- समतल भूमि की तुलना में पहाड़ी पर चढ़ते समय साइकिल चलाना अपेक्षाकृत अधिक कठिन क्यों लगता है?
- सूखी सतह की तुलना में गीली सतह पर फिसलना अधिक सरल क्यों होता है?
- जब हमारा झूला अपने दोलन के उच्चतम बिंदु पर पहुँचकर नीचे की ओर आने लगता है तो हमें 'हल्केपन' की या 'तैरने' जैसी अनुभूति क्यों होती है?
- अपने प्रश्नों को साझा कीजिए
_____________
_____________?
सोनाली और रागिनी की गर्मी की छुट्टियाँ आरंभ हो गई थीं। बहुत समय से वे सोच रही थीं कि अपने गाँव के निकट के मनोरम भू-दृश्यों की संरचनाओं को निकट से देखा और समझा जाए। अतः उन्होंने साइकिल से भ्रमण की योजना बनाई। अपनी-अपनी साइकिल के पहियों में हवा भरने के पश्चात वे अपनी अन्वेषण यात्रा पर निकल पड़ीं। उस दिन तीव्र गति से हवा चल रही थी जैसे ही वे साइकिल चलाती हुईं गाँव से बाहर निकलीं वैसे ही एक तीव्र हवा का झोंका उनसे टकराया। रागिनी ने कहा, "अरे नहीं! हवा मुझे प्रबलता से पीछे की ओर धकेल रही है!" सोनाली ने हँसते हुए उत्तर दिया, "हम हवा की विपरीत दिशा में साइकिल चला रहे हैं। तेज चलने के लिए हमें अपनी साइकिल के पैडल और अधिक तेजी से घुमाने होंगे।"
साइकिल चलाते-चलाते वे पहाड़ी की चोटी तक जाने वाले लंबे रास्ते पर पहुँच गईं। सड़क का कुछ भाग ऊबड़-खाबड़ था जहाँ पैडल मारने में उन्हें कठिनाई हो रही थी जबकि कुछ अन्य भाग सपाट थे जहाँ साइकिल सरलता से चल पाती थी। जब वह दोनों चोटी पर पहुंचीं और अपने आस-पास के मनोरम दृश्यों का आनंद ले रही थीं तभी उन्होंने एक गड़गड़ाहट की ध्वनि सुनी और दूर आकाश में चमकती हुई तड़ित देखी। यद्यपि यह सब उन्हें मनभावन लग रहा था पर फिर भी उन्होंने तुरंत वापस लौटने का निर्णय लिया। वापस लौटते समय जब वह भेड़ों के एक झुंड के समीप से निकल रही थीं तो उन्होंने अपनी साइकिल की घंटियाँ बजाईं और दिशा-परिवर्तन हेतु साइकिल के हैंडल घुमाएँ।
जब वे पहाड़ी की ढलान से नीचे उतर रही थीं तब उन्हें अनुभूति हुई कि यद्यपि वे पैडल नहीं मार रही थीं फिर भी उनकी साइकिलें तीव्र गति से नीचे की ओर आ रही थीं। सोनाली चिल्लाई- "यह बहुत रोमांचक है! ऐसा लग रहा है कि कोई हमें नीचे की ओर खींच रहा है। यह क्या हो सकता है?"
5.1 बल क्या है?
आइए, हम अभिकर्षण (खिंचाव) एवं अपकर्षण (धक्का) का अनुभव करने का प्रयास करें।
क्रियाकलाप 5.1- आइए, खोज करें
- गत्ते का एक बड़ा डिब्बा लीजिए।
- इस डिब्बे का स्थान परिवर्तित करने के लिए आप अपने मस्तिष्क में आने वाली सभी युक्तियों का प्रयोग कीजिए।

जितनी भी भिन्न-भिन्न युक्तियाँ आप सोच सकते हैं, वह सब अपनाकर इस डिब्बे का स्थान परिवर्तित करने का प्रयास कीजिए। क्या आपने चित्र 5.1 में दर्शाई गई युक्तियों के अतिरिक्त किसी अन्य युक्ति से डिब्बे का स्थान परिवर्तित किया है? डिब्बे का स्थान परिवर्तित करने के लिए आपने जितनी भी युक्तियों का प्रयोग किया होगा आपने उन प्रत्येक डिब्बे को अपकर्षित किया होगा या अभिकर्षित किया होगा।
सामान्यतः किसी वस्तु पर लगाए गए अपकर्षण या अभिकर्षण को विज्ञान में बल कहा जाता है।
5.2 किसी वस्तु पर लगाया गया बल उस पर क्या प्रभाव डालता है?
दैनिक जीवन में हम पर अपकर्षण या अभिकर्षण बल सदैव लग रहा होता है जिस पर प्रायः हमारा ध्यान भी नहीं जाता है। आइए, इनमें से कुछ अनुभवों को स्मरण करें और उनका विश्लेषण करें।
क्रियाकलाप 5.2- आइए, विश्लेषण करें
- ऐसी स्थितियों के विषय में विचार कीजिए जहाँ बल (अपकर्षण या अभिकर्षण) आरोपित होता है और उन्हें तालिका 5.1 में सूचीबद्ध कीजिए।
- प्रत्येक स्थिति का विश्लेषण कीजिए और बल के प्रभाव को तालिका 5.1 में लिखिए। कुछ स्थितियाँ और उनके प्रभाव आपके लिए पहले से ही तालिका में अंकित किए गए हैं।
तालिका 5.1 - विभिन्न क्रियाएँ और उनके प्रभाव
| क्र.सं. | क्रिया | अपकर्षण/अभिकर्षण | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 1. | आपकी चलती साइकिल को रोकने के लिए आपके मित्र द्वारा इसे पीछे से पकड़ना | अभिकर्षण | साइकिल का रुकना या इसकी चाल का कम होना |
| 2. | गतिशील गेंद को बल्ले से मारना | अपकर्षण | गतिशील गेंद की दिशा में परिवर्तन |
| 3. | एक फूले हुए गुब्बारे को दबाना | अपकर्षण | गुब्बारे के आकार में परिवर्तन |
| ........ | ........... | .... |
उपर्युक्त उदाहरणों से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? क्या कोई बल किसी गतिमान वस्तु को रोक सकता है? क्या यह किसी वस्तु की चाल या गति की दिशा में कोई परिवर्तन कर सकता है या किसी वस्तु के आकार को परिवर्तित कर सकता है?

दैनिक जीवन में हम कई ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं जहाँ बल लगाया जाता है। उदाहरण के लिए मेज की दराज खोलना, रबर बैंड खींचना, क्षेत्ररक्षक द्वारा गेंद रोकना, फुटबॉल को किक मारना, चलती साइकिल में ब्रेक लगाना, रोटी बेलना और बस का स्टीयरिंग हैंडल घुमाना। बल लगाने का वस्तुओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
किसी वस्तु पर लगाया गया बल -
- विरामावस्था में रखी वस्तु को गति प्रदान कर सकता है।
- पहले से गतिमान वस्तु की चाल को परिवर्तित कर सकता है।
- गतिमान वस्तु की गति की दिशा परिवर्तित कर सकता है।
- वस्तु के आकार में परिवर्तन ला सकता है।
- इनमें से कुछ या सभी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।
- क्या इसका तात्पर्य यह है कि जब भी किसी वस्तु की चाल या दिशा उसके आकार में कोई परिवर्तन होता है तो उस वस्तु पर कोई बल कार्य कर रहा होता है?
- हाँ, इनमें से कोई भी प्रभाव बल लगाए बिना संभव नहीं हो सकता।
5.3 क्या बल दो अथवा दो से अधिक वस्तुओं के बीच की पारस्परिक क्रिया है?
जब आप किसी मेज को धक्का देते हैं तो आपका हाथ एक वस्तु है और दूसरी वस्तु वह मेज है जिस पर आपका हाथ बल लगा रहा है। यहाँ हम कहते हैं कि आपका हाथ और मेज दो वस्तुएँ हैं जो एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया कर रही हैं।
तालिका 5.1 में सूचीबद्ध सभी क्रियाओं के विषय में विचार कीजिए। प्रत्येक क्रिया में कितनी वस्तुएँ सम्मिलित हैं? क्या आपने ध्यान दिया है कि बल तभी उत्पन्न होते हैं जब दो वस्तुएँ किसी न किसी तरह से परस्पर क्रिया कर रही हों? इन उदाहरणों से हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे सकते हैं कि किसी बल के कार्य करने के लिए कम से कम दो वस्तुओं का परस्पर क्रिया करना आवश्यक है।
बल किसी वस्तु पर लगने वाला अपकर्षण या अभिकर्षण है जो उस वस्तु की किसी अन्य वस्तु के साथ परस्पर क्रिया का परिणाम होता है। बल का SI मात्रक न्यूटन है और इसका प्रतीक N है (ध्यान दें कि बल के मात्रक न्यूटन को जब किसी वाक्य में अंग्रेजी में लिखते हैं तो इसके पहले अक्षर को अंग्रेजी वर्णमाला के छोटे अक्षर 'n' से प्रारंभ करते हुए 'newton' लिखते हैं किंतु इसके प्रतीक को अंग्रेजी वर्णमाला के बड़े अक्षर 'N' से दर्शाते हैं)।
5.4 बलों के विभिन्न प्रकार क्या हैं?
5.4.1 संपर्क बल
कई स्थितियों में हम पाते हैं कि किसी वस्तु पर बल लगाने के लिए हमारे शरीर और वस्तु के बीच भौतिक संपर्क आवश्यक होता है। यह संपर्क या तो प्रत्यक्ष होता है, जैसे- हमारे हाथों या शरीर के अन्य अंगों द्वारा वस्तु को स्पर्श करके या फिर यह अप्रत्यक्ष होता है, जैसे-किसी छड़ी या रस्सी के माध्यम से किसी वस्तु पर बल लगाए जाने पर। इस प्रकार के बल जो वस्तुओं के बीच भौतिक संपर्क होने पर ही उत्पन्न होते हैं संपर्क बल कहलाते हैं।
पेशीय बल
संपर्क बल का एक उदाहरण पेशीय बल है। जब हम कोई भी शारीरिक गतिविधि करते हैं, जैसे-चलना, दौड़ना, उठाना, धक्का देना, कूदना या खींचना तो यह बल हमारे शरीर की माँसपेशियों की क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। माँसपेशियों की क्रिया के कारण उत्पन्न बल को पेशीय बल कहते हैं। पेशीय बल तब उत्पन्न होता है जब माँसपेशियाँ किसी भी गतिविधि को करते समय सिकुड़ती और फैलती हैं। पशु, पक्षी, मछली और कीट गति करने एवं जीवित बने रहने की क्रियाओं हेतु पेशीय बलों का उपयोग करते हैं (चित्र 5.3)।
मानव लंबे समय से अपने अनेक कार्यों की पूर्ति के लिए कुछ पशुओं के पेशीय बल का उपयोग करते आए हैं (चित्र 5.4)।

घर्षण
- क्या कोई अन्य बल भी संपर्क बल है?
समतल भूमि पर लुढ़कती हुई एक गेंद कुछ समय के पश्चात स्वयं विरामावस्था में आ जाती है। इसके साथ ही यदि हम समतल सड़क पर अपनी साइकिल के पैडल घुमाना बंद कर दें तो साइकिल धीमी हो जाती है और कुछ समय पश्चात विरामावस्था में आ जाती है। यदि सड़क ऊबड़-खाबड़ है तो इस प्रकार की सड़क पर वह सपाट सड़क की तुलना में कम समय में विरामावस्था में आ जाती है। आपने ऐसे अनेक अनुभव किए होंगे। ऐसी स्थितियों में वस्तुओं की गति में होने वाले इस परिवर्तन का क्या कारण होता है? हम पहले ही सीख चुके हैं कि किसी वस्तु की गति में परिवर्तन हेतु बल आवश्यक होता है। यद्यपि इन सभी स्थितियों में वस्तुओं पर कोई बल कार्य करता हुआ प्रतीत नहीं होता है तब भी उनकी चाल धीरे-धीरे कम होती जाती है और वह कुछ समय पश्चात विरामावस्था में आ जाती है। क्या यह संभव है कि वास्तव में कोई बल उन पर कार्य कर रहा हो? यदि हाँ, तो वह कौन-सा बल है?
क्रियाकलाप 5.3- आइए, अन्वेषण करें
- एक समतल सतह वाली वस्तु (जैसे - खाली टिफिन या ज्यामिति बॉक्स या अभ्यास पुस्तिका) लीजिए और उसे मेज पर या धरातल पर रखिए।
- इसे धीरे से धक्का दीजिए और अवलोकन कीजिए (चित्र 5.3)। क्या यह कुछ दूरी तय करने के बाद रुक जाती है? क्या इस पर कोई बल लग रहा है जो इसे विरामावस्था में ला देता है?
- अब वस्तु को विपरीत दिशा में धक्का दीजिए। क्या यह वस्तु अब भी कुछ दूरी तय करने के पश्चात विरामावस्था में आ जाती है?

धक्का देने पर वस्तु एक निश्चित दूरी तक फिसलने के पश्चात विरामावस्था में आ जाती है। ऐसा इस फिसलने वाली वस्तु और संपर्क में आने वाली मेज या धरातल की सतहों के बीच लगने वाले किसी बल के कारण होता होगा और यह बल वस्तु पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता होगा। यही वह बल होगा जो वस्तु को विरामावस्था में लाता है।
जब कोई वस्तु किसी अन्य वस्तु की सतह पर गति करती है या गति करने का प्रयास करती है तो जो बल उस वस्तु की सतह और उसके संपर्क की दूसरी वस्तु की सतह के बीच लगता है उसे घर्षण बल या घर्षण कहते हैं। घर्षण उस दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता है जिसमें वस्तु गति कर रही है या गति करने का प्रयास कर रही है। घर्षण बल एक संपर्क बल होता है क्योंकि यह संपर्क मे रखी दो सतहों के आपेक्षिक गति के कारण उत्पन्न होता है। घर्षण दो संपर्क में आने वाली सतहों में अनियमितताओं के कारण उत्पन्न होता है। यहाँ तक कि चिकनी दिखाई देने वाली सतहों में भी बड़ी संख्या में सूक्ष्म अनियमितताएँ होती हैं (चित्र 5.6)। संपर्क में आने पर दो सतहों की अनियमितताएँ एक-दूसरे के पाश में फँस जाती हैं और एक सतह को दूसरी सतह पर फिसलने के किसी भी प्रयास का विरोध करती हैं।


- क्या इसका तात्पर्य यह है कि यदि सतहें अधिक खुरदरी हैं तो उनके बीच घर्षण बल अधिक होगा?
क्रियाकलाप 5.4- आइए, खोज करें
- क्रियाकलाप 5.3 को पुनः दोहराएँ परंतु इस बार उसी वस्तु को अलग-अलग सतहों, जैसे- काँच, कपड़ा, लकड़ी, सिरेमिक टाइल और रेत पर रखिए।
- क्या वस्तु उतनी ही दूरी चलने के पश्चात विरामावस्था में आती है जितनी दूरी चलने के पश्चात क्रियाकलाप 5.3 में आई थी?
- क्या वस्तु सभी सतहों पर समान दूरी चलने के पश्चात विरामावस्था में आती है?
विभिन्न सतहों पर वस्तु अलग-अलग दूरी तय करने के पश्चात विरामावस्था में आती है। अतः हम यह कह सकते हैं कि घर्षण बल संपर्क में आने वाली सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है। खुरदरी सतहों के बीच घर्षण अधिक होता है।
क्या घर्षण बल केवल तभी लगता है जब वस्तुएँ ठोस सतहों पर गतिमान हों? द्रवों और गैसों में गतिमान वस्तुओं के विषय में आपका क्या विचार है? वायु, जल और अन्य द्रव भी अपने भीतर गतिमान वस्तुओं पर घर्षण बल लगाते हैं। अतः वायुयान, जलयान, नाव और तीव्र गति वाली रेलगाड़ी जैसी वस्तुओं की संरचना का अभिकल्पन कुछ विशिष्ट आकृतियों के साथ किया जाता है। इनके कारण उन पर उनके आस-पास की वायु अथवा जल के कारण लगने वाला घर्षण बल कम हो जाता है।
- क्या एक वस्तु द्वारा दूसरी वस्तु पर बल लगाने के लिए उन दोनों का संपर्क में रहना आवश्यक है?
5.4.2 असंपर्क बल
कुछ बल ऐसे होते हैं जिनका प्रभाव उस समय भी अनुभव किया जा सकता है जब वस्तुएँ परस्पर संपर्क में न हों। इन बलों को असंपर्क बल कहते हैं। आइए, असंपर्क बलों के विषय में जानें।
चुंबकीय बल
क्या आपको स्मरण है कि कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'चुंबकों को जानें' में आपने चुंबकों के विषय में क्या पढ़ा था? हमने सीखा था कि चुंबक, चुंबकीय पदार्थों से निर्मित वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। जब दो चुंबकों को एक-दूसरे के समीप लाया जाता है तो उनके समान ध्रुव (उत्तर-उत्तर, दक्षिण-दक्षिण) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि असमान ध्रुव (उत्तर-दक्षिण) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इस पुस्तक के अध्याय 4 में हमने विद्युत चुंबकों के विषय में भी सीखा था जो चुंबकों की तरह व्यवहार करते हैं। वस्तुओं के बीच आकर्षण और प्रतिकर्षण भी एक प्रकार का धक्का और खिंचाव अर्थात बल होता है। क्या आपको स्मरण है कि एक चुंबक किसी अन्य चुंबक अथवा चुंबकीय पदार्थ पर उसके संपर्क में आए बिना बल लगा सकता है?
क्रियाकलाप 5.5- आइए, परीक्षण करें
- - दो वलय चुंबक और एक लकड़ी की छड़ी लीजिए।
- छड़ी को लकड़ी की मेज पर ऊर्ध्वाधर खड़ा कीजिए और एक वलय चुंबक को छड़ी में पिरो कर मेज की सतह पर रखिए (चित्र 5.7)।
- अब दूसरे वलय चुंबक को उसके ऊपर इस प्रकार डालें कि दोनों चुंबकों के समान ध्रुव एक दूसरे के सामने हों। क्या दूसरा चुंबक पहले चुंबक के ऊपर कुछ दूरी पर तैरता रहता है?
- दूसरे चुंबक को धीरे से नीचे धकेलने का प्रयास कीजिए। क्या आप उस पर लगने वाले बल का अनुभव करते हैं?
- अब दोनों चुंबकों के ध्रुवों को उलट दीजिए। क्या दूसरा चुंबक अभी भी पहले चुंबक के ऊपर तैरता रहता है?

एक चुंबक द्वारा दूसरे चुंबक अथवा चुंबकीय पदार्थ पर लगाए गए बल को चुंबकीय बल कहते हैं। चूँकि एक चुंबक बिना संपर्क में आए भी दूर से बल लगा सकता है इसलिए इसे असंपर्क बल कहते हैं।
क्या ऐसे और भी बल हैं जो एक वस्तु दूसरी वस्तु पर दूर से लगा सकती हैं?
स्थिरवैद्युत बल
क्रियाकलाप 5.6- आइए, प्रयोग करें

- एक प्लास्टिक मापक या प्लास्टिक नलिका (स्ट्रॉ), पॉलीथीन का एक टुकड़ा और कागज के कुछ छोटे-छोटे टुकड़े लीजिए।
- प्लास्टिक मापक या नलिका को पॉलीथीन से अच्छी तरह रगड़िए।
- ध्यान रखिए की रगड़े हुए भाग का स्पर्श आपके हाथ या किसी धातु की वस्तु से न हो।
- अब इसे मेज पर रखे कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों को निकट लाइए ध्यान रखिए कि आपका मापक या नलिका कागज के टुकड़ों को स्पर्श न करें (चित्र 5.8)। क्या आप कुछ आश्चर्यजनक देखते हैं?
जब कुछ निश्चित पदार्थों से बनी दो वस्तुओं को आपस में रगड़ा जाता है तो उनकी सतहों पर विद्युत आवेश उत्पन्न होते हैं। इन आवेशों को स्थैतिक आवेश कहा जाता है क्योंकि ये स्वयं गति नहीं करते। जिस वस्तु पर स्थैतिक आवेश आ जाता है उसे आवेशित वस्तु कहते हैं। एक आवेशित वस्तु कुछ पदार्थों से बनी अनावेशित वस्तुओं, जैसे- कागज के छोटे टुकड़ों को आकर्षित करती है अर्थात उन पर बल लगाती है। आवेशित वस्तु कागज के इन टुकड़ों पर बल इनके संपर्क में आए बिना भी लगाती है।
आइए, विभिन्न पदार्थों से बनी वस्तुओं के साथ एक और क्रियाकलाप करें।क्रियाकलाप 5.7- आइए, प्रयोग करें

- दो गुब्बारे, एक लंबा धागा और एक ऊनी कपड़ा लीजिए।
- दोनों गुब्बारों को फुलाइए एवं इन्हें इस प्रकार लटकाइए कि वे परस्पर स्पर्श न करें जैसाकि चित्र 5.9 (क) में दर्शाया गया है।
- दोनों गुब्बारों को ऊनी कपड़े से रगड़िए और इन्हें छोड़ दीजिए। ध्यान रखिए कि रगड़े हुए गुब्बारों को अपनी अँगुलियों से स्पर्श न करें। आप क्या देखते हैं? हम देखते हैं कि गुब्बारे एक-दूसरे से इस प्रकार दूर जाते हैं मानो वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित कर रहे हों (चित्र 5.9, ख)।
- अब गुब्बारों को रगड़ने के लिए प्रयोग किए गए ऊनी कपड़े को रगड़े हुए गुब्बारों में से एक के पास लाइए। देखिए कि क्या होता है? गुब्बारा ऊनी कपड़े की ओर इस प्रकार बढ़ता है मानो ऊनी कपड़ा उसे अपनी ओर आकर्षित कर रहा हो। इन प्रेक्षणों से हम क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
हमने देखा कि दो समान रूप से आवेशित गुब्बारे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि एक आवेशित गुब्बारा और ऊनी कपड़ा (जिससे गुब्बारे को रगड़ा गया था) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। क्या यह दर्शाता है कि गुब्बारे पर आवेश ऊनी कपड़े पर आवेश से भिन्न प्रकार का है?

- क्या इसका तात्पर्य यह है कि विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं?
चूँकि गुब्बारे एक ही प्रकार से आवेशित किए गए थे अतः हम कह सकते हैं कि इन्होंने एक जैसा आवेश प्राप्त कर लिया। यद्यपि एक समान आवेश के गुब्बारों ने एक-दूसरे को प्रतिकर्षित किया इसलिए हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि समान (एक जैसे) आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। रगड़ने वाली वस्तु और रगड़ी गई वस्तु दोनों आवेशित हो जाती हैं परंतु उनमें विपरीत प्रकार के आवेश आ जाते हैं। उनका आकर्षण दर्शाता है कि विपरीत प्रकार के (विषम) आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इन दो प्रकार के स्थैतिक आवेशों को 'धनात्मक' आवेश और 'ऋणात्मक' आवेश कहा जाता है।
एक आवेशित पिंड द्वारा दूसरे आवेशित अथवा अनावेशित पिंड पर लगाया गया बल स्थिरवैद्युत बल कहलाता है। यह एक असंपर्क बल है।
गुरुत्वाकर्षण बल
क्रियाकलाप 5.8- आइए, अवलोकन करें
- एक गेंद लीजिए और इसे ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर फेकिए। क्या यह नीचे की ओर वापस गिरती है?
- अब इसे पुनः फेंकिए परंतु इस बार अधिक बल से फेंकिए। क्या यह अब भी धरती पर वापस गिरती है?


- सभी वस्तुएँ पृथ्वी की ओर क्यों गिरती हैं?
- क्या कोई बल है जो उन वस्तुओं पर लगता है? यह बल किसके कारण लगता है?
चूँकि सभी वस्तुएँ पृथ्वी की ओर गिरती हैं। इसका अर्थ है कि पृथ्वी उन्हें आकर्षित करती (अपनी ओर खींचती) है। जिस बल से पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है वह गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है। पृथ्वी द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल गुरुत्वीय बल या केवल गुरुत्व भी कहलाता है।

चूँकि गुरुत्वीय बल किसी वस्तु के संपर्क में आए बिना उसे आकर्षित करता है। अतः यह एक असंपर्क बल होता है।
गुरुत्वीय बल सदैव आकर्षी बल होता है जबकि चुंबकीय बल या स्थिरवैद्युत बल आकर्षी या प्रतिकर्षी दोनों में से कोई भी हो सकता है।
आपने अवलोकन किया होगा कि जब किसी वस्तु को किसी ऊँचाई से गिराया जाता है तो वह नीचे की ओर एक ऊर्ध्वाधर सरलरेखीय पथ पर गिरती है (चित्र 5.11, क)। जब किसी वस्तु को ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर फेंका जाता है तो वह सीधी ऊपर की ओर गति करती है फिर उसकी गति धीमी होती है तदनन्तर वह वस्तु शीर्ष पर क्षण भर के लिए रुकती है एवं अंततः वह एक सरलरेखीय पथ पर ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर गिरती है (चित्र 5.11, ख)।
ऊपर जाते समय वस्तु की चाल तब तक घटती जाती है जब तक कि वह विरामावस्था में न आ जाए। इसके पश्चात इसकी गति की दिशा में परिवर्तन हो जाता है और यह नीचे की ओर गिरने लगती है। नीचे की ओर आते समय इसकी चाल में वृद्धि होती जाती है। जब कोई वस्तु गुरुत्वीय बल के अधीन ऊर्ध्वाधर दिशा में गति करती है तो इसकी गति को ऊर्ध्वाधर गति कहते हैं।

- क्या पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को समान बल से आकर्षित करती है?
5.5 भार और उसका मापन
वह बल जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है उस वस्तु का भार कहलाता है। किसी वस्तु का भार यह बताता है कि पृथ्वी उस वस्तु को कितनी प्रबलता से अपनी ओर खींचती है। चूँकि भार एक बल है इसलिए इसे बल के मात्रक में ही मापा जाता है। अतः भार का भी SI मात्रक न्यूटन (N) है।
आइए, अब यह जानने का प्रयास करें कि क्या पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को समान बल से अपनी ओर खींचती है।
क्रियाकलाप 5.9- आइए, खोज करें

- एक स्प्रिंग और अलग-अलग द्रव्यमान की कुछ वस्तुएँ, जैसे- एक पेंसिल बॉक्स, एक टिफिन बॉक्स और एक छोटा पत्थर वस्तु लीजिए।
- स्प्रिंग के एक सिरे को एक कील से लटकाइए (चित्र 5.12, क)। दूसरे सिरे से उपर्युक्त वस्तुओं में से किसी एक वस्तु को लटकाइए एवं स्प्रिंग का निरीक्षण कीजिए (चित्र 5.12, ख)। क्या स्प्रिंग की लंबाई में वृद्धि होती है?
- अब एक-एक करके अन्य वस्तुओं को लटकाइए एवं प्रत्येक बार स्प्रिंग में हुई लंबाई वृद्धि पर ध्यान दीजिए। क्या प्रत्येक वस्तु के कारण लंबाई में वृद्धि समान है?
जब किसी वस्तु को स्प्रिंग से लटकाया जाता है तो पृथ्वी द्वारा वस्तु पर लगाए गए बल के कारण स्प्रिंग की लंबाई में वृद्धि होती है। हम पाते हैं कि स्प्रिंग में उत्पन्न यह लंबाई वृद्धि भिन्न-भिन्न वस्तुओं के लिए भिन्न-भिन्न होती है। इससे ज्ञात होता है कि पृथ्वी विभिन्न वस्तुओं को भिन्न-भिन्न बलों से आकर्षित करती है अर्थात भिन्न-भिन्न वस्तुओं का भार भिन्न-भिन्न होता है। क्या हम स्प्रिंग का उपयोग वस्तु का भार मापने के लिए कर सकते हैं?
कमानीदार तुला (स्प्रिंग बैलेंस) एक सरल उपकरण है जिसका उपयोग भार (बल) मापने के लिए किया जाता है। इसमें कमानी (स्प्रिंग) का एक सिरा ऊपर की ओर स्थिर किया जाता है और दूसरे सिरे पर एक हुक लगा होता है। जब हम किसी वस्तु को कमानी के हुक से लटकाते हैं तो कमानी की लंबाई में वृद्धि होती है एवं इस वृद्धि का परिमाण वस्तु का भार दर्शाता है। इस तुला पर एक पैमाना होता है जिस पर भार (बल) को न्यूटन (N) में दर्शाया जाता है। सामान्यतः इसके साथ द्रव्यमान के संगत मानों को ग्राम (g) में दर्शाने के लिए एक अन्य पैमाना भी होता है। ये मान इस धारणा के साथ अंकित किए गए हैं कि कमानीदार तुला का उपयोग पृथ्वी पर किया जाता है जहाँ पृथ्वी का ग्रुत्वाकर्षण बल वस्तु को आकर्षित करता है।
आइए, हम कमानीदार तुला से भार मापना सीखें। इससे पहले हम स्वयं को कमानीदार तुला से उसी प्रकार परिचित कराएँ जैसे हमने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'ताप एवं उसका मापन' में तापमापी से कराया था।
क्रियाकलाप 5.10- आइए, अवलोकन करें

- चित्र 5.13 में दर्शाई गई कमानीदार तुला को ध्यान से देखिए। यह अधिकतम कितना भार माप सकती है?
आइए, अब हम भार का वह न्यूनतम मान ज्ञात करने का प्रयास करते हैं जो कमानीदार तुला द्वारा मापा जा सकता है।
क्रियाकलाप 5.11- आइए, परिकलन करें
- चित्र 5.13 में दर्शाई गई कमानीदार तुला को देखिए एवं निम्नलिखित को अभिलेखित कीजिए -
- दो बड़े चिह्नों के बीच की दूरी भार का कितना अंतर इंगित करती है? 0 और 01 N के बीच अथवा 01 N एवं 02 N के बीच इंगित भार का अंतर 1 N है।
- इन दो बड़े चिह्नों के बीच कितने भाग (छोटे चिह्नों द्वारा दर्शाए गए) हैं? इन चिह्नों के बीच 5 भाग हैं।
- एक छोटा भाग कितने भार को दर्शाता है? एक छोटा भाग पढ़ सकता है 1N/5 = 0.2N
अब इस विधि का उपयोग करके प्रयोगशाला में आपको दी गई कमानीदार तुला द्वारा मापे जा सकने वाले सबसे छोटे भार का मान ज्ञात कीजिए। आपके विद्यालय की प्रयोगशाला में ऐसी कमानीदार तुलाएँ हो सकती हैं जिनका परास और सबसे छोटे भाग का मान इस तुला से भिन्न हों। अतः यह सदैव आवश्यक है कि किसी कमानीदार तुला का उपयोग करने से पूर्व आप उस कमानीदार तुला (या किसी भी अन्य उपकरण) को ध्यान से देखें।
आइए, अब हम सीखते हैं कि कमानीदार तुला का उपयोग करके भार का मापन कैसे किया जाता है।
क्रियाकलाप 5.12- आइए, मापन करें

- एक कमानीदार तुला और कुछ वस्तुएँ लीजिए। ध्यान रखिए कि वस्तुएँ कमानीदार तुला द्वारा मापे जा सकने वाले अधिकतम भार से अधिक भारी नहीं होनी चाहिए अन्यथा यह क्षतिग्रस्त हो सकती है।
- वस्तुओं को एक-एक करके हुक से लटकाइए (चित्र 5.14)। इसके साथ ही भार के पैमाने को ध्यान से पढ़िए और अपने प्रेक्षणों को तालिका 5.2 में अंकित कीजिए।
तालिका 5.2 – कमानीदार तुला का उपयोग करके भार मापना
| क्र.सं. | वस्तु | भार |
| 1. | पेंसिल बॉक्स | |
| 2. | आंशिक रूप से भरी हुई जल की बोतल | |
किसी वस्तु का द्रव्यमान मापने के लिए आप कमानीदार तुला (चित्र 5.13) पर बाईं ओर दर्शाए गए द्रव्यमान पैमाने का उपयोग करके क्रियाकलाप 5.10 से 5.12 दोहरा सकते हैं।

- भार और द्रव्यमान में क्या अंतर है?
जैसाकि हम पहले कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'हमारे आस-पास की सामग्री' में सीख चुके हैं कि द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा है और इसे ग्राम (g) अथवा किलोग्राम (kg) में मापा जाता है। इसका मान प्रत्येक स्थान पर समान रहता है। दूसरी ओर भार वह गुरुत्वाकर्षण बल है जिससे पृथ्वी (या कोई अन्य ग्रह) किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। चूँकि गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर बहुत कम ही सही पर परिवर्तित हो सकता है (और विभिन्न ग्रहों पर पूर्णतया भिन्न हो सकता है)। अतः हम कह सकते हैं कि वस्तु के भार में तो परिवर्तन हो सकता है पंरतु उसके द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता है।
| पृथ्वी | चंद्रमा | मंगल | शुक्र | बृहस्पति | |
| वस्तु का द्रव्यमान | 1 kg | 1 kg | 1 kg | 1 kg | 1 kg |
| वस्त का भार | 10 N | 1.6 N | 3.8 N | 9 N | 25.4 N |
5.6 तैरना और डूबना

- यदि हम कुछ वस्तुओं को जल की सतह पर रखते हैं तो उनमें से कुछ वस्तुएँ तैरती हैं जबकि कुछ नीचे डूब जाती हैं। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल सभी वस्तुओं पर कार्य कर रहा है तो सभी वस्तुएँ जल के पात्र की तली की ओर क्यों नहीं गिरती?
क्रियाकलाप 5.13- आइए, अन्वेषण करें
- एक खाली बोतल (जिसका ढक्कन कस कर बंद हो) और जल से भरी एक बाल्टी लीजिए।
- बोतल को जल की सतह पर रख कर नीचे की ओर धकेलिए (चित्र 5.15)। क्या आप बोतल पर ऊपर की ओर लगते हुए बल का अनुभव करते हैं? बोतल को छोड़ दीजिए। क्या वह उछलकर ऊपर आती है?

जब किसी वस्तु को द्रव में रखा जाता है तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उस पर नीचे की ओर कार्य करता है। परंतु द्रव द्वारा उस पर ऊपर की दिशा में एक उत्प्लावन बल लगाया जाता है। यदि गुरुत्वाकर्षण बल उत्प्लावन बल से अधिक है तो वस्तु डूब जाती है परंतु यदि दोनों बल एक दूसरे के बराबर होते हैं तो वस्तु तैरती है। उत्प्लावन बल जिस कारक पर निर्भर करता है वह द्रव का घनत्व है। आप इस पुस्तक के आगे के अध्याय में घनत्व के विषय में जानेंगे।
कुछ चट्टानें ऐसी होती हैं जो जल पर तैर सकती हैं। ऐसी ही एक चट्टान है प्यूमिस जो ज्वालामुखी विस्फोटों के समय निर्मित होती है। जब गैस और जलवाष्प से परिपूर्ण लावा तेजी से ठंडा होता है तो गैस के छोटे-छोटे बुलबुले इसके भीतर फँस जाते हैं। इससे एक हल्की एवं छिद्रयुक्त चट्टान बनती है जो वायु कोटरिकाओं (वायु पॉकेट्स) से भरी होती है। यह चट्टान जल की अपेक्षा हल्की होती है एवं जल पर तैरती है।- बल किसी वस्तु पर लगने वाला अपकर्षण या अभिकर्षण है जो उस वस्तु पर किसी अन्य वस्तु की उसके साथ पारस्पिरक क्रिया के परिणामस्वरूप आरोपित होता है।
- बल का SI मात्रक न्यूटन है और इसका प्रतीक N है।
- वस्तु पर बल संपर्क द्वारा भी लग सकता है एवं बिना संपर्क के भी लग सकता है।
- पेशीय बल एवं घर्षण बल संपर्क बलों के उदाहरण हैं।
- चुंबकीय बल, गुरुत्वाकर्षण बल और स्थिरवैद्युत बल असंपर्क बल होते हैं।
- बल किसी वस्तु की चाल उसकी गति की दिशा या दोनों में परिवर्तन कर सकता है। बल किसी वस्तु के आकार को भी परिवर्तित कर सकता है।
- जब कोई वस्तु किसी सतह पर गति करती है या गति करने का प्रयास करती है तो इस कारण से जो बल उत्पन्न होता है उसे घर्षण बल या सरल शब्दों में केवल घर्षण कहते हैं। यह उस दिशा के विपरीत दिशा में है। कार्य करता है जिस दिशा में वस्तु गति कर रही है या गति करने का प्रयास कर रही
- एक चुंबक द्वारा दूसरे चुंबक अथवा चुंबकीय पदार्थ पर लगाया गया बल चुंबकीय बल कहलाता है।
- एक आवेशित पिंड द्वारा किसी अन्य आवेशित पिंड या अनावेशित पिंड पर लगाए गए बल को स्थिरवैद्युत बल कहते हैं।
- वह बल जिससे पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है। यह सदैव एक आकर्षण बल होता है।
- वह बल जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है वह वस्तु का भार कहलाता है। भार का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
- किसी वस्तु का द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है जबकि उसका भार भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न हो सकता है।
- जब किसी वस्तु को किसी द्रव में रखा जाता है तो द्रव द्वारा उस वस्तु पर ऊपर की ओर लगाया गया बल उत्क्षेप या उत्प्लावन बल कहलाता है।
- स्तंभ 'क' में दिए गए बल का मिलान स्तंभ 'ख' के संगत उदाहरण से कीजिए।
- बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य।
(i) किसी गतिशील वस्तु की चाल में परिवर्तन हेतु सदैव एक बल की आवश्यकता होती है। [ ]
(ii) घर्षण के समतल सतह पर लुढ़कती हुई गेंद की चाल में वृद्धि हो जाती है। [ ]
(iii) एक दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित दो आवेशित वस्तुओं के बीच कोई बल नहीं लगता है। [ ] - दो गुब्बारों को ऊनी कपड़े से रगड़ कर एक-दूसरे के समीप लाया जाए तो क्या होगा और क्यों?
- जब आप जल से भरे गिलास में एक सिक्के को डालते हैं तो वह डूब जाता है परंतु जब आप एक बड़ा लकड़ी का टुकड़ा जल में डालते हैं तो वह तैरता है। व्याख्या कीजिए।
- यदि एक गेंद को ऊपर की ओर फेंका जाता है तो वह धीमी होती जाती है फिर एक क्षण के लिए विरामावस्था में आती है एवं पुनः धरती पर गिर जाती है। गेंद पर लगने वाले बलों का नाम एवं उसकी दिशाएँ बताइए -
(i) ऊपर की ओर गति की कालावधि में
(ii)(नीचे की ओर गति की कालावधि में
(iii) इसकी सबसे ऊपरी स्थिति पर - . एक गेंद को बिंदु 'क' से छोड़ा जाता है और वह एक नत तल पर एवं इसके पश्चात एक क्षैतिज सतह पर गति करती है जैसाकि चित्र 5.16 में दर्शाया गया है। क्षैतिज सतह पर यह बिंदु 'ख' पर विरामावस्था में आ जाती है। एक ऐसी विधि लिखिए जिसमें गेंद को उसी बिंदु 'क' से छोड़ा जाए तो वह (i) बिंदु 'ख' से पूर्व (ii) बिंदु 'ख' को पार करने के पश्चात विरामावस्था में आए।
- यदि हम सावधान न रहें तो चिकनी सतहों जैसे बर्फ या पॉलिश की हुई सतह पर क्यों फिसल जाते हैं? समझाइए।
- यदि कोई वस्तु असमान गति से चल रही है तो क्या इस पर कोई बल लगाया जा रहा है?
- चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार के छठवें भाग के समान हो जाता है। इस परिवर्तन का क्या कारण है? क्या वस्तु का द्रव्यमान चंद्रमा पर भी पृथ्वी पर उसके द्रव्यमान का छठवाँ भाग हो जाता है?
- समान आमाप और आकृति की भिन्न-भिन्न पदार्थों से बनी तीन वस्तुएँ 1, 2 और 3 जल में रखी गई हैं। वे भिन्न-भिन्न गहराई तक डूबती हैं जैसाकि चित्र 5.17 में दर्शाया गया है। यदि तीनों वस्तुओं 1, 2 और 3 के भार क्रमशः W1, W2 और W3 हैं तो निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सत्य है?
(i) w1 = w2 = w3
(ii) w1 > w2 > w3
(iii) w2 > w3 > w1
(iv) w3 > w1 > w2
| स्तंभ 'क' (बल का प्रकार) | स्तंभ 'ख' (उदाहरण) |
| पेशीय बल | (क) एक क्रिकेट की गेंद का सीमा रेखा की स्पर्श करने से ठीक पूर्व अपने आप रुकना |
| - चुंबकीय बल (ख) | बच्चे द्वारा अपना बस्ता (स्कूल बैग) उठाना |
| घर्षण बल | (ग) पेड़ से फल का गिरना |
| (iv) गुरुत्व बल | (घ) ऊनी कपड़े पर रगड़े गए गुब्बारे द्वारा बालों को आकर्षित करना |
| (v) स्थिरवैद्युत बल | ) (ङ) उत्तर दिशा की ओर इंगित करती एक दिक्सूचक सुई |

- विभिन्न पदार्थों, जैसे – प्लास्टिक, ऊन, रेशम, रबर, पॉलीथीन शीट, कागज और धातुओं से बनी वस्तुओं को एकत्रित कीजिए। एक वस्तु को दूसरी वस्तु से रगड़िए एवं जाँचिए कि क्या यह कागज के छोटे टुकड़ों को आकर्षित करती है या नहीं अथवा यह आवेशित होती है या नहीं। अपने प्रेक्षणों को व्यवस्थित ढंग से अभिलेखित कीजिए और एक शोध पत्र लिखिए।
- एक ऐसे परिदृश्य की कल्पना कीजिए जहाँ गुरुत्वाकर्षण विलुप्त हो जाता है। एक कहानी तैयार कीजिए। अपनी कहानी प्रस्तुत करने के लिए एक हास्य पट्टी (कार्टून स्ट्रिप) बनाइए। अपनी कक्षा में घर्षण - एक आवश्यकता या एक समस्या, विषय पर एक चर्चा कीजिए। चर्चा का संक्षिप्त विवरण अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए और बताइए कि घर्षण कहाँ आवश्यक है और कब यह एक समस्या बन जाता है?
- अपने शिक्षक की सहायता से अपनी स्वयं की एक कमानीदार तुला बनाइए और मानक भारों का उपयोग करके इसे चिह्नित कीजिए। अब विभिन्न वस्तुओं के भार मापिए और विभिन्न वस्तुओं के भार और द्रव्यमान के अनुपात की गणना कीजिए। क्या आप कोई स्पष्ट संबंध देखते हैं?
- विद्युतदर्शी (इलेक्ट्रोस्कोप) एक ऐसा उपकरण है जो यह निर्धारित कर सकता है कि कोई वस्तु विद्युत आवेशित है या नहीं। आप अपनी कक्षा में अपने शिक्षक की सहायता से स्वयं का विद्युतदर्शी बना सकते हैं (चित्र 5.18) एवं उपकरण का परीक्षण कर सकते हैं। पता लगाइए कि आप इस विद्युतदर्शी का अन्य किन विधियों से उपयोग कर सकते हैं।
