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अध्याय - 7

उत्पादन के कारक

भारत जैसे देश में संवृद्धि और उत्पादकता में संभवतः सर्वाधिक योगदान भूमि, श्रम और पूँजी के अधिक दक्षतापूर्ण उपयोग से आता है, अतः इनका उपयोग अधिक दक्षतापूर्वक किया जाना चाहिए।

- बिबेक देबरॉय,
अध्यक्ष, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद् (2017-24)

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महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. उत्पादन के कौन-कौन से कारक हैं?
  2. ये कारक कैसे अंतर्संबंधित हैं?
  3. उत्पादन में मानव पूँजी की क्या भूमिका है और इसके सहायक तत्व कौन-से हैं?
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चित्र 7.2 - कुछ वस्तुओं के उत्पादन की एक झलक

परिचय

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके कपड़े, जूते, स्कूल बैग, फर्नीचर, फोन, कंप्यूटर आदि का निर्माण कैसे होता है? आपके आस-पास पाई जाने वाली प्रत्येक वस्तु अपने अंतिम स्वरूप में आप तक पहुँचने से पहले उत्पादन प्रक्रिया से गुजरती है। उत्पादन की इस प्रक्रिया में वस्तुओं को उनके अंतिम स्वरूप में तैयार करने के लिए कुछ संसाधनों या इनपुट्स का उपयोग किया जाता है। इसलिए वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले ये संसाधन उत्पादन के कारक कहे जाते हैं।

आइए, रत्ना से मिलते हैं जो शहर के बाह्य क्षेत्र में 'पॉज पॉइंट' नामक एक छोटा-सा भोजनालय चलाती है। यह भोजनालय राजमार्ग से आने-जाने वाले यात्रियों में स्वादिष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले भोजन के लिए प्रसिद्ध है तथा निरंतर प्रगति कर रहा है। वर्तमान में रत्ना के पास सात कर्मचारियों का एक समूह है, जो भोजनालय को सुचारु रूप से चलाने में उनकी सहायता करता है। पाँच वर्ष पूर्व जब रत्ना ने इसे आरंभ किया था, तब उसे उचित स्थान का चयन, किराये और उपकरणों के लिए धन के प्रबंध, कर्मचारियों की नियुक्ति, सामग्रियों की खरीदारी तथा अपने सपने को साकार करने की योजना बनानी थी।

व्यवसाय वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए विभिन्न उत्पादन के कारकों का एक साथ संयोजन करते हैं, जिससे लोगों को आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होने का अवसर भी प्राप्त होता है।

आइए पता लगाएँ

  • छोटे-छोटे समूहों में अपने स्थानीय क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करें। यह देखिए कि वहाँ विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ एवं सेवाएँ कैसे बनती हैं या प्रदान की जाती हैं?
  • यहाँ लता, आशा, मोहन और किरण द्वारा बनाया गया एक छोटा-सा प्रतिवेदन (रिपोर्ट) दिया गया है। आप भी अपनी चयनित दुकानों के लिए इस प्रकार का एक प्रतिवेदन बना सकते हैं।
दुकानों के प्रकार आपके क्षेत्र में संख्या उत्पादित वस्तुएँ या प्रदत्त सेवाएँ आवश्यक इनपुट्स के प्रकार
किराने की दुकान 13 खाद्यान्न (अनाज), दूध, ब्रेड डिब्बाबंद वस्तुएँ, शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ, भंडारण का स्थान
भोजनालय/फूड स्टॉल 8 पका हुआ भोजन, नाश्ता, पेय पदार्थ कच्ची सामग्री जैसे सब्जियाँ और फल, गैस, बर्तन, रसोइया / सहायक
सब्जी विक्रेता 15 ताजी सब्जियाँ एवं फल ताजा उत्पाद, टोकरियाँ, तराजू, ठेला या स्टॉल
मोबाइल रिपेयर की दुकान 4 मोबाइल रिपेयर एवं उससे संबंधित सामग्री उपकरण, कलपुर्जे, मोबाइल के अवयवों और उनके कार्यों का ज्ञान एवं कौशल
सैलून/पार्लर 3 बाल काटना, साज-सज्जा एवं सौंदर्य सेवाएँ कैंची, क्रीम, सौंदर्य उत्पाद, जल, विद्युत
अपने समूह के प्रतिवेदन को देखते हुए निम्नलिखित तथ्यों पर विचार कीजिए -
  • लोगों को अपने व्यवसाय के लिए आवश्यक धन कहाँ से प्राप्त होता है?
  • केश-प्रसाधक (हेयर ड्रेसर) ने प्रशिक्षण कहाँ से प्राप्त किया?
  • खाद्य-विक्रेताओं (फूड वेंडर्स) को खाना बनाना किसने सिखाया?
  • व्यापारियों को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

अर्थशास्त्र में उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले इनपुट्स या उत्पादन के कारकों को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है- भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता। प्रौद्योगिकी एक सहयोगी एवं महत्वपूर्ण कारक है, जो व्यवसायों को समान या कम उत्पादन कारकों के साथ अधिक उत्पादन करने में सक्षम बनाती है। आइए, आगामी अनुभागों में इनके विषय में और अधिक जानें!

उत्पादन के कारक

भूमि (प्राकृतिक संसाधन)

अर्थशास्त्र में 'भूमि' शब्द का आशय केवल भौगोलिक भूखंड नहीं है, अपितु इसमें मृदा, वन, जल, वायु, सूर्य का प्रकाश, खनिज, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे प्राकृतिक संसाधन भी सम्मिलित होते हैं।

'प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग' अध्याय को स्मरण करें, जहाँ हमने प्रकृति द्वारा उपहारस्वरूप दिए गए विभिन्न संसाधनों एवं उनके उपयोग पर चर्चा की थी। व्यवसायी आवश्यक भूमि को या तो खरीदते हैं अथवा एक निश्चित अवधि के लिए किराए पर लेते हैं।

आइए पता लगाएँ

अपने प्रतिवेदन का पुनरावलोकन करें। आपकी सूची में से किन वस्तुओं को 'भूमि' की श्रेणी में रखा जा सकता है?

श्रम (मानव संसाधन)

श्रम, जिसमें शारीरिक और मानसिक योगदान सम्मिलित हैं, उत्पादन का एक महत्वपूर्ण कारक है। काष्ठकार (बढ़ई), कृषक, निर्माण-श्रमिक, शिक्षक और चिकित्सक अपने-अपने कार्यों में विभिन्न स्तर की शारीरिक शक्ति, ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हैं। समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्माण करने में प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्य के माध्यम से योगदान देता है।

मानव एक संसाधन के रूप में

मनुष्य आर्थिक गतिविधि एवं उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे अपने ज्ञान, कौशल और निर्णय-निर्धारण क्षमता का उपयोग करते हुए वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करते हैं। उदाहरण के लिए, पुलिस अधिकारी कानून और व्यवस्था बनाए रखता है, वैज्ञानिक नई तकनीकों का आविष्कार करता है, रसोइया (शेफ) नया व्यंजन तैयार करता है आदि। अपने कार्य को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने के लिए इन सभी को विशेष प्रकार के ज्ञान और कौशल की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही, इन सभी का अपने-अपने कार्यों के प्रति समर्पण भी आवश्यक है। शब्द श्रम का तात्पर्य उत्पादन में प्रयुक्त शारीरिक और मानसिक योगदान से है। यद्यपि मानव पूँजी से तात्पर्य उन विशिष्ट कौशलों, ज्ञान, क्षमताओं और विशेषज्ञता से है जो उस श्रम को करने के लिए आवश्यक होते हैं। अतः मानव पूँजी केवल बुनियादी श्रम नहीं है, अपितु उस श्रम की गुणवत्ता और दक्षता का परिचायक भी है।Screenshot 2026-02-13 104209
चित्र 7.3 - चाय उद्यान में काम करती हुई एक श्रमिक
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चित्र 7.4 - रासायनिक अभियंता
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चित्र 7.5- काष्ठकार (बढ़ई)
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चित्र 7.6- सॉफ्टवेयर निर्माता

मानव पूँजी के सहयोगी कारक

शिक्षा और प्रशिक्षण

शिक्षा ज्ञान प्राप्त करने में व्यक्तियों की सहायता करती है। यह प्रक्रिया मूलभूत साक्षरता से आरंभ होकर विशिष्ट क्षेत्रों में निपुणता तक पहुँचती है। आप विद्यालय में जो कुछ भी सीखते हैं, वह आपके ज्ञान को समृद्ध करता है और आपको वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने योग्य बनाता है। उदाहरण के लिए, सिविल इंजीनियरिंग का विद्यार्थी डिजाइन और निर्माण सामग्री के सिद्धांतों को सीखता है। जिनका उपयोग आधारभूत संरचना जैसे - सड़क और पुल के निर्माण में किया जाता है। इसमें चुनौती एक दीर्घकालिक, कम लागत वाले और पर्यावरण के अनुकूल समाधान तैयार करने की होती है। इसे निर्माण स्थलों के अवलोकन, सामग्री परीक्षण, सुरक्षा प्रक्रियाओं को समझने एवं व्यावहारिक अनुभव जैसे प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

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चित्र 7.7 - शिक्षा एवं प्रशिक्षण

स्वास्थ्य सेवा

अच्छा स्वास्थ्य संज्ञानात्मक विकास में सहायता करता है। इससे बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जाते हैं और अधिक प्रभावपूर्ण ढंग से सीखते हैं। इसी प्रकार जब श्रमिकों का स्वास्थ्य अच्छा होता है, तब वे भी शारीरिक एवं मानसिक रूप से अपना श्रेष्ठ योगदान देने में सक्षम होते हैं। वे कम समय में अधिक कार्य करते हैं, सृजनात्मक होते हैं और स्वास्थ्य कारणों से अवकाश नहीं लेते हैं।

आइए विचार करें

आधारभूत संरचनाएँ एवं स्वास्थ सेवा संबंधी व्यवस्थाएँ, जैसे- अस्पताल, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, चिकित्सक, औषधालय, रोग परीक्षण केंद्र आदि मानव पूँजी को विकसित करने में किस प्रकार अपनी भूमिका निभाते हैं?

सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव

C कठिन श्रम, सतत सुधार एवं कार्य को भली-भाँति संपन्न करने की संस्कृति ने विभिन्न देशों की प्रगति में सहयोग किया है। एक जापानी अवधारणा है-'काइजेन' जिसका अर्थ है 'सतत सुधार'। इस अवधारणा को जापान में 1940 के दशक के मध्य से प्रयोग में लाया जा रहा है और इसने जापान को अपने निवासियों के लिए उच्च जीवन-गुणवत्ता प्राप्त करने में सहायता की है। इसी प्रकार दूसरा उदाहरण जर्मनी की कार्यनिष्ठा का है, जिसकी जड़ें उसके इतिहास में गहरी हैं। जर्मनी अपने उच्चस्तरीय गुणवत्ता वाले औद्योगिक उत्पादों के लिए जाना जाता है। वे समयबद्धता, बारीकियों पर ध्यान एवं गुणवत्ता को अत्यधिक महत्व देते हैं। उनकी मानव पूँजी की इन विशेषताओं ने तकनीकी एवं निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक रूप से अग्रणी बनने में उनकी सहायता की है।

आइए पता लगाएँ

  • आइए, एक लघु प्रयोग करते हैं। अपने परिवार एवं पड़ोस के 10 कार्यरत वयस्कों की एक सूची बनाएँ। उनसे उनके कार्यस्थल की संस्कृति का वर्णन करने के लिए कहें। इस विवरण को अपने सहपाठियों के साथ साझा करें। आपने क्या जाना? ऐसे कौन-से विशेषण हैं जो अधिकतर प्रयोग किए गए हैं।
  • 'अतीत के चित्रपट' वाले अध्यायों में आपने भारत में अनेक शताब्दियों से चले आ रहे कला एवं पुरातत्व के उदाहरण देखे। आपकी दृष्टि में ऐसे कौन-से कारक रहे होंगे जिन्होंने निर्माणकर्ताओं को अपने कार्य में इतनी उच्चस्तरीय दक्षता प्राप्त करने में सक्षम बनाया होगा। समूह बनाकर चर्चा करें और पूरी कक्षा के साथ साझा करें।

मानव पूँजी की चुनौतियाँ

स्वतंत्रता के पश्चात हमारे देश ने मानव पूँजी के विविध पक्षों में बहुत उन्नति की है। साक्षरता जनसंख्या की एक महत्वपूर्ण विशेषता है और यह मानव पूँजी की कौशलता एवं उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। विश्व बैंक द्वारा 2023 में लगाए गए अनुमान के अनुसार भारत में वयस्क साक्षरता दर पुरुषों के लिए 85 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 70 प्रतिशत है। अनेक क्षेत्रों में प्रगति करने के बाद भी भारत मानव पूँजी को विकसित करने में चुनौतियों का सामना करता है।

आइए विचार करें

  • सरस्वती विद्यालय के कक्षा 8 के विद्यार्थी शिवाय को दो वर्ष पूर्व अपना विद्यालय छोड़ना पड़ा क्योंकि उसके पिताजी की नौकरी चली गई थी। विद्यालयी शिक्षा के दो वर्षों की हानि ने शिवाय को कैसे प्रभावित किया होगा?
  • जब किसी व्यवसाय में आवश्यक कौशलयुक्त श्रमिक नहीं मिलते तो उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
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चित्र 7.8 - परीक्षा देते हुए विद्यार्थी

भारतीय आर्थिक सर्वेक्षण 2024 के अनुसार भारत में 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। इसका तात्पर्य है कि भारत के पास युवा उत्पादक जनसंख्या है, जो देश को जनांकिकीय लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। जनांकिकीय लाभांश उस लाभ को कहते हैं, जो एक देश को तब प्राप्त होता है जब उसके पास बड़ी संख्या में युवा एवं कार्यरत व्यक्ति हों। जब अधिक लोग काम करते हैं और अपनी जीविका उपार्जित करते हैं तथा उन पर आश्रित व्यक्तियों की संख्या कम होती है, तब देश में व्यापार उन्नति करता है और नागरिकों का जीवन-स्तर उन्नत होता है। इस क्षमता का लाभउठाने के लिए व्यक्ति के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण एवं कौशल प्रशिक्षण तक पहुँच आवश्यक है। ये सब देश की प्रगति में योगदान करते हैं। आगामी वर्षों में आप 'जनांकिकीय' वाले अध्याय में इस विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त करेंगे।

आइए विचार करें

क्या कुछ कार्य अन्य कार्यों से अधिक महत्वपूर्ण हैं? क्या होगा यदि कोई सड़कों की सफाई न करे, कूड़ा न उठाए, किसान फसल उगाना बंद कर दें, चिकित्सक रोगियों के उपचार के लिए उपलब्ध न हों और इसी प्रकार की अन्य परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाएँ।

वर्तमान में अनेक प्रकार के कार्य उपलब्ध हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के कौशलों की आवश्यकता होती है। यद्यपि भारत में कौशल-आधारित ज्ञान प्रणाली एवं कर्म-कौशल की एक समृद्ध परंपरा रही है।

प्राचीन भारत की कौशल परंपरा

प्राचीन भारतीयों के लिए कार्य अपने स्वभाव की अभिव्यक्ति और पूर्णता (सिद्धि) के लिए प्रयत्न करने का एक साधन था। इसे देवता या प्राप्तकर्ता के प्रति अर्पण (पूजन) के रूप में किया जाता था। इसे पूर्ण समर्पण के साथ किया जाता था। कार्य में प्रयुक्त उपकरणों (प्रौद्योगिकी के साधन) की पूजा की जाती थी। यह परंपरा आज भी विश्वकर्मा पूजा या आयुध पूजा के रूप में निरंतर चल रही है। अतः वस्तुओं के निर्माण में कला एवं ज्ञान का अद्भुत मिश्रण सम्मिलित होता था। ज्ञान का पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण हुआ और इसी क्रम में नए ज्ञान का सृजन भी हुआ। शिल्पशास्त्र प्राचीन ग्रंथ हैं, जिसमें मूर्तिकला, चित्रकला, भवन-निर्माण, काष्ठकारी और आभूषण निर्माण संबंधी विस्तृत निर्देश मिलते हैं। उदाहरण के लिए, मूर्तिकला संबधी ग्रंथ में शारीरिक मुद्रा, रंगों, माप और चित्रों के अनुपात का सटीक विवरण दिया गया है।

इसे अनदेखा न करें

शिल्पकारों के परिवारों की अनेक पीढ़ियों ने शताब्दियों तक भारत में मंदिर निर्माण के लिए कार्य किया। उन्होंने अपने कौशल का प्रयोग बिना इस अपेक्षा के किया कि वे इसका परिणाम देख पाएँगे। कार्य को पूजा मानकर, नियमित अभ्यास करते हुए और नई तकनीकों को सीखते हुए वे उत्कृष्टता की खोज में लगे रहे।


सिले हुए जहाज का निर्माण

भारतीय 2000 वर्ष पूर्व से एक विशेष प्रकार की सिलाई तकनीक का प्रयोग जहाज और नाव बनाने के लिए करते थे। इन जहाजों और नावों का प्रयोग वे हिंद महासागर के देशों में समुद्री व्यापार एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए करते थे। इस तकनीक में लकड़ी के पट्टों को एक-साथ कीलों के स्थान पर डोरियों से सिला जाता था, जिससे वे लचीले बनते थे और जहाजों को हिंद महासागर में आवागमन करने में आसानी होती थी।।Screenshot 2026-02-13 104308
चित्र 7.9 - पाँचवीं शताब्दी के सिले हुए जहाज का पुनर्निर्माण

आइए पता लगाएँ

  • उत्पादन की अनेक परंपरागत तकनीकें या तो विलुप्त हो गई हैं या समाप्ति की ओर हैं। उदाहरण के लिए, 16वीं शताब्दी में सिले हुए जहाज निर्माण की कला का पतन हिंद महासागर में यूरोपीय आगमन के पश्चात धीरे-धीरे हुआ। वर्तमान में इस तकनीक का प्रयोग अब केवल मछली पकड़ने वाली छोटी नावों के निर्माण में किया जाता है।
  • आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि उत्पादन की स्वदेशी तकनीकों में अत्यधिक गिरावट आ चुकी है? कक्षा में चर्चा करें।
  • अपने क्षेत्र की कुछ ऐसी तकनीकों और उत्पादों को ढूँढ़ें जिनमें मानव श्रम एवं कौशल का उपयोग हुआ हो। चित्रों एवं पुस्तक का प्रयोग कर कक्षा में इनकी संक्षिप्त व्याख्या करें।

पूँजी

व्यवसायों को अपने दैनिक कार्यों के संचालन के लिए पूँजी की भी आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत मौद्रिक संसाधन और टिकाऊ संपत्ति जैसे मशीनें, औजार, उपकरण, वाहन, उत्पादों के विक्रय हेतु गाड़ियाँ (वेंडिंग कार्ट्स), कंप्यूटर, दुकानें, कारखाने, कार्यालय भवन आदि सम्मिलित होते हैं। ठीक वैसे ही जैसे रत्ना को भूखंड किराए पर लेने, फर्नीचर और रसोई के उपकरण आदि को खरीदने हेतु धन की आवश्यकता थी। इन्हें ही 'पूँजी' कहा जाता है, अर्थात धन और मानव निर्मित संसाधन जो वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में उपयोग होते हैं।

एक निर्माण इकाई या सेवा क्षेत्रक उद्यम के लिए पूँजी आवश्यक है। किंतु व्यवसायों को पूँजी कहाँ से प्राप्त होती है? सामान्यतः जब कोई व्यक्ति व्यवसाय आरंभ करता है

उसकी व्यक्तिगत बचत, परिवार एवं मित्र ही धन और सहयोग के प्राथमिक स्रोत होते हैं। ठीक वैसे ही जैसे रत्ना ने भी अपना व्यापार आरंभ करते समय किया था। किंतु, रत्ना के पास व्यापार आरंभ करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। धन की इस कमी को पूरा करने के लिए रत्ना ने बैंक से ऋण (लोन) लिया। उसने एक निश्चित अवधि में अपने ऋण की राशि के साथ-साथ ब्याज का भी भुगतान किया। इसी प्रकार बड़ी कंपनियों को भी अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए अत्यधिक मात्रा में धन की आवश्यकता होती है। इसलिए वे शेयर (स्टॉक) बाजार के माध्यम से आम जनता से धन एकत्रित करती हैं। शेयर बाजार एक विशेष प्रकार का बाजार होता है, जहाँ शेयरों का क्रय एवं विक्रय होता है। बड़ी कंपनियाँ आम जनता से अपने लाभ का एक भाग - जिसे लाभांश (डिविडेंड) कहा जाता है; देने के बदले धन जुटाती हैं। दूसरे शब्दों में, बड़े व्यवसाय इस प्रकार के बाजार द्वारा धनराशि या वित्तीय पूँजी प्राप्त कर सकते हैं और अपने व्यवसाय के शेयर बेच सकते हैं। यह प्रणाली कैसे कार्य करती है, इसकी जानकारी आप आगामी कक्षाओं में प्राप्त करेंगे।

आइए पता लगाएँ

अपने क्षेत्र के किसी कारखाने की पहचान करें। अनुमान लगाएँ कि कारखाने के निर्माण में कितनी पूँजी का निवेश हुआ है। यह भी पता करें कि अपने उत्पाद को अंतिम रूप से उत्पादित करने के लिए कारखाने में किस प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया जाता है?

उद्यमिता

उद्यमिता का तात्पर्य स्वयं का व्यवसाय आरंभ करना या किसी समस्या का समाधान करने हेतु कुछ नया निर्मित करने से है। एक उद्यमी वह व्यक्ति होता है जिसके पास एकScreenshot 2026-02-13 105241
चित्र 7.12- बाँस एवं बेंत के उत्पाद, अरुणाचल प्रदेश
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चित्र 7.13 - खाद्य प्रसंस्करण
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चित्र 7.14 - मृदा के बर्तन, दिल्ली
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चित्र 7.15 - पेट्रो-रसायन संयंत्र

विचार होता है, जो जोखिम उठाता है, उत्पादन के अन्य कारकों को एकत्रित करता है और अपने स्टार्टअप के विचार को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करता है।

उद्यमी का उद्देश्य नई वस्तुओं एवं सेवाओं को बाजार में लाकर उसके माध्यम से समस्या का समाधान प्रस्तुत करना होता है, जिससे समाज और देश को लाभ पहुँच सके। साथ ही, वे रोजगार के अवसर भी सृजित करते हैं और लोगों को आजीविका उपार्जित करने में सहायता करते हैं। बदले में, अपने सपनों को साकार होते और लोगों की सेवा करते देख उन्हें गहरी संतुष्टि की अनुभूति होती है।

इस प्रकार, एक उद्यमी वह व्यक्ति होता है जो- Screenshot 2026-02-13 105323
चित्र 7.16-एक उद्यमी द्वारा निष्पादित किए जाने वाले कार्य

वह व्यक्ति जिसने भारत के लिए बड़ा स्वप्न देखा

जे.आर.डी. टाटा- उद्यमी, उद्योगपति एवं परोपकारी व्यक्ति

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चित्र 7.17- जे.आर.डी. टाटा

जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा भारत के बड़े उद्यमियों में से एक थे और आधुनिक भारत के निर्माण में इनकी बड़ी भूमिका थी। उनका जन्म 1904 में हुआ था। कालांतर में वह देश के एक बड़े व्यावसायिक समूह 'टाटा समूह' के प्रमुख बने। उनका यह मानना था कि व्यवसायों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, अपितु समाज की सेवा करना भी होना चाहिए। 1932 में उन्होंने भारत की पहली हवाई सेवा 'टाटा एयरलाइन्स' प्रारंभ की, जो बाद में 'एयर इंडिया' बनी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने अपना विस्तार कई क्षेत्रों, जैसे- इस्पात, वाहन निर्माण, विद्युत उत्पादन एवं वितरण, रसायन निर्माण आदि में किया। जे.आर.डी. टाटा अपने कर्मचारियों की देखभाल करने और उन्हें कार्य करने की उत्तम परिस्थितियाँ प्रदान करने में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में भी प्रसिद्ध थे। वह ईमानदार, परिश्रमी एवं उन्नत विचारों वाले व्यक्ति थे। 1992 में देश की सेवा के लिए उन्हें भारत सरकार का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्रदान किया गया।

आइए विचार करें

  • ऊपर दिए गए उदाहरण से युवा उद्यमी कौन-कौन सी बातें सीख सकते हैं?
  • क्या उद्यमी का वर्तमान ज्ञान तात्कालिक समस्या के समाधान में सहायक होता है अथवा इसके लिए उन्हें अन्य स्रोतों की आवश्यकता पड़ती है?
  • क्या किसी उद्यमी की एकमात्र प्रेरणा लाभ कमाना ही होना चाहिए? क्यों अथवा क्यों नहीं?
  • एक सफल उद्यमी बनने के लिए व्यक्तित्व में और कौन-से गुणों की आवश्यकता होती है?

प्रौद्योगिकी - उत्पादन में सहायक

प्रौद्योगिकी का अर्थ वैज्ञानिक ज्ञान को प्रयोग में लाना है। उदाहरण के लिए, कैमरा प्रकाश को विद्युत संकेतों में परिवर्तित कर डिजिटल छवि बनाता है। उत्पादन से संबंधित प्रत्येक गतिविधि में किसी-न-किसी प्रकार की प्रौद्योगिकी का उपयोग होता है। कुछ प्रारंभिक प्रकार की प्रौद्योगिकियाँ, जो प्राचीन काल से विद्यमान हैं, आज भी उपयोग में लाई जा रही हैं।

वर्तमान में नई और उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा है, जो हमारे जीवन को सरल बना रही हैं। उदाहरण के लिए, यू.पी.आई. (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से एक बटन दबाकर भुगतान किया जा सकता है, किसान मौसम की जानकारी पहले से प्राप्त कर सकते हैं और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जी.पी.एस.) माल ढोने के लिए लघुत्तम मार्ग खोज सकता है इत्यादि।

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चित्र 7.18 - फसल की गुणवत्ता को उन्नत बनाने के लिए ड्रोन द्वारा उर्वरक का छिड़काव
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चित्र 7.19 - रोबोट्स की सहायता से शल्य चिकित्सा

क्या आपने देखा है कि किस प्रकार पुरानी प्रौद्योगिकी को एक नई और उत्तम प्रौद्योगिकी से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है?

यह प्रक्रिया लोगों और व्यवसायों के लिए कार्य करना सरल बनाती है और उनकी कार्य-पद्धतियों में सुधार लाती है। उदाहरण के लिए, डाक से पत्र भेजने के स्थान पर अब हम ई-मेल का उपयोग करते हैं, जिससे हम लोगों से शीघ्रता से और कम लागत में संपर्क कर सकते हैं। यद्यपि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रौद्योगिकी की प्रगति का अर्थ सदैव प्रौद्योगिकियों को बदलना नहीं होता है। कुछ प्रौद्योगिकियाँ, जैसे- चरखी (पुली) और ठेलागाड़ी, आज भी उपयोग में हैं।

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चित्र 7.20 - एक निर्माण स्थल पर ठेलागाड़ी
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चित्र चित्र 7.21 - नौकाओं में प्रयुक्त चरखियाँ

आइए, अब कुछ उदाहरण देखते हैं कि विद्यार्थियों के सीखने, नए कौशल विकसित करने और रोजगार ढूँढने में प्रौद्योगिकी किस प्रकार सहायता कर रही है।

ज्ञान, कौशल और रोजगार के अवसरों तक पहुँच का मार्ग प्रशस्त करती प्रौद्योगिकी

सरकारी ऑनलाइन मंचों जैसे स्वयं [SWAYAM (स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स)] पर विद्यार्थियों के लिए विविध ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जो कक्षा 9 और उससे आगे की कक्षाओं के लिए बनाए गए हैं। यह मंच इन पाठ्यक्रमों को मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज [MOOCs (व्यापक एवं मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम)] के रूप में संचालित करता है। इनके माध्यम से विद्यार्थी रोबोटिक्स, जल-कृषि (एक्वाकल्चर), वस्त्र-मुद्रण (टेक्सटाइल प्रिंटिंग) आदि विषयों को निःशुल्क सीख सकते हैं। विद्यार्थी नौकरी करते हुए या अन्य पाठ्यक्रमों का अध्ययन करते हुए भी इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को किसी भी स्थान से अपनी गति से सीख सकते हैं। सरकार के ऑनलाइन पोर्टल जैसे नेशनल करियर सर्विस व्यक्तियों को प्लंबिंग (जल-नल व्यवस्था) से लेकर लेखांकन (एकाउंटिंग) तक के विविध क्षेत्रों में रोजगार के अवसर ढूँढ़ने में सहायता करते हैं। इस प्रकार, प्रौद्योगिकी ने भौगोलिक सीमाओं की बाध्यता को समाप्त कर लोगों को भारत तथा विदेशों में ज्ञान, कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। इन ऑनलाइन पोर्टलों की सेवाओं का लाभ निम्नलिखित संपर्क सेतुओं (लिंक्स) के माध्यम से उठाया जा सकता है-

  • https://swayam.gov.in/
  • https://www.ncs.gov.in/

आइए पता लगाएँ

  • क्या आप कुछ ऐसे प्रौद्योगिकी विकास के विषय में सोच सकते हैं, जिसने आपके आस-पास के लोगों और समुदाय के जीवन को प्रभावित किया है? इस विषय पर अपने घर और आस-पड़ोस के वरिष्ठ सदस्यों से चर्चा करें।
  • किसी ऐसे आविष्कार के विषय में सोचें जिसे आप किसी समस्या के समाधान के लिए बनाना चाहेंगे। उससे संबंधित जानकारी जैसे- उसका नाम, उसका काम, वह क्या करता है, उसके स्वरूप का चित्र या रेखाचित्र आदि एक कागज पर अंकित करें और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें।

कारक आपस में कैसे संबंधित हैं?

भूमि, श्रम, पूँजी, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी जैसे कारकों को मिलाकर वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जाता है। उत्पादन के ये कारक किस अनुपात में उपयोग में लाए जाएँगे, यह उत्पाद विशेष पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, कृषि, विनिर्माण और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में उत्पादन मुख्यतः श्रम पर आधारित होता है, इसलिए ये श्रम-प्रधान (लेबर-इंटेंसिव) क्षेत्र कहलाते हैं। वहीं, सेमीकंडक्टर चिप्स या उपग्रह (सैटेलाइट) जैसे उत्पादों के लिए अधिक पूँजी, विशेषीकृत उपकरण और तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है, इसलिए ये पूँजी-प्रधान क्षेत्र कहलाते हैं।

उत्पादन के ये कारक एक-दूसरे के पूरक एवं अंतर्संबंधित होते हैं। उत्पाद के एक या अधिक कारकों की अनुपस्थिति या दुरुपयोग की स्थिति में उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है या उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है। यद्यपि नई तकनीकें कुछ परिस्थितियों में उपयोग में लाए जाने वाले कारकों के अनुपात और उत्पादन की मात्रा को बदल सकती हैं। उदाहरण के लिए, कृषि कार्य में मशीनों का बढ़ता उपयोग श्रम पर निर्भरता को कम कर सकता है। इसी प्रकार, वस्त्र बाजार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर हथकरघा उत्पादों को तैयार करके, त्रिआयामी मुद्रण (3-डी प्रिंटिंग) वस्त्र निर्माण क्षेत्र की लुप्त होती कला-शैलियों को पुनर्जीवित कर सकती है। उत्पादन के इनपुट्स विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर उपलब्ध होते हैं। व्यवसाय उन स्थानों से इनपुट्स का क्रय कर सकते हैं तथा उन्हें एक-साथ मिलाकर निवेश के तौर पर वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन कर सकते हैं। इस प्रकार, भौगोलिक अंतर्संबंध व्यवसायों को विविध संसाधनों तक पहुँच प्रदान करते हैं। यद्यपि कभी-कभी उत्पादन क्रियाएँ आपूर्ति श्रृंखला संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करती हैं। आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) वस्तुओं के उत्पादन और विक्रय में सम्मिलित व्यक्तियों, संगठनों, संसाधनों, क्रियाओं एवं प्रौद्योगिकी का एक अंतर्जाल (नेटवर्क) होता है।

जब आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान स्थानीय संसाधनों पर निर्भरता के कारण न होकर दूरस्थ संसाधनों पर निर्भरता के कारण उत्पन्न होता है, तो इसके परिणामस्वरुप उत्पादन प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है- जैसा कि कोविड-19 महामारी के समय हुआ था।

इसे अनदेखा न करें

2025 में भारत, चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश है! आइए, इन विचारों को मोबाइल फोन निर्माण की प्रक्रिया को दर्शाने वाले एक प्रवाह-चित्र (फ्लो चार्ट) के माध्यम से समझें।

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उत्पादन के प्रत्येक चरण में उत्पादों और प्रक्रियाओं को डिजाइन करने, निरीक्षण करने और उन्हें उन्नत बनाने में मानवीय प्रयास सम्मिलित होता है। उदाहरण के लिए, सॉफ्टवेयर, विद्युत एवं यांत्रिक अभियंताओं का समूह एवं परियोजना प्रबंधक एक साथ मिलकर अपनी विशेषज्ञता का प्रयोग किसी उत्पाद को विकसित करने में करते हैं। उद्यमी संसाधनों के उपयोग संबंधी मार्गदर्शन देता है, अर्थात वह यह बताता है कि संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए। तत्पश्चात भूमि, संयंत्र स्थापित करने के लिए स्थान, उपकरण एवं कुशल श्रमिक जैसे संसाधनों की उपलब्धता के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। ये सभी इनपुट्स एक साथ आवश्यक होते हैं और

पहेली के टुकड़ों के समान जुड़कर उन वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण करते हैं, जिन पर हम निर्भर होते हैं!

उत्पादन के कारकों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व

जब हम वस्तुओं का उत्पादन करते हैं, तब हम प्राकृतिक संसाधनों, जैसे- भूमि, जल और खनिजों का उपयोग करते हैं। यद्यपि ये संसाधन सीमित हैं और यदि हम सावधान न रहें तो इन्हें क्षति पहुँच सकती है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में बहुत से लोग चमड़ा (लेदर) उद्योग में काम करके आजीविका कमाते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है, परंतु इन कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट नदियों और मृदा को प्रदूषित कर सकता है। इसी प्रकार, जब पुराने स्मार्टफोन्स का उचित पुनर्चक्रण (रिसायकल) नहीं किया जाए तो उनमें उपस्थित हानिकारक तत्व जैसे- सीसा (लेड) और पारा (मर्करी) भूमि और जल में मिल सकते हैं। यह प्रदूषण मनुष्यों, पशुओं और पौधों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि उत्पादक प्राकृतिक संसाधनों का उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग करें, जिससे हम अपनी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को संकट में डाले बिना कर सकें। उन्हें उत्पादन करते समय कचरे को कम करने, प्रदूषण से बचने और पर्यावरण की रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए।

आइए विचार करें

स्थानीय समुदायों और जैव-विविधता पर इस प्रकार की गतिविधियों का क्या प्रभाव पड़ता है? क्या आप अपने आस-पास ऐसे कुछ स्थानों को जानते हैं, जहाँ समय के साथ जल और भूमि का क्षरण हुआ है? कक्षा में इस पर चर्चा करें।

इसलिए उत्पादकों के लिए यह आवश्यक है कि वे प्राकृतिक संसाधनों को भविष्य में उपयोग के लिए पुनः उपलब्ध कराने हेतु संधारणीय उपायों को अपनाएँ।

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चित्र 7.24 - जल स्रोतों में प्रवाहित करने से पहले औद्योगिक दूषित जल का पुनर्चक्रण
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चित्र 7.25 - पुनर्चक्रित उत्पादों का इनपुट्स के रूप में प्रयोग

भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के अतिरिक्त, व्यवसायों के अपने श्रमिकों और कर्मचारियों के प्रति भी कुछ उत्तरदायित्व होते हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-

  • उचित पारिश्रमिक और कार्य परिस्थितियाँ - नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रमिकों को उनके श्रम का उचित पारिश्रमिक मिले और वे सुरक्षित वातावरण में कार्य कर सकें।
  • कौशल-विकास और प्रशिक्षण - व्यवसायों का यह उत्तरदायित्व है कि वे प्रशिक्षण और शिक्षा में निवेश करें, जिससे श्रमिकों को ऐसे कौशल प्राप्त हो सकें जो उन्हें श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखें।
  • कार्यस्थल संबंधी अधिकार और संरक्षण- श्रमिकों के अधिकारों से संबंधित कानून और नियमों का अनुपालन करना, जैसे- उचित व्यवहार, भेदभाव से बचाव, स्वास्थ्य देखभाल या सवैतनिक अवकाश जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।

व्यवसायों को अपने संचालन में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए समाज और जैव-विविधता के हित में कार्य करने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) के अंतर्गत प्रेरित किया जाता है। इसमें प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को कम करना, स्थानीय समुदायों के कल्याण का ध्यान रखना तथा कर्मचारियों और ग्राहकों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना आदि सम्मिलित है।

इसे अनदेखा न करें

भारत 2014 में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर कानून बनाने वाला विश्व का प्रथम देश बना। इसके अंतर्गत कंपनियों को अपने पिछले तीन वर्षों के औसत लाभ का 2 प्रतिशत सामाजिक उत्तरदायित्व संबंधी गतिविधियों पर व्यय करना अनिवार्य किया गया है।

आगे बढ़ने से पहले...

  • भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता उत्पादन के वे कारक हैं जो वस्तुओं और सेवाओं के निर्माण के लिए निश्चित अनुपात में उपयोग में लाए जाते हैं। ये सभी कारक एक-दूसरे के पूरक एवं अंतर्संबंधित होते हैं।
  • मानव पूँजी व्यक्तियों के ज्ञान, कौशल, अनुभव और कार्य करने की क्षमता का योग है। यह उनकी कार्यक्षमता एवं आर्थिक मूल्य सृजन में अपना योगदान देती है। मानव पूँजी शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी के उपयोग और सामाजिक परिवेश जैसे कारकों से प्रभावित होती है, जो लोगों के कार्यबल को अधिक उत्पादक बनाती है।
  • संसाधन उन वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सहायक होते हैं, जो समाज की सेवा करती हैं और इन्हें संरक्षित कर विवेकपूर्ण ढंग से उपयोग में लाना आवश्यक है।

प्रश्न और क्रियाकलाप

  1. 1. उत्पादन के कारक एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं? पाठगत अभ्यास में उत्पादन के कारकों को वर्गीकृत करने में आपने किन-किन कठिनाइयों का सामना किया?
  2. मानव पूँजी, भौतिक पूँजी से किस प्रकार भिन्न है?
  3. प्रौद्योगिकी व्यक्ति के कौशल और ज्ञान के विकास को किस प्रकार परिवर्तित कर रही है, आप इस विषय में क्या सोचते हैं?
  4. कौशल वह है जिसे आप अभ्यास से सीखते और उसमें निपुण होते हैं। यह किसी भी कार्य, जैसे- खेल खेलना, रचनात्मक लेखन करना, गणित की समस्याएँ हल करना, भोजन बनाना आदि के प्रभावी निष्पादन में आपकी सहायता करता है। यहाँ तक कि लोगों से उचित संवाद स्थापित करना भी एक कौशल है। यदि आज आपको कोई एक कौशल सीखने का अवसर मिले तो आप कौन-सा कौशल सीखना चाहेंगे और क्यों?
  5. क्या आप मानते हैं कि उद्यमिता उत्पादन की 'प्रेरक शक्ति' है? क्यों या क्यों नहीं?
  6. क्या प्रौद्योगिकी अन्य कारकों, जैसे श्रम को प्रतिस्थापित कर सकती है? यह अच्छा है या बुरा? अपने उत्तर की पुष्टि उदाहरण की सहायता से करें।
  7. शिक्षा और कौशल-प्रशिक्षण मानव पूँजी को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? क्या वे एक-दूसरे को प्रतिस्थापित करते हैं या एक-दूसरे के पूरक हैं?
  8. कल्पना कीजिए कि आप एक व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं जो स्टील की पानी की बोतलों का उत्पादन करेगा। आपको किस प्रकार के इनपुट्स की आवश्यकता होगी? आप उन्हें कैसे प्राप्त करेंगे? यदि कोई एक कारक उपलब्ध न हो तो आपके व्यवसाय के संचालन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
  9. किसी उद्यमी या संस्थापक का साक्षात्कार कीजिए और जानिए कि उन्हें व्यवसाय आरंभ करने की प्रेरणा कहाँ से प्राप्त हुई, उन्हें कौन-कौन से अवसर प्राप्त हुए और उन्हें किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आप समूहों में बँटकर एक प्रश्नावली बना सकते हैं और प्राप्त जानकारी को एक रिपोर्ट में साझा कर सकते हैं।
  10. अर्थशास्त्री की भाँति विचार करें। आइए पता लगाएँ कि क्या होता है जब परिस्थितियाँ परिवर्तित होती हैं। यदि आप रत्ना होते तो, निम्नलिखित परिस्थितियों में क्या करते? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें।
    1. मान लीजिए कि आपके कार्यस्थल का किराया अचानक दोगुना हो जाता है।
      • क्या आप लागत की भरपाई के लिए परोसे जाने वाले भोजन की कीमत बढ़ाएँगे?
      • क्या आप सस्ते स्थान की खोज करेंगे?
      • यह आपके व्यवसाय को किस प्रकार प्रभावित करेगा?
    2. कल्पना कीजिए कि आपका एक कर्मचारी अचानक काम छोड़ देता है।
      • क्या शेष कर्मचारी उतना ही काम संभाल सकते हैं?
      • नए कर्मचारी को आकर्षित करने के लिए क्या आप अधिक वेतन देंगे?
    3. आपको अपने भोजनालय में अच्छी तकनीकी एवं उपकरण लाने के लिए एक लघु ऋण प्राप्त होता है।
    4. क्या इससे उत्पादन में वृद्धि या गुणवत्ता में सुधार होगा?
    5. क्या आप इसकी सहायता से अधिक ग्राहकों तक पहुँच पाएँगे?
      • मान लीजिए कि आपके पड़ोस में एक नया भोजनालय खुल जाता है।
      • आप ग्राहकों को आकर्षित करने और उन्हें अपना ग्राहक बनाए रखने के लिए क्या करेंगे?
    6. क्या आप अपनी सेवा में सुधार करेंगे, कीमत कम करेंगे या फिर कुछ नया उपलब्ध कराएँगे?
    7. व्यवसाय संचालन को अधिक सहज बनाने हेतु किन सरकारी नियमों में बदलाव किए जाने चाहिए?