- वायु की गति अन्य दिनों की तुलना में कुछ दिनों में अधिक तीव्र क्यों होती है?
- जल की टंकियों को प्रायः ऊँचाई पर क्यों रखा जाता है?
- क्या वायु दाब हमें वस्तुतः दबा सकता है?
- झंझावात एवं चक्रवात किन कारणों से होते हैं? यदि पृथ्वी का घूमना रुक जाए तो क्या चक्रवात फिर भी बनेंगे?
- अपने प्रश्नों को साझा कीजिए।
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_____________?
आपने देखा होगा कि भूमि पर गिरी हुई पत्तियाँ हवा में घूमती हैं या उड़ जाती हैं। साथ ही तीव्र हवा चलने पर पेड़ हिलने या झुकने लगते हैं। क्या आपने कभी विचार किया कि गिरी हुई पत्तियाँ वायु में ऊपर क्यों उठती हैं तथा पेड़ लहराते हुए झुक क्यों जाते हैं? क्या वायु गिरी हुई पत्तियों पर कोई बल लगाती है जिससे वे ऊपर उठती हैं तथा पेड़ झुक जाते हैं? इसी प्रकार वायु द्वारा आरोपित बल के अन्य प्रभावों, जैसे- दरवाजों का बंद होना, खिड़कियों का खड़खड़ाना या कपड़ों का लहराना आदि का स्मरण कीजिए। ये सभी वायु द्वारा उत्पन्न बल से किस प्रकार संभव होते हैं? वायु द्वारा आरोपित बल वायु दाब है जिसके कारण ये सभी प्रभाव दिखाई देते हैं। इस अध्याय में हम बल और दाब के मध्य संबंध का अध्ययन करेंगे और समझेंगे कि यह किस प्रकार तड़ित झंझावात और चक्रवात जैसी शक्तिशाली प्राकृतिक घटनाओं का कारण बनते हैं।
6.1 दाब
मेघा और उसका भाई पवन भ्रमण पर जा रहे हैं। वे दोनों भ्रमण स्थल पर अपने बस्तों में कुछ सामग्रियाँ लेकर जाते हैं (चित्र. 6.1)। मार्ग में पवन अपने बस्ते को कंधों पर उठाने में कठिनाई का अनुभव करता है और बार-बार अपने बस्ते को ठीक करता है। मेघा पूछती है, "क्या आपको बस्ते से कोई समस्या है?" पवन उत्तर देता है, "हाँ, इससे मेरे कंधों में पीड़ा हो रही है।" मेघा कहती है, "हम दोनों के बस्ते समान रूप से भारी हैं तो आपको पीड़ा क्यों हो रही है जबकि मेरे बस्ते से मुझे क्यों नहीं?” पवन कुछ क्षण के लिए विचार करता है और कहता है, "संभवतः इसका कारण हम दोनों के बस्तों की पट्टियों का अंतर है। मेरे बस्ते की पट्टियाँ संकरी हैं जबकि आपके बस्ते की पट्टियाँ चौड़ी हैं।"
क्या पट्टियों का आकार एवं आकृति वास्तव में कोई अंतर उत्पन्न करता है? आइए इसे समझने का प्रयास करते हैं।जब हम बस्ता लेकर चलते हैं तो गुरुत्व बल के कारण हमारे कंधों पर उसका भार अनुभव होता है। संकरी पट्टियों वाले बस्ते का भार हमारे कंधों के कम क्षेत्रफल पर कार्य करता है जबकि चौड़ी पट्टियों वाले बस्ते का भार हमारे कंधों के अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ होता है। इस कारण जब हम संकरी पट्टी की अपेक्षा चौड़ी पट्टी वाले बस्ते का उपयोग करते हैं तो हमें अधिक सुविधाजनक लगता है। वह क्षेत्रफल जिस पर बल कार्य करता है उस राशि को हम दाब कहते हैं जो किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है।
So, दाब = बल/क्षेत्रफलसंकरी पट्टियों की तुलना में चौड़ी पट्टियों वाला बस्ता हमारे कंधों पर डाले गए दाब को घटा देता है। अतः हम चौड़ी पट्टियों वाले बस्ते को उठाने में अधिक सुविधा का अनुभव करते हैं। अब आप समझ गए होंगे कि जल से भरी चौड़े हत्थे वाली बाल्टी को संकरे हत्थे वाली बाल्टी की तुलना में उठाना सुविधाजनक क्यों होता है (चित्र 6.2)। आपने देखा होगा कि जब लोग घड़ों या सब्जी की टोकरियों को अपने सिर पर रखते हैं तो वे प्रायः इनके नीचे कपड़े का गोला बनाकर रखते हैं (चित्र 6.3)। दोनों ही स्थितियों का उद्देश्य है कि जहाँ भार कार्य कर रहा है वहाँ दाब कम करने के लिए क्षेत्रफल बढ़ा दिया जाए।
एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब के रूप में परिभाषित किया जाता है। बल का SI मात्रक न्यूटन है और क्षेत्रफल का मीटर'। अतः दाब का SI मात्रक न्यूटन मीटर (N/m²) है। इस मात्रक को पास्कल भी कहते हैं जिसे Pa द्वारा निरूपित किया जाता है।
यदि 2 m² क्षेत्रफल के गत्ते पर 100 N का बल लगाया जाए तो गत्ते पर लगने वाला दाब होगा-
दाब = बल/क्षेत्रफल = 100 N/2 m2 = 50 N/m2
दैनिक जीवन में अनेक स्थितियाँ ऐसी होती हैं जहाँ दाब की भूमिका होती है। तालिका 6.1 में दिए गए क्रियाकलापों को करें और अपने प्रेक्षणों को तालिका में अंकित कीजिए तथा समझाइए कि दाब किस प्रकार प्रत्येक क्रियाकलाप की कार्यविधि को प्रभावित करता है।
तालिका 5.2 – कमानीदार तुला का उपयोग करके भार मापना
| क्रियाकलाप | कार्य विधि | क्रियान्वयन में सरल या जटिल? कारण दीजिए | |
| लोहे की कील को ठोकना | कील के शीर्ष की ओर से | कील के नुकीले सिरे की ओर से | |
| चाकू से सेब को काटना | चाकू की तीक्ष्ण धार से | चाकू की कुंद धार से | |
तालिका 6.1 के प्रेक्षणों से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
हम निष्कर्ष निकालते हैं कि जब बल कम क्षेत्रफल पर लगाया जाता है तो परिणामी दाब अधिक होता है। वह किसी निश्चित कार्य को सरल बना देगा। इसी कारण एक कील को उसके शीर्ष की ओर से ठोकना और चाकू की तीक्ष्ण धार से सेब को काटना अधिक सुविधाजनक होता है।आपने जल आपूर्ति हेतु स्थानीय क्षेत्रों में तथा घरों की छतों पर रखी उपरिवर्ती टंकियों को देखा होगा। (चित्र 6.4) इन टंकियों को सदैव ऊँचाई पर ही क्यों रखा जाता है?
- क्या द्रव भी दाब डालते हैं?
क्रियाकलाप 6.1 – आइए, प्रयास करें और जानें
- दर्शाए गए चित्र 6.5 के अनुसार समान लंबाई (लगभग 25 cm) परंतु असमान व्यास वाले दो पारदर्शी काँच अथवा प्लास्टिक के पाइप लीजिए।
- दो अच्छी गुणवत्ता के रबर के गुब्बारे लीजिए। इन्हें प्रत्येक पाइप के एक सिरे पर लगा दीजिए।
- पाइपों को चित्र 6.5 के अनुसार स्टैंड पर कस दीजिए।
- अब जल से दोनों पाइपों को समान स्तर तक लगभग आधा भर दीजिए।
- अवलोकन कीजिए कि गुब्बारों का क्या होता है?
- क्या दोनों गुब्बारे फूल जाते हैं? क्या दोनों गुब्बारे समान रूप से फलते हैं?
क्या ऐसा हो सकता है कि इस स्थिति में जल-स्तंभ दाब डाल रहा हो? हाँ, यह जल-स्तंभद्वारा डाला गया दाब ही है जो फैलाव के लिए उत्तरदायी होता है। अतः पाइपों का असमान व्यास होते हुए भी समान ऊँचाई का जल-स्तंभ गुब्बारों में समान फैलाव उत्पन्न करता है।
- यदि पाइप के भीतर जल स्तंभ की ऊँचाई में वृद्धि की जाए तो गुब्बारे के फैलाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
चित्र 6.5 के अनुसार किसी एक पाइप में थोड़ा अतिरिक्त जल डालकर गुब्बारे के फैलाव का अवलोकन कीजिए। इस प्रक्रिया को अनेक बार दोहराइए। प्रत्येक बार में थोड़ा अतिरिक्त जल डालते जाइए और दर्शाए गए चित्र 6.6 के अनुसार गुब्बारे के फैलाव के विस्तार को अंकित करते जाइए।
क्या आप रबड़ के गुब्बारे के फैलाव और पाइप के जल स्तंभ की ऊँचाई के मध्य कोई संबंध पाते हैं? आपने यह अवलोकन किया होगा कि गुब्बारे का फैलाव जल स्तंभ में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ता है।इस प्रकार पाइप में जल स्तंभ की ऊँचाई जैसे-जैसे बढ़ती है वैसे-वैसे पाइप के तल पर दाब में वृद्धि होती जाती है। इसके कारण गुब्बारे का फैलाव भी बढ़ता जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि एक पात्र में द्रव द्वारा लगाया गया दाब द्रव स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है। यही कारण है कि जल की टंकियों को एक निश्चित ऊँचाई पर रखा जाता है जिससे नलों में जल का दाब बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप नल से जल की धारा तीव्र हो जाती है।
मान लीजिए कि आप तीन मंजिला भवन के द्वितीय तल पर रहते हैं और जल की टंकी सबसे ऊपर के तल की छत पर रखी हुई है। आप अथवा प्रथम तल पर रहने वाले आपके मित्र दोनों में से किसे नल से निकलने वाले जल का अधिक प्रवाह प्राप्त होगा? कारण बताइए।
क्या द्रव पात्र की दीवारों पर भी दाब डालते हैं?
आइए, निम्नलिखित क्रियाकलाप द्वारा इसका पता लगाएँ।
क्रियाकलाप 6.2- आइए, पता लगाएँ
- एक उपयोग की हुई प्लास्टिक की बोतल लीजिए और उसका ढक्कन हटा दीजिए। एक कील अथवा सुई की सहायता से बोतल में तल के समीप की पार्श्व सतहों पर चार छोटे छिद्र कीजिए। ध्यान रहे कि सभी छिद्र तल से समान ऊँचाई पर हों जैसाकि चित्र 6.7 में दर्शाया गया है (यदि आपको छिद्र बनाने में कठिनाई होती है तो आप सुई को थोड़ा गरम करके बोतल में छिद्र बना सकते हैं।)।
- चिपकाने वाली टेप की सहायता से छिद्रों को बंद कीजिए एवं बोतल को जल से भर दीजिए।
- अब एक ही समय पर सभी छिद्रों से टेप को हटा दीजिए।
- आपने क्या अवलोकन किया?
क्या आप जानते हैं कि बाँध की दीवारों का आधार उसके ऊपरी भाग से अधिक चौड़ा होता है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चौड़ा आधार न केवल बाँध की संरचना में अपितु तल के समीप क्षैतिज जल के दाब को सहन करने में भी सहायक है (चित्र 6.8)। बाँध में एकत्रित जल बाँध की दीवारों पर क्षैतिज रूप से तथा जल स्तर की ऊँचाई के कारण बाँध के तल पर ऊर्ध्वाधर रूप से दाब डालता है। दाब क्षैतिज रूप से कार्य करता है और यह तल के पास अधिक होता है। अतः बाँध का आधार इसलिए चौड़ा बनाया जाता है ताकि वह जल द्वारा लगने वाले दाब को सुगमतापूर्वक वहन कर सके।
आइए, अब यह समझने का प्रयास करें कि क्या वायु भी दाब आरोपित करती है?
6.2 वायु द्वारा आरोपित दाब
आप पहले से जानते हैं कि हमारे चारों ओर वायु विद्यमान है। पृथ्वी के चारों ओर वायु के आवरण को वायुमंडल कहा जाता है। वायु में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, ऑर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और अल्प मात्रा में अन्य गैसें विद्यमान होती हैं। पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर ऊपर तक वायुमंडल विस्तारित है।
आइए, निम्नलिखित क्रियाकलाप द्वारा पता लगाते हैं कि वायुमंडल किस प्रकार दाब आरोपित करता है।
क्रियाकलाप 6.3- आइए, खोज करें
- कागज की एक प्लेट लेकर उसे उल्टा कीजिए और चित्र 6.9 (क) के अनुसार उस पर एक छड़ लगाकर इसे एक समतल सतह पर रख दीजिए।
- 70cm * 56 cm आकार के दो समान पत्रक (चार्ट) लीजिए। एक पत्रक को दो बार मोड़िए और उसके केंद्र में एक छिद्र कीजिए। यह छिद्र पर्याप्त रूप से बड़ा हो ताकि छड़ बाहर आ सके। तह किए हुए पत्रक को चित्र 6.9 (ख) के अनुसार उल्टी रखी कागज की प्लेट के ऊपर रख दीजिए।
- अब कागज की जो प्लेट तह किए गए चार्ट पत्रक से ढकी है, उसे छड़ द्वारा उठाने का प्रयास कीजिए।
- अवलोकन कीजिए कि उसे उठाने के लिए हमें कितना प्रयास करना पड़ा।
- अब तह लगे चार्ट पत्रक के स्थान पर बिना तह लगे दूसरे चार्ट पत्रक को रख दीजिए। छड़ को चार्ट पत्रक से निकालने के लिए चार्ट के बीच एक छिद्र बना दीजिए। चित्र 6.9 (ग) में दर्शाए गए अनुसार कागज की प्लेट को इस बिना तह लगे चार्ट पत्रक से ढक दीजिए।
- कागज की प्लेट को पुनः उठाइए। इसे उठाने में लगाए गए बल का अनुभव कीजिए।
- किस स्थिति में कागज की प्लेट को उठाना अधिक सुविधाजनक है? तह किए हुए पत्रक को अथवा बिना तह किए हुए चार्ट पत्रक को जिसने कागज की प्लेट को ढक रखा है।
अधिकांशतः यह बल ढकने वाले पत्रक के बढ़ते क्षेत्रफल के साथ बढ़ता जाता है। इसका अर्थ यह है कि वायु कागज की प्लेट पर दाब आरोपित करती है जो कि ढकने वाले पत्रक के क्षेत्रफल के बढ़ने के साथ बढ़ता है। जैसाकि हम जानते हैं कि प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं तो हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि वायु कागज पत्रक पर दाब आरोपित करती है। वस्तुतः वायु सभी वस्तुओं पर दाब आरोपित करती है। हमारे चारों ओर वायु द्वारा डाला गया दाब वायुमंडलीय दाब कहलाता है।
आपने अनुभव किया होगा कि जब आप गुब्बारे में वायु भरते हैं तो वह फूल जाता है। क्यों? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गुब्बारे के अंदर भरी वायु गुब्बारे की आंतरिक दीवारों पर दाब आरोपित करती है (चित्र 6.10)। क्या हम यह कह सकते हैं कि वायु सभी दिशाओं में दाब आरोपित करती है? हाँ, इसीलिए गुब्बारा सभी दिशाओं में फैलता है। क्या होता है जब एक फूले हुए गुब्बारे के मुँह को बिना बंद किए रख दिया जाता है? गुब्बारे से वायु निकल जाती है। गुब्बारे से वायु क्यों निकल जाती है?
क्या आपने कभी सोचा है कि वायुमंडलीय दाब कितना व्यापक है? आइए, निम्नलिखित क्रियाकलाप के द्वारा इसके परिमाण की व्यापकता का अनुभव करते हैं।क्रियाकलाप 6.4 – आइए, करके देखें
- एक उत्तम गुणवत्ता वाला रबर का चूषक लीजिए। इसे एक समतल चिकने पृष्ठ पर बलपूर्वक दबाइए (चित्र 6.11)।
- क्या आपने अनुभव किया कि यह सतह से चिपकता है?
- अब इसे खींचने का प्रयास कीजिए। क्या आपको इसे बाहर खींचने में कठिनाई होती है?
जब हम चूषक को दबाते हैं तो उसके कप एवं पृष्ठ (जिस पर उसे रखा गया है) के बीच की अधिकतम वायु बाहर निकल जाती है एवं भीतर का वायु दाब कम हो जाता है। चूषक सतह से इसलिए चिपकता है क्योंकि चूषक के चारों ओर वायु दाब चूषक के भीतर की वायु द्वारा डाले गए दाब से अधिक होता है। चूषक को सतह से खींचने के लिए लगने वाला बल पर्याप्त होना चाहिए ताकि चूषक के बाहर और भीतर के दाब के अंतर को पार किया जा सके।
क्या आप जानते हैं कि वायुमंडलीय दाब कितना अधिक होता है? 15cm * 15cm क्षेत्रफल पर वायु स्तंभ द्वारा लगने वाला बल उस गुरुत्वीय बल के लगभग समान होता है जो 225 kg द्रव्यमान (2250 N) के पिंड पर लगता है। इतना भार होने के पश्चात भी हम इसलिए नहीं दबते हैं क्योंकि हमारे शरीर के भीतर का दाब वायुमंडलीय दाब के समान है और यह बाहर से लगने वाले दाब को संतुलित कर देता है। हमारे शरीर के भीतर का दाब शरीर के अंगों और ऊतकों में तरल पदार्थों व गैसों की गति के कारण होता है।
6.3 पवन का बनना
आपने देखा होगा कि किसी दिन वायु का प्रवाह तीव्र होता है जबकि अन्य दिनों वायु मंद गति से बहती है। कभी-कभी वायु अत्यधिक तीव्र हो कर आँधी झंझावात (तूफान) में परिवर्तित हो जाती है जिसके कारण जीवन एवं संपत्ति को हानि पहुँचती है।
आपने देखा होगा कि वायु से भरे हुए गुब्बारे के मुँह को यदि खुला छोड़ दिया जाए तो गुब्बारे से वायु निकल जाती है। याद कीजिए जब साइकिल की ट्यूब में छेद (पंचर) होता है तो वायु बाहर निकल जाती है और ट्यूब पिचक जाती है। इन दोनों घटनाओं में क्या वायु उच्च दाब वाले क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है?
- क्या वायुदाब में अंतर पवन के बनने से संबंधित है?
- पवन कैसे बनती है?
आइए, निम्नलिखित क्रियाकलाप द्वारा इसका पता लगाएँ।
क्रियाकलाप 6.5 – आइए, अवलोकन करें
- पतले रबड़ के बने हुए एक समान दो गुब्बारे और एक नलिका लीजिए।
- नलिका का एक सिरा गुब्बारे में डालिए और इसे एक रबड़ बैंड अथवा धागे से बाँध दीजिए।
- अब दूसरे गुब्बारे को फुलाइए और इसके मुँह को अँगुलियों से पकड़िए जिससे हवा बाहर न जाए।
- नलिका के दूसरे सिरे को फूले हुए गुब्बारे में डालिए और उसे रबड़ बैंड अथवा धागे से बाँध दीजिए। नलिका को गुब्बारे में डालते समय यह अथवा धागे से बाँध दीजिए। नलिका को गुब्बारे में डालते समय यह सुनिश्चित कीजिए कि गुब्बारे से हवा बाहर न निकले। दर्शाए गए चित्र 6.12 के अनुसार नलिका का एक सिरा फूले हुए गुब्बारे में तथा दूसरा सिरा बिना फूले हुए गुब्बारे के भीतर है।
- अनुमान लगाइए कि गुब्बारों का क्या होगा?
- अनुमान लगाइए कि गुब्बारों का क्या होगा?
- अब फूले हुए गुब्बारे के मुँह से अपनी अँगुलियों को हटा दीजिए।
- अवलोकन कीजिए कि दोनों गुब्बारों के साथ क्या हुआ? क्या यह पूर्वानुमान के अनुरूप हुआ है?
- क्या आपने गुब्बारों के आकार में कोई परिवर्तन देखा? अपने अवलोकनों को लिखिए। ...............
क्या आपने ध्यान दिया कि कुछ समय पश्चात दोनों गुब्बारों का आकार लगभग समान हो गया और वायु का प्रवाह भी बंद हो गया? वायु का प्रवाह क्यों बंद हुआ? वायु का प्रवाह तब तक चलता रहता है जब तक फूले हुए गुब्बारे में वायु का दाब बिना फूले हुए गुब्बारे से अधिक रहता है। जब दोनों गुब्बारों में वायु दाब समान हो जाता है तो वायु का प्रवाह बंद हो जाता है। इस अवस्था में दोनों गुब्बारों का आकार लगभग समान हो जाता है। अतः हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
आप इस निष्कर्ष को समुद्र एवं स्थल समीर की दिशाओं से जोड़ कर देख सकते हैं जिसे आपने कक्षा 7 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में पढ़ा था। दिन के समय जल की तुलना में स्थल तीव्रता से गरम होता है जिससे स्थल के ऊपर की वायु गरम और हल्की होकर ऊपर उठती है और वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है।
वायु समुद्र के उच्च दाब वाले क्षेत्र से स्थल पर बने निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है। परिणामस्वरूप समुद्र समीर उत्पन्न होती है। रात्रि में स्थल की तुलना में जल अधिक गरम होता है। फलस्वरूप समुद्र के ऊपर निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है इससे वायु स्थल से समुद्र की ओर प्रवाहित होती है एवं यह स्थल समीर उत्पन्न करती है। इस प्रकार स्थल समीर और समुद्र समीर की परिघटनाएँ मुख्य रूप से स्थल और समुद्र के वायु दाब में अंतर के कारण होती हैं।
यदि हम क्रियाकलाप 6.5 में बाहर निकलती वायु की चाल को माप सकें तो हम पाएँगे यदि दाब का अंतर अधिक है तो वायु की चाल भी अधिक होगी।
- मैंने पढ़ा है कि तीव्रगामी पवन छतें उड़ा सकती हैं।
- मै आश्चर्यचकित हूँ! कैसे?
6.4 तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है
क्रियाकलाप 6.6 – आइए, अवलोकन करें
- लगभग समान आमाप के दो गुब्बारे लीजिए।
- दोनों गुब्बारों को फुलाइए और प्रत्येक को डोरी से एक छड़ी पर बाँधिए।
- 6-10 सेंटीमीटर के अंतराल पर दोनों गुब्बारों को किसी छड़ से लटका दीजिए (चित्र 6.13)।
- अब गुब्बारों के बीच के संकरे स्थान में फूँक मारिए।
- गुब्बारों का क्या होता है? अपने अवलोकन को लिखिए।
- अब अधिक वेग से फूँक मारिए और अवलोकन कीजिए।
जब आप दो गुब्बारों के बीच में फूंक मारते हैं तो आप देखते हैं कि वे एक-दूसरे की ओर आने का प्रयास करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दोनों गुब्बारों के बीच फूंक मारने से इनके बीच निम्न दाब वाला क्षेत्र बन जाता है। अतः गुब्बारों के चारों ओर की वायु का अधिक दाब उन्हें एक दूसरे की ओर धकेलता है। आपने यह अवलोकन किया होगा कि अधिक वेग से फूंक मारने से गुब्बारे भी अधिक वेग से एक दूसरे के निकट आते हैं। इस क्रियाकलाप से हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? हम निष्कर्ष निकालते हैं कि तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है।
जब तीव्रगामी पवन घरों के ऊपर से प्रवाहित होती है तो वहाँ एक निम्न दाब क्षेत्र बन जाता है क्योंकि तीव्रगामी पवन दाब को कम करने में सहायक होती है। फलस्वरूप घरों की छतों के ऊपर वायुदाब घर के भीतर के वायु दाब से कम हो जाता है। यदि वायुदाब का अंतर अधिक हो तो क्षतिग्रस्त छतें उड़ सकती हैं जैसाकि चित्र 6.14 (क) में दर्शाया गया है। यही कारण है कि तीव्रगामी पवन के साथ जब झंझावात आता है तो घरों के दरवाजों और खिड़कियों को खुला रखना सुरक्षित होता है। जब तीव्रगामी पवन छतों के ऊपर से एवं घरों के भीतर से चलती है तो घरों के भीतर एवं छतों के ऊपर दाब अंतर अत्यधिक कम हो जाता है। इस प्रक्रिया से घरों की छतों को उड़ने से बचाया जा सकता है जैसाकि चित्र 6.14 (ख) में दर्शाया गया है।
आपने अनुभव किया होगा कि झंझावातों के समय जब पवन की - गति तीव्र होती है तो कभी-कभी वह गर्जन एवं तड़ित के साथ आती है। आइए इसके विषय में हम और अधिक जानें।
6.5 झंझावात, तड़ितझंझा और तड़ित
- क्या आपने वर्षा ऋतु में बादलों की गर्जन एवं तड़ित देखी है।
- हाँ, बादलों की गर्जन बहुत भयावह होती है! सामान्यतः वहाँ पर भारी वर्षा भी होती है।
6 ऊर्ध्वगामी और अधोगामी तीव्र पवन (चित्र 6.15) जल की बूंदों एवं हिम के कणों के मध्य घर्षण को सरल बना देती हैं।
आपने अध्याय 'बलों को जानें' में सीखा कि जब दो वस्तुएँ एक दूसरे के विरुद्ध घर्षण करती हैं तो वे आवेशित हो जाती हैं। जब तीव्रता से ऊर्ध्वगामी और अधोगामी वायु प्रवाहित होती है तो एक-दूसरे के विरुद्ध घर्षण करने पर बादलों में स्थिर वैद्युत आवेश उत्पन्न होता है।
आवेश उत्पन्न होता है। धनावेशित बर्फ के हल्के कण ऊपर की ओर गति कर बादलों के ऊपर की जगह घेर लेते हैं। ऋणावेशित भारी जल की बूँदें बादलों के नीचे के भाग में जमा हो जाती हैं। इस प्रकार बादलों में आवेश का पृथक्करण हो जाता है। जब किसी बादल का ऋणावेशित निचला भाग स्थल के समीप आता है तो यह स्थल और उसके आस-पास की वस्तुएँ, जैसे- पेड़-पौधे अथवा इमारतों को धनावेशित कर देता है।
वायु प्रायः विद्युतरोधी की तरह कार्य करती है और विपरीत आवेशों को परस्पर मिलने नहीं देती है। परंतु जब निर्मित आवेश अधिकता में हो तो वायु का विद्युतरोधी गुण समाप्त हो जाता है। इससे आवेशों का वायु में आकस्मिक प्रवाह होता है जिसके कारण क्षणदीप्त प्रकाश उत्पन्न होता है जिसे हम तड़ित कहते हैं।बादल के भीतर बादलों के मध्य अथवा बादलों एवं धरातल के मध्य विपरीत आवेश परस्पर टकराते हैं तो तड़ित उत्पन्न हो सकती है। तड़ित तीव्रता से आस-पास की वायु को तीव्र गति से गरम कर देती है जिसके कारण वायु में प्रसार होता है और एक तीव्र ध्वनि उत्पन्न होती है जिसे हम गर्जन कहते हैं। तड़ित एवं गर्जन के साथ जब कोई झंझावात आता है तो उसे तड़ित-झंझावात कहते हैं।
कभी-कभी तड़ित अत्यंत भयावह हो सकती है। इससे आग लग सकती है, भवन नष्ट हो सकते हैं एवं मानव और जीव गंभीर रूप से जल सकते हैं अथवा उनकी मृत्यु भी हो सकती है। अतः तड़ित से बचाव के लिए हमें आवश्यक सावधानियाँ रखनी चाहिए। तड़ित के समय हम ऊँची वस्तुओं से दूर रहें, किसी निम्न एवं खुले स्थान पर छिप कर बैठ जाएँ और भूमि से सीधे संपर्क को कम रखें। तड़ित के समय भूमि पर न लेटें एवं धातु की छड़ी वाला छाता उपयोग न करें। यदि आप जल के भीतर हैं तो तुरंत बाहर निकल जाएँ। तड़ित के समय यदि आप बस या कार में सवार हैं तो आप अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हैं।
6.6 चक्रवात
चक्रवात महासागर के गरम जल के ऊपर बनने वाले बड़े झंझावात होते हैं। जैसे ही महासागरीय जल गरम होता है तब गरम एवं आर्द्र वायु ऊपर की ओर उठती है। आर्द्र वायु ऊपर की ओर उठकर जलवाष्प को संघनित कर वर्षा की बूँदें बनाती है। हम जानते हैं कि वाष्पन के समय जल ऊष्मा लेकर वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। जब यह जलवाष्प संघनित होकर वर्षा की बूंदों में परिवर्तित होता है तो वायुमंडल में यह ऊष्मा मुक्त होती है। इस कारण से ऊपरी गरम वायु और अधिक गरम होकर ऊपर उठती है और निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न करती है। आस-पास के क्षेत्रों से वायु तीव्रगति से आती है और ऊपर उठना प्रारंभ कर देती है। गतिमान वायु पृथ्वी के घूर्णन के कारण चक्रण करती है। इस चक्र की पुनरावृत्ति होती है फलस्वरूप उसके चारों और घूमने वाली तीव्रगामी वायु के साथ अत्यधिक दाब क्षेत्र बन जाता है। बादल, पवन एवं वर्षा के इस चक्रण को चक्रवात कहते हैं।
एक चक्रवात में अत्यधिक निम्न दाब का क्षेत्र केंद्र में होता है जिसे चक्रवात अक्षि कहते हैं। चक्रवात अक्षि वाले क्षेत्र में वायु शांत होती है किंतु आस-पास के क्षेत्र में तीव्र वायु चलती है एवं भारी वर्षा होती है। जैसे ही चक्रवात महासागर से स्थल की ओर गति करता है, यह सामान्य तड़ित झंझावात से उत्पन्न पवन की तुलना में उच्च गति की वायु को उत्पन्न करता है। एक बार चक्रवात जब स्थल पर पहुँच जाता है तो नम वायु का स्रोत टूट जाता है और धीरे-धीरे यह क्षीण होने लग जाता है।
जब चक्रवात स्थल पर आगे की ओर बढ़ता है यह क्षीण होने लगता है साथ ही अपने पीछे एक विनाशकारी चिह्न छोड़ जाता है जिसका पुनर्निर्माण होने में कई महीने यहाँ तक कि कई वर्ष लग सकते हैं। चक्रवात अत्यंत विनाशकारी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए वर्ष 2020 में आए अम्फान चक्रवात की उच्चतम गति 270 km/h थी।
चक्रवात के समय उत्पन्न तीव्र वायु महासागरीय जल को तटों की ओर धकेलती है जिससे जल एक दीवार जैसा बन जाता है जो 3 से 12 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। जल का यह तीव्र प्रवाह तटीय क्षेत्रों में ही नहीं अपितु समुद्र से दूरस्थ क्षेत्रों में भी बाढ़ ला सकता है। चक्रवात के साथ होने वाली भारी वर्षा से नदियों के जल स्तर में वृद्धि होती है एवं इसके कारण भूस्खलन भी हो सकता है।
तीव्रगति से स्थल की ओर आने वाला समुद्री जल पीने योग्य स्रोतों को प्रदूषित कर सकता है। साथ ही कृषि भूमि को क्षति भी पहुँचा सकता है। समुद्री जल में उपस्थित लवण मृदा की उर्वरता को कम कर फसलों को प्रभावित करते हैं। वृक्षों के गिरने और मलबे के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक सहायता पहुँचाना कठिन हो जाता है। विद्युत आपूर्ति कुछ दिनों तक बाधित रह सकती है एवं आपातकालीन सेवाएँ तथा दैनिक जीवन अवरुद्ध हो सकता है।चक्रवात के समय हम स्वयं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं? मौसम संबंधी सूचनाओं, समय-समय पर दी जाने वाली चेतावनियों और भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी की गई चेतावनियों से अवगत रहना महत्त्वपूर्ण है। हम मौसम निगरानी उपग्रह के प्रति कृतज्ञ हैं क्योंकि इसके द्वारा हमें चक्रवात के आगमन की पूर्व सूचना प्राप्त हो जाती है। यह जीवन संपत्ति पर होने वाले प्रभाव को कम करने में सहायक है। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन चक्रवात संबंधी आपदाओं की निगरानी के लिए साथ मिलकर कार्य करते हैं। यदि आप चक्रवात संवेदनशील क्षेत्र में रहते हैं तो आवश्यक सामग्री के साथ आपातकालीन पेटी (किट) अवश्य रखनी चाहिए। साथ ही चक्रवात के समय निकटवर्ती चक्रवात सुरक्षा गृहों में तुरंत चले जाना चाहिए।
आइए इसे दोहराएँ।
- प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं।
- दाब का SI मात्रक N / (m ^ 2) है और इसे पास्कल भी कहते हैं। इसे Pa से निरूपित किया जाता है।
- द्रव एवं गैस पात्र की दीवारों पर दाब आरोपित करते हैं।
- हमारे चारों ओर वायु द्वारा लगने वाले दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।
- वायु दाब में अंतर के कारण ही पवन प्रवाहित होती है।
- गरम वायु ऊपर उठकर निम्न दाब क्षेत्र बनाती है। उच्च दाब क्षेत्र के आस-पास की ठंडी वायु निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
- तड़ित झंझावात के निर्माण के लिए आर्द्र एवं तीव्र वायु महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं।
- ऊर्ध्वगामी और अधोगामी तीव्र वायु हिम कणों एवं जल की बूँदों में निघर्षण को सुगम बनती हैं जिससे बादलों में वैद्युत आवेश उत्पन्न होता है।
- बादलों के भीतर, बादलों के मध्य या बादल और धरातल के मध्य वैद्युत आवेशों के संघट्ट से तड़ित उत्पन्न होती है।
- तड़ित प्रहार से जन-धन की हानि होती है।
- तड़ित चालक भवनों को तड़ित के प्रभाव से बचाते हैं।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भारत में चक्रवात और तड़ित-झंझावात का निरंतर अनुवीक्षण करता है।
- सही विकल्प का चयन कीजिए।
(i) चित्र 6.21 को ध्यानपूर्वक देखिए। पात्र 'ग' में जल भरा जा रहा है। जल भरने की प्रक्रिया रोकने पर पात्रों में जलस्तर होगा _____________
(क)पात्र 'क' में उच्चतम
(ख) पात्र 'ख' में उच्चतम
(ग) पात्र 'ग' में उच्चतम
(घ) सभी पात्रों में समान
एक रबर चूषक 'क' को एक समतल चिकने पृष्ठ पर एवं समान चूषक 'ख' को खुरदरे पृष्ठ पर दबाया गया।
(क) 'क' और 'ख' दोनों ही अपने पृष्ठ से चिपक जाएँगे।
(ख) 'क' और 'ख' दोनों अपने पृष्ठ से नहीं चिपकेंगे।
(ग) 'क' चिपक जाएगा परंतु 'ख' नहीं चिपकेगा।
(घ) 'क' नहीं चिपकेगा परंतु 'ख' चिपक जाएगा।
(iii) किसी भवन की छत पर एक जल की टंकी को H ऊँचाई पर रखा जाता है। भूतल पर जल को अधिक दाब से प्राप्त करने के लिए हमें करना होगा-
(क) जहाँ टंकी रखी है, उस ऊँचाई H को बढ़ा दिया जाए।
(ख) जहाँ टंकी रखी है उस स्थान की ऊँचाई H को कम कर दिया जाए।
(ग) टंकी को समान ऊँचाई वाली दूसरी टंकी जिसमें अधिक जल आ सके, से परिवर्तित कर दिया जाए।
(घ) टंकी को समान ऊँचाई की दूसरी टंकी जिसमें कम जल आ सके, से परिवर्तित कर दिया जाए।
दर्शाए गए चित्र 6.22 में दो पात्र 'क' और 'ख' में समान स्तर तक जल भरा गया। दोनों पात्रों में लगने वाले दाब क्रमशः Pक और Pखतथा बल क्रमशः Fक और Fख में संबंध होगा।
(a) PA = PB , FA = FB
(b) PA = PB , FA < FB
(c) PA< PB , FA = FB
(d) PA > PB , FA > FB - बताइए निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य -
- वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है। [ ]
- द्रव केवल पात्र के तल पर दाब डालते हैं। [ ]
- चक्रवात अक्षि में मौसम झंझावाती होता है। [ ]
- तड़ितझंझा के समय हम कार में सुरक्षित रहते हैं। [ ]
- चित्र 6.23 (क) में रेतीली सतह पर एक लड़के को क्षैतिज रूप से लेटा हुआ दर्शाया गया है और चित्र 6.23 (ख) में लड़के को ऊर्ध्वाधर खड़ा हुआ दर्शाया है। किस स्थिति में लड़का रेत के अंदर अधिक धँसेगा? कारण दीजिए।
- एक हाथी अपने चारों पैरों पर खड़ा है। यदि एक पैर द्वारा घेरे जाने वाला 0.25m2 क्षेत्रफल है और हाथी का भार 20000 N है तो हाथी द्वारा स्थल पर आरोपित दाब की गणना कीजिए।
- 'क' और 'ख' दो नाव हैं। नाव 'क' के आधार का क्षेत्रफल 7m2है और उसमें 5 लोग बैठे हैं। नाव 'ख' के आधार का क्षेत्रफल 3.5m2 है और उसमें 3 लोग बैठे हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति का भार 700 N है तो पता लगाएँ कि किस नाव के आधार पर अधिक दाब लगेगा और कितना?
- यदि वायु और बादल दोनों विद्युत के सुचालक होते तो क्या तड़ित उत्पन्न होती? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
- यदि बोतल में जल एक निश्चित ऊँचाई तक भर दिया जाए तो दर्शाए गए चित्र 6.24 के अनुसार दो समान गुब्बारों 'क' और 'ख' का क्या होगा? क्या दोनों गुब्बारे फूलेंगे? यदि हाँ, तो क्या वे समान रूप से फूलेंगे? अपने उत्तर को समझाइए।
- व्याख्या कीजिए कि झंझावात चक्रवात में किस प्रकार परिवर्तित हो जाता है।
- चित्र 6.25 में गर्मियों की दोपहर के समय में समुद्र तट पर पेड़ों को दर्शाया गया है। पहचानिए 'क' अथवा 'ख' में स्थल किस ओर है। अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
- ऐसे किसी क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए जो यह दर्शाए कि वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है।
- तड़ितझंझा क्या है? इसके निर्माण प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
- उस प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए जिसके कारण तड़ित उत्पन्न होती है।
- व्याख्या कीजिए कि प्रदर्शपट्ट (बैनर) और विज्ञापन पट्ट (होर्डिंग्स) में छिद्र क्यों बनाए जाते हैं।
अभी तक के अपने अधिगम के आधार पर कुछ प्रश्नों का निर्माण कीजिए...
अपने साथियों द्वारा निर्मित प्रश्नों पर चिंतन कीजिए और उत्तर देने का प्रयास कीजिए...
- अपने अँगूठे और तर्जनी अँगुली के मध्य 18 cm लंबी और 2 cm चौड़ी एक कागज की पट्टी को पकड़िए ताकि ये मुक्त रूप से लटकी रहे। अनुमान लगाइए कि कागज पर फूंक मारने से आपका अवलोकन क्या होगा? इस क्रियाकलाप को कीजिए। अपने प्रेक्षणों को अंकित कर परिणामों की व्याख्या कीजिए।
- विगत 20 वर्षों में भारत में आए तीन प्रमुख चक्रवातों की सूची बनाइए। प्रत्येक चक्रवात से होने वाली दो प्रमुख क्षतियों की सूची बनाइए। स्थानीय सरकार और समुदायों द्वारा जीवन एवं संपत्ति की क्षति को कम करने के लिए कौन से कदम उठाए गए? ऐसे दो सुझावों को इंगित कीजिए जिन्हें आप स्थानीय सरकार को देना चाहेंगे।
- भारत के विभिन्न क्षेत्रों में तड़ितझंझा की प्रबलता के आँकड़े एकत्रित कीजिए। अपने आँकड़ों की तुलना करके पहचानिए कि कौन से क्षेत्रों में तड़ितझंझा की संभावनाएँ अधिक हैं। क्या आप अपने निष्कर्षों का कारण दे सकते हैं?