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प्रकाश
दर्पण एवं लेंस

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खोजबीन और विचार करें
  • क्या हम ऐसे दर्पण बना सकते हैं जिनसे आवर्धित अथवा लघुकृत प्रतिबिंब बनते हों?
  • वाहनों में लगे पार्श्व-दृश्य दर्पणों पर एक चेतावनी अंकित होती है जिसका हिंदी में अर्थ -है – “वस्तुओं के बीच वास्तविक दूरी दर्पण में दिखाई देने वाली दूरी से कम होती है।" उन पर यह चेतावनी क्यों लिखी होती है?
  • कुछ ऐनक के लेंसों पर एक वक्र रेखा क्यों होती है?
  • अपने प्रश्नों को साझा कीजिए

    _____________

    _____________?

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ग्रीष्मकालीन अवकाश में मीना अपने परिवार के साथ एक विज्ञान केंद्र गई। वहाँ पर प्रकृति संबंधी, अंतरिक्ष संबंधी एवं प्रौद्योगिकी संबंधी अनेक आकर्षक प्रदर्श थे। जब मीना के माता-पिता जल और विद्युत की बचत संबंधी खंड में जानकारी प्राप्त करने में व्यस्त थे उस समय मीना अपने भाई के साथ सब ओर घूम-घूम कर वहाँ विद्यमान प्रदर्शों को देखने लगी। एक कोने में मीना को एक पंक्ति में रखे कुछ अनोखे वक्रित दर्पण दिखाई दिए। जिज्ञासावश वह एक दर्पण के समीप गई और उसमें उसने अपना प्रतिबिंब देखा। उसे अपना चेहरा असामान्य रूप से बड़ा दिखाई दिया जबकि उससे कुछ दूरी पर खड़े उसके भाई का प्रतिबिंब उल्टा दिखाई दे रहा था। एक अन्य दर्पण में उसने अपना एक अत्यंत लघु रूप देखा। मीना उलझन में पड़ गई।

उसको अपनी कक्षा 7 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'प्रकाश - छाया एवं परावर्तन' में उस दर्पण के साथ किए गए क्रियाकलाप स्मरण हो आए जिनमें वस्तु का सीधा और समान आमाप का प्रतिबिंब बनता था। उसकी उलझन को देखकर विज्ञान केंद्र के एक मार्गदर्शक उसके समीप आए और मुस्कुरा कर बोले, “ये समतल दर्पण नहीं हैं।” इसके पश्चात उन्होंने बताया, "ये गोलीय दर्पण हैं। जब दर्पण भीतर या बाहर की ओर वक्रित होते हैं तो इनमें आपका प्रतिबिंब वास्तविक स्वरुप से भिन्न दिखाई पड़ता है।" मीना की जिज्ञासा बढ़ गई और उसने निश्चय किया कि वह इन गोलीय दर्पणों के विषय में अपनी शिक्षिका से चर्चा करेगी।

10.1 गोलीय दर्पण क्या हैं?

क्रियाकलाप 10.1- आइए, खोज करें

  • धातु की एक चमकदार चम्मच लीजिए और इसके वक्रित पृष्ठ को अपने चेहरे के पास लाइए। क्या आप अपना प्रतिबिंब इसमें देख पाते हैं?
  • अपने चेहरे के प्रतिबिंब को ध्यान से देखिए। क्या यह उस प्रतिबिंब से भिन्न है जो आप समतल दर्पण में देखते हैं?
  • प्रतिबिंब का अवलोकन करते हुए चम्मच को धीरे-धीरे अपने चेहरे से दूर ले जाइए। क्या आपको प्रतिबिंब में कोई परिवर्तन दिखाई देता है?
  • अब चम्मच को उल्टा कर लीजिए और उपर्युक्त चरणों को दोहराइए। क्या आपने ध्यान दिया कि धातु की चमकदार चम्मच दर्पण की भाँति व्यवहार करती है और आप इसमें अपना प्रतिबिंब देख सकते हैं? जब आपने चम्मच के भीतरी पृष्ठ की ओर से देखा तो आपने अवलोकन किया होगा कि इसमें बना प्रतिबिंब उल्टा था (चित्र 10.1, क)। जब आपने चम्मच के उभरे पृष्ठ की ओर से देखा तो आपके चेहरे का प्रतिबिंब सीधा और आमाप में छोटा था (चित्र 10.1, ख)।
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चित्र 10.1 - किसी धातु की चमकदार चम्मच के (क) भीतर की ओर वक्रित पृष्ठ पर बना प्रतिबिंब (ख) बाहर की ओर वक्रित पृष्ठ पर बना प्रतिबिंब

चम्मच की भाँति वक्रित दर्पण विशेष रूप से भी बनाए जा सकते हैं। गोलीय दर्पण सामान्य प्रकार के वक्रित दर्पण हैं जिनकी आकृति काँच के खोखले गोले के एक भाग जैसी बनाई जाती है। वे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ गोलाकार होता है गोलीय दर्पण कहलाते हैं।

गोलीय दर्पण का पृष्ठ भीतर की ओर या बाहर की ओर वक्रित हो सकता है। एक ऐसा गोलीय दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ भीतर की ओर वक्रित होता है अवतल दर्पण कहलाता है (चित्र 10.2, क)। इसका आरेखीय निरूपण चित्र 10.2 (ख) में दर्शाया गया है। गोलीय दर्पण के पृष्ठ की परिरेखा वृत्ताकार होती है।

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चित्र 10.2 - (क) अवतल दर्पण
(ख) इसका आरेखीय निरूपण
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चित्र 10.3 - (क) उत्तल दर्पण
(ख) इसका आरेखीय निरूपण

एक गोलीय दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर वक्रित होता है उत्तल दर्पण कहलाता है (चित्र 10.3, क)। इसका आरेखीय निरूपण चित्र 10.3 (ख) में दर्शाया गया है।

दोनों दर्पणों के निरूपण में अपरावर्ती पृष्ठ को छायांकित किया गया है।

एक सोपान ऊपर
गोलीय दर्पण की आकृति ऐसी होती है कि इसे आप किसी काल्पनिक खोखले गोले का एक भाग समझ सकते हैं। तथापि स्मरण रहे कि गोलीय दर्पण किसी काँच के खोखले गोले का एक खंड काटकर नहीं बनाए जाते हैं। अपितु ये चपटे काँच के टुकड़े को एक वक्रित पृष्ठ के रूप में घिसकर और पॉलिश करके बनाए जाते हैं। यदि इसके बाहरी वक्रित पृष्ठ पर एक परावर्तक परत (जैसे कि एलुमिनियम की पतली परत) चढ़ा दी जाती है तो इसका आंतरिक वक्रित पृष्ठ परावर्तक पृष्ठ हो जाता है और यह अवतल दर्पण कहलाता है। यदि इस परत को आंतरिक पृष्ठ पर चढ़ाकर बाह्य उभरे हुए पृष्ठ को परावर्तक पृष्ठ बनाया जाता है तो यह उत्तल दर्पण कहलाता है।Screenshot 2026-02-26 095020

क्रियाकलाप 10.2- आइए, भेद करें

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  • हम अवतल और उत्तल दर्पण में किस प्रकार भेद कर सकते हैं?
  • अवतल और उत्तल दर्पण के परावर्तक पृष्ठों को ऊपर की ओर करके मेज पर रखिए। अब आँख को दर्पण के ऊपरी पृष्ठ के तल में लाकर पार्श्व से देखकर पहचानिए कि पृष्ठ भीतर की ओर वक्रित है या बाहर की ओर (चित्र 10.4)।
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चित्र 10.4- पार्श्व से देखकर अवतल और उत्तल दर्पण की पहचान करना

10.2 गोलीय दर्पणों द्वारा बनाए गए प्रतिबिंबों के अभिलक्षण क्या होते हैं?

क्रियाकलाप 10.3- आइए, खोज करें

  • एक अवतल दर्पण, एक उत्तल दर्पण, दो लकड़ी के छोटे गुटके अथवा दर्पणों को सीधा खड़ा रखने में सहायक कोई वस्तु लीजिए। साथ ही एक छोटा खिलौना अथवा कोई अन्य वस्तु लीजिए।
  • दोनों दर्पणों को मेज पर एक दूसरे के समीप सीधा खड़ा करके रखिए। वस्तु को उनके सामने थोड़ी दूरी (3-4 सेंटीमीटर) पर रखिए जैसे चित्र 10.5 (क) में दर्शाया गया है। आप प्रत्येक दर्पण में किस प्रकार का प्रतिबिंब देखते हैं? क्या प्रतिबिंबों का आमाप उतना ही है जितना उनके सामने रखी वस्तु का है? क्या वे सीधे हैं? क्या आप प्रतिबिंबों में पार्श्व परिवर्तन देखते हैं? अपनी अभ्यास पुस्तिका में अपने अवलोकनों को लिखिए।
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    चित्र 10.5 - अवतल एवं उत्तल दर्पण के सामने (क) अल्प दूरी पर (ख) बहुत अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं के प्रतिबिंब
  • अब धीरे-धीरे वस्तु को दर्पणों से दूर ले जाइए (चित्र 10.5, ख)। दोनों दर्पणों के प्रतिबिंबों में आप क्या परिवर्तन देखते हैं? प्रतिबिंब का आमाप घटता है या बढ़ता है? क्या प्रतिबिंब सीधे बने रहते हैं? ये सब प्रेक्षण भी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए।
  • प्रत्येक दर्पण के लिए ये चरण अलग-अलग दोहराइए।
  • अपने अवलोकनों का विश्लेषण कीजिए और निष्कर्ष निकालिए।

जब वस्तु अवतल दर्पण के समीप रखी होती है तो इसमें इस वस्तु का प्रतिबिंब सीधा और आमाप में वस्तु के आकार से बड़ा अर्थात आवर्धित होता है। तथापि जब वस्तु को दर्पण से दूर ले जाया जाता है तो प्रतिबिंब उल्टा हो जाता है। आरंभ में यह उल्टा प्रतिबिंब आमाप में आवर्धित होता है और उसके पश्चात छोटा होता जाता है। यदि उत्तल दर्पण लिया जाए तब प्रतिबिंब सदैव सीधा और वस्तु से छोटा अर्थात लघुकृत होता है। तथापि जब वस्तु उत्तल दर्पण से दूर ले जाई जाती है तो प्रतिबिंब का आमाप थोड़ा और कम होता जाता है।

यह क्रियाकलाप दर्शाता है कि गोलीय (अवतल एवं उत्तल) दर्पणों का व्यवहार समतल दर्पणों से भिन्न होता है। एक समतल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा और वस्तु के बराबर आमाप का प्रतिबिंब बनाता है। जबकि अवतल और उत्तल दर्पणों में प्रतिबिंब का आमाप दर्पण से वस्तु की दूरी के साथ परिवर्तित होता रहता है। इसके अतिरिक्त अवतल दर्पण के प्रकरण में वस्तु को दर्पण से दूर ले जाने पर प्रतिबिंब उल्टा भी हो जाता है। पार्श्व परिवर्तन तीनों ही प्रकार के दर्पणों से बने प्रतिबिंबों में देखने को मिलता है।

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  • अभी-अभी मेरे मस्तिष्क में एक विचार आया है कि कोई दर्पण समतल है, अवतल है या उत्तल है इसकी पहचान हम उसमें बने प्रतिबिंब को देखकर भी कर सकते हैं।
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  • सही बात है। किंतु अपने आस-पास हम उत्तल एवं अवतल दर्पणों का उपयोग कहाँ-कहाँ देखते हैं?
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चित्र 10.6- अवतल दर्पण का उपयोग (क) टॉर्च में परावर्तक के रूप में (ख) दंत चिकित्सक द्वारा

टॉर्च लाइटों, कारों एवं स्कूटरों के अग्रदीपों (हेडलाइटों) के परावर्तक अवतल आकार के होते हैं (चित्र 10.6, क)। क्या आपने दंत चिकित्सक द्वारा दाँतों के निरीक्षण के लिए उपयोग में लाए जाने वाले दर्पण को देखा है? यह एक अवतल दर्पण होता है जिसे मुख में दाँतों के निकट रखने पर इसमें दाँतों का एक आवर्धित प्रतिबिंब बनता है (चित्र 10.6, ख)।

एक सोपान ऊपर
क्या कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के 'पृथ्वी से परे' अध्याय में आपने दूरदर्शक यंत्र के विषय में जो सीखा था वह आपको स्मरण है? अधिकांश आधुनिक दूरदर्शक यंत्र परावर्तक दूरदर्शक होते हैं जिनमें वक्रित दर्पण उपयोग में लाए जाते हैं और मुख्य दर्पण एक बड़ा अवतल दर्पण होता है।

वाहनों में लगे पार्श्व-दृश्य दर्पणों का अवलोकन कीजिए (चित्र 10.7, Phi )l ये उत्तल दर्पण होते हैं। ये पीछे चल रहे वाहनों का सदैव सीधा तथा उनके वास्तविक आमाप से छोटा प्रतिबिंब बनाते हैं। उत्तल दर्पण बाहर की ओर वक्रित होता है इस कारण यह पीछे की सड़क का एक विस्तृत क्षेत्र प्रतिबिंबित करता है।Screenshot 2026-02-26 100002

चित्र 10.7 - उत्तल दर्पण का उपयोग (क) पार्श्व दृश्य दर्पण के रूप में (ख) सड़क सुरक्षा दर्पण के रूप में (ग) चौकसी दर्पण के रूप में

इसके अतिरिक्त इस प्रकार के उत्तल दर्पण सड़कों के चौराहों अथवा तीक्ष्ण मोड़ों पर भी लगाए जाते हैं ताकि दोनों ओर के वाहन चालक दूसरी ओर के यातायात को देख सकें और टकराने से बच सकें (चित्र 10.7, ख)। उत्तल दर्पण एक बड़े क्षेत्र पर दृष्टि बनाए रखने के लिए बड़े भंडार गृहों में भी लगाए जाते हैं। इससे वहाँ चोरी की संभावना कम हो जाती है (चित्र 10.7, ग)।

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  • हमने समतल, उत्तल एवं अवतल तीनों प्रकार के दर्पणों में बने प्रतिबिंबों का अवलोकन किया है। किंतु क्या इन प्रतिबिंबों की रचना के कुछ नियम होते हैं?

10.3 परावर्तन के नियम क्या हैं?

आइए, अब हम एक क्रियाकलाप दोहराते हैं जो हमने कक्षा 7 में किया था किंतु यहाँ हम उसे और आगे बढ़ाएँगे। क्या आपको वह क्रियाकलाप स्मरण है जिसे आपने समतल दर्पण से किसी प्रकाश पुंज के परावर्तन के अवलोकन के लिए किया था।

क्रियाकलाप 10.4- आइए, प्रयोग करें

  • एक स्टैंडयुक्त समतल दर्पण, एक टॉर्च, एक कंघी, कंघी को सीधा खड़ा करने के लिए एक बाइंडर क्लिप, सफेद कागज की एक शीट तथा काले कागज की एक पट्टी लीजिए।
  • जैसा आपने पहले किया था उसी प्रकार कंघी के मध्य की एक झिरी के अतिरिक्त अन्य सभी झिरियों को काले कागज की पट्टी से ढक कर मध्य में एक पतली झिरी बनाइए।
  • मेज पर सफेद कागज फैलाइए (चित्र 10.8, ख)। समतल दर्पण को इस पर उर्ध्वाधर खड़ा कीजिए।
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    चित्र 10.8 - समतल दर्पण पर आपतित किरणपुंज (क) किसी एक कोण पर (ख) किसी दूसरे कोण पर
  • पतली झिरी और टॉर्च का उपयोग करके कागज के अनुदिश एक पतला प्रकाश पुंज प्राप्त कीजिए और इसे इस प्रकार समंजित कीजिए कि यह दर्पण पर चित्र 10.8 (क) में दर्शाए अनुसार आपतित हो।
  • अब झिरी और टॉर्च को थोड़ा-सा एक ओर हटाइए ताकि प्रकाश पुंज दर्पण पर एक भिन्न कोण पर आपतित हो (चित्र 10.8, ख)। क्या दर्पण के सापेक्ष परावर्तित किरण का कोण भी परिवर्तित हो जाता है?
  • प्रकाश पुंज को दर्पण पर विभिन्न कोणों पर पड़ने दीजिए और अवलोकन कीजिए कि आपतन कोण बदलने से परावर्तित प्रकाश पुंज की दिशा किस प्रकार परिवर्तित होती है। इस तथ्य को और स्पष्ट रूप से समझने के लिए हम अपने क्रियाकलाप के प्रत्येक चरण को कागज पर आरेखित करते हैं। ऐसा करने से पूर्व आइए समझते हैं कि प्रकाश पुंज को कैसे निरूपित किया जा सकता है। हम प्रायः प्रकाश पुंज को बाणाग्र चिह्न युक्त सरल रेखाओं या किरणों के द्वारा निरूपित करते हैं। किरणें उस पथ को निर्दिष्ट करती हैं जिसके अनुदिश प्रकाश गमन करता है। क्या आपको स्मरण है कि प्रकाश सरल रेखा के अनुदिश गमन करता है?
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    चित्र 10.9 - (क) आपतित एवं परावर्तित किरणों का आरेखण (ख) अभिलंब का आरेखण (ग) आपतन कोण एवं परावर्तन कोण (घ) कोणों का मापन
  • समतल दर्पण की स्थिति दर्शाती हुई एक सरल रेखा आरेखित कीजिए। दर्पण पर आपतित और इससे परावर्तित किरणपुंजों को निरूपित करने के लिए बाणाग्र युक्त रेखाएँ भी दर्शाइए। (चित्र 10.9, क) अब दर्पण को हटा दीजिए। दर्पण को निरूपित करने वाली रेखा के उस बिंदु पर
  • दर्पण पर पड़ने वाली प्रकाश किरण आपतित किरण कहलाती हैं। दर्पण से टकराकर वापस लौटने वाली प्रकाश किरण परावर्तित किरण कहलाती हैं।
  • अब दर्पण को हटा दीजिए। दर्पण को निरूपित करने वाली रेखा के उस बिंदु पर 90 deg का कोण बनाती हुई रेखा खींचिए जिस पर आपतित किरण आकर मिलती है। यह रेखा परावर्तक सतह के आपतन बिंदु पर अभिलंब कहलाती है (चित्र 10.9, ख)।

    अभिलंब और आपतित किरण के बीच का कोण आपतन कोण (i) (चित्र 10.9, ग) कहलाता है। अभिलंब और परावर्तित किरण के बीच का कोण परावर्तन कोण (r) कहलाता है (चित्र 10.9, ग)।

  • आपने जो आरेख बनाया है उसमें आपतन कोण और परावर्तन कोण मापिए और कोण माप तालिका 10.1 में अंकित कीजिए।
  • आपतन कोण परिवर्तित कर इस क्रियाकलाप को दोहराइए।
  • अंत में आपतित किरणपुंज को दर्पण पर अभिलंब के अनुदिश पड़ने दीजिए और परावर्तित किरणपुंज का अवलोकन कीजिए। यहाँ आपतन कोण एवं परावर्तन कोण के मान क्या हैं? यहाँ इन दोनों कोणों के मान शून्य हैं।

तालिका 10.1- आपतन कोण और परावर्तन कोण का मापन



क्र.सं. आपतन कोण (i) परावर्तन कोण (r)




क्या आपने ध्यान दिया कि तालिका 10.1 में दोनों कोणों के मान लगभग बराबर हैं? यदि यह प्रयोग सावधानी से किया जाए तो इससे पता चलता है कि आपतन कोण (i) का मान परावर्तन कोण के मान के बराबर है। यह परावर्तन का एक नियम है। (r)

क्रियाकलाप 10.5- आइए, प्रयोग करें

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चित्र 10.10 - (क) परावर्तित किरण मेज से बाहर निकले हुए कागज के भाग के अनुदिश दिखाई देती है। (ख) परावर्तित किरण कागज के मुड़े हुए भाग के अनुदिश दिखाई नहीं देती।
  • क्रियाकलाप 10.4 में उपयोग की गई वस्तुओं को उसी प्रकार व्यवस्थित कीजिए जैसे क्रियाकलाप में किया था साथ ही एक अनम्य चार्ट पत्रक को मेज पर इस प्रकार रखिए कि इसका कुछ भाग मेज के बाहर निकला रहे।
  • पत्रक पर रखे हुए दर्पण पर प्रकाश की एक पतली किरणपुंज डालिए और परावर्तित किरणपुंज को मेज से बाहर निकले पत्रक के भाग पर देखिए (चित्र 10.10, क)।
  • अब पत्रक के बाहर निकले हुए भाग को मेज के किनारे से नीचे की तरफ मोड़ दीजिए (चित्र 10.10, ख)। क्या आप अब भी परावर्तित किरणपुंज को पत्रक के बाहर निकले हुए भाग पर देख पाते हैं।
  • पत्रक के मुड़े हुए भाग को सीधा कर दीजिए और अवलोकन कीजिए।

जब पत्रक को मोड़ देते हैं तो किरणपुंज लुप्त हो जाता है किंतु जब इसे पुनः सीधा कर दिया जाता है तो किरणपुंज पुनः प्रकट हो जाती है। इससे पता चलता है कि परावर्तित किरणपुंज उसी समतल में होता है जिसमें आपतित किरणपुंज होती है। पत्रक को मोड़ देने पर एक नया समतल निर्मित हो जाता है जिससे यह सरेखण भंग हो जाता है।

आपतित किरण, दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण, ये सभी एक ही तल में अवस्थित होते हैं।

यह परावर्तन का एक अन्य नियम है।
एक सोपान ऊपर
नीचे दर्शाए गए दो प्रकरणों में यद्यपि आपतित किरणों की दिशाएँ भिन्न हैं वे दर्पण के एक ही बिंदु पर पड़ती हैं और इसलिए अभिलंब की दिशा एक ही है। तथापि परावर्तित किरण की दिशा ऐसी होती है कि आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब एवं परावर्तित किरण, ये सभी दोनों ही प्रकरणों में अपने-अपने समतल में समाहित रहते हैं।Screenshot 2026-02-26 100136

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  • क्या परावर्तन के नियम गोलीय दर्पणों पर भी लागू होते हैं?

परावर्तन के नियम सभी प्रकार के दर्पणों के लिए मान्य होते हैं चाहे वह समतल हो अथवा गोलीय। इसके साथ ही यदि अनेक समांतर किरणें गोलीय दर्पण पर आपतित होती हैं तो हम कुछ रोचक अवलोकन करते हैं।

क्रियाकलाप 10.6- आइए, खोज करें

  • एक समतल दर्पण, एक अवतल दर्पण, एक उत्तल दर्पण, दर्पणों के लिए स्टैंड, एक टॉर्च, एक कंघा तथा कंघे को ऊर्ध्वाधर खड़ा करने के लिए एक बाइंडर क्लिप लीजिए।
  • सभी वस्तुओं को उसी प्रकार से व्यवस्थित कीजिए जैसे क्रियाकलाप 10.4 में किया था किंतु प्रकाश के अनेक समांतर किरणपुंज प्राप्त करने के लिए एक झिरी के स्थान पर कंघे की अनेक झिरियाँ खुली रखिए (चित्र 10.11, क)।
  • एक-एक करके समतल दर्पण, अवतल दर्पण तत्पश्चात उत्तल दर्पण पर प्रकाश के अनेक किरणपुंज पड़ने दीजिए। परावर्तित किरणपुंज का अवलोकन कीजिए। क्या आप वैसा कुछ अवलोकित करते हैं जैसा चित्र 10.11, 'ख', 'ग' और 'घ' में दर्शाया गया है?
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Fig. 10.11: (a) Multiple slits; Multiple parallel beams of light fall upon — (b) Plane mirror; (c) Concave mirror; (d) Convex mirror

जब समतल दर्पण पर प्रकाश के अनेक समांतर किरणपुंज आपतित होते हैं तो परावर्तित होने वाले सभी किरणपुंज भी समांतर होते हैं (चित्र 10.11, ख)। तथापि जब प्रकाश के अनेक किरणपुंज अवतल दर्पण पर आपतित होते हैं तो इनके संगत परावर्तित किरणपुंज निकट आ जाते हैं अर्थात वे अभिसरित हो जाते हैं (चित्र 10.11, ग) जबकि उत्तल दर्पण पर पड़ने वाले अनेक प्रकाश किरणपुंज परावर्तित होकर फैल जाते हैं अर्थात वे अपसरित हो जाते है (चित्र 10.11, घ)।

परावर्तित होकर फैल जाते हैं अर्थात वे अपसरित हो जाते है (चित्र 10.11, घ)। गोलीय दर्पणों के प्रकरण में भी प्रत्येक प्रकाश किरण परावर्तन के नियमों का अनुपालन करती है परंतु गोलीय दर्पणों का पृष्ठ वक्रित होने के कारण उन पर आपतित समांतर प्रकाश किरणपुंज अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात अभिसरित होता है और उत्तल दर्पण से परावर्तन के पश्चात अपसरित होता है।

एक सोपान ऊपर
यदि हम क्रियाकलाप 10.6 में किए गए अपने अवलोकनों का चित्रांकन करें तो हमें नीचे दर्शाए अनुसार आरेख प्राप्त होंगे।Screenshot 2026-02-26 100205
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  • अतः अवतल दर्पण प्रकाश किरणपुंज को अभिसरित करता है और उत्तल दर्पण इसे अपसरित करता है। यह तो अत्यंत रोचक है!
  • अवतल दर्पण प्रकाश किरणपुंज को अभिसरित करता है तो क्या इससे प्रकाश एक छोटे क्षेत्र में संकेंद्रित नहीं हो जाएगा?

क्रियाकलाप 10.7- आइए, खोज करें

सुरक्षा सर्वोपरि
इस क्रियाकलाप को सदैव किसी शिक्षक अथवा अन्य वयस्क व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही करें। सूर्य की ओर अथवा दर्पण में सूर्य के प्रतिबिंब की ओर सीधे न देखें। परावर्तित प्रकाश को कागज के टुकड़े पर ही संकेंद्रित करें किसी के चेहरे अथवा आँखों पर कभी भी संकेंद्रित न करें।
  • एक अवतल दर्पण तथा एक पतला कागज अथवा समाचार पत्र का टुकड़ा लीजिए। अवतल दर्पण को इस प्रकार पकड़िए कि इसका परावर्तक पृष्ठ सूर्य की ओर रहे। दर्पण द्वारा परावर्तित सूर्य के प्रकाश को कागज की ओर निर्दिष्ट कीजिए।Screenshot 2026-02-26 100247
    चित्र 10.12 - अवतल दर्पण द्वारा सूर्य के प्रकाश को कागज पर अभिसरित करना
  • एक अवतल दर्पण तथा एक पतला कागज अथवा समाचार पत्र का टुकड़ा लीजिए। अवतल दर्पण को इस प्रकार पकड़िए कि इसका परावर्तक पृष्ठ सूर्य की ओर रहे। दर्पण द्वारा परावर्तित सूर्य के प्रकाश को कागज की ओर निर्दिष्ट कीजिए।
  • दर्पण और कागज के बीच की दूरी को समंजित कीजिए जब तक कि इस पर एक स्पष्ट चमकदार धब्बा न बन जाए जैसे चित्र 10.12 में दर्शाया गया है।
  • कुछ समय तक दर्पण एवं कागज की स्थितियाँ स्थिर बनाए रखिए। क्या कागज जलने लगता है और इससे धुआँ उठने लगता है?

कागज पर चमकदार धब्बा इसलिए बनता है क्योंकि सूर्य से आने वाला प्रकाश दर्पण से परावर्तन के पश्चात इस बिंदु पर संकेंद्रित हो जाता है। इससे इस बिंदु पर इतनी ऊष्मा उत्पन्न होती है जो कागज को जलाने के लिए पर्याप्त होती है।

एक सोपान ऊपर
दर्पणों एवं लेंसों का उपयोग करके बनाई गई ऐसी युक्तियाँ जो सूर्य के प्रकाश को एक छोटे से क्षेत्र में संकेंद्रित कर देती हैं सौर-संकेंद्रक कहलाती हैं। सूर्य के संकेंद्रित प्रकाश का उपयोग जल को गर्म करके वाष्प बनाने के लिए किया जाता है जो विद्युत जनन अथवा अन्य विभिन्न उद्देश्यों जैसे बड़े स्तर पर भोजन पकाने अथवा सौर भट्टियों के लिए उपयोग में लाई जा सकती है। सौर भट्टियों का उपयोग इस्पात (स्टील) को पिघलाने के लिए भी किया जाता है। आपको स्मरण होगा कि एक पूर्ववर्ती अध्याय में आपने इस्पात को पिघलाने के लिए विद्युत भट्टियों के उपयोग के संबंध में पढ़ा था।

10.4 लेंस क्या होता है?

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  • हमने किसी वस्तु के वक्रित दर्पणों द्वारा बने प्रतिबिंबों का अन्वेषण किया। परंतु वक्रित पृष्ठों वाले पारदर्शी पदार्थों के माध्यम से देखने पर वस्तुएँ कैसी दिखाई पड़ती हैं?

यदि आप किसी खिड़की के समतल, पारदर्शी, काँच के पार की वस्तुओं का अवलोकन करते हैं तो आपको सभी वस्तुएँ समान आमाप और आकृति की दिखाई पड़ती हैं। किंतु यदि पारदर्शी पदार्थ के पृष्ठ वक्रित हों तब भी क्या ये वस्तुएँ वैसी ही दिखाई देंगी?

क्रियाकलाप 10.8- आइए, खोज करें

  • काँच या पारदर्शी प्लास्टिक की एक समतल पट्टिका, जैसे- एक समतल मापक, तेल की कुछ बूंदे, बिंदुपाती (ड्रॉपर), जल एवं कागज जिस पर कुछ छपा हो अथवा पुस्तक लीजिए। काँच अथवा प्लास्टिक की पट्टिका के पृष्ठ पर तेल की कुछ बूँदें फैलाइए और इसको रगड़ कर पट्टिका पर तेल की एक अत्यंत पतली परत बनाइए। तेल के स्थान पर आप मोम का उपयोग भी कर सकते हैं।
  • बिंदुपाती या अपनी अँगुली का उपयोग करके तेल या मोम लगे स्थान पर जल की एक छोटी बूँद रखिए (तेल या मोम, जल की बूँद की अच्छी गोलाकार आकृति बनाए रखने में सहायता करता है)।
  • जल की बूँद का अवलोकन कीजिए। इसका पृष्ठ किस आकृति का है? क्या यह समतल है, भीतर की ओर वक्रित है या बाहर की ओर वक्रित है?Screenshot 2026-02-26 100309
    चित्र 10.13 - जल की बूँद के नीचे पाठ्यसामग्री का अवलोकन
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    चित्र 10.14 - आवर्धक लेंस
  • कागज को काँच या प्लास्टिक पट्टिका के नीचे इस प्रकार रखिए कि पाठ्यसामग्री का कुछ भाग ठीक जल की बूँद के नीचे रहे (चित्र 10.13)।
  • अब पट्टिका के नीचे की पाठ्यसामग्री को जल की बूँद के ऊपर से देखिए। क्या आपको जल की बूँद के नीचे के अक्षर या अक्षरों के आमाप में कोई परिवर्तन दिखाई पड़ता है।
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चित्र 10.15 - (क) उत्तल लेंस (ख) इसका आरेखीय निरूपण

क्या ये आमाप में बड़े दिखाई पड़ते हैं या छोटे?

जल की बूँद का पृष्ठ बाहर की ओर उभरा हुआ होता है। जल की बूँद के नीचे के अक्षर भिन्न दिखाई पड़ते हैं जिससे ये आस-पास के अक्षरों की तुलना में बड़े दिखाई पड़ सकते हैं। जल की बूंद के वक्रित पृष्ठ ने पाठ्यसामग्री के आमाप में वृद्धि कर दी है। जल की यह वक्रित पृष्ठ वाली बूँद एक साधारण लेंस की भाँति व्यवहार करती है। क्या आपने चित्र 10.14 में - दर्शाए जैसा आवर्धक लेंस देखा है? इस लेंस की सहायता से मुद्रित छोटे-छोटे अक्षर बड़े दिखाई देते हैं जिससे उन्हें सरलता से पढ़ा जा सकता है।

A लेंस पारदर्शी पदार्थ का एक टुकड़ा होता है जो प्रायः काँच या प्लास्टिक का बना होता है। इसके पृष्ठ वक्रित होते हैं। दर्पणों की भाँति लेंस भी उत्तल या अवतल हो सकते हैं।

वह लेंस जो किनारों की अपेक्षा बीच में अधिक मोटा होता है उत्तल लेंस कहलाता है (चित्र 10.15)।

ऐसा लेंस जो किनारों पर मोटा और बीच में पतला होता है अवतल लेंस कहलाता है (चित्र 10.16)।

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चित्र 10.16 - (क) अवतल लेंस (ख) निरूपण

दर्पणों के विपरीत लेंसों पर पड़ने वाला प्रकाश इनके पार निकल जाता है और हम लेंस में वस्तुओं को न देख कर लेंस के माध्यम से इन्हें देखते हैं।

Screenshot 2026-02-26 100349
  • वस्तुओं को जब लेंसों के माध्यम से देखा जाता है तो उनमें क्या परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं?

क्रियाकलाप 10.9- आइए, प्रयोग करें

  • एक उत्तल लेंस, एक अवतल लेंस, एक लेंसधारक तथा कोई छोटी वस्तु लीजिए।
  • उत्तल लेंस को इसके धारक में लगाकर सीधा खड़ा कीजिए।
  • Screenshot 2026-02-26 101341
    चित्र 10.17 - जब किसी वस्तु को (क) उत्तल लेंस द्वारा इसके समीप रखकर देखा जाता है। (ख) उत्तल लेंस द्वारा दूर रखकर देखा जाता है। (ग) अवतल लेंस द्वारा देखा जाता है।
  • वस्तु को उत्तल लेंस के पीछे रखिए (वस्तु को लेंस के तल में लाने के लिए इसे किसी आधार के ऊपर रखा जा सकता है)।
  • वस्तु को लेंस के दूसरी ओर से लेंस के माध्यम से देखिए (चित्र 10.17, क) और अपने अवलोकनों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए।
  • अब धीरे-धीरे वस्तु को लेंस से दूर हटाते जाइए और अवलोकन करते जाइए कि प्रतिबिंब किस प्रकार परिवर्तित होता है (चित्र 10.17, ख)। उत्तल लेंस से वस्तु की दूरी का परिवर्तन प्रतिबिंब को किस प्रकार प्रभावित करता है?
  • अब इन्हीं चरणों को अवतल लेंस के साथ दोहराइए (चित्र 10.17, ग)।
  • अपनी अभ्यास पुस्तिका में अभिलेखित अपने प्रेक्षणों का विश्लेषण कीजिए और दोनों लेंसों से देखे गए प्रतिबिंबों की तुलना कीजिए।
  • आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
जब किसी वस्तु को एक उत्तल लेंस के पीछे इससे अल्प दूरी पर रख कर देखा जाता है तो वस्तु सीधी और आमाप में आवर्धित दिखाई पड़ती है। लेंस और वस्तु के बीच की दूरी का मान एक विशिष्ट मान से अधिक होने पर वस्तु उल्टी दिखाई देने लगती है। प्रारंभ में यह उल्टा प्रतिबिंब आवर्धित होता है इसके पश्चात आमाप में छोटा हो जाता है। अवतल लेंस के पीछे रखी किसी वस्तु को जब लेंस के माध्यम से देखा जाता है तो यह सदैव उल्टा और आमाप में छोटा दिखाई देता है। लेंस से दूरी बढ़ाने पर इसका आमाप छोटा होता जाता है।Screenshot 2026-02-26 101349
  • क्या लेंस भी प्रकाश पुंज को अभिसरित और अपसरित करते हैं?

क्रियाकलाप 10.10- आइए, अन्वेषण करें

  • एक पतली पारदर्शी काँच पट्टिका, एक उत्तल लेंस, एक अवतल लेंस, एक टॉर्च, प्रकाश के अनेक समांतर किरणपुंज प्राप्त करने के लिए एक कंघा, कंघे को सीधा खड़ा करने के लिए एक बाइंडर क्लिप, एक समान दो पुस्तकें तथा एक सफेद कागज लीजिए।
  • एक दूसरे के सन्निकट रखी दो पुस्तकों का उपयोग करके काँच पट्टिका अथवा लेंस को उनके बीच चित्र 10.18 में दर्शाए अनुसार सीधा खड़ा कीजिए। दोनों पुस्तकों पर कागज फैलाइए।
  • अब पतली काँच पट्टिका उत्तल लेंस और अवतल लेंस पर चित्र 10.18 में दर्शाए अनुसार प्रकाश के अनेक समांतर किरणपुंज आपतित होने दीजिए। क्या इनमें से प्रकाश का समांतर किरणपुंज उसी प्रकार पार होता है जैसे चित्र में दर्शाया गया है?
  • अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए और उनका विश्लेषण कीजिए।
पतली काँच पट्टिका में से प्रकाश पुंज यथावत पार हो जाता है। उत्तल लेंस अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को अभिसरित कर देता है जबकि अवतल लेंस प्रकाश को अपसरित करता है। उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस तथा अवतल लेंस को अपसारी लेंस भी कहते हैं।Screenshot 2026-02-26 101540
चित्र 10.18 - प्रकाश के अनेक समांतर किरणपुंज (क) पतली काँच पट्टिका पर (ख) उत्तल लेंस पर (ग) अवतल लेंस पर आपतित होते हुए

एक सोपान ऊपर
यदि हम क्रियाकलाप 10.10 में किए गए अवलोकनों का चित्रांकन करें तो हमें नीचे दर्शाए अनुसार आरेख प्राप्त होंगे।Screenshot 2026-02-26 101553

Screenshot 2026-02-26 101602
  • क्योंकि उत्तल लेंस प्रकाश को अभिसरित करता है तो क्या इसका उपयोग करके भी कागज को जलाया जा सकता है?

क्रियाकलाप 10.11- आइए, अन्वेषण करें

  • सूर्य की किरणों के मार्ग में अवतल दर्पण के स्थान पर उत्तल लेंस रख कर क्रियाकलाप 10.7 को दोहराइए (चित्र क्या आप इसका उपयोग करके कागज को जला सकते हैं? 10.19 )|
Screenshot 2026-02-26 101850
  • लेंसों का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है?
सुरक्षा सर्वोपरि
सूर्य को सीधे अथवा लेंस के माध्यम से न देखें क्योंकि ऐसा करने से आपके नेत्रों को क्षति पहुँच सकती है।
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चित्र 10.19- उत्तल लेंस का उपयोग करके कागज पर सूर्य के प्रकाश को अभिसरित करना।
Screenshot 2026-02-26 101909
चित्र 10.20 - (क) ऐनक (ख) स्मार्टफोन के कैमरे के लेंस

लेंस महत्त्वपूर्ण है और हमारे चारों ओर विभिन्न स्थानों पर प्रयुक्त होते हैं। वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने के लिए लोग जो ऐनक पहनते हैं उसके पारदर्शी भाग लेंस ही होते हैं (चित्र 10.20, क)। कैमरों (चित्र 10.20, ख), दूरदर्शक यंत्रों और सूक्ष्मदर्शियों में भी उनके कार्य के लिए लेंसों का उपयोग a

Snapshots
  • अवतल दर्पण द्वारा निर्मित प्रतिबिंब आवर्धित, वस्तु से छोटे अथवा वस्तु के आमाप के बराबर हो सकते हैं और ये सीधे भी हो सकते हैं और उल्टे भी। उनके ये अभिलक्षण दर्पण से वस्तु की दूरी पर निर्भर करते हैं।
  • उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब सदैव सीधे और आमाप में वस्तु से छोटे होते हैं।
  • परावर्तन के दो नियम निम्नलिखित हैं-
    • आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है।
    • आपतित किरण, दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण सभी एक ही समतल में स्थित होते हैं।
  • परावर्तन के नियम समतल, अवतल और उत्तल-सभी प्रकार के दर्पणों के लिए मान्य हैं।
  • अवतल दर्पण प्रकाश किरणपुंजों को अभिसरित करते हैं जबकि उत्तल दर्पण उन्हें अपसरित करते हैं।
  • उत्तल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब आवर्धित, आमाप में वस्तु से छोटा अथवा समान आमाप का हो सकता है और यह सीधा अथवा उल्टा भी हो सकता है। प्रतिबिंब का यह अभिलक्षण लेंस से वस्तु की दूरी पर निर्भर करता है।
  • अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव सीधा और आमाप में वस्तु से छोटा होता है।
  • उत्तल लेंस प्रकाश किरणपुंज को अभिसरित करता है जबकि अवतल लेंस इसे अपसरित करता है।
जिज्ञासा बनाए रखें
  1. किसी दर्पण पर आपतित प्रकाश की एक किरण एवं उसके संगत परिवर्तित किरण चित्र 10.12 में दर्शाई गई है आपतित किरण दर्पण पर अभिलंब के साथ 40° का कोण बनाती है। परावर्तित किरण और दर्पण के बीच बने कोण का मान कितना है?Screenshot 2026-02-26 101919
    चित्र . 10.21
    1. 40°
    2. 50°
    3. 45°
    4. 60°
  2. Screenshot 2026-02-26 101926
    चित्र 10.22
  3. चित्र 10.22 में तीन भिन्न स्थितियाँ दर्शाई गई हैं जिनमें प्रकाश किरण एक दर्पण पर आपतित है-
    1. प्रकाश किरण अभिलंब के अनुदिश दर्पण पर आपतित है।
    2. दर्पण को किसी कोण पर घुमा दिया गया है किंतु प्रकाश किरण अभी भी इस पर अभिलंब के अनुदिश आपतित है।
    3. दर्पण को किसी कोण पर घुमा दिया गया है और प्रकाश किरण इस पर अभिलंब से 20° का कोण बनाती हुई आपतित होती है।
    उपर्युक्त तीनों स्थितियों में परावर्तित किरण आरेखित कीजिए [(सही आरेख बनाने के लिए रेखनी (रूलर) एवं कोणमापक (प्रोट्रैक्टर) का उपयोग कीजिए)]। प्रत्येक स्थिति के लिए बताइए कि परावर्तन कोण का मान कितना है?
  4. 3. चित्र 10.23 में तीन प्रकार के दर्पणों के सामने स्केच पेन का ढक्कन रखा गया है।
  5. Screenshot 2026-02-26 101934
    चित्र 10.23

    प्रतिबिंब का मिलान सही दर्पण से कीजिए।

    प्रतिबिंब दर्पण
    (i) समतल दर्पण
    (ii) उत्तल दर्पण
    (iii) अवतल दर्पण
  6. चित्र 10.24 में एक स्केच पेन के ढक्कन को एक उत्तल लेंस, एक अवतल लेंस और एक समतल काँच पट्टिका के पीछे समान दूरी पर रखिए और प्रतिबिंबों का अवलोकन कीजिए। ये चित्र 10.24 में दर्शाए अनुसार हो सकते हैं।Screenshot 2026-02-26 101943
    चित्र 10.24

    प्रत्येक प्रतिबिंब का मिलान सही प्रकाशिक युक्ति के साथ कीजिए।

    प्रतिबिंब प्रकाशिक युक्ति
    (i) काँच की समतल पारदर्शी पट्टिका
    (ii) उत्तल लेंस
    (iii) अवतल लेंस
  7. - किसी समतल दर्पण पर प्रकाश अभिलंब के अनुदिश आपतित है। बताइए कि निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है-
    1. में से कौन सा कथन सत्य है-
    2. आपतन कोण 90° है।
    3. आपतन कोण 0° है।
    4. परावर्तन कोण 90° है।
    5. इस स्थिति में प्रकाश परावर्तित
  8. चित्र 10.25 में तीन दर्पण- समतल, अवतल एवं उत्तल रखे गए हैं। किसी ग्राफ पत्रक के दर्पण में बने प्रतिबिंब के आधार पर इन दर्पणों की पहचान कीजिए और चित्र में दर्पणों के ऊपर उनके नाम लिखिए।
  9. Screenshot 2026-02-26 102343
    Fig. 10.25
  10. किसी संग्रहालय में कोई महिला एक विशाल अवतल दर्पण में अपना प्रतिबिंब देखती हुई चल कर उसकी ओर जाती है (चित्र 10.26)। वह देखेगी कि-Screenshot 2026-02-26 102351
    चित्र 10.26
    1. उसके सीधे प्रतिबिंब का आमाप घटता जाता है।
    2. उसके उल्टे प्रतिबिंब का आमाप घटता जाता है।
    3. उसके उल्टे प्रतिबिंब का आमाप बढ़ता जाता है और अंततः यह सीधा तथा आवर्धित हो जाता है।
    4. उसके सीधे प्रतिबिंब का आमाप बढ़ता जाता है।
  11. एक आवर्धक लेंस को किसी मुद्रित पाठ्यसामग्री के ऊपर लाइए और उस दूरी को पहचानिए जिस पर पाठ्यसामग्री का आमाप बड़ा दिखाई देने लगता है। अब इसे पाठ्यसामग्री से दूर ले जाइए। आप क्या अवलोकन करते हैं? बताइए आवर्धक लेंस किस प्रकार का लेंस होता है?
  12. स्तंभ I की प्रविष्टियों का मिलान स्तंभ II में की गई प्रविष्टियों से कीजिए।
  13. स्तंभ । स्तंभ II
    (i) अवतल दर्पण (क) एक ऐसा गोलीय दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ भीतर की ओर वक्रित होता है।
    (ii) उत्तल दर्पण (ख) यह सदैव सीधा और आमाप में वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनता है।
    (iii) उत्तल लेंस (ग) इसके पीछे रखी वस्तु कुछ अधिक दूरी पर उल्टी रखी हुई प्रतीत होती है।
    (iv) अवतल लेंस (घ) इसके पीछे रखी वस्तु आमाप में सदैव अपने वास्तविक आमाप से छोटी दिखाई देती है।
  14. निम्नलिखित प्रश्न अभिकथन या कारण पर आधारित है।
    अभिकथन- पीछे के यातायात के अवलोकन के लिए उत्तल दर्पणो को वरीयता दी जाती है।

    कारण - उत्तल दर्पण समतल दर्पणों की तुलना में सार्थक रूप से व्यापक दृष्टि क्षेत्र प्रदान करता है।

    सही विकल्प का चयन कीजिए-
    1. अभिकथन और कारण दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।
    2. अभिकथन और कारण दोनों सही हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है। अभिकथन सही है किंतु कारण असत्य है। अभिकथन और कारण दोनों असत्य हैं।
  15. Screenshot 2026-02-26 102359
    चित्र 10.27
  16. - चित्र 10.27 में O वस्तु, M दर्पण तथा I प्रतिबिंब को निरूपित करता है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
    1. चित्र (क) समतल दर्पण और चित्र (ख) अवतल दर्पण निरूपित करता है। [ ]
    2. चित्र (क) उत्तल दर्पण और चित्र (ख) अवतल दर्पण निरूपित करता है। [ ]
    3. चित्र (क) अवतल दर्पण तथा चित्र (ख) उत्तल दर्पण निरूपित करता है। [ ]
    4. चित्र (क) समतल दर्पण तथा चित्र (ख) उत्तल दर्पण निरूपित करता है। [ ]
  17. किसी पारदर्शी काँच के गिलास के पीछे एक पेंसिल रखिए (चित्र 10.28)। अब गिलास को आधा जल से भरिए (चित्र 10.28) जल भरे भाग से गिलास के पार देखने पर पेंसिल कैसी दिखती है? व्याख्या कीजिए कि इसकी आकृति में परिवर्तन क्यों प्रतीत होता है?
Screenshot 2026-02-26 102406
चित्र 10.28
खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें
  • अपने शिक्षक अथवा अभिभावक के साथ किसी निकटवर्ती चिकित्सालय अथवा किसी कान, नाक, गला (ई.एन.टी) विशेषज्ञ अथवा दंत चिकित्सक के चिकित्सालय में जाइए। चिकित्सक से अनुरोध कीजिए कि वे आपको वह दर्पण दिखाएँ जो वे कान, नाक, गले अथवा दाँतों के परीक्षण के लिए उपयोग में लाते हैं। पहचानिए कि इन यंत्रों में किस प्रकार का दर्पण लगा होता है।
  • Screenshot 2026-02-26 102414
    चित्र 10.29
  • सूर्य के प्रकाश का उपयोग करना भावी ऊर्जा चुनौतियों के समाधान की कुंजी है। सौर-कुकर (चित्र 10.29) जैसी युक्तियों में सूर्य के विकिरणों को अभिसरित करने और ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए दर्पणों का उपयोग किया जाता है। भारत के गाँवों में इस प्रकार की रचनाओं का उपयोग विद्युत की बचत करने और जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में कमी लाने के लिए किया जाता है। अपने विद्यालय अथवा घर के लिए सौर-कुकर की अभिकल्पना पर विचार कीजिए और इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कीजिए जिसमें आवश्यक आय-व्यय पत्र भी सम्मिलित हों।
  • गोलीय दर्पणों और लेंसों के साथ आभासी (वर्चुअल) प्रयोग करने के लिए ऑनलाइन साधनों (टूल्स) अथवा एनिमेशन का उपयोग कीजिए। अनुरूपण में (सिमुलेशन) वस्तु की स्थिति परिवर्तित कीजिए और प्रतिबिंब में होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन कीजिए।
हमारी वैज्ञानिक परंपरा
800 से अधिक वर्ष पूर्व महान भारतीय गणितज्ञ भास्कर द्वितीय के समय में खगोलविद तारों और ग्रहों के प्रेक्षण के लिए जल से भरी उथली कटोरियों का उपयोग करते थे। उपयुक्त कोणों पर लगी नलिकाओं के माध्यम से परावर्तन से बने उनके प्रतिबिंबों का सावधानीपूर्वक अवलोकन करके वे आकाश में तारों और ग्रहों की स्थितियों का मापन कर सकते थे। यद्यपि साहित्य में परावर्तन के नियमों का उल्लेख नहीं है परंतु उनके यंत्रों और विधियों से ये संकेत मिलते हैं कि व्यावहारिक रूप से उन्हें इनके विषय में जानकारी थी।