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विलेयों, विलायकों और विलयनों का अद्भुत संसार

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खोजबीन और विचार करें
  • आपको क्या लगता है कि उपर्युक्त चित्र में क्या हो रहा है।
  • क्या होता है जब आप चाय में चीनी अधिक डाल देते हैं और वह घुलना बंद कर देती है? आप इस समस्या का समाधान किस प्रकार कर सकते हैं?
  • चीनी और नमक जल में क्यों घुल जाते हैं जबकि तेल में नहीं घुलते? जल को एक अच्छा विलायक क्यों माना जाता है?
  • जल की बोतलें गोलाकार होने की अपेक्षा प्रायः लंबी और बेलनाकार आकृति की क्यों होती हैं?
  • अपने प्रश्नों को साझा कीजिए

    _____________

    _____________?

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आपने अपने जीवन में कभी न कभी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओ.आर.एस.) का सेवन अवश्य किया होगा। ओ.आर.एस. का उपयोग निर्जलीकरण के उपचार हेतु किया जाता है और यह शरीर को जलयोजित रखता है। आपने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'हमारे आस-पास की सामग्री' में ओ.आर.एस. को घर में बनाना सीखा था। आपको आश्चर्य हुआ होगा कि घर पर बनाए गए ओ.आर.एस. को पीने पर उसके प्रत्येक घूँट का स्वाद एक जैसा होता है चाहे आप उसका कितना भी सेवन करें। इसका स्वाद एक घूँट में नमकीन और दूसरे में मीठा क्यों नहीं होता है?

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब आप जल में चीनी और नमक मिलाते हैं तब वे एक मिश्रण बनाते हैं जिसमें घटक पूर्णतया समान रूप से वितरित होते हैं।

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चित्र 9.1- चीनी, नमक और जल का मिश्रण

क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि यह मिश्रण समरूप है या नहीं (चित्र 9.1)? क्या होता है जब चॉक के चूर्ण को जल के साथ मिलाया जाता है-क्या यह समरूप मिश्रण बनाता है?

जब नमक और चीनी को जल के साथ मिश्रित किया जाता है तब समरूप मिश्रण बनता है जबकि चॉक के चूर्ण एवं रेत या लकड़ी के बुरादे को जल में मिलाने पर उनके घटक समान रूप से जल में वितरित नहीं होते हैं। ऐसे मिश्रणों को विषमरूप मिश्रण कहा जाता है (चित्र 9.2, क और 9.2, ख)।

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चित्र 9.2- (क) रेत और जल का मिश्रण (ख) लकड़ी के बुरादे और जल का मिश्रण

आइए, इन पदार्थों को एक साथ मिश्रित करने के विज्ञान का अन्वेषण करें।

9.1 विलेय, विलायक और विलयन क्या हैं?

एक समरूप मिश्रण जैसे कि नमक अथवा चीनी एवं जल का मिश्रण विलयन कहलाता है। जब भी किसी ठोस पदार्थ को किसी द्रव के साथ मिलाकर एक विलयन बनाया जाता है तब ठोस घटक को विलेय और द्रव घटक को विलायक कहा जाता है। विलेय, विलायक में घुलकर एक विलयन बनाता है चित्र (9.3)।

विलेय + विलायक-> विलयन

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चित्र 9.3- विलायक में समान रूप में वितरित विलेय की व्यवस्था का आवर्धित चित्र

जब दो द्रवों को मिश्रित कर एक विलयन बनाया जाता है तब यह सदैव स्पष्ट नहीं होता कि कौन-सा पदार्थ दूसरे पदार्थ को घोल रहा है। ऐसी स्थिति में कम मात्रा में उपस्थित पदार्थ विलेय कहलाता है एवं अधिक मात्रा में उपस्थित पदार्थ को विलायक कहते हैं।

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  • हम जानते हैं कि वायु एक मिश्रण है। क्या गैसों के मिश्रण को भी विलयन माना जाएगा?
क्या आपके संज्ञान में है...
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चित्र 9.4 - चाशनी में डूबे गुलाब जामुन
भारतीय मिठाई गुलाब जामुन की चाशनी बनाने के लिए अधिक मात्रा में चीनी (ठोस) को जल (द्रव) की थोड़ी-सी मात्रा में घोला जाता है। तब भी जल को विलायक और चीनी को विलेय माना जाता है (चित्र 9.4)।

9.2 विलायक की एक निश्चित मात्रा विलेय की कितनी मात्रा घोल सकती है?

क्रियाकलाप 9.1- आइए, अन्वेषण करें

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  • क्या होगा यदि हम जल की एक निश्चित मात्रा में नमक को और अधिक मिलाते जाएँ?
  • काँच का एक स्वच्छ गिलास लीजिए और उसे जल से आधा भरिए।
  • इसमें एक चम्मच नमक डालिए और भली-भाँति तब तक विलोडित कीजिए जब तक कि वह पूर्णतया घुल न जाए (चित्र 9.5)।
  • इसी जल में एक और चम्मच भरकर नमक को धीरे-धीरे डालिए इसी जल में एक और चम्मच भरकर नमक को धीरे-धीरे डालिए और उसे विलोडित कीजिए। अवलोकन कीजिए कि नमक पूर्णतया घुलना बंद होने से पूर्व आप कितने चम्मच और नमक डाल सकते हैं।
  • तालिका 9.1 में अपने अवलोकनों को अंकित कीजिए।
ली गई नमक की मात्रा (छोटा चम्मच) अवलोकन (नमक घुल जाता है / नमक नहीं घुलता है)
एक
दो
तीन
चार
...

चर्चा के कुछ बिंदु

  • आप कितने चम्मच नमक जल में घोल पाए इससे पहले कि घोल में नमक का कुछ अंश अघुलनशील रह जाए?
  • यह जल की नमक घोलने की क्षमता के विषय में क्या इंगित करता है?

आपने देखा होगा कि प्रारंभ में नमक जल में पूर्णतया घुलकर एक विलयन बनाता है। कुछ और चम्मच नमक डालने के पश्चात एक अवस्था ऐसी आती है जब डाला गया नमक पूर्णतया नहीं घुलता है और तब अघुलनशील नमक सतह पर बैठ जाता है। यह दर्शाता है कि जल में अब और नमक नहीं घुल सकता क्योंकि उसकी नमक घोलने की क्षमता समाप्त हो गई है। वह विलयन जिसमें दिए गए किसी तापमान पर और अधिक विलेय घोला जा सकता है, असंतृप्त विलयन (चित्र 9.5) कहलाता है। परंतु जब विलेय घुलना बंद कर देता है और तली पर बैठना आरंभ हो जाता है तब उस विशिष्ट तापमान पर वह विलयन एक संतृप्त विलयन कहलाता है (चित्र 9.6)।

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चित्र 9.5 - असंतृप्त विलयन

किसी विलयन (विलायक) की निश्चित मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा को उसकी सांद्रता कहते हैं। किसी विलयन की निश्चित मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा के आधार पर उसे तनु विलयन (विलेय की कम मात्रा) या सांद्र विलयन (विलेय की अधिक मात्रा) कहा जा सकता है। तनु और सांद्र सापेक्ष पद हैं।

अतः क्रियाकलाप 9.1 से कहा जा सकता है कि एक चम्मच नमक घोलने से प्राप्त विलयन दो या दो से अधिक चम्मच नमक घोलने से प्राप्त विलयन की तुलना में तनु होता है।

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चित्र 9.6 - संतृप्त विलयन

क्या अब आप यह बता सकते हैं कि कौन-सा विलयन अधिक सांद्रित है- 100 mL जल में 2 चम्मच नमक या 50 mL जल में 4 चम्मच नमक को घोल कर बनाया गया विलयन?

किसी विलायक की एक निश्चित मात्रा (100 mL) में घुलने वाले विलेय की अधिकतम मात्रा को उसकी घुलनशीलता या विलेयता कहते हैं।

क्या तापमान किसी विलेय की विलेयता को प्रभावित करता है?

आइए, ज्ञात करें!

9.2.1 किसी विलेय की विलेयता को तापमान कैसे प्रभावित करता है?

क्रियाकलाप 9.2- आइए, प्रयोग करें (निदर्शन क्रियाकलाप)

  • काँच के एक बीकर में लगभग 50 mL जल लीजिए और प्रयोगशाला तापमापी (थर्मामीटर) का उपयोग करके उसका तापमान माप लीजिए, जैसे- 20 °C |
  • एक चम्मच भरकर बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) जल में मिलाइए और उसे तब तक विलोडित कीजिए जब तक यह पूर्णतः घुल न जाए। विलोडित करते हुए थोड़ी मात्रा में और बेकिंग सोडा मिलाते रहिए जब तक कि बीकर की तली पर कुछ अविलीन बेकिंग सोडा शेष न रह जाए।
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    चित्र 9.7- जल में बेकिंग सोडा घोलना
  • अब इसे विलोडित करते हुए 50 °C तक गरम कीजिए (चित्र 9.7)।
  • इस अविलीन बेकिंग सोडा का क्या होता है?
  • आप देखेंगे कि इस तापमान पर यह घुल गया है।
  • इस तापमान पर विलोडित करते हुए और अधिक बेकिंग सोडा मिलाते रहिए जब तक कि कुछ ठोस बेकिंग सोडा अविलीन न रह जाए।
  • इसे पुनः विलोडित करते हुए 70 °C तक गरम कीजिए।
  • आप क्या देखते हैं?
  • अविलीन बेकिंग सोडा घुल जाता है।
  • इस प्रयोग से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

50°C तापमान वाले जल की तुलना में 70°C तापमान वाले जल में अधिक बेकिंग सोडा घुलता है। 20 °C तापमान वाले जल में घुले बेकिंग सोडा की मात्रा और भी कम होती है।

इससे यह ज्ञात होता है कि अधिकांश पदार्थों की घुलनशीलता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है। हम यह भी कह सकते हैं कि एक विशिष्ट तापमान पर संतृप्त विलयन तापमान में वृद्धि करने पर असंतृप्त विलयन की भाँति व्यवहार करता है।

सुरक्षा सर्वोपरि
तापन उपकरणों का उपयोग करते हुए सावधान रहिए।

हमारी वैज्ञानिक परंपरा
भारत में आयुर्वेद, सिद्ध और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में औषधीय संरूपणों के निर्माण हेतु जल का उपयोग मुख्यतः विलायक के रूप में किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त जड़ी-बूटियों के हाइड्रो-ऐल्कोहॉलिक सत्व का उपयोग करके औषधि संरूपण बनाए गए हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में औषधि संरूपण में विलायक के रूप में तेल, घी, दूध और अन्य पदार्थों के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है। इन पदार्थों के उपयोग से औषधियों के चिकित्सीय लाभों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

वैज्ञानिक परिचय
Screenshot 2026-02-25 113723 असीमा चटर्जी ने औषधीय पौधों पर कार्य करने की प्रेरणा कहाँ से प्राप्त की। असीमा चटर्जी को अपस्मार-रोधी (एंटी-ऐप्टिलेटिक) और मलेरिया-रोधी औषधियों के विकास में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने औषधीय पौधों से महत्वपूर्ण यौगिकों का सत्व निकालने और पृथक करने के लिए व्यापक रूप से विलायकों एवं विलयनों का उपयोग किया। असीमा चटर्जी ने विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की और जानकी अम्माल के बाद वे ऐसा करने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। वे रसायन विज्ञान के क्षेत्र में 'शांति स्वरूप भटनागर' पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं तथा उन्हें पद्मभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
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  • क्या गैसें भी जल में घुलती हैं?

9.3 Solubility of Gases

ऑक्सीजन सहित अनेक गैसें जल में घुलती हैं। ऑक्सीजन गैस जल में सीमित मात्रा में घुलती है। यद्यपि जल में यह अल्प मात्रा में ही विद्यमान होती है तब भी यही घुली हुई ऑक्सीजन पौधों, मछलियों और अन्य जीवों सहित समस्त जलीय जीवन को बनाए रखती है।

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चित्र 9.8 - जलीय प्रजातियाँ

जल में गैसों का यह मिश्रण समरूप है या विषमरूप?

यह एक समरूप मिश्रण है क्योंकि गैसें जल में समान रूप से घुलती हैं।

क्या तापमान द्रवों में गैसों की विलेयता को भी प्रभावित करता है? यदि हाँ, तो कैसे?

ऐसा देखा गया है कि गैसों की विलेयता तापमान में वृद्धि के साथ सामान्यतः घटती है। ठंडे जल में अधिक ऑक्सीजन घुल सकती है जिससे जलीय जीवन के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की मात्रा सुनिश्चित होती है (चित्र 9.8)। दूसरी ओर जब जल गरम होता है तब ऑक्सीजन की विलेयता घट जाती है।

  • अब मैं समझा कि हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले मिश्रण दो प्रकार के हो सकते हैं- समरूप एवं विषमरूप। समरूप मिश्रणों को विलयन कहते हैं और उनके घटक पृथक रूप से दृश्यमान नहीं होते हैं। विषमरूप मिश्रणों में घटक या तो नग्न आँखों से या किसी आवर्धक युक्ति के माध्यम से देखे जा सकते हैं।
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  • मैंने देखा है कि कुछ विषमरूप मिश्रणों, जैसे- जल में बुरादे वाले मिश्रण में बुरादा तैरता है जबकि रेत और जल के मिश्रण में रेत डूब जाता है। मुझे आश्चर्य होता है कि ऐसा क्यों होता है?

9.4 वस्तुएँ जल में तैरती या डूबती क्यों हैं?

आपने अवलोकन किया होगा कि कुछ वस्तुएँ जल में तैरती हैं जबकि कुछ डूब जाती हैं (चित्र 9.9)। आपने ध्यान दिया होगा कि चावल धोते समय उसमें उपस्थित भूसी के कण जल की सतह पर तैरते हैं जबकि चावल पात्र की तली पर बैठ जाते हैं। ऐसा क्यों होता है? यदि आप जल में तेल डालेंगे तो वह जल पर तैरने लगता है। प्रायः यह माना जाता है कि जो वस्तुएँ किसी द्रव में तैरती हैं वे हल्की होती हैं और जो वस्तुएँ डूब जाती हैं वे द्रव से भारी होती हैं।

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चित्र 9.9 - कुछ वस्तुएँ जल में तैरती हैं जबकि कुछ डूब जाती हैं।

यदि लकड़ी की एक छड़ी और लोहे की एक छड़ी एकसमान आकार की हों तब भी लोहे की छड़ बहुत भारी प्रतीत होती है। जब हम कहते हैं कि लोहा, लकड़ी से भारी है तो हम एक विशेष गुण यानी घनत्व का उल्लेख कर रहे हैं जो किसी वस्तु के भारीपन का वर्णन करता है।

टिप्पणी
किसी पदार्थ का घनत्व ही एकमात्र कारक नहीं है जो यह निर्धारित करता है कि वह किसी विशिष्ट द्रव में तैरेगा या डूबेगा।

आइए, आगे खोज करें।

9.5 घनत्व क्या है?

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चित्र 9.10 (क) - सघन वन

एक भीड़ से भरी बस की कल्पना कीजिए जहाँ बहुत से व्यक्ति एक साथ बस में उपस्थित हैं तो यह उच्च घनत्व का उदाहरण होगा। यदि उसी बस में गिने-चुने व्यक्ति उपस्थित हों तो यह कम घनत्व का उदाहरण होगा। इसी प्रकार एक वन जहाँ वृक्ष एक दूसरे के समीप उगते हैं, उसे सघन वन कहा जाता है (चित्र 9.10, क) जबकि यदि वृक्ष एक-दूसरे से बहुत दूर हों (चित्र 9.10, ख) तो इसे निम्न सघन वन कहा जाता है।

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चित्र 9.10 (ख) - निम्न सघन वन

वैज्ञानिक घनत्व को कैसे परिभाषित करते हैं?

आइए, ज्ञात करें।

हमने सीखा कि पदार्थ वह होता है जिसका कोई द्रव्यमान होता है और जो स्थान (आयतन) घेरता है। किसी पदार्थ के इकाई आयतन में विद्यमान द्रव्यमान को घनत्व कहा जाता है।

किसी पदार्थ के घनत्व को निम्नलिखित गणितीय सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।

घनत्व = द्रव्यमान/आयतन

पदार्थ का घनत्व उसके आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता है। यद्यपि यह तापमान और दाब पर निर्भर करता है। दाब मुख्यतः गैसों के घनत्व को प्रभावित करता है जबकि ठोस पदार्थों और द्रवों पर इसका प्रभाव नगण्य होता है।

घनत्व को व्यक्त करने के मात्रक द्रव्यमान और आयतन के मात्रकों पर निर्भर करते हैं। जैसाकि आपने सीखा है कि द्रव्यमान और आयतन के SI मात्रक क्रमशः किलोग्राम (kg) और घन मीटर (m³) हैं। अतः घनत्व का SI मात्रक किलोग्राम प्रति घन मीटर है जिसका संक्षिप्त रूप kg/m³ है। द्रवों के संदर्भ में सुविधा के लिए घनत्व के अन्य मात्रक भी उपयोग किए जाते हैं, जैसे- ग्राम प्रति मिलीलीटर जिसे संक्षिप्त रूप में g/mL लिखा जाता है और ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर जिसे संक्षिप्त रूप में g/cm³ लिखा जाता है।

घनत्व के लिए रूपांतरण गुणक

1 kg/m3 = 1000 g/m3 = 1000 g/1000 L = 1 g/L = 1 g/1000 mL = 1 g/1000 cm3

कक्ष के तापमान पर जल के 1 mL का द्रव्यमान लगभग 1g होता है। जल के द्रव्यमान को मापने के लिए हम प्रायः आयतन को mL में और द्रव्यमान को g में लेते हैं। अतः 10 mL जल लगभग 10 g होगा। इसी प्रकार से 100 mL जल लगभग 100 g होगा।

मान लीजिए कि ऐलुमिनियम के किसी टुकड़े का द्रव्यमान 27 g है और उसका आयतन 10 cm³ है तो उसका घनत्व 2.7 g/cm³ होगा।

अतः यह कहा जा सकता है कि जल की अपेक्षा ऐलुमिनियम का घनत्व 2.7 गुणा अधिक है। हम इस तथ्य को यह कहकर व्यक्त करते हैं कि जल के सापेक्ष ऐलुमिनियम का आपेक्षिक घनत्व 2.7 है। यह एक ऐसी संख्या है जिसका कोई मात्रक नहीं है।

जल के सापेक्ष किसी पदार्थ का आपेक्षिक घनत्व = उस पदार्थ का घनत्व/ उस तापमान पर जल का घनत्व

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चित्र 9.11- तेल की बोतल
वैज्ञानिक की भाँति सोचें
क्या आपने ध्यान दिया है कि घी या तेल के कुछ पैकेटों पर आयतन 1L चिह्नित होता है परंतु भार केवल 910 ग्राम होता है (चित्र 9.11)? इससे हमें तेल के घनत्व के विषय में क्या ज्ञात होता है? क्या यह जल के घनत्व से कम है या अधिक?

9.5.1 घनत्व का निर्धारण

किसी वस्तु के घनत्व का निर्धारण उसके द्रव्यमान और आयतन की माप द्वारा किया जा सकता है।

द्रव्यमान कैसे मापें?

आपने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में पद 'द्रव्यमान' के विषय में सीखा। किसी वस्तु में विद्यमान पदार्थ की मात्रा उसका द्रव्यमान है। वस्तु का द्रव्यमान मापने का उपकरण तुला कहलाता है। आपने दुकानदारों को विभिन्न प्रकार की तुलाओं का उपयोग करते हुए देखा होगा। यहाँ हम द्रव्यमान मापने के लिए एक अंकीय (डिजिटल) भार तुला का उपयोग कर रहे हैं। आपने 'बल का अन्वेषण' अध्याय में पढ़ा होगा कि पृथ्वी पर भार और द्रव्यमान परस्पर संबंधित होते हैं।

आप निम्नलिखित क्रियाकलाप द्वारा द्रव्यमान माप सकते हैं।

क्रियाकलाप 9.3- आइए, मापन करें

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चित्र 9.12 (क) - अंकीय -भार तुला
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चित्र 9.12 (ख) - वाच-ग्लास रखने के पश्चात तुला को शून्य पर लाएँ।
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चित्र 9.12 (ग) - अंकीय तुला पर किसी -ठोस वस्तु को तोलना
  • अंकीय भार तुला का स्विच ऑन करें।
  • अंकीय भार तुला प्रदर्श पर प्रारंभिक पाठ्यांक का अवलोकन कीजिए।
  • उसे शून्य पाठ्यांक प्रदर्शित करना चाहिए। यदि नहीं, तो हमें आधेय भार को दबाकर या बटन का पुनः नियोजन कर उसे शून्य पर लाना चाहिए (चित्र 9.12, क)।
  • पलड़े पर एक शुष्क एवं स्वच्छ वाच-ग्लास या चिकना कागज रखिए।
  • अंकीय भार तुला का पाठ्यांक अंकित कीजिए।
  • आधेय भार को दबाकर या बटन का पुनः नियोजन कर अंकीय भार तुला का पुनः नियोजन कीजिए जैसाकि चित्र 9.12 (ख) में दर्शाया गया है।
  • अब सावधानीपूर्वक ठोस वस्तु जैसे कि पत्थर को वाच-ग्लास पर रखिए (चित्र 9.12, ग)।
  • तुला पर प्रदर्शित पाठ्यांक अंकित कीजिए जो पत्थर का द्रव्यमान दर्शा रहा है, जैसे- 16.400g

आप अपने विद्यालय में उपलब्ध किसी अन्य प्रकार की तुला का उपयोग कर सकते हैं।)

टिप्पणी
किसी द्रव का द्रव्यमान वाच-ग्लास के स्थान पर बीकर रखकर तथा उसमें वांछित मात्रा में द्रव डालकर मापा जा सकता है।

एक सोपान ऊपर
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चित्र 9.13 - द्विपलड़े युक्त तुला
जैसाकि अध्याय 5 में उल्लिखित है कि दैनिक वार्तालाप में 'द्रव्यमान' और 'भार' शब्द का प्रयोग सामान्यतः एक-दूसरे के स्थान पर किया जाता है। परंतु विज्ञान में इनके अर्थ भिन्न हैं और इससे कभी-कभी भ्रम भी हो सकता है। किसी वस्तु या पदार्थ में उपस्थित द्रव्य की मात्रा द्रव्यमान है। इसके मात्रक ग्राम (g) और किलोग्राम (kg) हैं। दूसरी ओर भार वह बल है जिसके द्वारा पृथ्वी किसी वस्तु या किसी पदार्थ को अपनी ओर आकर्षित करती है और यह न्यूटन (N) में मापा जाता है। वस्तुतः अधिकांश तुला भार मापते हैं (चित्र 9.13 में दर्शाए अनुसार द्विपलड़े युक्त तुलाओं के अतिरिक्त) परंतु उनके मापन द्रव्यमान मात्रकों में अंकित होते हैं। अतः ये ग्राम या किलोग्राम में मान दर्शाते हैं (चित्र 9.12, ग)।

आयतन कैसे मापें?

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चित्र 9.14- 200 mL छाछ का टेट्रा पैक

किसी टेट्रा पैक पर लिखा है कि इसमें 200 mL छाछ है (चित्र 9.14)। इसका क्या अर्थ है?

आपने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में पढ़ा कि आयतन किसी वस्तु द्वारा घेरा गया स्थान होता है। आप यह भी जानते हैं कि आयतन का SI मात्रक घन मीटर है जिसे m3 लिखा जाता है। यह उस घन का आयतन है जिसकी प्रत्येक भुजा की लंबाई एक मीटर होती है।

छोटी वस्तुओं का आयतन प्रायः घन डेसीमीटर (dm³) या घन सेंटीमीटर (cm³) में व्यक्त किया जाता है। एक सेंटीमीटर घन को एक cc भी लिखा जाता है। द्रवों का आयतन लीटर में व्यक्त किया जाता है जो 1 dm³ के तुल्य होता है। एक लीटर(L) का सामान्यतः प्रयुक्त उपगुणक मिलीलीटर (mL) होता है जो 1 cm³ के तुल्य है।

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चित्र 9.15 - विभिन्न क्षमताओं के मापक सिलिंडर -

द्रवों के आयतन को मापने के लिए प्रयुक्त सामान्य उपकरणों में से एक उपकरण मापक सिलिंडर है। यह एक संकीर्ण पारदर्शी बेलनाकार पात्र होता है जिसका एक सिरा खुला और दूसरा सिरा बंद होता है जैसा कि चित्र 9.15 में दर्शाया गया है। सिलिंडर की पारदर्शी सतह पर चिह्न अंकित होते हैं जो मापक सिलिंडर में द्रव का आयतन दर्शाते हैं। हम किसी द्रव की वांछित मात्रा मापने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

आयतन मापने हेतु मापक सिलिंडर विभिन्न परिमाणों में 5 mL, 10 mL, 25 mL, 50 mL, 100 mL, 250 mL इत्यादि में उपलब्ध हैं (चित्र 9.15)। ये मापक सिलिंडर कितनी यथार्थता से माप कर सकते हैं?

आइए, ज्ञात करें !

क्रियाकलाप 9.4- आइए, प्रेक्षण कर परिकलन करें

कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 6 'ताप एवं उसका मापन' में आपने सीखा कि तापमापी का उपयोग कैसे करें और इसका सबसे छोटा पाठ्यांक कैसे ज्ञात करें। आप मापक सिलिंडर के लिए भी ऐसा कर सकते हैं।

  • यह अधिकतम कितना आयतन माप सकता है?

    अब ध्यानपूर्वक मापक सिलिंडर (चित्र 9.16) को देखिए। सिलिंडर पर 100 mL अंकित है, अतः यह 100 mL तक आयतन माप सकता है।

    यह न्यूनतम कितना आयतन माप सकता है? मापक सिलिंडर को पुनः देखिए।

दो बड़े चिह्नों के मध्य इंगित आयतन में कितना अंतर है (उदाहरण के लिए 10 mL और 20 mL के बीच)?

  • दो बड़े चिह्नों के मध्य कितने छोटे प्रभाग हैं?
  • एक छोटा प्रभाग कितना आयतन इंगित करता है?

मापक सिलिंडर द्वारा पढ़ा जा सकने वाला न्यूनतम आयतन __________है।

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  • मापक सिलिंडरों को सदैव संकीर्ण एवं लंबा ही क्यों बनाया जाता है तथा ये बीकर की भाँति चौड़े एवं छोटे क्यों नहीं होते?

चित्र 9.16 में दर्शाए गए मापक सिलिंडर में 10 mL और 20 mL के मध्य या 40 mL और 50 mL के मध्य आयतन अंतर 10 mL है।

इन चिह्नों के बीच प्रभागों की संख्या 10 है।

इसलिए एक छोटे प्रभाग को 10/10 = 1 mL पढ़ा जा सकता है।

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चित्र 9.16-100 mL का मापक सिलिंडर

इसका तात्पर्य है कि इस मापक सिलिंडर द्वारा पढ़ा जा सकने वाला न्यूनतम मान 1 mL है। किसी मापक सिलिंडर द्वारा मापी जा सकने वाली न्यूनतम मात्रा मापक सिलिंडर की क्षमता पर निर्भर करती है। सामान्यतः 10 mL या 25 mL की क्षमता के छोटे मापक सिलिंडरों में यह 0.1 mL होती है। 100 mL के मापक सिलिंडर में यह 1 mL और 250 mL के मापक सिलिंडर में 2 mL होती है और 500 mL के मापक सिलिंडर में 5 mL होती है। मान लीजिए हम 70 mL जल लेना चाहते हैं। यदि हम 50 mL के मापक सिलिंडर का उपयोग करते हैं तो एक बार में 70 mL जल को मापना संभव नहीं होगा। पहले हमें 50 mL जल मापना होगा तत्पश्चात 20 mL जल। एक से अधिक चरणों में आयतन मापना असुविधाजनक है। दूसरी ओर यदि 250 mL या 500 mL के मापक सिलिंडर का उपयोग किया जाए तो मापन एक चरण में किया जा सकता है परंतु यथार्थता घट जाएगी क्योंकि ये मापक सिलिंडर जितना न्यूनतम आयतन माप सकते हैं वह 100 mL के मापन सिलिंडर से अधिक है। अतः इस मापन हेतु 100 mL का मापक सिलिंडर ही सबसे अच्छा विकल्प है।

क्रियाकलाप 9.5- आइए, 50 mL जल मापें

  • किसी समतल सतह पर एक स्वच्छ एवं शुष्क मापक सिलिंडर रखिए। चित्र 9.17 में दर्शाए अनुसार मापक सिलिंडर में अपेक्षित चिह्न तक धीरे-धीरे जल डालिए। यदि आवश्यक हो तो मापक सिलिंडर में बिंदुपाती (ड्रॉपर) का उपयोग करके जल की थोड़ी मात्रा डाल कर या निकाल कर जल का स्तर समायोजित कीजिए। ध्यानपूर्वक अवलोकन करने पर आप पाएँगे कि मापक सिलिंडर के अंदर जल का एक वक्र पृष्ठ होता है। इस वक्र पृष्ठ को नवचंद्रक (मेनिस्कस) कहते हैं (चित्र 9.18)। जल या अन्य रंगहीन द्रवों के लिए मापक सिलिंडर पर उस चिह्न को पढ़िए जैसाकि चित्र 9.18 में दर्शाया गया है।
  • Screenshot 2026-02-25 113935
    चित्र 9.17 - मापक सिलिंडर में जल डालते हुए
    Screenshot 2026-02-25 113942
    चित्र 9.18 - पाठ्यांक पढ़ना
  • सुनिश्चित कीजिए कि पाठ्यांक पढ़ते समय आपकी आँखें नवचंद्रक के तल की सीध में हों जैसाकि चित्र 9.18 में दर्शाया गया है।
  • Screenshot 2026-02-25 113950
    • मुझे आश्चर्य है कि रंगीन द्रवों का स्तर कैसे मापा जाता है?
  • एक बार जल अपेक्षित स्तर जैसे 50 mL तक पहुँच जाए इसके पश्चात इस जल को वांछित पात्र में स्थानांतरित कीजिए।

रंगीन द्रवों के लिए मापक सिलिंडर का पाठ्यांक नवचंद्रक के ऊपरी भाग के साथ सीध में होना चाहिए।

नियमित आकार की ठोस वस्तुओं का आयतन ज्ञात करना

क्रियाकलाप 9.6- आइए, परिकलन करें

  • घनाभ आकृतियों की विभिन्न वस्तुएँ, जैसे- अभ्यास पुस्तिका (नोटबुक), जूते का डिब्बा या पासा एकत्रित कीजिए।
  • मापक का उपयोग करके वस्तुओं की लंबाई (I), चौड़ाई (w) और ऊँचाई (h) मापिए। मान लीजिए कि अभ्यास पुस्तिका (नोटबुक) की लंबाई 25 cm, चौड़ाई 18 cm और ऊँचाई 2 cm है।
  • निम्नलिखित सूत्र का उपयोग करके आयतन का परिकलन कीजिए।

    आयतन = l × w × h

    आयतन = 25 cm × 18 cm × 2 cm = 900 cm3
  • इसे अपनी अभ्यास पुस्तिका (नोटबुक) में अंकित कीजिए।

अनियमित आकार की वस्तुओं का आयतन ज्ञात करना

कल्पना कीजिए कि आपके पास एक ऐसी वस्तु है जैसे पत्थर, जिसकी कोई नियमित आकृति नहीं है। इसका घनत्व ज्ञात करने के लिए मुख्य चुनौती इसका आयतन ज्ञात करना है। आइए, सीखें कि अनियमित आकृति के ठोस का आयतन कैसे ज्ञात किया जा सकता है।

क्रियाकलाप 9.7- आइए मापन करें

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चित्र 9.19 - मापक सिलिंडर में जल का स्तर (क) बिना वस्तु के (ख) वस्तु के साथ
  • अपने आस-पास से विभिन्न वस्तुएँ एकत्रित कीजिए, जैसे- पत्थर, धातु की चाबियाँ आदि।
  • एक मापक सिलिंडर को किसी वांछित आयतन जैसे 50 mL (चित्र 9.19, क) तक जल से भरिए तथा प्रारंभिक आयतन को तालिका 9.2 में अंकित कीजिए।
  • किसी वस्तु, जैसे- पत्थर को धागे से बाँधिए और धीरे से उसे मापक सिलिंडर में लटकाइए।
  • आप क्या देखते हैं?
  • जलस्तर के ऊँचा उठने के पश्चात अंतिम आयतन को लिखिए। मान लीजिए 55 mL जैसाकि चित्र 9.19 (ख) में दर्शाया गया है।
  • मापक सिलिंडर में वस्तु को डालने के पश्चात प्रारंभिक आयतन को अंतिम आयतन में से घटा दीजिए। अतः प्राप्त मान ही वस्तु का आयतन है।
  • अपने अवलोकनों को तालिका 9.2 में लिखिए।

(इस क्रियाकलाप में धागे का आयतन नगण्य माना गया है।)

तालिका 9.2- अनियमित आकार की वस्तुओं का आयतन



क्र.सं. वस्तु मापक सिलिंडर में जल का प्रारंभिक आयतन (mL)
(क)
मापक सिलिंडर में जल का अंतिम आयतन (mL)
(ख)
मापक सिलिंडर में जल का विस्थापित आयतन (mL)
(ख-क)
वस्तु का आयतन (cm³)
1. पत्थर 50 mL 55 mL 5 mL 5 cm³
2. धात की चाबी
3. अन्य

Note
टिप्पणी आयतन के मान mL मात्रकों में प्राप्त किए जाते हैं जिन्हें ठोस पदार्थों के लिए समतुल्य इकाई मात्रक cm3 में लिखा जा सकता है।

हमने अभी तक विभिन्न प्रकार के द्रवों और ठोस पदार्थों के द्रव्यमान और आयतन को मापना सीखा है। इन राशियों का उपयोग किसी वस्तु अथवा पदार्थ का घनत्व ज्ञात करने के लिए किया जा सकता है।

आइए, घनत्व का परिकलन करें

निम्नलिखित सूत्र का उपयोग कर घनत्व परिकलित किया जा सकता है।

घनत्व =द्रव्यमान/आयतन = (16.400g)/5cm3 =3.28 g/cm3

आइए, गहन अध्ययन करें

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चित्र 9.20 - पृथ्वी की परतें

क्या आप जानते हैं कि हमारा ग्रह पृथ्वी अनेक परतों, जैसे-भू-पर्पटी ऊपरी प्रावार, अधः प्रावार, बाहरी क्रोड और आंतरिक क्रोड से मिलकर बना है जिनमें से प्रत्येक परत का अपना विशिष्ट घनत्व है। इसकी बाह्यतम परत को भू-पर्पटी कहा जाता है। यह सबसे हल्की होती है। इसके साथ ही जैसे-जैसे हम केंद्र की ओर बढ़ते हैं विभिन्न परतों के घनत्व में वृद्धि होती जाती है (चित्र 9.20)। जैसे ही पृथ्वी की गहराई में जाते हैं दाब और तापमान दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होने से पदार्थ भारी और अधिक सघन हो जाते हैं।

क्या आपके संज्ञान में है...
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चित्र 9.21 - बाँस की चाटी जल पर तैरती है।
प्राचीन समय में बड़े जहाजों के आविष्कार से पूर्व लोग नदियों और समुद्रों की यात्रा करने के लिए बाँस और लकड़ी के लट्ठों का उपयोग किया करते थे (चित्र 9.21)। बाँस का उपयोग इसलिए किया जाता था क्योंकि यह हल्का और खोखला होता है और जल पर सरलतापूर्वक तैरता है। लोग बाँस के डंडों को एक साथ बाँधकर चाटी (राफ्ट) और छोटी नावें बनाते थे जो मछली पकड़ने, व्यापार करने और जल निकायों को पार करने के काम आती थीं। लकड़ी के लड्डे विशेषतया मजबूत वृक्षों के लड्डों को खोखला कर नाव या चाटी (राफ्ट) बनाने के लिए उपयोग में लाए जाते थे। स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों से बनी ये साधारण नावें विभिन्न स्थानों पर आवागमन हेतु एवं उन स्थानों को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण थीं। वर्तमान में भी अनेक क्षेत्रों में बाँस या लकड़ी से बनी ऐसी ही पारंपरिक नावों का प्रयोग न केवल परिवहन के लिए अपितु पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भी किया जाता है।

9.5.2 घनत्व पर तापमान का प्रभाव

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चित्र 9.22 - गरम वायु के गुब्बारों का ऊपर उठना

प्रायः किसी पदार्थ को गरम करने पर उसके घनत्व में कमी आती है और ठंडा करने पर उसमें वृद्धि होती है। इसका वर्णन अध्याय 7 'द्रव्य की कणीय प्रकृति' में सीखी गई बातों के आधार पर किया जा सकता है। जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होती है वैसे-वैसे ठोस, द्रव या गैस के कण एक दूसरे से दूर जाने और फैलने के लिए प्रवृत्त होते हैं। परिणामस्वरूप आयतन में वृद्धि होती है परंतु द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता है। चूँकि घनत्व = द्रव्यमान /आयतन होता है, अतः गरम करने पर आयतन बढ़ता है और घनत्व घटता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गरम वायु का घनत्व अपने आस-पास की ठंडी वायु से कम होता है और इसीलिए यह ऊपर की ओर उठती है। इसी सिद्धांत पर गरम वायु का गुब्बारा भी कार्य करता है (चित्र 9.22)।

घनत्व पर दाब का प्रभाव

पदार्थ की अवस्था के आधार पर दाब घनत्व को अलग-अलग प्रकार से प्रभावित करता है। गैसीय अवस्था में दाब में की गई वृद्धि कणों को एक-दूसरे के निकट लाती है। परिणामस्वरूप गैस का आयतन घटता है और उसके घनत्व में वृद्धि होती है। द्रवों में दाब का प्रभाव कम होता है क्योंकि वह लगभग असंपीड्य होते हैं। हमने 'द्रव्य की कणीय प्रकृति' अध्याय में पढ़ा है कि ठोस पदार्थों में कण एक-दूसरे के अति निकट होते हैं। अतः जब दाब आरोपित किया जाता है तो ठोस पदार्थों का घनत्व किस प्रकार प्रभावित होता है? द्रवों की अपेक्षा ठोस दाब से कम प्रभावित होते हैं और उनके घनत्व में परिवर्तन सामान्यतः नगण्य होते हैं।

क्या आपके संज्ञान में है...
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बर्फ जल पर क्यों तैरती है?
बर्फ जल पर इसलिए तैरती है क्योंकि यह द्रवित जल की अपेक्षा हल्की होती है (चित्र 9.23)। जल का एक विशेष गुणधर्म है कि इसका घनत्व 4°C पर सबसे अधिक होता है। इसका अर्थ है कि 4°C पर जल का भार अधिकतम होता है। जैसे-जैसे तापमान कम होता है वैसे-वैसे जल 0°C पर बर्फ में परिवर्तित हो जाता है क्योंकि इसकी संरचना में परिवर्तन होने लगता है। जल के कण स्वयं को इस प्रकार व्यवस्थित कर लेते हैं कि वे अधिक स्थान घेरते हैं। इस प्रक्रम को हम विस्तारण कहते हैं। चूँकि समान मात्रा का जल अब अधिक आयतन का है इसलिए इसका घनत्व घट जाता है। परिणामस्वरूप द्रवित जल की अपेक्षा बर्फ हल्की हो जाती है और जल की सतह पर तैरने लगती है।

झीलों और महासागरों में रहने वाले जीवों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बर्फ जब जल पर तैरती है तब यह सतह पर एक परत बनाती है जिससे उसके नीचे का जल हल्का गरम रहता है। इससे अत्यधिक ठंडे मौसम में भी मछलियाँ और अन्य जीवधारी जीवित रह पाते हैं।

वैज्ञानिक की भाँति सोचें
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चित्र 9.24 – जल में डूबा हुआ अंडा
  • वैज्ञानिक की भाँति सोचें काँच का एक गिलास लीजिए और उसमें नल से जल भरिए। सावधानीपूर्वक एक पूर्ण कच्चा अंडा जल में डालिए और अवलोकन कीजिए कि क्या होता है? आप देखेंगे कि अंडा गिलास की तली तक डूब गया है (चित्र 9.24)।
  • आप इस व्यवस्था में क्या परिवर्तन कर सकते हैं जिससे अंडा जल में डूबने की अपेक्षा तैरने लगे?
  • इस अध्याय में आपने घनत्व की अवधारणा के विषय में सीखा जो आंशिक रूप से व्याख्या करता है कि कुछ वस्तुएँ क्यों तैरती हैं जबकि अन्य डूब जाती हैं।
स्मरणीय बिंदु
  • जब दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक समरूप मिश्रण बनाते हैं तब विलयन बनता है।
  • किसी ठोस पदार्थ को द्रव में घोलकर बनाए गए विलयन में ठोस घटक को विलेय तथा द्रव घटक को विलायक कहा जाता है।
  • दो द्रवों को मिलाकर बने विलयन में कम मात्रा में उपस्थित घटक को विलेय तथा दूसरे घटक को विलायक कहते हैं।
  • वह विलयन जिसमें विलेय की अधिकतम मात्रा घुली हुई हो और एक निश्चित तापमान पर इससे अधिक विलेय उसमें घोला ना जा सके, उसे संतृप्त विलयन कहा जाता है।
  • वह विलयन जिसमें किसी निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय घुल सकता है, असंतृप्त विलयन कहलाता है।
  • घुलनशीलता या विलेयता विलेय की वह अधिकतम मात्रा है जो किसी विलयन या विलायक की एक निश्चित मात्रा (100 mL) में किसी विशिष्ट तापमान पर घुल सकती है।
  • सामान्यतः तापमान बढ़ने पर द्रवों में ठोस पदार्थों की घुलनशीलता बढ़ जाती है और गैसों की घुलनशीलता घट जाती है।
  • किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं।
  • किसी वस्तु या पदार्थ द्वारा घेरे गए स्थान को उसका आयतन कहते हैं।
  • द्रव्यमान और आयतन मापने के लिए प्रयुक्त उपकरण क्रमशः तौल तुला और मापक सिलिंडर हैं।
  • किसी पदार्थ के प्रति इकाई आयतन के द्रव्यमान को उसका घनत्व (घनत्व = द्रव्यमान/आयतन) कहते हैं।
  • सामान्यतः तापमान में वृद्धि के साथ घनत्व कम हो जाता है एवं पदार्थ की अवस्था के आधार पर दाब घनत्व को अलग-अलग प्रकार से प्रभावित करता है।

Keep the curiosity alive
  1. 1. बताइए कि नीचे दिए गए कथन सत्य हैं अथवा असत्य। असत्य कथन या कथनों को सत्य बनाइए।
    1. ऑक्सीजन गैस ठंडे पानी की अपेक्षा गरम पानी में अधिक घुलनशील होती है।
    2. रेत और पानी का मिश्रण एक विलयन है।
    3. किसी वस्तु द्वारा घेरे गए स्थान को उसका द्रव्यमान कहते हैं।
    4. असंतृप्त विलयन में संतृप्त विलयन की अपेक्षा अधिक विलेय घुला हुआ होता है।
    5. वायुमंडल में उपस्थित विभिन्न गैसें भी एक समरूपी मिश्रण है।
  2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
    1. किसी ठोस का आयतन विस्थापन विधि द्वारा मापा जा सकता है जहाँ ठोस को जल में ________ जाता है और जल स्तर की __________ मापी जाती है।
    2. किसी विशिष्ट तापमान पर __________में घुली _______की अधिकतम मात्रा उस तापमान पर उसकी विलेयता कहलाती है।
    3. प्रायः तापमान में वृद्धि से घनत्व _______है।
    4. वह विलयन जिसमें ग्लूकोस जल में पूर्णतः घुल गया हो तथा दिए गए तापमान पर और अधिक ग्लूकोस नहीं घुल सकता, ग्लूकोस का _________ विलयन कहलाता है।
  3. आप जल से भरे गिलास में तेल डालते हैं। तेल ऊपर तैरने लगता है। इससे आपको क्या ज्ञात होता है?
    1. तेल जल से अधिक सघन होता है।
    2. जल तेल से अधिक सघन होता है।
    3. तेल और जल का घनत्व समान होता है।
    4. तेल जल में घल जाता है।
  4. - किसी पत्थर की मूर्ति का वजन 225 g है और इसका आयतन 90 cm³ है। इसके घनत्व का परिकलन कीजिए और पूर्वानुमान लगाइए कि यह मूर्ति जल में तैरेगी अथवा डूबेगी।
  5. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है? अन्य कथन उपयुक्त क्यों नहीं हैं
    1. एक संतृप्त विलयन किसी निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय घोल सकता है।
    2. किसी दिए गए तापमान पर एक असंतृप्त विलयन में विलेय की अधिकतम संभव मात्रा घुल गई है।
    3. एक निश्चित तापमान पर संतृप्त विलयन में और अधिक विलेय नहीं घुल सकता है।
    4. एक संतृप्त विलयन केवल उच्च तापमान पर बनता है।
  6. आपके पास 2 लीटर आयतन की एक बोतल है। आप इसमें 500 mL जल भरते हैं। बोतल में और कितना जल भरा जा सकता है?
  7. किसी वस्तु का द्रव्यमान 400 g और आयतन 40 cm³ है। इसका घनत्व क्या है?
  8. Screenshot 2026-02-25 114515
    Fig. 9.25
  9. चित्र 9.25 (क) और 9.25 (ख) का विश्लेषण कीजिए। बिना छिला हुआ संतरा जल में क्यों तैरता है एवं छिला हुआ संतरा जल में क्यों डूब जाता है? व्याख्या कीजिए।
  10. किसी वस्तु 'क' का द्रव्यमान 200 g और आयतन 40 cm³ है। वस्तु 'ख' का द्रव्यमान 240 g और आयतन 60 cm³ है। किस वस्तु का घनत्व सघन है?
  11. Screenshot 2026-02-25 114525Screenshot 2026-02-25 114534
    Fig. 9.26
  12. रीमा के पास प्रतिरूपण मृदा (मॉडलिंग क्ले) का एक टुकड़ा है जिसका वजन 120 g है। वह पहले इसे एक ठोस घन के रूप में ढालती है जिसका आयतन 60cm³ है। इसके पश्चात वह इसे एक पतले पत्रक के रूप में समतल करती है। अनुमान लगाइए कि इसके घनत्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
  13. लोहे के एक ब्लॉक का द्रव्यमान 600 g और घनत्व 7.9g/cm³ है। इसका आयतन क्या होगा?
  14. आपको चित्र 9.26 (क) और 9.26 (ख) में दर्शाए अनुसार एक प्रयोगात्मक व्यवस्था दी गई है। परखनली (चित्र 9.26, ख) को गरम जल (~70°C) से भरे बीकर में रखने पर काँच की नली में जल के स्तर में वृद्धि हो जाती है। यह घनत्व को किस प्रकार प्रभावित करता है?
खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें
  • मृत सागर पर शोध परियोजना- मृत सागर में जलीय जीवन क्यों नहीं है? यह ज्ञात करने का प्रयास कीजिए कि क्या कहीं और भी इसी प्रकार के जलस्रोत हैं।
  • जाँच कीजिए कि साधारण नमक विभिन्न विलायकों, जैसे-जल, सिरका और तेल में कितनी भली प्रकार से घुलता है। प्रत्येक विलायक में नमक की घुलनशीलता की तुलना कीजिए और अपने अवलोकनों को अंकित कीजिए।
  • कक्षा में चर्चा कीजिए कि क्या जल वास्तव में सबसे सर्वतोमुखी विलायक है?
हमारी वैज्ञानिक परंपरा
मणिपुर के थौबल जिले का निंगेल गाँव एक ऐसा स्थान है जहाँ वर्तमान समय में भी पारंपरिक विधियों के उपयोग द्वारा नमक का उत्पादन किया जाता है। गाँव में लवणयुक्त खारे जल के कुछ कूप हैं जिनमें से एक कूप में लगभग सौ वर्ष प्राचीन वृक्ष का तना स्थापित किया गया है। इस तने के माध्यम से लवणयुक्त जल ऊपर आ जाता है। कुछ परिवारों की महिलाएँ नमक बनाने की पवित्र प्रथा को बनाए रखते हुए इस लवणीय जल को एकत्रित करके इसे लकड़ी के बड़े भट्टों पर धातु के पात्रों में उबालती हैं। जब जल वाष्पित हो जाता है और नमक के क्रिस्टल बन जाते हैं तब उसे केले के पत्तों पर हस्त उपकरणों द्वारा गोल आकार दिया जाता है जिसे 'नमक की टिक्की' कहते हैं। इसके पश्चात इन टिकियों को सुरक्षित रखने के लिए इस पारंपरिक कपड़े (फानेक) में लपेटा जाता है। माना जाता है कि नमक की टिकिया का औषधीय महत्व भी है।

निंगेल में नमक केवल भोजन ही नहीं है अपितु यह इतिहास है, संस्कृति है, विश्वास है और भारत की जीवंत परंपरा का एक सुंदर उदाहरण है।