं, तो निराश न हों। आपको धैर्य रखने की आवश्यकता है। जीवों को इस बात का विश्वास होना चाहिए कि उनकी आवश्यकताएँ पूरी होंगी। पहले से ही कुछ जीव विद्यालय-परिसर में रह रहे होंगे और वे पर्यावास उद्यान का उपयोग करने का निर्णय ले सकते हैं। कुछ समय तक प्रतीक्षा करें, विशेषज्ञों से चर्चा करें और आवश्यकतानुसार उपयुक्त परिवर्तन करें|
गतिविधि 8- पर्यावास उद्यान का रख-रखाव
पर्यावास उद्यान विभिन्न जीवों का आश्रय स्थल बन सकता है। इसमें पौधे, चींटियाँ, कीड़े-मकोड़े, पक्षी, छिपकलियाँ एवं अनेक अन्य जीव सम्मिलित होते हैं। अपने पर्यावास उद्यान को जीवंत रखने के लिए आपको इसका नियमित रूप से रख-रखाव करने की आवश्यकता है।
पर्यावास उद्यान का रख-रखाव यह सुनिश्चित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है कि यह आपके इच्छित जीवों को आकर्षित करता रहे। आपको पौधों की देखभाल करने की भी आवश्यकता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि कोई अवांछित जीव वहाँ न आए। उदाहरण के लिए, आपको पौधों को आवश्यकतानुसार जल देना होगा। ध्यान रखें कि मच्छरों को रोकने के लिए पौधों में ठहरा हुआ जल न हो, गिरे हुए पत्तों और तनों से पगडंडियों को स्वच्छ करें (आप उन्हें एकत्र कर सकते हैं और उन्हें खाद के गड्ढे में डाल सकते हैं)। अतः आपको पर्यावास उद्यान के लिए रख-रखाव कार्यक्रम तैयार करना चाहिए। आप स्वयं को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर सकते हैं और कार्यों को परस्पर विभाजित कर सकते हैं। इसके साथ ही कार्यों को परिवर्तित करते रहें जिससे प्रत्येक को कार्यों में योगदान देने का अवसर प्राप्त हो सके। आप यह सुनिश्चित करने के लिए एक रख-रखाव सूचनापट्ट (चार्ट) और एक जाँच सूची तैयार कर सकते हैं कि सभी कार्य समय पर पूर्ण हो रहे हैं। कुछ उदाहरण तालिका 2.7 में दिए गए हैं जिन्हें आप अपने पर्यावास उद्यान के अनुसार बढ़ा सकते हैं।
तालिका 2.7- पर्यावास उद्यान के लिए रख-रखाव कार्यक्रम
| माह.......... के.......... सप्ताह के लिए समय सारिणी | ||||
|---|---|---|---|---|
| कार्य | उत्तरदायित्व | गतिविधि के लिए नियोजित तिथि | टिप्पणियाँ | |
| पौधों को जल देना | प्रतिदिन | |||
| जल और स्नान के पात्र भरना | प्रतिदिन | |||
| पक्षी आहार-पात्र में भोजन रखना | सप्ताह में एक बार | |||
| निराई करना | महीने में एक बार | |||
| उद्यान की सफाई | प्रतिदिन | |||
| कृषि अपशिष्ट की खाद बनाना | प्रतिदिन | |||
प्रत्येक जीव एक विश्रामदायक और सुरक्षित आवास स्थान की खोज में रहता है। अतः आपके द्वारा उद्यान के निरंतर रख-रखाव से वहाँ अधिक से अधिक जीव आकर्षित हो सकेंगे।
गतिविधि 9- अपना कार्य प्रदर्शित करना
योजना बनाएँ कि आप अपने पर्यावास उद्यान को दूसरों के साथ कैसे साझा करेंगे। इसे आगंतुकों के लिए जानकारी पूर्ण बनाने के लिए निम्नलिखित मुख्य विशेषताओं को चिह्नित करने पर विचार करें, जैसे-
- 1. फूलों वाले पौधों के नाम।
- 2. वे पशु जो आश्रयों, जल के पात्रों एवं आहार पात्र से लाभान्वित हो रहे हैं।
- 3. कीचड़-भराव एवं धूल-स्नान के लिए चिह्नित क्षेत्र।
आप इस प्रक्रिया को समझाने के लिए एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) भी बना सकते हैं। यह सूचनापट्ट या डिजिटल स्लाइड प्रस्तुति के रूप में हो सकती है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदु सम्मिलित करें -
1. उद्देश्य- आपने पर्यावास उद्यान क्यों बनाया?2. रूपरेखा और प्रतिरूप- आपने जीवों की आवश्यकताओं के आधार पर प्रतिरूप की योजना कैसे बनाई?
3. लक्षित प्रजातियाँ- आपने किन जीवों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा था और उनकी विशिष्ट आवश्यकताएँ क्या हैं?
4. अवलोकन - उद्यान स्थापित करने के पश्चात आपने क्या देखा या क्या अनुभव किया? यह प्रस्तुति कौशल मेले के समय उपयोगी सिद्ध होगी जहाँ आप इसका उपयोग आगंतुकों को अपनी परियोजना समझाने के लिए कर सकते हैं।
मैंने दूसरों से क्या सीखा?
1. आपने कौन-सी तीन सबसे आकर्षक वस्तुएँ खोजीं?
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2. जीवों और उनके पर्यावास के संबंध में अवलोकन और चर्चा से आपको क्या महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली?.....................
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मैंने क्या कार्य किया और इसमें कितना समय लगा?
यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि किसी गतिविधि को पूर्ण करने में कितना समय लगता है।
प्रत्येक गतिविधि को क्रियान्वित करने में आपने कितना समय व्यतीत किया, इसका आकलन अवश्य कीजिए। इसे नीचे दी गई समयरेखा (टाइमलाइन) पर चिह्नित कीजिए। यदि आपने पुस्तिका में सुझाई गई गतिविधियों से अधिक गतिविधियाँ की हैं तो कृपया उनकी संख्या और उनमें लगा समय जोड़िए।
मैं और क्या कर सकता/सकती हूँ?
- 1. घर पर एक छोटा तितली उद्यान बनाने का प्रयास करें। इसके लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि किस प्रकार के पौधे और पौधे के अतिरिक्त तत्व इन कीटों को आकर्षित करेंगे। स्थानीय तितलियों, पक्षियों और उनके आवासों के संबंध में विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करें। आप आवास संरक्षण की विधियों के संबंध में स्थानीय समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल आदि से जानकारी एकत्र कर सकते हैं।
- 2. अपने पर्यावास उद्यान के निर्माण के संबंध में एक निबंध या कहानी लिखें और इसे स्थानीय समाचार-पत्र में प्रकाशन के लिए भेजें।
- 3. अपने पर्यावास उद्यान का एक वीडियो बनाएँ।
टाइम-लैप्स वीडियो
आप एक टाइम-लैप्स वीडियो बना सकते हैं जो यह दर्शाए कि कोई वस्तु किस प्रकार परिवर्तित हो रही है। जब भी आप अपने उद्यान में कुछ नए तत्व जोड़ते हैं या आपको ज्ञात होता है कि पौधे अपने विकास के कुछ निश्चित बिंदुओं पर पहुँच गए हैं (जैसे- अंकुरण, तने और पत्तियों का दिखना एवं बाद में फूलों का आना) तो आप उनके छायाचित्र (फोटो) ले सकते हैं।
अंतरजाल पर कीवर्ड - App+Time+Lapse+Video का उपयोग कर इनके विषय में खोजे। ऐसे ऐप का चयन करें जो आपको स्थिर छायाचित्र (स्टिल फोटोग्राफ) अपलोड करने और वीडियो बनाने की सुविधा दें।
सोचिए और उत्तर दीजिए
- 1. दी गई गतिविधियों को करने में आपको क्या आनंद आया?
- 2. आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
- 3. अगली बार आप क्या भिन्न करेंगे?
- 4. आपके अनुसार पर्यावास उद्यान का क्या महत्त्व है?
- 5. परियोजना गतिविधियों के पूर्ण होने के पश्चात आप पर्यावास उद्यान को किस प्रकार बनाए रखने की योजना बना रहे हैं?
- 6. आपने अभी जो कार्य किया है, उससे संबंधित रोजगार के कुछ उदाहरण पहचानें। यथा- प्रकृतिवादी, संरक्षणवादी, कीटविज्ञानी, प्राणीविज्ञानी, वनस्पतिशास्त्री, वन-अधिकारी, पर्यावरणविद् अपने आस-पास देखें, लोगों से बात करें और अपना उत्तर लिखें।
