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भाग 2



मशीनों और उपकरणों के साथ कार्य करना



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मशीन हमारे जीवन को आसान बनाती हैं। हमारे चारों ओर विभिन्न प्रकार की मशीन और सामग्रियाँ उपलब्ध हैं। मशीनों और उपकरणों के साथ कार्य करने वाली परियोजनाएँ आपको नई-नई मशीनों और उपकरणों से कार्य करना, विभिन्न औजारों का उपयोग कर नवीन वस्तुएँ बनाना, उन्हें सुधारना एवं उनका रखरखाव करना सिखाएँगी।

आप विद्युतचालित खिलौने बना सकते हैं, लकड़ी और बाँस को आकार दे सकते हैं तथा मिट्टी के बर्तन (चाक पर या बिना चाक के) भी बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप वस्त्रों की सिलाई और उनका अलंकरण कर सकते हैं। आप संगणक (कम्प्यूटर) और दूरभाष का उपयोग करते हुए खेल और एनिमेशन बना सकते हैं तथा अनुपयोगी वस्तुओं का उपयोग कर खिलौने भी बना सकते हैं। साथ ही आप अपने विद्यालय के वाद्य समूह के लिए वाद्ययंत्र भी बना सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने सहपाठियों के सहयोग से कौन-से नवीन और रोचक कार्य कर सकते हैं?

इस भाग में दो परियोजनाओं के उदाहरण दिए गए हैं- बँधाई एवं रंगाई (टाई एंड डाई) तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) सहायक। आप इनमें से किसी एक का चयन कर सकते हैं या अपने शिक्षक की सहायता से अपनी रुचि की कोई अन्य परियोजना तैयार कर सकते हैं।

परियोजना 3
बँधाई एवं रंगाई

इस परियोजना के माध्यम से आप सीखेंगे कि किस प्रकार रंगाई का उपयोग करते हुए वस्त्रों पर अनेक आकर्षक आकृतियाँ बनाई जाती हैं। इसके लिए आप बँधाई एवं रंगाई की विभिन्न विधियों का उपयोग करेंगे।

परियोजना के अंतर्गत आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम हो सकेंगे -

बँधाई एवं रंगाई की विभिन्न विधियों को जानने में
प्राकृतिक रंगों को तैयार करने में
वस्त्रों की बँधाई एवं रंगाई कर आकृतियाँ बनाने में
बँधाई एवं रंगाई विधि का उपयोग करके विभिन्न उत्पाद तैयार करने में

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भारत में वस्त्रों का इतिहास समृद्ध रहा है। प्रत्येक राज्य में वस्त्र बुनने तथा रंगाई, कढ़ाई और छपाई की विशिष्ट विधियों का उपयोग कर सुंदर आकृतियाँ बनाने की अपनी पारंपरिक विधियाँ हैं। इनमें से बुनाई की कुछ विधियाँ शताब्दियों से प्रचलन में हैं।

बँधाई एवं रंगाई की एक पारंपरिक विधि बाँधनी है (चित्र 3.1 और 3.2)। बाँधनी का शाब्दिक अर्थ है 'बाँधना'। यह एक विशिष्ट विधि है जिसमें वस्त्रों के कुछ भागों को इस प्रकार से बाँधा जाता है कि वे रंगाई से बच जाते हैं और अपनी मूल रंगत बनाए रखते हैं। इससे वस्त्रों पर सुंदर प्रतिरूप तैयार होते हैं।

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बाँधनी विधि में वस्त्रों को मोड़कर, बाँधकर एवं लपेटकर रंगा जाता है जिससे वस्त्रों के कुछ भागों को रंगने से रोका जा सके। इस विधि को अपनाने वाले शिल्पी वस्त्रों को इस प्रकार से बाँधते हैं कि उस पर वृत्त, सर्पिल, धारियाँ, पेड़-पौधे, जीव-जंतुओं आदि जैसी आकृतियाँ उभरती हैं। साधारणतः बाँधनी विधि राजस्थान और गुजरात में अत्यंत प्रचलित है। पारंपरिक रूप से यह कला कपास, रेशम एवं ऊनी वस्त्रों पर प्राकृतिक रंगों से की जाती है। ये रंग पौधों से और मसालों से तैयार किए जाते हैं।

Screenshot 2025-11-21 104543 क्या आप जानते हैं?


समय के साथ जब व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो वे अपनी पारंपरिक कलाओं और व्यवसायों को भी नए स्थान पर ले जाते हैं। उदाहरण के लिए, अनेक शताब्दियों पूर्व गुजरात से प्रवासियों का एक समुदाय तमिलनाडु चला गया था। इनमें से अधिकांश प्रवासी रेशम की बुनाई में लग गए। वहीं मदुरै में रहने वाले कुछ व्यक्तियों ने कपास पर की जाने वाली 'मदुरै सुंगुडी' नामक बँधाई एवं रंगाई विधि विकसित की। इसका उपयोग मुख्य रूप से साड़ियाँ बनाने में किया जाता है।

इस प्रकार बँधाई एवं रंगाई गुजरात, राजस्थान एवं तमिलनाडु जैसे विभिन्न राज्यों में प्रसिद्ध हो गई।



मोम प्रतिरोध विधि रंग चढ़ाने की एक प्रसिद्ध विधि है। इसमें मोम या आटे के लेप का उपयोग किया जाता है। यह लेप हाथ से मुद्रित-चित्रों पर लगाया जाता है। ये चित्र ज्यामितिक हो सकते हैं। ये चित्र जीवों, पक्षियों और पौधों के आकार के भी हो सकते हैं। इस विधि को 'बाटिक' कहा जाता है और यह विधि परंपरागत रूप से मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में प्रचलित है।

बाँधनी सबसे पुरानी बँधाई एवं रंगाई विधियों में से एक है। इसका सबसे प्राचीन प्रमाण महाराष्ट्र की अजंता गुफाओं की चित्रकलाओं में प्रदर्शित होता है। यहाँ चित्रों में एक महिला को बिंदुयुक्त वस्त्रों में दर्शाया गया है जिसे बाँधनी माना गया है (चित्र 3.3)।

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बाँधनी भारतीय कला का एक रूप ही नहीं अपितु हमारे देश की समृद्ध संस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। बाँधनी की विभिन्न रंग-शैलियाँ भिन्न-भिन्न समुदायों से संबंधित हैं। राजस्थान और गुजरात के पुरुष इसे गर्व के साथ पहनते हैं (चित्र 3.4)। कुछ समुदायों में बाँधनी की विभिन्न अभिकल्पनाओं और रंगों को विशेष अनुष्ठानों से जोड़ा जाता है।

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यद्यपि बँधाई एवं रंगाई के उत्पाद हाथों से बनाए जाते हैं और कोई भी शिल्पी इन्हें निश्चित रूप से एक जैसी विधि से नहीं बनाते हैं। अतः इन उत्पादों की विशेषताएँ अद्वितीय होती हैं।

यह परियोजना आपको बँधाई एवं रंगाई के अपने अद्वितीय उत्पाद बनाने में सहायता करेगी।



Screenshot 2025-11-21 105315 मैं क्या कर पाऊँगा/पाऊँगी?

इस परियोजना कार्य के पश्चात आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम हो सकेंगे-

  1. 1. सब्जियों, फलों, मसालों एवं पौधों का उपयोग करते हुए प्राकृतिक रंगों को तैयार करने में।

  2. 2. बँधाई एवं रंगाई के लिए अभिकल्पना प्रारूप तैयार करने में।

  3. 3. बँधाई एवं रंगाई का उपयोग करते हुए पुनर्चक्रित वस्त्रों पर रंग-बिरंगी आकृतियाँ तैयार करने में।

  4. 4. बँधाई एवं रंगाई के माध्यम से उपयोगी उत्पाद तैयार करने में।

Screenshot 2025-11-21 105624 मुझे किन वस्तुओं की आवश्यकता होगी?

कार्य प्रारंभ करने से पूर्व आपको विभिन्न प्रकार के उपकरणों और सामग्रियों की आवश्यकता होगी।

आवश्यक उपकरण एवं सामग्रियाँ

1. वस्त्र - बाँधनी के लिए उपयोग किया जाने वाला वस्त्र मजबूत होना चाहिए क्योंकि इसे बार-बार मोड़ना और रंगना पड़ता है। अतः इसमें प्राकृतिक रेशों से निर्मित वस्त्र का उपयोग किया जाता है, जैसे- सूती, रेशम और ऊनी वस्त्र। आप पुराने हल्के रंग के सूती, लिनन अथवा रेशम के वस्त्रों का भी उपयोग कर सकते हैं। रंगने से पूर्व वस्त्र को भली-भाँति धोकर यह सुनिश्चित कीजिए कि उसमें धूल या गंदगी न हो।

2. बाँधने के लिए सामग्रियाँ - बाँधने के लिए श्वेत या बहुत हल्के रंग के धागे का उपयोग किया जाना चाहिए जिससे वह रंगने की प्रक्रिया में वस्त्र के रंग को प्रभावित न करें। यदि बड़े भाग को रंगने से बचाना है तो रबर और चिमटे का भी उपयोग किया जा सकता है। अनाज, दाल, बीज, छोटे पत्थर, काली मिर्च आदि का भी उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है कि बिना रंग वाला भाग वांछित आकार में ही बनें।

3. रंगाई और रंग लगाने के लिए सामग्रियाँ - प्राकृतिक रंग विभिन्न स्रोतों से तैयार किए जा सकते हैं, जैसे- चुकंदर, कॉफी, हल्दी, लाल गोभी, अनार, मेंहदी, पालक, संतरे के छिलके, प्याज के छिलके एवं नील आदि। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि रंगाई का रंग धुलाई के बाद न तो सरलता से निकले, न हल्का पड़े और न ही अन्य वस्त्रों पर लगे (जैसे - आप जो कुर्ता पहन रहे हैं उस पर)। रंग को पक्का करने के लिए आपको फिक्सर जैसे स्थायीकरण पदार्थ की आवश्यकता होगी। उदाहरण के लिए, यदि रंगाई का रंग फूलों या पत्तियों से बनाया गया हो तो उसे स्थाई बनाए रखने के लिए सिरका (वेनेगर) या नमक का उपयोग किया जाना चाहिए।

4. उपकरण- मापक पात्र या चम्मच, पात्र (कंटेनर्स), चूल्हा या स्टोव, मिश्रण को हिलाने की छड़ी, इस्त्री, मग, कतरनी (कैंची), चिमटा, प्याला एवं कटोरा।

Screenshot 2025-11-21 110528 चित्र 3.5 में दर्शाई गई 'नखली' या 'नखलो' धातु से बनी एक 'अँगूठी' जैसी होती है जिसमें आगे का भाग पैना होता है। इसका उपयोग शिल्पी वस्त्र का चयन करने के लिए करते हैं।


Screenshot 2025-11-21 110638 मैं स्वयं और दूसरों को कैसे सुरक्षित रखूँ?

बँधाई एवं रंगाई विधि से संबंधित विभिन्न कार्यों को करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए-

  1. 1. अपने हाथों को गर्म रंगों से बचाने के लिए दस्ताने पहनें और वस्त्रों की सुरक्षा के लिए ऊपर से कोई कपड़ा बाँधे (ऐप्रन) या पहनें। अपने मुँह को गरम छींटे पड़ने से बचाने के लिए मुखावरण (मास्क) का उपयोग करें और गर्म रंगों से निकलने वाली भाप को श्वास के साथ अंदर न लें। आँखों को सुरक्षित रखने के लिए चश्मा पहनें।


  2. 2. हवादार क्षेत्र में कार्य करें जिससे आपको गंध और वाष्प से कोई कष्ट न हो।

  3. 3. वस्त्र काटते समय कतरनी का उपयोग सावधानी से करें। इसे कभी भी अपनी ओर या किसी अन्य व्यक्ति की ओर न घुमाएँ।

  4. 4. बचे हुए रंग के घोल को सावधानीपूर्वक धुलाई पात्र (सिंक) मे बहा दें। रंग का उपयोग करते समय छींटे पड़ने से बचाने तथा कार्यस्थल को सुरक्षित और स्वच्छ रखने के लिए सतह पर प्लास्टिक की शीट बिछाएँ।

Screenshot 2025-11-21 111006 अंतर्जाल सुरक्षा - अंतर्जाल का उपयोग करते समय अपने शिक्षक से सहायता लें। बिना जाँच किए कुछ भी अपलोड या डाउनलोड न करें। अपनी या अन्य व्यक्तियों की व्यक्तिगत मत्चना को कहीं भी साझा न करें।



Screenshot 2025-11-21 111435 आरंभ करने से पहले मुझे क्या जानने की आवश्यकता है?



चित्र 3.6 में बाँधनी के प्रतिदर्शों (सैंपल्स) को देखिए। प्रत्येक प्रतिदर्श में प्रतिरूप (पैटर्न) दोहराए गए हैं। आप इनमें कौन-कौन सी संरचनाएँ पहचान सकते हैं? चित्रों को नीचे दिए गए बॉक्सों में बनाएँ।

चित्र 3.6- बाँधनी के विभिन्न प्रतिरूप
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अब अपने बनाए गए प्रतिरूपों की तुलना अपने सहपाठी द्वारा बनाए गए प्रतिरूपों से करें और उनके विषय में चर्चा करें।

कुछ अन्य बँधाई एवं रंगाई विधियाँ बँधाई एवं रंगाई की लोकप्रिय तकनीकों में बाँधनी के अतिरिक्त दो उदाहरणों का वर्णन निम्नलिखित है-

1. लहरिया - यह आकृति बनाने के लिए रंगने से पूर्व वस्त्र को मोड़कर और बाँधकर रखा जाता है। इससे लहरदार आकृतियाँ बनती है। 'लहरिया' शब्द 'लहर' से बना है। यह जल के प्रवाह और हरियाली को दर्शाता है जिसका राजस्थान व गुजरात जैसे राज्यों में विशेष महत्त्व है।

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2. शिबोरी - शिबोरी एक प्राचीन जापानी बंधाई एवं रंगाई विधि है। शिबोरी शब्द का अर्थ होता है- निचोड़ना, मरोड़ना या दबाना। इस विधि में पारंपरिक रूप से प्राकृतिक नील का उपयोग किया जाता है। यह नील वस्त्र के सूखने के समय वायु के साथ प्रतिक्रिया करने पर हरे से नीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।

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बँधाई एवं रंगाई की प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व आपको यह समझना आवश्यक है कि किस प्रकार के वस्त्र का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही आपके लिए यह जानना भी उपयोगी होगा कि कौन-से वस्त्र और प्रतिरूप प्रसिद्ध हैं जिनका विक्रय अधिक होने की संभावना हो। आप बँधाई एवं रंगाई उत्पादों हेतु लगने वाले मूल्य की तुलना अन्य उत्पादों से भी कर सकते हैं।

यह ज्ञात करने के लिए आप वस्त्र विक्रय करने वाले किसी विक्रय केंद्र (बाजार) पर जाएँ और वहाँ आप विभिन्न प्रकार के बँधाई एवं रंगाई उत्पादों की तुलना कर सकते हैं। आप किसी स्थानीय वस्त्रालय के स्वामी (बुटिक ऑनर) या वेशभूषा अभिकल्पक (फैशन डिजाइनर) से भी वार्तालाप कर उनके विचार समझ सकते हैं।

आप किसी बँधाई एवं रंगाई कार्यशाला में भाग लें। इससे आपको इस प्रक्रिया के विषय में प्रत्यक्ष रूप से समझने में सहायता मिलेगी। आप अपने विद्यालय में प्रदर्शन के लिए किसी शिल्पी को भी आमंत्रित कर सकते हैं। यदि शिल्पी को आमंत्रित करना संभव नहीं है तो रुचि के आधार पर बँधाई एवं रंगाई करने वाले किसी व्यक्ति को भी आमंत्रित किया जा सकता है।

यदि आपके समीपवर्ती कोई बंधाई एवं रंगाई कार्यशाला उपलब्ध नहीं हो तो आप रंगने की प्रक्रिया को किसी अन्य कार्यशाला में इसे कर सकते हैं।

गतिविधि 1- विक्रय-केंद्र का भ्रमण

जब आप किसी विक्रय केंद्र में जाएँगे तो आपको विभिन्न प्रकार के वस्त्र और उनसे बने उत्पाद दिखाई देंगे। ये वस्त्र बुनाई, कढ़ाई, रंगाई आदि विधियों का उपयोग करते हुए तैयार किए जाते हैं (चित्र 3.7)। विक्रय-केंद्र में भिन्न-भिन्न प्रकार के वस्त्रों को छूकर उनकी बनावट और गुणवत्ता अनुभव करने का प्रयास करें। यह जानने की जिज्ञासा रखें कि क्या वहाँ बाँधनी, बाटिक, शिबोरी या अन्य प्रकार के बंधाई एवं रंगाई बनावट के वस्त्र उपलब्ध हैं।

विक्रेता से मिलने से पूर्व उन प्रश्नों के विषय में भी विचार करें जो आप उनसे पूछना चाहेंगे। कुछ प्रमुख बिंदु तालिका 3.1 में दर्शाए गए हैं परंतु आप इसमें और प्रश्न जोड़ कर सकते हैं। आप विक्रेता से कम-से-कम पाँच प्रकार के वस्त्रों के लिए उत्तर अवश्य प्राप्त करें।

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तालिका 3.1 - विक्रय-केंद्र में वस्त्रों को ढूँढ़ना
क्र. सं. वस्त्र का प्रकार (जैसे - सूती, रेशम, लिनन, सिंथेटिक, जूट) प्रतिरूप बनाने की विधि (जैसे - बँधाई एवं रंगाई, ब्लॉक मुद्रण, डिजिटल मुद्रण, कढ़ाई) दर (रुपये प्रति मीटर या परिधान साड़ी की दर)
1.
2.
3.
4.
5.
  1. 1. क्या बँधाई एवं रंगाई उपलब्ध है?

  2. .....................................
  3. 2. यदि हाँ, तो किस प्रकार में उपलब्ध है (जैसे- शिबोरी, लहरिया, बाँधनी आदि)?

  4. .....................................
  5. 3. सबसे अधिक प्रसिद्ध परिधान कौन-से हैं (जैसे- साड़ी, दुपट्टा, कुर्ता आदि)?

  6. .....................................
  7. 4. विक्रेताओं के मध्य कौन-से वस्त्र और रंग सबसे प्रसिद्ध हैं?

  8. .....................................
Screenshot 2025-11-21 122648 यदि आप अधिक प्रकार की अभिकल्पनाओं और प्रतिरूपों को वीडियो में देखना चाहते हैं तो ऑनलाइन भारत में बाँधनी साड़ी की दुकानें (Bandhani Saree Shops in India), बाँधनी वस्त्रालय और डिजाइन के प्रकार (Bandhani Cloth Shop or Types of Design), (अपनी रुचि के अनुसार) + सूचना अथवा प्रश्न (Information) आदि की-वर्ड्स का उपयोग करें।

अन्य की-वर्ड का पता लगाएँ जो आपको तालिका पूरा करने में सहायता करेंगे। ध्यान रखिए कि स्थान परिवर्तन के साथ-साथ भिन्नताएँ भी होंगी। अतः आप अपने शहर या गाँव या आस-पास के स्थानों से जानकारी एकत्रित करने का प्रयास करें।



आपको क्या लगता है कि बँधाई एवं रंगाई अभिकल्पना का उपयोग केवल वस्त्रों पर ही नहीं अपितु अन्य वस्तुओं पर भी किया जाता है, जैसे - कुर्ता, पगड़ी, शर्ट, साड़ी, दुपट्टा। सोचिए और अपने विचार लिखिए।

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गतिविधि 2- बँधाई एवं रंगाई कार्यशाला का भ्रमण

कार्यशाला का भ्रमण करते समय वहाँ की प्रत्येक गतिविधि को ध्यानपूर्वक देखें और यथासंभव अधिक प्रश्न पूछने का प्रयास कीजिए (चित्र 3.8)।

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प्रक्रिया को समझने के लिए विशेषज्ञ से प्रदर्शन करवाएँ और यदि संभव हो तो कुछ कार्य स्वयं करके देखें।

आगे कुछ प्रश्न दिए गए हैं जिनके माध्यम से आप वार्तालाप प्रारंभ कर सकते हैं। कार्यशाला में विशेषज्ञों से चर्चा के समय आपके मस्तिष्क में और भी प्रश्न आ सकते हैं। ऐसे प्रश्नों के उत्तर अवश्य लिखें।

  1. 1. आप वस्त्र को कैसे बाँधते हैं? आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि सभी आकृतियाँ एक समान आकार की हैं? आप आकृतियों को बड़ा या छोटा कैसे बनाते हैं?

  2. ...............................

  3. ...............................

  4. ...............................
  5. 2. रंगाई के लिए आप किन साधनों और सामग्रियों का उपयोग करते हैं और रंग कहाँ से प्राप्त करते हैं?

  6. ...............................

  7. ...............................

  8. ...............................
  9. 3. किस प्रकार के वस्त्रों को सरलता से रंगा जा सकता है? क्या ये सभी वस्त्र बँधाई एवं रंगाई के लिए भी उपयुक्त हैं?

  10. ...............................

  11. ...............................

  12. ...............................
  13. 4. आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि रंगाई के पश्चात वस्त्रों से रंग न निकले?

  14. ...............................

  15. ...............................

  16. ...............................
  17. 5. जब आप वस्त्र को रंगयुक्त जल में डुबोते हैं तो उसका तापमान कितना होना चाहिए? क्या सभी वस्त्रों और सभी रंगों के लिए जल का तापमान समान होना चाहिए?

  18. ...............................

  19. ...............................

  20. ...............................
  21. 6. वस्त्र को कितनी बार रंग के जल में भिगोया जाता है?

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  25. 7. वस्त्र को कैसे रंगा जाता है? इस प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

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  27. ...............................

  28. ...............................
  29. 8. क्या वस्त्र के विभिन्न भागों को भिन्न-भिन्न रंगों में रंगना संभव है? यदि हाँ, तो क्या आप इस प्रक्रिया को समझा सकते हैं?

  30. ...............................

  31. ...............................

  32. ...............................

निम्नलिखित चित्र 3.9 को देखें। इसमें बँधाई एवं रंगाई की प्रक्रिया को दिखाया गया है।

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यदि आप किसी परिस्थितिवश कार्यशाला में जाने में अथवा किसी शिल्पी को आमंत्रित करने में असमर्थ हैं तो आप दिए गए खोज शब्दों (सर्च वर्ड्स) का उपयोग करके अंतर्जाल पर एक उपयुक्त ऑनलाइन वीडियो देख सकते हैं, जैसे- बंधाई एवं रंगाई प्रक्रिया (tie and dye process), बँधाई एवं रंगाई कार्यशाला (tie and dye workshop), बाँधनी कार्यशाला (Bandhni Workshop), भारत में बाँधनी के कलाकार (Bandhni Artist in India) आदि।

यदि इस प्रक्रिया में आपको कुछ और सूचनाएँ भी प्राप्त हुई हैं तो उन्हें भी चित्र 3.9 में जोड़िए।।





Screenshot 2025-11-21 112605 मुझे क्या करना है?

गतिविधि 3- बँधाई एवं रंगाई की कला को समझना

आपको अपने उत्पाद को तैयार करने से पूर्व वस्त्र, रंग एवं अभिकल्पना (डिजाइन) पर अभ्यास और प्रयोग करना होगा। तत्पश्चात आप इनका उपयोग कर सकते हैं। सर्वप्रथम वस्त्र के छोटे टुकड़ों पर कुछ प्रतिदर्श (सैंपल) बनाकर देखें।

चरण 1- प्रतिदर्श (सैंपल) वस्त्र तैयार करना

रुमाल के आकार (6 इंच × 6 इंच) के पाँच वस्त्र के टुकड़े लें। ये वस्त्र कोई पुरानी कमीज, कुर्ता, साड़ी या कोई भी ऐसे वस्त्र से हो सकते हैं जो अब उपयोग में नहीं हैं। आप भिन्न-भिन्न प्रकार के वस्त्रों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे- पतला सूती, मोटा सूती, रेशमी, लिनन या अन्य किसी भी प्रकार के वस्त्र ताकि यह देखा जा सके कि भिन्न-भिन्न वस्त्रों पर रंग किस प्रकार से प्रभाव डालता है। याद रखें कि रंगाई और बंधाई श्वेत या हल्के रंग के वस्त्रों से ही आरंभ करें ताकि आप अपनी अभिकल्पना को भली प्रकार से देख सकें। चित्र 3.10 दर्शाता है कि कपड़े को कैसे तैयार करना है।

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नीचे दी गई तालिका 3.2 में उन वस्त्रों का विवरण लिखें जिनका आप उपयोग करना चाहते हैं-

तालिका 3.2- प्रतिदर्शों की जाँच सूची
प्रतिदर्श संख्या पुराना वस्त्र वस्त्र की तैयारी (जैसे- आकार में काटना, धोना, सुखाना एवं इस्त्री करना)







चरण 2- वस्त्र को बाँधना

आप पहले ही पढ़ चुके हैं कि जब वस्त्र को बाँधा जाता है तो बँधे हुए भाग पर रंग नहीं लगता। यह विधि रंगाई में प्रतिरूपों का निर्माण करती है जिससे रंगे हुए और बिना रंगे हुए भागों के बीच सुंदर अभिकल्पनाएँ उभर कर आती हैं। वस्त्रों को भिन्न-भिन्न विधियों से बाँधने पर विभिन्न प्रकार की विशेष अभिकल्पनाएँ बन सकती हैं।

विशेषज्ञ एक ही वस्त्र को कई बार बँधाई एवं रंगाई विधि से रंगते हैं। इससे एक ही वस्त्र पर विभिन्न प्रकार के प्रतिदर्श विभिन्न रंगों में बनते हैं। यद्यपि यहाँ हम दो रंगों पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे - वस्त्र का मूल रंग और रंगाई के लिए उपयोग किया जाने वाला रंग।

बाँधनी, शिबोरी एवं लहरिया की बाँधने की तकनीकें क्रमशः चित्र 3.11 से 3.13 में दर्शाई गई हैं। Screenshot 2025-11-21 112950

परंपरागत रूप से बाँधनी अभिकल्पना को गाँठों की संख्या के आधार पर विभिन्न नाम दिए जाते हैं। इन अभिकल्पनाओं को दोहराकर बड़े प्रतिरूप बनाए जाते हैं। कुछ सामान्य अभिकल्पनाएँ तालिका 3.3 में दर्शाई गई हैं। इनमें से किसी एक का उपयोग करते हुए आप स्वयं की अभिकल्पना भी बना सकते हैं।

तालिका 3.3- कुछ पारंपरिक बाँधनी प्रतिरूप के उदाहरण
प्रतिरूप और छवि का नाम इस प्रतिरूप का उपयोग करते हुए अपनी अभिकल्पना बनाइए
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Screenshot 2025-11-21 113403चरण 1- वस्त्रों पर अभिकल्पना बनाएँ। आप अभिकल्पना को सीधी या बिंदुदार रेखा में बना सकते हैं। Screenshot 2025-11-21 114359 चरण 2- अपनी अभिकल्पना की रेखाओं के साथ सरल सीधे टाँकें लगाने के लिए सुई और धागे का उपयोग करें। एक स्पष्ट प्रतिरूप के लिए समान दूरी बनाए रखना सुनिश्चित करें।
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चरण 3- तब तक सिलाई जारी रखें जब तक कि आपका पूर्ण प्रतिरूप सीधे टाँकें से आकृतिबद्ध न हो जाए। टाँकों/धागों को ढीला रखें। तत्पश्चात उन्हें एकत्र किया जाएगा।
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चरण 4- वस्त्रों को एकत्र करने के लिए धागे के ढीले सिरों को धीरे से खींचें जिससे चुन्नटें बन जाएँ। आप जितना अधिक खींचेंगे, आपकी अभिकल्पना उतनी ही स्पष्ट दिखाई देगी।
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Screenshot 2025-12-03 100808 चरण 5- वस्त्र एकत्र करने के पश्चात चुन्नटों के स्थान पर रखने के लिए धागे के सिरे पर एक स्थिर गाँठ बाँधें। सुनिश्चित करें कि यह कस कर बँधी हुई हो जिससे डाई सिलवटों के अंदर न जाए।

आप सिलाई की लंबाई, रेखाओं के कोणों और धागों को कहाँ और कितना कस कर बाँधने आदि में परिवर्तन करके प्रतिरूपों में परिवर्तन कर सकते हैं।

चित्र 3.12- शिबोरी के लिए बाँधने की विधि


लहरिया के लिए बाँधनी
Screenshot 2025-11-21 114715 चरण 1- वस्त्र को आधा मोड़ें और केंद्र बिंदु निर्धारित करें जिससे समांतर चुन्नटें बन सकें।



Screenshot 2025-11-21 114735 चरण 2- वस्त्र को आगे-पीछे लहरदार तरीके से मोड़ते हुए समान आकार की चुन्नटें बनाएँ। यह सुनिश्चित करें कि चुन्नटें व्यवस्थित और समतल हों जिससे आकृतियाँ स्पष्ट बने। इसके साथ यह भी सुनिश्चित करें कि समान चौड़ाई के मोड़ पूर्णतः स्वच्छ हों जिससे प्रतिरूप सुंदर और स्पष्ट दिखाई दें।



Screenshot 2025-11-24 100446 चरण 3-चुन्नटें तब तक बनाते रहें जब तक पूरे वस्त्र में परतें न हो जाए। यह सुनिश्चित करें कि वस्त्र अच्छे से पकड़ा गया है जिससे चुन्नटें खुलें नहीं।





Screenshot 2025-11-24 100519 चरण 4- चुन्नटों को सावधानी से पकड़ें और बीच में उन्हें धागे से कसकर बाँधें। सुनिश्चित करें कि चुन्नटों को अपने स्थान पर रखने के लिए गाँठ पक्की हो। Screenshot 2025-11-24 100540

चरण 5- वस्त्र को बीच के दोनों ओर समान अंतराल पर बाँधें। इससे रंगाई के पश्चात लहरिया आकृति तैयार हो जाएगी।

आप चुन्नटों की संख्या, चौड़ाई एवं धागे की बाँधने की दूरी में परिवर्तन कर अभिकल्पनाओं में विविधता दर्शा सकते हैं।

चित्र 3.13- लहरिया के लिए बाँधने की विधि





अब आप प्रथम प्रतिदर्श (सैंपल) तैयार करने के लिए तैयार हैं। सर्वप्रथम एक अभिकल्पना सुनिश्चित करें। उसे वस्त्र पर बनाएँ इसके पश्चात बाँधने की प्रक्रिया प्रारंभ करें। सभी प्रतिदर्शों को एक साथ बाँधे परंतु उन्हें तत्काल न रंगें। एक-एक करते हुए बाँधने और रंगाई करने से विधि में सुधार होगा।



आप अपनी सुविधानुसार बाँधने की किसी भी विधि को अपना सकते हैं परंतु यह सुझाव दिया जाता है कि आप विभिन्न विधियों को अपनाएँ। तालिका 3.4 में बाँधने के अपने अनुभवों को अंकित करें। इसके साथ ही प्रतिदर्श (सैंपल) की अभिकल्पना (डिजाइन) बनाएँ और अपने समक्ष आई समस्याओं और उनके समाधानों को अंकित करें।

तालिका 3.4- प्रतिदर्श का निर्माण
क्रियाएँ विवरण चुनौतियाँ और समाधान
प्रतिदर्श संख्या और वस्त्र-
उपयोग की गई बाँधनी-विधि-
प्रतिदर्श की अभिकल्पना
(सैंपल की डिजाइन)
प्रतिदर्श संख्या और वस्त्र-
उपयोग की गई बाँधनी-विधि-
प्रतिदर्श की अभिकल्पना
प्रतिदर्श संख्या और वस्त्र-
उपयोग की गई बाँधनी-विधि-
प्रतिदर्श की अभिकल्पना
प्रतिदर्श संख्या और वस्त्र-
उपयोग की गई बाँधनी-विधि-
प्रतिदर्श की अभिकल्पना
प्रतिदर्श संख्या और वस्त्र-
उपयोग की गई बाँधनी-विधि-
प्रतिदर्श की अभिकल्पना
प्रतिदर्श संख्या और वस्त्र-
उपयोग की गई बाँधनी-विधि-
प्रतिदर्श की अभिकल्पना


चरण 3- रंग तैयार करना

विक्रय स्थलों (बाजारों) में रंगों के अनेक प्रकार उपलब्ध हैं जिनमें रासायनिक और प्राकृतिक दोनों प्रकार के रंग होते हैं। इनमें से प्राकृतिक रंग पर्यावरण के लिए अत्याधिक अनुकूल होते हैं।

प्राकृतिक रंगों को तैयार करने के लिए अपनी रुचि के रंग के आधार पर सामग्रियों का चयन करें। उदाहरण के लिए, हल्दी या गेंदे के फूलों से पीला रंग, चुकंदर से प्राकृतिक गुलाबी और लाल रंग, पालक से हरा रंग, गुड़हल व जामुन या नीले अपराजिता के फूलों से नीला रंग बना सकते हैं।



Screenshot 2025-11-24 101025 आप अंतर्जाल (इंटरनेट) पर विभिन्न की-वर्ड्स का प्रयोग करके प्राकृतिक रंग तैयार करने की विधियों के संबंध में सूचना प्राप्त कर सकते हैं, जैसे- पौधे से प्राकृतिक रंग बनाना। प्रोसेस फॉर मेंकिंग नेचुरल डाई फ्रॉम प्लांटस ऑफ......... कलर (process for making natural dye from plants of ......... Colour) (अपनी रुचि के रंग का उल्लेख करें)।

चित्र 3.14 में चुकंदर का उपयोग करके गुलाबी या लाल रंग का घोल बनाने की प्रक्रिया दर्शाई गई है।

गुलाबी या लाल रंग बनाना
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  1. चरण 1- दो मध्यम आकार के चुकंदर लें और उन्हें काट लें या पीस लें। इससे रंग सरलता से निकलेगा।

  2. Screenshot 2025-11-24 101100



  3. चरण 2- कटे हुए चुकंदर को 1 लीटर जल में डालें और धीमी आँच पर लगभग 1 घंटे तक उबालें जिससे चुकंदर से गहरा लाल रंग निकल सके।





  4. Screenshot 2025-11-24 101134
  5. चरण 3- मिश्रण ठंडा होने के पश्चात एक स्वच्छ सूती वस्त्र या छलनी से इसे छान लें जिससे ठोस भाग अलग हो जाए और केवल रंगीन तरल शेष रहे।





  6. Screenshot 2025-11-24 101151
  7. चरण 4- अंत में रंग को स्थाई बनाने के लिए घोल में 1-2 बड़े चम्मच नमक डालें। यह वस्त्र पर रंग को चढ़ाने में सहायता करेगा और इसे वस्त्र पर टिकाऊ बनाएगा।

आपका प्राकृतिक चुकंदर रंग अब उपयोग के लिए तैयार है। पौधे की (सब्जी/फूल/फल) और जल की मात्रा आवश्यक रंग की गहराई और वस्त्र के भार पर निर्भर करेगी। यदि गहरा रंग चाहिए या वस्त्र भारी हो तो सामग्री की मात्रा अधिक रखनी होगी।

चित्र 3.14- चुकंदर का उपयोग करते हुए गुलाबी या लाल रंग बनाना



चित्र 3.15 में हल्दी का उपयोग करते हुए पीला रंग बनाने की प्रक्रिया दर्शाई गई है। हल्दी हमारे घरों में सरलता से उपलब्ध होती है।
पीला रंग बनाना Screenshot 2025-12-02 161857 चरण 1- 2 बड़े चम्मच हल्दी पाउडर लें और इसे एक कटोरे में रखें। Screenshot 2025-12-02 162153 चरण 2- आधा गिलास ठंडे जल में हल्दी डालकर अच्छी प्रकार घोल लें। Screenshot 2025-12-02 162244 चरण 3- एक बड़े पात्र में 1 लीटर जल डालकर उबालें। Screenshot 2025-12-02 162311 चरण 4- उबलते जल में हल्दी का घोल डालें तथा लगभग 1 घंटे तक धीमी आँच पर पकाएँ। Screenshot 2025-12-02 162353

चरण 5- रंग को स्थाई बनाने के लिए इसमें 1-2 बड़े चम्मच नमक/बेकिंग पाउडर/सिरका मिलाएँ। ये रंग को स्थाई बनाने के रूप में कार्य करेंगे तथा वस्त्रों में रंग को बनाए रखने में सहायता करेंगे।

अब हल्दी से बना आपका प्राकृतिक पीला रंग उपयोग के लिए तैयार है। पीले रंग को अधिक गहरा करने हेतु तथा कपड़े का भार अधिक होने पर हल्दी की भी उतनी ही अधिक मात्रा की आवश्यकता होगी।

चित्र 3.15- हल्दी का उपयोग कर पीला रंग बनाना



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क्या आप जानते हैं?

रंगाई की प्रक्रिया में ताप एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह जल में रंग की घुलनशीलता में वृद्धि करता है। इसके साथ ही यह रंगने की प्रक्रिया को तीव्र करता है एवं वस्त्र पर रंग की रंगाई भली-भाँति करने में भी सहायता करता है। यद्यपि रंगाई की कुछ और प्रक्रियाएँ हैं जिनमें ताप की आवश्यकता नहीं होती है अथवा न्यूनतम ताप की आवश्यकता होती है। रंगाई की अनेक विधियाँ होती हैं जिनमें से दो विधियों का वर्णन अग्रलिखित है-



निष्क्रिय ताप प्रक्रिया

यदि समय की कोई बाध्यता नहीं है तो सौर ऊर्जा का उपयोग करके रंग तैयार किया जा सकता है। इसके लिए रंग-सामग्री तथा वस्त्रों को काँच के डिब्बे में रखकर धूप में रखा जाता है जिससे धीरे-धीरे रंग निकलता है और कम तापमान पर रंगाई होती है। इस प्रक्रिया में कुछ दिनों से लेकर अनेक सप्ताह तक का समय लग सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमें गहरा या हल्का रंग प्राप्त करना है।

ठंडे जल के रंग

कुछ रंग ऐसे होते हैं जो गर्मी के अतिरिक्त रसायनों की सहायता से वस्त्रों पर स्थिर किए जाते हैं। विक्रय स्थलों में उपलब्ध इन रंगों को शीत या सामान्य तापमान के जल में मिश्रित किया जाता है। बँधे हुए वस्त्रों को इस घोल में डुबोया जाता है और अंतिम धुलाई से पहले एक विशेष स्थायीकरण (फिक्सर) घोल में रखा जाता है जिससे रंग पक्का हो जाता है।

तालिका 3.5 में पौधों से विभिन्न रंगों से डाई तैयार करने के अन्य उदाहरण दिए गए हैं।


तालिका 3.5- पौधों से रंग बनाना
रंग पौधा चित्र रंग तैयार करने के चरण (आवश्यक मात्रा इच्छित रंग की तीव्रता पर निर्भर करती है)
नीला नीला गुड़हल Screenshot 2025-11-24 101443
  • 100 ग्राम नीले गुड़हल के फूलों को 1 लीटर जल में मिलाएँ।
  • जल को उबालें और छानकर 250 मिलीलीटर सिरका मिलाएँ।
भूरा चाय या कॉफी Screenshot 2025-11-24 101507
  • 100 ग्राम कॉफी पाउडर या चाय पाउडर को 1 लीटर जल में मिलाएँ।
  • जल को उबलने तक गर्म करें।
  • घोल को छानकर कॉफी या चाय के कण हटा दें और 250 मिलीलीटर सिरका मिलाएँ।
हरा पालक Screenshot 2025-11-24 101529
  • 100 ग्राम पालक काट लें।
  • इसे 1 लीटर जल में डालें।
  • जल के उबलने तक धीमी आँच पर गर्म करें।
  • घोल को छानकर सब्जी के कण हटा दें और इसमें 2 बड़े चम्मच नमक मिलाएँ
पीला गेंदा Screenshot 2025-11-24 101615
  • 100 ग्राम गेंदे के फूलों को 1 लीटर जल में मिलाएँ।
  • जल को उबलने तक धीमी आँच पर गर्म करें।
  • घोल को छानकर फूल हटा दें और 250 मिली-लीटर सिरका मिलाएँ।
लाल अनार Screenshot 2025-11-24 101636
  • 100 ग्राम अनार के दानों को 1 लीटर जल में मिलाएँ।
  • जल को उबलने तक धीमी आँच पर गर्म करें।
  • घोल को छानकर बीज हटा दें और इसमें 2 बड़े चम्मच नमक मिलाएँ।


प्रतिदर्श (सैंपल) को रंगने के लिए आपने कौन-से रंगों का चयन किया हैं?.........

प्रत्येक प्रतिदर्श के लिए तैयार किए गए रंग का विवरण तालिका 3.6 में उल्लेख करें। यदि आपने एक ही रंग का उपयोग किया है तो कृपया उसका विवरण बताएँ।

तालिका 3.6 - विभिन्न पौधों से रंग तैयार करना
चरण विवरण
रंग तैयार करने में उपयोग की गई सामग्री
सामग्री की मात्रा
जल की मात्रा
रंग को स्थाई बनाने के लिए प्रयुक्त सामग्री
बरती गई सुरक्षा सावधानियाँ
कोई अन्य ऐसी सामग्री जो इसी प्रकार का रंग दे


चित्र 3.16 में वस्त्रों को रंगने, सुखाने एवं खोलने की प्रक्रिया प्रस्तुत की गई है।
वस्त्रों को रंगें, सुखाएँ और इसके बाद खोलें
Screenshot 2025-11-24 101742 चरण 1- बँधे हुए वस्त्रों को सामान्य जल में डुबोएँ।
Screenshot 2025-11-24 101759 चरण 2- वस्त्रों को 20-30 मिनट के लिए गर्म डाई के घोल में डुबोएँ।
Screenshot 2025-11-24 101819 चरण 3- कपड़े को रंग (डाई) से बाहर निकालें। सुनिश्चित करें कि आपने दस्ताने पहने हैं।
Screenshot 2025-11-24 101841 चरण 4- अतिरिक्त रंग हटाने के लिए इसे एक बार साधारण जल से धो लें। 24 घंटे
Screenshot 2025-11-24 101906 चरण 5- इसे एक दिन के लिए सूखने हेतु स्वच्छ स्थान पर रखें।
Screenshot 2025-11-24 101921 चरण 6- अगले दिन आप वस्त्रों को खोल सकते हैं और उसे इस्त्री कर सकते हैं।

सभी 5 प्रतिदर्शों के लिए चरण 1-6 तक की प्रक्रिया को दोहराएँ।

चित्र 3.16- वस्त्रों को रंगने, सुखाने एवं खोलने की प्रक्रिया

क्या आपको तालिका 3.7 में सूचीबद्ध किसी भी चरण में चुनौती का सामना करना पड़ा? देखें कि क्या इन चुनौतियों को अन्य प्रतिदर्शों के माध्यम से दूर कर सकते हैं।

तालिका 3.7- सामान्य चुनौतियाँ एवं उनके समाधान
चुनौती समाधान करें
क्या रंगाई प्रक्रिया के समय धागा टूट गया या खुल गया? वस्त्र को कसकर बाँधें और सावधानीपूर्वक संभालें जिससे यह प्रक्रिया के समय ढीला न हो। क्या प्रक्रिया के समय डाई का घोल फैल गया? कार्यस्थल में पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करें जिससे रंग (डाई) और अन्य सामग्रियाँ सुरक्षित रूप से रखी जा सकें। गर्म पात्र पकड़ने के लिए वस्त्र या दस्ताने का उपयोग करें। क्या वस्त्र खोलते समय आपने त्रुटिवश वस्त्र को काट दिया। धागा काटने के लिए कतरनी का उपयोग न करें। धागे का सिरा ढूँढ़ने के लिए सुई का उपयोग करें और तत्पश्चात हाथ से धीरे-धीरे खोलें।
प्रतिदर्शों को ध्यानपूर्वक देखें-

प्रतिदर्श 1 से 5 तक के बीच कार्य करते समय आपने 'क्या करना' या 'क्या नहीं करना' सीखा, उसका उल्लेख करें।

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चरण 4- संचिका तैयार करना

आपके द्वारा तैयार किए गए प्रतिदर्शों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने के लिए संचिका बनाएँ (चित्र 3.17)। यह प्रतिदर्श संचिका आपके द्वारा तैयार किए गए प्रतिदर्शों का एक संग्रह होगी जिसमें उनसे संबंधित आवश्यक विवरण अंकित होंगे। इस संचिका का उपयोग आप अपने प्रतिदर्श प्रस्तुत करने के लिए कर सकते हैं। प्रत्येक प्रतिदर्श में निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित होंगे

1. वस्त्र का प्रतिदर्श (सैंपल)

2. वस्त्र का प्रकार

3. बँधाई एवं रंगाई के लिए उपयोग की जाने वाली विधि

4. उपयोग किए जाने वाले वस्त्र और रंगाई

5. प्रतिदर्श बनाते समय आने वाली चुनौतियाँ

6. प्रतिदर्शों को तैयार करने की चरणवार प्रक्रिया

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गतिविधि 4- अंतिम उत्पाद बनाना

पाँच प्रतिदर्शों पर अभ्यास करने के पश्चात आपने बँधाई एवं रंगाई की प्रक्रिया के सभी चरणों को सीख लिया है। अब आप एक ऐसा उत्पाद बनाने के लिए तैयार हैं जिसे उपयोग में लाया जा सके।

चरण 1- उत्पाद का चयन सर्वप्रथम उस उत्पाद का चयन करें जिसे आप बनाना चाहते हैं, जैसे- दुपट्टा, तकिये का खोल या किसी वस्त्र का कोई अन्य टुकड़ा। इसके पश्चात वस्त्र का चयन करें। इसके लिए आप घर पर पुराने वस्त्र ढूँढ़ें जिनका अब उपयोग नहीं किया जा रहा है, जैसे- पुरानी चादरें या अन्य अनुपयोगी वस्त्र। यदि आवश्यक हो तो इन्हें उचित आकार में काटें। चित्र 3.18 में कुछ उत्पादों के लिए आकार चित्रफलक दिया गया है।

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वस्त्र को उचित आकार में काटने के लिए आप अपने शिक्षक, परिवार के किसी सदस्य या समीप के किसी दर्जी से सहायता ले सकते हैं।

1. आप कौन-सा उत्पाद बनाएँगे?

.................

.................

.................

2. आपने कौन-से वस्त्र का चयन किया? क्यों?

...............

...............

...............

3. अपने उत्पाद की आकृति माप सहित चित्रित करें।







चरण 2- अभिकल्पना, रंग एवं बाँधने की विधि को अंतिम रूप दें

आपको बँधाई एवं रंगाई विधि का उपयोग करने के लिए एक अभिकल्पना तैयार करनी होगी। आप अपने आस-पास की वस्तुओं से 'अभिकल्पना की प्रेरणा' ले सकते हैं। चित्र 3.19 में प्रतिदिन की वस्तुओं से प्रेरित कुछ अभिकल्पनाओं के उदाहरण दर्शाए गए हैं।

Screenshot 2025-11-24 102238

अब चित्र 3.20 में दिए गए पुष्प से प्रेरित होकर एक अभिकल्पना तैयार करने का प्रयास करें।




Screenshot 2025-11-24 102520 चित्र 3.20- पुष्प से प्रेरित अभिकल्पना



अपने आस-पास आनंद के साथ घूमें और संसार से प्रेरणा लें। अपनी अभिकल्पना हेतु प्रकृति, कला या अपनी रुचि के अनुसार वस्तुओं को देखें। प्रकृति की कल्पना करें। यह आपको बंधाई एवं रंगाई विधि से आकृति बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। आपने जिस आकृति का चयन किया है वह 'अभिकल्पना की प्रेरणा' पर आधारित हो सकती है।


अपनी अभिकल्पना को सुनिश्चित करने के पश्चात रंगाई हेतु रंग का तथा बँधाई एवं रंगाई की विधि का चयन करें-

1. आपकी अभिकल्पना प्रेरणा क्या है?

.......................

.......................

2. अपने उत्पाद पर इच्छित अभिकल्पना को दिए गए बॉक्स में बनाएँ।









3. आप डाई बनाने के लिए किस पौधे (सब्जियाँ या फूल या फल) या अन्य सामग्री (जैसे - चाय या कॉफी) का उपयोग करेंगे?

.......................

.......................

4. आप बँधाई एवं रंगाई की किस विधि का उपयोग करेंगे?

.......................

.......................

चरण 3- वस्त्र को बाँधना और रंगना

अब समय आ गया है कि आप अपनी बँधाई एवं रंगाई अभिकल्पना को वास्तविक रूप दें। सर्वप्रथम वस्त्र को तैयार करें और फिर इसे बाँधने और रंगने की प्रक्रिया के लिए तैयार करें। अपनी अभिकल्पना के अनुसार वस्त्र को रचनात्मक प्रक्रिया से मोड़ें और बाँधें जिससे इच्छित प्रतिरूप बन सके।

सुनिश्चित करें कि आप सभी सुरक्षा निर्देशों का अनुसरण कर रहे हैं। इस बार आपके पास पिछले अभ्यास की अपेक्षा वस्त्र का आकार बड़ा होगा। अतः अधिक मात्रा में पौधों से तैयार रंग के लिए 2-3 लीटर जल का उपयोग करें। रंगने के पश्चात वस्त्र को अच्छी प्रकार से निचोड़ें और एक दिन के लिए सूखने हेतु छोड़ दें।

तालिका 3.8 में बताएँ कि आपने क्या किया।

तालिका 3.8- उत्पाद निर्माण की अंतिम प्रक्रिया का विवरण
क्रियाएँकिए गए चरण
वस्त्र की तैयारी
बाँधना
रंग तैयार करना
वस्त्र को रंगना और सुखाना

चरण 4 अंतिम उत्पाद तैयार करना

अंतिम चरण में सूखे हुए वस्त्र को सावधानी से खोलें और उसकी अभिकल्पना देखें। गाँठों को धीरे-धीरे खोलें। वस्त्र से किसी भी प्रकार की सिलवट को हटाने के लिए वस्त्र पर हल्के से इस्त्री करें। ध्यान दें कि इस्त्री करते समय वस्त्र के प्रकार के आधार पर उचित तापमान का चयन करें।

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क्या आप जानते हैं? कुछ आधुनिक कलाकार उल्टे प्रकार से बँधाई एवं रंगाई (रिवर्स टाई एंड डाई) नामक एक विधि का उपयोग करते हैं। इस विधि में वस्त्रों में डाई करने के अतिरिक्त ब्लीच या अन्य रसायनों का उपयोग करके रंग को हटाया जाता है जिससे गहरे रंग की पृष्ठभूमि पर सुंदर श्वेत प्रतिरूप (पैटर्न) बनकर उभरते हैं।

1. क्या आप इच्छित अभिकल्पना बनाने में सफल रहे? यदि नहीं, तो इसका क्या कारण हो सकता है?

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गतिविधि 5- आपने क्या निवेश किया?

आपने इसमें समय निवेश किया और संभवतः सामग्री एकत्र करने में कुछ धनराशि का भी व्यय हुआ होगा। अतः तालिका 3.9 आपको उत्पाद की लागत का अनुमान लगाने में सहायता करेगी।

तालिका 3.9- उत्पाद लागत
सामग्री सूची सामग्री की मात्रा सामग्री की लागत ( 0 /- रुपए यदि उपयोग की सामग्री का पुनः उपयोग किया गया हो)




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मैंने दूसरों से क्या सीखा?

1. आपने विशेषज्ञों, परिवार के सदस्यों, सहपाठियों, समुदाय के सदस्यों और अन्य स्रोतों के साथ प्रत्यक्ष (क्षेत्र-भ्रमण) और अप्रत्यक्ष (ऑनलाइन संवाद) रूप से बहुत कुछ सीखा। आपको इनमें से सबसे रोचक बात क्या लगी?

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2. आपने परिवार या समुदाय के सदस्यों से क्या सीखा (जैसे- घर पर पारंपरिक वस्त्रों के संबंध में कोई जानकारी, वस्त्र निर्माण की कहानियाँ या वस्त्रों से संबंधित कोई विशेष स्मृति)?

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मैंने क्या कार्य किया और इसमें कितना समय लगा?

यह समझना आवश्यक है कि किसी गतिविधि को पूर्ण करने में कितना समय लगता है?

प्रत्येक गतिविधि पर बिताए गए समय की गणना करें तथा इसे अगले पृष्ठ पर दर्शाई गई समयरेखा पर चिह्नित करें। यदि आपने पुस्तक में दी गई गतिविधियों से अधिक कार्य किया है तो कृपया उसे भी जोड़ें।

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मैं और क्या कर सकता/सकती हूँ?

सजावट से किसी भी उत्पाद को विशेष बनाया जा सकता है। आप अपनी रचनात्मकता का उपयोग करके उत्पाद को आकर्षक बना सकते हैं। इसके लिए पहले से उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करें, जैसे-पुनर्नवीनीकरण वस्तुएँ, बचे हुए वस्त्र, बटन, रेशम या सूती धागा, दर्पण आदि।

तालिका 3.10 में कुछ उदाहरण दर्शाए गए हैं। आप अपने शिक्षक, परिवार के सदस्यों या मित्रों से भी अन्य विचार प्राप्त कर सकते हैं

तालिका 3.10- आपके तैयार किए गए उत्पादों की सजावट
सजावट के प्रकार कैसे करें?
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  • वस्त्र पर किनारी/गोटा लगा कर देखें जहाँ आप इसे संलग्न करना चाहते हैं।
  • किनारी/गोटा को वस्त्र पर पिन करें ताकि जब आप सिलाई करें तो यह हिले नहीं।
  • एक साधारण सीधे टाँकें का उपयोग करते हुए किनारी/गोटा को वस्त्र से जोड़ें।
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  • अपनी रुचि के बटन का चयन करें।
  • योजना बनाएँ कि आप उनका उपयोग कैसे करेंगे। उदाहरण के लिए, आपको अपने दुपट्टे के प्रत्येक छोर पर 5 बटन या अपने स्कार्फ के कोनों पर 4 बटन लगा सकते हैं।
  • सुई और धागे का उपयोग करते हुए वस्त्र में बटन को लगाएँ।
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  • अपनी रुचि के अनुसार लटकन का चयन करें।
  • योजना बनाएँ कि आप उनका उपयोग कैसे करेंगे उदाहरण के लिए, आप अपने तकिये के खोल या कुशन के कोनों पर 4 लटकन या अपने दुपट्टे के प्रत्येक छोर पर 7 लटकन लगाकर उसे और सुंदर बना सकते हैं।
  • सुई और धागे का उपयोग करते हुए वस्त्र में लटकन को लगाएँ।

आप तालिका 3.10 में उल्लेखित वस्तुओं के अतिरिक्त कढ़ाई, मनकों का कार्य (मोती-सज्जा) और गोटे के विषय में भी ज्ञात कर सकते हैं। यह आपके उत्पाद को और भी अनूठा बना देगा।

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सोचिए और उत्तर दीजिए

1. दी गई गतिविधियों को करने में आपको क्या आनंद आया?

2. आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

3. अगली बार आप भिन्न प्रकार से क्या करेंगे?

4. कच्चे माल के उत्पादन से लेकर विक्रय स्थल तक पहुँचने तक एक बंधाई एवं रंगाई उत्पाद की यात्रा लिखें। इस प्रक्रिया में कौन-से रोज़गार सम्मिलित हैं, उसके विषय में भी लिखें।

5. आपके द्वारा किए गए कार्य से संबंधित नौकरियों के कुछ उदाहरणों को पहचानें। उदाहरण के लिए, शिल्पी, वेशभूषा अभिकल्पक, खुदरा और वस्त्र शोधकर्ता। अपने आस-पास के व्यक्तियों से चर्चा करें और अपना उत्तर लिखें।