अध्याय-5
संख्याओं का खेल
5.1 क्या यह गुणज है?
क्रमागत संख्याओं का योग
अंशु क्रमागत संख्याओं के योग खोज रहा है। उसने इन्हें निम्नांकित प्रकार से लिखा है-
10 = 1 + 2 + 3 + 4
12 = 3 + 4 + 5
15=7+8
= 4 + 5 + 6
= 1 + 2 + 3 + 4 + 5
अब वह आश्चर्यचकित है-
- “क्या मैं प्रत्येक प्राकृत संख्या को क्रमागत संख्याओं के योग के रूप में लिख सकता हूँ?"
- “मैं किन संख्याओं को क्रमागत संख्याओं के योग के रूप में एक से अधिक प्रकार से लिख सकता हूँ?"
- "ओह! मैं समझ गया कि सभी विषम संख्याओं को दो क्रमागत संख्याओं के योग के रूप में लिखा जा सकता है। क्या हम सभी सम संख्याओं को क्रमागत संख्याओं के योग के रूप में लिख सकते हैं?"
- “क्या मैं 0 को भी क्रमागत संख्याओं के योग के रूप में लिख सकता हूँ? संभवतः मुझे ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग करना चाहिए।"
? इन प्रश्नों एवं आपके मस्तिष्क में आने वाले अन्य प्रश्नों को खोजिए तथा सभी प्रश्नों पर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।
? कोई 4 क्रमागत संख्याएँ लीजिए, उदाहरण के लिए 3, 4, 5 और 6 संख्याओं के बीच '+' एवं '-' चिह्न लगाइए। इस प्रकार संख्याओं को लिखने की कितनी विभिन्न संभावनाएँ हो सकती हैं उन सभी को लिखिए।
3 + 4 - 5 + 63-4-5-6
ऐसे आठ व्यंजक संभव हैं। आप निम्नानुसार आरेख का उपयोग करके सभी संभावनाओं को व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध कर सकते हैं।
? प्रत्येक व्यंजक की गणना कीजिए एवं परिणाम को इनके सामने लिखिए। क्या आपको इसमें कुछ रोचक दिखाई देता है?
? अब चार अन्य क्रमागत संख्याएँ लीजिए। पूर्वानुसार '+' एवं '-' चिह्न लगाइए। प्रत्येक व्यंजक का मान ज्ञात कीजिए। आपने क्या अवलोकन किया?
? अब आप उपर्युक्त क्रियाकलाप को 4 क्रमागत संख्याओं के एक अन्य समूह (सेट) के साथ । दोहराइए। अपने परिणामों को साझा कीजिए।
कुछ योगफल सदैव समान प्राप्त होते हैं चाहे किन्हीं भी 4 क्रमागत संख्याओं का चयन किया जाए। क्या यह रोचक नहीं है?
? क्या यह प्रतिरूप तब भी बनता है जब किन्हीं भी 4 क्रमागत संख्याओं का चयन किया जाता है? क्या तर्कशक्ति द्वारा इसका उत्तर प्राप्त किया जा सकता है?
संकेत - बीजगणित का उपयोग कीजिए और इन 8 व्यंजकों को सामान्य रूप में लिखिए। आपने ध्यान दिया होगा कि सभी व्यंजकों का परिणाम सम संख्याएँ हैं। सम संख्याओं का एक गुणनखंड 2 होता है। ऋणात्मक संख्याएँ जिनका एक गुणनखंड 2 होता है वे भी सम संख्याएँ होती हैं। उदाहरण के लिए – 2, 4, 6 इत्यादि। पता लगाइए कि क्या आपकी कक्षा में किसी को विषम संख्या प्राप्त हुई है।
जब 4 क्रमागत संख्याओं का चयन किया जाता है तो उनके बीच '+' और '' चिह्न जिस भी प्रकार से लगाए जाएँ प्राप्त परिणामी व्यंजकों में सदैव सम समता (even parity) होती है।
अब कोई भी 4 संख्याएँ लीजिए, उनके बीच '+' और '-' चिह्न आठ विभिन्न प्रकार से लगाइए और परिणामी व्यंजक का मान ज्ञात कीजिए। आप उनकी समताओं के विषय में क्या अवलोकन करते हैं? इसी प्रक्रिया को 4 संख्याओं के अन्य समूहों के साथ इसे दोहराइए।
? क्या ऐसी कोई पद्धति है जिससे यह समझाया जा सके कि ऐसा क्यों होता है?
संकेत - दो संख्याओं के योग या अंतर की समता के लिए नियमों पर विचार कीजिए।
व्याख्या 1- आइए, चार संख्याओं a, b, c और d से बने 8 व्यंजकों में से किसी भी व्यंजक पर विचार करें। जब इनमें से किसी भी एक चिह्न में परिवर्तन किया जाता है तो इसके मान में सदैव एक सम संख्या के समान वृद्धि होगी या कमी। आइए, देखते हैं कि ऐसा क्यों होता है।
किसी एक व्यंजक पर विचार कीजिए- a + b-c-d में + b को - b से परिवर्तित कर दिया जाए तो हमें प्राप्त होता है-
- a-b-c-d
संख्या में कितना अंतर आया है? यह अंतर है-
- (a+b-c-d)-(a-b-c-d)
=a+b-c-d-a+b + c + d (ध्यान दीजिए कि जब हमने संख्याओं के समूह का दूसरा कोष्ठक खोला तो चिह्न कैसे परिवर्तित हुए)
= 2b (यह एक सम संख्या है।)
यदि दो संख्याओं के मध्य अंतर सम है तो क्या उनमें समताएँ भिन्न हो सकती हैं? नहीं, अतः या तो दोनों संख्याएँ सम हैं या दोनों विषम संख्याएँ हैं।
आइए, अब देखते हैं कि जब एक ऋणात्मक चिह्न को एक धनात्मक चिह्न से परिवर्तित किया जाए तब क्या होता है?
? व्यंजक a + b- c -d में किसी भी एक ऋणात्मक चिह्न को एक धनात्मक चिह्न से परिवर्तित कीजिए और दोनों संख्याओं के मध्य अंतर ज्ञात कीजिए।
? आपको अवलोकन से क्या परिणाम प्राप्त होता है?
किसी भी व्यंजक से प्रारंभ करके और एक या एक से अधिक '+' और '-' चिह्नों में परिवर्तन करके हमें 7 व्यंजक प्राप्त हो सकते हैं। इस प्रकार सभी व्यंजकों की समता समान होती है।
व्याख्या 2- हम जानते हैं कि-
हम समझ चुके हैं कि a + b और a - b की समता समान रहती है चाहे a और b की समता कुछ भी हो। संक्षेप में, a±b की समता सदैव समान होती है। इसी तर्क द्वारा a±b+ c और a±b - c की समता समान होती है। इसी क्रम में हम कह सकते हैं कि सभी व्यंजक a ± b ± c ± d की समान समता होती है।
व्याख्या 3- इसकी व्याख्या धनात्मक और ऋणात्मक टोकन प्रतिरूप का उपयोग करके भी की जा सकती है, जिसे आपने पूर्णांकों पर आधारित अध्याय में पढ़ा था। इस पर विचार करने का प्रयास कीजिए कि यह कैसे संभव है?
चार संख्याओं a, b, c, d का चयन करने और '+' एवं '-' चिह्न का उपयोग करके उन्हें संयोजित करने के अनंत प्रकार हैं। गणितीय तर्कण हमें एक-एक संयोजन को हल किए बिना यह सिद्ध करने की अनुमति देता है कि सभी a ± b ± c ± d संयोजनों की समता सदैव समान होती है।
? क्या सभी व्यंजकों की समान समता होने की परिघटना केवल 4 संख्याएँ लेने तक सीमित है? इस विषय में आपका क्या विचार है?
सम संख्याओं का विभंजन
हम जानते हैं कि सम संख्याओं की पहचान कैसे की जाती है। बिना गणना किए ज्ञात कीजिए कि निम्न में से कौन-से अंकगणितीय व्यंजक सम हैं?
? विभिन्न संक्रियाओं के अंतर्गत समता कैसे व्यवहार करती है, हमारी इस समझ का उपयोग करके पता लगाइए कि अक्षर-संख्याओं (चर संख्याएँ) के किसी भी पूर्णांक मान के लिए नीचे दिए गए बीजगणितीय व्यंजकों में से किन व्यंजकों का मान एक सम संख्या के रूप में प्राप्त होता है।
m और q के किन्हीं पूर्णांक मानों के लिए व्यंजक 4m + 2q का मान सदैव एक सम संख्या होगी। हम इसे दो भिन्न विधियों से सत्यापित कर सकते हैं-
हमें ज्ञात है कि किन्हीं भी पूर्णांकों m और q के लिए 4m और 2q सम होंगे। अतः उनका योग भी सम संख्या होगी।व्यंजक 4m + 2q, व्यंजक 2 (2m + q) के समान है। यहाँ व्यंजक 2 (2m + q) का अर्थ 2m + q का 2 गुना है। अन्य शब्दों में इस व्यंजक का एक गुणनखंड 2 है। अतः किन्हीं भी पूर्णांकों m और q के लिए इस व्यंजक का मान सदैव एक सम संख्या होगी।
उदाहरण के लिए, यदि m = 4 और q = - 9 हो, तो व्यंजक 4m + 2q का मान 4 * 4 +2* (- 9) = (- 2) होगा, जो एक सम संख्या है।
व्यंजक x2+2 में x2 सम होगा, यदि x सम हो तथा x2 विषम होगा, यदि x विषम हो। अतः व्यंजक का x2+2 मान सदैव एक सम संख्या नहीं होगा। व्यंजक का मान एक सम संख्या होने के लिए एक उदाहरण व एक सम संख्या ना होने के लिए एक उदाहरण - (i) यदि x=6 तो x2+2 = 38 और (ii) यदि x = 3 तो x2 + 2 = 11
? इसी प्रकार ज्ञात कीजिए एवं व्याख्या कीजिए कि कौन-से अन्य व्यंजकों का मान सदैव सम संख्याएँ होती हैं। प्रत्येक व्यंजक के लिए मान सम संख्या होने व सम संख्या ना होने के कुछ उचित उदाहरण दीजिए।
? कुछ बीजगणितीय व्यंजक लिखिए जिनका मान सदैव सम संख्या होता है।
चार के समूह बनाने के लिए युग्म
? सम संख्याओं का एक युग्म लीजिए तथा उनका योग कीजिए। क्या यह योग 4 से विभाज्य है?
इसे सम संख्याओं के विभिन्न युग्मों के लिए प्रयोग कीजिए।
कब योगफल 4 का एक गुणज है और कब नहीं है?
क्या इसका कोई सामान्य नियम या प्रतिरूप है?
4 से विभाजित करने पर मिलने वाले शेषफलों के आधार पर सम संख्याएँ दो प्रकार की हो सकती हैं।
? दो सम संख्याओं का योग कब 4 के गुणज के रूप में प्राप्त होगा?
यह समस्या दो संख्याओं को जोड़ने पर परिणामतः एक सम संख्या प्राप्त होने का पता लगाने के प्रश्न के समान है। क्या आप इसे देख सकते हैं? यहाँ जाँच करने की तीन स्थितियाँ हैं-
| बीजगणित और दृश्यांकन के साथ व्याख्या | उदाहरण | ||
|---|---|---|---|
| दो सम संख्याएँ जो 4 की गुणज हों उन्हें जोड़ने पर सदैव 4 का गुणज प्राप्त होगा। | 4p और 4q
4p + 4q = 4(p + q) |
![]() |
4, 12, 16, 24, 36 12+16 = 4 (3+4) = 28 16+28 = 4 (4+7) = 44 |
| दो सम संख्याएँ जो 4 की गुणज नहीं हैं, उन्हें जोड़ने पर सदैव 4 का गुणज प्राप्त होगा क्योंकि इनके शेषफलों जो 2 है, उसे जोड़ने पर 4 प्राप्त होगा। | (4p + 2) और (4q + 2) (4p + 2) + (4q + 2) = 4p + 4q + 4 = 4(p + q + 1) |
![]() |
2, 6, 10, 18, 22, 42 2+6=8 6+10=16 22+6=28 |
क्या होगा जब हम एक 4 की गुणज संख्या को ऐसी सम संख्या जो 4 की गुणज ना हो के साथ जोड़ते हैं? क्या यह एक सम संख्या एवं एक विषम संख्या के योग की समता के समान है?
? आगे दिए गए व्यंजकों एवं दृश्यांकन को देखिए एवं उनकी संगत व्याख्या और उदाहरण लिखिए।
ध्यान दीजिए कि कैसे हम बीजगणित और साथ ही दृश्यांकन का उपयोग करके अंकगणित के गुणधर्मों को व्यापकीकृत एवं सिद्ध कर पाते हैं।
सदैव, कभी-कभी या कभी नहीं
? हम गुणनखंडों और गुणजों के विषय में विभिन्न कथनों को सत्यापित करते हैं एवं सुनिश्चित करते हैं कि क्या कथन 'सदैव सत्य', 'कभी-कभी सत्य' या 'कभी सत्य नहीं' हैं?
हम जानते हैं कि 2 के किन्हीं 2 गुणजों का योग भी 2 का एक गुणज होता है।
? 1. यदि 8 दो संख्याओं को भिन्न-भिन्न प्रकार से विभाजित करता है, तो यह उनके योग को भी अवश्य ही पूर्णतः विभाजित करेगा।
कथन 1 सदैव सत्य है। निर्धारित कीजिए कि क्या घटाव के साथ यह सत्य होगा।
सामान्यतः यदि a, M को विभाजित करता है तथा को विभाजित करता है तो a, M + N को विभाजित करेगा तथा a, M - N को विभाजित करेगा। दूसरे शब्दों में यदि M व N ,a के गुणज हैं तो M + N व M - N भी a के गुणज होंगे।
? 2. यदि कोई संख्या 8 से विभाजित होती है तो 8 उन दो संख्याओं (अलग-अलग) को भी विभाजित करेगा जिनका योगफल वह संख्या हो।
अतः कथन 2 कभी-कभी सत्य है।
? 3.यदि कोई संख्या 7 से विभाज्य है तो उस संख्या के सभी गुणज 7 से विभाज्य होंगे।
संख्या 7jm या (7 × j × m) का एक गुणनखंड 7 है। हम देख सकते हैं कि कथन 3 सदैव सत्य है।
सामान्यतः यदि A, k से विभाज्य है तो A के सभी गुणज k से विभाज्य होंगे।
सामान्यतः यदि A, k से विभाज्य है, तो A, k के सभी गुणनखंडों से भी विभाज्य होगा।
अतः कथन 4 सदैव सत्य है।
? 5.यदि कोई संख्या 7 से विभाज्य है तो वह 7 के किसी भी गुणज से विभाज्य होगी।
? नीचे दिए गए कथनों में से प्रत्येक की जाँच कीजिए एवं निर्धारित कीजिए कि यह 'सदैव सत्य है',, 'कभी-कभी सत्य है' या 'कभी सत्य नहीं हैं'।
? 6. यदि कोई संख्या 9 और 4 दोनों से विभाज्य है तो यह 36 से अवश्य विभाज्य होगी।
? 7. यदि कोई संख्या 6 और 4 दोनों से विभाज्य है तो यह 24 से अवश्य विभाज्य होगी।
सामान्यतः यदि A, k से विभाज्य है और A, m से भी विभाज्य है, तो A, k व m के लघुत्तम समापवर्त्य से भी विभाज्य होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि A, k का एक गुणज है और m का भी एक गुणज है। अतः A के अभाज्य गुणनखंड में k व m के लघुत्तम समापवर्त्य के अभाज्य गुणनखंड सम्मिलित होने चाहिए।
? 8. जब आप एक विषम संख्या में एक सम संख्या जोड़ते हैं तो 6 का गुणज प्राप्त होता है।
हम जानते हैं कि 6 के सभी गुणज सम संख्याएँ हैं। एक विषम संख्या व एक सम संख्या का योगफल एक विषम संख्या होगी। अतः यह कथन कभी सत्य नहीं होगा। हम बीजगणितीय रूप से भी इसकी व्याख्या कर सकते हैं। मान लीजिए -
(2n) + (2m + 1) = 6j
जहाँ 2n एक सम संख्या है, 2m + 1 एक विषम संख्या है और 6j, 6 का एक गुणज है। तब-
2n + 2m = 6j - 1
2(n + m) = 6j - 1
इसका अर्थ है 2(n + m) जो एक सम संख्या है, 6j - 1 के समान होनी चाहिए जो एक विषम संख्या है। यह कभी सत्य नहीं होगा।
क्या शेष बचता है?
? एक संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 5 से विभाजित करने पर 3 शेषफल बचता हो। ऐसी ही कुछ अन्य संख्याएँ भी लिखिए।
? कौन-सा बीजीय व्यंजक ऐसी सभी संख्याओं को समाहित करता है?
(i) 3k + 5 (ii) 3k - 5 (iii) (3k)/5 (iv) 5k + 3 (v) 5k - 2 (vi) 5k - 3वे संख्याएँ जिन्हें 5 से विभाजित करने पर शेषफल 0 बचता है तो वे 5 की गुणज हैं। इसके साथ ही हमें 5 से विभाजित करने पर 3 शेषफल बचाने वाली संख्याएँ चाहिए। ये संख्याएँ 5 के गुणजों से 3 अधिक हैं। 5 के गुणज 5k के रूप में होते हैं। अतः 5 से विभाजित करने पर 3 शेषफल बचाने वाली संख्याएँ 5k + 3 के रूप में होंगी।
? आइए, अन्य व्यंजक 5k - 2 पर विचार करें और के विभिन्न मानों के लिए इस व्यंजक के मान देखें।
संख्याएँ जिन्हें 5 से विभाजित करने पर शेषफल 3 हो उन्हें 5 के गणकों से 2 कम के रूप में भी देखा जा सकता है, जैसे- 5k जहाँ k >= 1 हो।
? क्या ऐसे अन्य व्यंजक हैं जो 5 के गुणज से 3 अधिक वाली संख्याएँ बनाते हों?
? आइए, पता लगाएँ
1. चार क्रमागत संख्याओं का योग 34 है। ये कौन-सी संख्याएँ हैं?
2. मान लीजिए पाँच क्रमागत संख्याओं में p सबसे बड़ा है। अन्य चार संख्याओं को p के पदों में व्यक्त कीजिए।
3. नीचे दिए गए प्रत्येक कथन के लिए निर्धारित कीजिए कि 'यह सदैव सत्य है', 'कभी-कभी सत्य है', या 'कभी सत्य नहीं है'। अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए। उपयुक्तता के आधार पर जो उदाहरण हैं तथा जो उदाहरण नहीं है उनका उल्लेख कीजिए। बीजगणित का उपयोग करके अपने तर्क की पुष्टि कीजिए।
- (i) दो सम संख्याओं का योगफल 3 का एक गुणज है।
- (ii) यदि कोई संख्या 18 से विभाज्य नहीं है तो यह 9 से भी विभाज्य नहीं होगी।
- (iii) यदि दो संख्याएँ 6 से विभाज्य नहीं हैं तो उनका योगफल 6 से विभाज्य नहीं होगा।
- (iv) 6 के एक गुणज और 9 के एक गुणज का योगफल 3 का एक गुणज होता है।
- (v) 6 के एक गुणज और 3 के एक गुणज का योगफल 9 का एक गुणज होता है।
4. ऐसी कुछ संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिन्हें 3 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त हो और 4 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त हो। ऐसी सभी संख्याओं को व्यक्त करने के लिए एक बीजगणितीय व्यंजक लिखिए।
5. "मुझमें हैं कुछ कंकड़, बहुत अधिक तो नहीं, मैं बाँटता जब उन्हें 3 के समूहों में तो एक बच ही जाता यहीं यदि मैं चाहूँ उन्हें युग्मों में बाँटना, मुझसे तो हो पाता नहीं, क्योंकि एक जिद्दी अकेला कंकड़, रह ही जाता कहीं। 5 के समूहों में बाँटने पर, फिर भी एक बचा है यहीं कहीं, किंतु 7 के समूहों में बाँटने पर, पूर्णता मिलती है सही। 100 से अधिक रखना, नहीं है मेरे लिए आसान, कहलाओगे तुम चतुर, यदि कंकड़ों की संख्या गए जान।”
6. तथागत ने ऐसी अनेक संख्याएँ लिखी हैं जिन्हें 6 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त होता है। वह पुष्टि करता है "यदि आप ऐसी किन्हीं तीन संख्याओं का योग करें तो योगफल सदैव 6 का एक गुणज होगा।" क्या तथागत की पुष्टि सही है?
7. 7 से विभाजित करने पर संख्या 661 में शेषफल 3 प्राप्त होता है और संख्या 4779 में शेषफल 5 प्राप्त होता है। गणना किए बिना क्या आप बता सकते हैं कि 7 से विभाजित करने पर नीचे दिए गए व्यंजकों में शेषफल कितना होगा? हल को बीजगणितीय एवं दृश्यांकन रूप में दर्शाइए।
(i) 4779+661 (ii) 4779-6618. वह संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 3 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त होता है एवं 4 से विभाजित करने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है एवं 5 से विभाजित करने पर शेषफल 4 प्राप्त होता है। ऐसी सबसे छोटी संख्या कौन-सी है? क्या आप यह बता सकते हैं कि यह संख्या सबसे छोटी क्यों है?
5.2 विभाज्यता की शीघ्र जाँच
पूर्व में आप यह जाँचने की संक्षिप्त विधियाँ सीख चुके हैं कि क्या भारतीय संख्या पद्धति में दी गई कोई संख्या 2, 4, 5, 8 व 10 से विभाज्य है। आइए, इन पर पुर्नविचार करें।
10, 5 और 2 से विभाज्यता - यदि किसी संख्या का इकाई अंक 0 है तो वह 10 से विभाज्य होगी। आइए, बीजगणित के माध्यम से समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
भारतीय पद्धति में हम अक्षर संख्याओं के एक समुच्चय का उपयोग करके किसी संख्या का व्यापक रूप लिख सकते हैं।
उदाहरण के लिए 5 अंकों की एक संख्या को edcba के रूप में दर्शाया जा सकता है जो e × 10000 + d × 1000+ c × 100+ b × 10+ a से निरूपित होती है।
अक्षर संख्याएँ e, d, c, b व a, 5 अंकों की संख्या के प्रत्येक अंक को प्रदर्शित करती हैं।
किसी भी संख्या को व्यापक रूप से ... dcba के रूप में लिखा जा सकता है जहाँ अक्षर संख्याएँ a, b, c व d क्रमशः इकाई, दहाई, सैकड़ा व हजार एवं इसी क्रम में अन्य अंकों को प्रदर्शित करती हैं। स्थानीय मानों के योगफल के रूप में यह संख्या है-
- … + 1000d + 100c + 10b + a
(उदाहरण के लिए संख्या 4075 में d = 4 c = 0 b = 7 व a = 5)
हम जानते हैं कि प्रत्येक स्थानीय मान इकाई स्थान के अपवाद के साथ 10 का एक गुणज होता है। अतः 10b, 100c, ... सभी 10 के गुणज होंगे। हम कह सकते हैं कि संख्या 10 से केवल तभी विभाज्य होगी जब इकाई अंक a, 0 हो।
? उपर्युक्त के आधार पर बीजगणित का उपयोग करके व्याख्या कीजिए कि 5, 2, 4 व 8 से विभाज्यता की जाँच करने में संक्षिप्त विधियाँ कैसे कार्य करती हैं।
आइए, अब कुछ अन्य संख्याओं से विभाज्यता की जाँच की संक्षिप्त विधियों को समझे कि वे कैसे कार्य करती है।
9 से विभाज्यता के लिए संक्षिप्त विधि
? वास्तविक गणना किए बिना क्या आप बता सकते हैं कि इनमें से कौन-सी संख्याएँ 9 से विभाज्य हैं- 999, 909, 900, 90, 990?
सभी संख्याएँ 9 से विभाज्य हैं।
? क्या हम कह सकते हैं कि किसी भी क्रम में केवल '0' और '9' अंकों से बनी संख्या सदैव 9 से विभाज्य होगी?
हाँ, यदि प्रत्येक अंक या तो 0 या 9 है तो विस्तारित रूप में प्रत्येक पद 9 ×....... और 0 ×....... होगा ( ' .......... ' स्थानीय मान को दर्शाते हैं)। इसका अर्थ है कि प्रत्येक पद 9 का गुणज होगा उदाहरण के लिए-
99009 = 9 * 10000 + 9 * 1000 + 0 * 100 + 0 * 10 + 9 * 1
ध्यान रखिए कि केवल यही संक्षिप्त विधि 9 के सभी गुणजों की पहचान नहीं कर सकती है। केवल इकाई के अंक को देख कर हम 9 के गुणजों की पहचान नहीं कर सकते हैं जो हम 2, 5, व 10 के गुणजों के लिए कर सकते हैं। 99 और 109 दोनों संख्याओं में इकाई का अंक 9 है किंतु 99, 9 से विभाज्य है जबकि 109 विभाज्य नहीं है।
? क्या 10, 9 से विभाज्य है? यदि नहीं, तो शेषफल क्या है?
10 के अन्य गुणजों (10, 20, 30, ...) की 9 से विभाज्यता की जाँच कीजिए।
आप देखेंगे कि 10 के किसी भी गुणज के लिए शेषफल दहाई की संख्या के समान है।
? इसी प्रकार जब 100 के गुणजों (100, 200, 300, ...) को 9 से विभाजित किया जाता है तो शेषफलों को देखिए। आपने क्या अवलोकन किया?
100 के किसी भी गुणज के लिए शेषफल सैकड़ों की संख्या के समान है।
? इस अवलोकन का उपयोग करके 427 को 9 से विभाजित करने पर शेषफल ज्ञात कीजिए।
हम देखते हैं कि 427 में सैकड़े की संख्या 4 है। इस प्रकार इसका संगत शेषफल (9 से विभाजित करने पर) 4 प्राप्त होगा। 427 में दहाई की संख्या 2 है इस प्रकार संगत शेषफल 2 प्राप्त होगा। 7 भी शेष है। सभी शेषफलों का योग करने पर हमें 4 + 2 + 7 = 13 प्राप्त होता है। हम 13 के साथ 9 का एक और समूह बना सकते हैं। इसके पश्चात शेषफल 4 प्राप्त होता है। अतः 427/9 से शेषफल 4 प्राप्त होता है।
? क्या बड़ी संख्याओं के साथ ऐसा होगा?
आप देख सकते हैं कि यह किसी भी स्थानीय मान के लिए सत्य है।
1=0+1 10=9+1
100=99+1
1000 = 999+1
10000 = 9999+1
और इसी प्रकार आगे भी। इस प्रकार प्रत्येक अंक शेषफल को दर्शाता है
जब संगत स्थानीय मान को 9 से विभाजित किया जाता है।
- उदाहरण के लिए 7309 को 9 से विभाजित करने पर शेषफल ज्ञात करने के लिए हम केवल सभी अंकों का योग कर सकते हैं- 7 + 3 + 0 + 9 जिससे 19 प्राप्त होता है। इसे निम्नलिखित प्रकार से देखा जा सकता है-
7 * 1000 + 3 * 100 + 0 * 10 + 9 * 1
= 7*(999 + 1) + 3(99 + 1) + 0(9 + 1) + 9(0 + 1)
= (7 * 999 + 3 * 99 + 0 * 9 + 9 * 0) + (7 * 1 + 3 * 1 + 0 * 1 + 9 * 1)
(7 * 999 + 3 * 99 + 0 * 9 + 9 * 0) यह 9 के गुणज हैं।
+( 7+3+0+9) इसलिए हमें बस इस भाग पर विचार करने की आवश्यकता है।
इसका अर्थ है कि संख्या 7309, 9 के किसी गुणज से 19 अधिक है। अत: अंक 1 व 9 को आगे भी जोड़ा जा सकता है जिससे 1 + 9 = 10 प्राप्त होता है। अब हम कह सकते हैं कि 7309, 9 के एक गुणज से 10 अधिक है। इसके साथ ही संख्या 10 के लिए इस चरण को दोहराते हुए हमें शेषफल 1 + 0 = 0 प्राप्त होता है अर्थात 7309, 9 के एक गुणज से 1 अधिक है अतः 7309, 9 से शेषफल 1 प्राप्त होता है।
कोई संख्या 9 से केवल तभी विभाज्य होगी यदि इसके अंकों का योगफल 9 से विभाज्य हो। साथ ही हम किसी संख्या के अंकों को एक अंकीय योगफल प्राप्त होने तक जोड़ते जाएँगे। यह प्राप्त एकल अंक उस संख्या को 9 से भाग देने पर प्राप्त शेषफल को दर्शाता है।
?निम्न कथनों में से प्रत्येक कथन को देखिए। कौन-से कथन सही हैं और क्यों?
- (i) यदि कोई संख्या 9 से विभाज्य है तो इसके अंकों का योगफल 9 से विभाज्य होगा।
- (ii) यदि किसी संख्या के अंकों का योगफल 9 से विभाज्य है तो यह संख्या 9 से विभाज्य होगी।
- (iii) यदि कोई संख्या 9 से अविभाज्य है तो इसके अंकों का योगफल 9 से अविभाज्य होगा।
- (iv) यदि किसी संख्या के अंकों का योगफल 9 से अविभाज्य है तो यह संख्या 9 से अविभाज्य होगी।
गणित अधिगम केवल कुछ संक्षिप्त विधियों को जानना और प्रक्रियाओं का अनुसरण करना नहीं है अपितु यह समझना है कि कोई विधि काम 'क्यों' करती है।
? आइए, पता लगाएँ
1. विभाजित किए बिना ज्ञात कीजिए कि क्या दी गई संख्याएँ 9 से विभाज्य हैं।
(i) 123 (ii) 405 (iii) 8888 (iv) 93547 (v) 3580952. 9 का सबसे छोटा गुणज ज्ञात कीजिए जिसमें कोई विषम अंक न हो।
3. 9 का वह गुणज ज्ञात कीजिए जो संख्या 6000 के सबसे समीप हो।
4. 4300 व 4400 संख्याओं के बीच 9 के कितने गुणज हैं?
3 से विभाज्यता के लिए संक्षिप्त विधि
हम जानते हैं कि 9 के सभी गुणज 3 के गुणज भी हैं। अर्थात यदि कोई संख्या 9 से विभाज्य है तो यह 3 से भी विभाज्य होगी। इसके अतिरिक्त 3 के अन्य गुणज भी हैं जो 9 के गुणज नहीं होते हैं। जैसे - 15, 33 व 87
? 3 से विभाज्यता की संक्षिप्त विधि को ज्ञात करना 9 से विभाज्यता की विधि के समान है। कोई संख्या 3 से विभाज्य है यदि इसके अंकों का योग 3 से विभाज्य हो। जब 10 की घातें 3 से विभाजित की जाती हैं तो शेषफल ज्ञात कीजिए। व्याख्या कीजिए कि यह विधि कैसे कार्य करती है।
11 से विभाज्यता की संक्षिप्त विधि
रोचक रूप से 11 से विभाज्यता की संक्षिप्त विधि भी स्थानीय मान के साथ शेषफलों को जाँचने पर आधारित है। आइए, देखते हैं कैसे।
यह 11 से अधिक व 11 से एक कम का एकांतर क्रम उच्चतर स्थानीय मानों के लिए निरंतरशील रहता है।
चूँकि 400 में 4 सैकड़ा है, अतः 400, 11 के एक गुणज से 4 अधिक (396+4) है। चूँकि 60 में 6 दहाई है, अत: 60, 11 के एक गुणज से 6 कम (66 - 6) है। चूँकि 2 में 2 इकाई है, अतः 2, 11 के एक गुणज से 2 अधिक है, जो 2 = (0 + 2) है।
? इन अवलोकनों का उपयोग करते हुए क्या आप बता सकते हैं कि क्या संख्या 462, 11 से विभाज्य है?
? 11 से विभाज्यता जाँचने की एक सामान्य विधि या संक्षिप्त विधि क्या हो सकती है?
हमने देखा कि स्थानीय मान 11 के किसी गुणज से 1 अधिक या 1 कम के एकांतर क्रम में होते हैं। इस अवलोकन का उपयोग करते हुए-
इन दोनों योगफलों का अंतर 8-11-3 है। यह दर्शाता है कि संख्या 320185, 11 के किसी गुणज से 3 कम या 8 अधिक है।
? यदि यह अंतर 11 हो या 11 का कोई गुणज हो तो संख्या को 11 से विभाजित करने पर मिलने वाले शेषफल के विषय में यह क्या दर्शाता है?
? इस संक्षिप्त विधि का उपयोग करते हुए ज्ञात कीजिए कि क्या दी गई संख्याएँ 11 से विभाज्य हैं। इसके साथ ही यदि संख्या 11 से अविभाज्य है तो शेषफल ज्ञात कीजिए।
(i) 158 (ii) 841 (iii) 481 (iv) 5529 (v) 90904 (vi) 857076निम्नलिखित प्रक्रिया का अवलोकन कीजिए।
| अनुसरण हेतु चरण | संख्या 328105 के लिए उदाहरण |
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1. इकाई के अंक से प्रारंभ करते हुए प्रत्येक अंक के आगे एकांतर क्रम में '+' एवं '-' चिह्न लगाइए। 2. व्यंजक का मान ज्ञात कीजिए। 3. यह परिणाम संख्या को 11 से विभाजित करने पर मिलने वाले शेषफल को दर्शाता है। |
- 3 + 2 - 8 + 1 + 0 + 5 - 3 + 2 - 8 + 1 + 0 + 5 = - 3 328105, 11 के एक गुणज से 3 कम या 8 अधिक है। |
? जो विधि हमने इस विधि से ठीक पूर्व में देखी क्या यह विधि उसके समान है या उससे भिन्न है?
? नीचे दी गई सारणी में संक्षिप्त विधि का उपयोग करते हुए नीचे दी गई सारणी में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
विभाज्यता की संक्षिप्त विधियों पर कुछ अन्य बिंदु
अन्य संख्याओं के लिए विभाज्यता की संक्षिप्त विधियाँ? हम कैसे ज्ञात कर सकते हैं कि क्या कोई संख्या 6 से विभाज्य है?
? क्या 6 से विभाज्यता की जाँच इसके गुणनखंडों 2 एवं 3 से विभाज्यता द्वारा की जा सकती है? दी गई संख्याओं पर 2 एवं 3 के लिए विभाज्यता की संक्षिप्त विधियों का उपयोग कीजिए एवं प्रत्येक संख्या को 6 से विभाजित करके अपने उत्तर की जाँच कीजिए 38, 225, 186, 64
? 24 से विभाज्यता की जाँच कैसे की जाए? क्या 24 के गुणनखंडों 4 एवं 6 द्वारा विभाज्यता की जाँच से यह किया जा सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
4 एवं 6 के द्वारा विभाज्यता की जाँच करके 24 द्वारा विभाज्यता निर्धारित नहीं की जा सकती। उदाहरण के लिए संख्या 12, 4 एवं 6 दोनों के द्वारा विभाज्य है किंतु 24 द्वारा नहीं।
इसके स्थान पर हम 24 द्वारा विभाज्यता की जाँच करने के लिए 3 व 8 द्वारा विभाज्यता की जाँच कर सकते हैं।
व्याख्या कीजिए कि क्यों 24 द्वारा विभाज्यता की जाँच 3 एवं 8 द्वारा विभाज्यता की जाँच करके की जा सकती है जबकि 24 द्वारा विभाज्यता की जाँच के लिए 4 एवं 6 द्वारा विभाज्यता की जाँच पर्याप्त नहीं है।
100 तक की सभी संख्याओं के लिए विभाज्यता की जाँच की संक्षिप्त विधियाँ विद्यमान हैं किंतु 100 से बड़ी कुछ ही संख्याओं के लिए ये विधियाँ विद्यमान हैं। आप अगली कक्षाओं में कुछ अवधारणाओं को सीखने के बाद यह समझने का प्रयत्न कर सकते हैं कि ये संक्षिप्त विधियाँ कैसे कार्य करती हैं।
अंकीय मूल
एक संख्या लीजिए। इसके अंकों को लगातार तब तक जोड़ते रहिए जब तक एक अंकीय संख्या प्राप्त न हो जाए। इस प्रकार प्राप्त एक अंकीय संख्या दी गई संख्या का अंकीय मूल कहलाती है। उदाहरण के लिए संख्या 489710 का अंकीय मूल 2 होगा
2( 4 + 8 + 9 + 7 + 1 + 0 = 29 , 2+9=11, l + 1 = 2 )
? आपके अनुसार इस अंकीय मूल में कौन-सी विशेषता होगी? स्मरण कीजिए 9 द्वारा विभाज्यता की संक्षिप्त विधि को ज्ञात करते समय हमने ऐसा किया था।
? संख्या 600 और 700 के मध्य किन संख्याओं का अंकीय मूल है- (i) 5 (ii) 7 (iii) 3?? किन्हीं 12 क्रमागत संख्याओं के अंकीय मूल लिखिए। आपने क्या अवलोकन किया?
हमने देखा कि 9 के गुणजों का अंकीय मूल सदैव 9 होता है।
? अब इन संख्याओं के कुछ क्रमागत गुणजों के अंकीय मूल ज्ञात कीजिए- (i) 3 (ii) 4 (iii) 6
? 6 के गुणजों से 1 अधिक वाली संख्याओं के अंकीय मूल क्या हैं? आपने क्या अवलोकन किया?
आपने जो प्रतिरूप देखा उसकी व्याख्या करने का प्रयत्न कीजिए।
? अंकों से हूँ मैं बना, हर एक छोटा और विषम, 1 नहीं है अंकीय मूल मेरा, बात है ये कितनी विषम! मेरे अंक, उनका योग, जो है मेरा मूल सारा, सभी मिलकर करते है एक सदृढ़ संख्या की ओर इशारा गर्व से कहता हूँ मैं, वह मूल है सबसे बड़ी एकअंकीय विषम संख्या क्या है क्या है मेरा नाम? कौन-सी हूँ मैं संख्या?
आर्यभट द्वितीय (लगभग 950 सामान्य संवत्) के ग्रंथ महासिद्धांत में एक संख्या के अंकीय मूल की गणना करने की विधि का वर्णन किया गया है जिसमें संख्या के अंकों का तब तक बार-बार योग किया जाता है जब तक कि एक इकाई अंक प्राप्त नहीं हो जाता। इस विधि का प्रयोग अंकगणितीय संक्रियाओं की गणनाओं की जाँच करने के लिए किया जाता रहा है।
? आइए, पता लगाएँ
1. 8 अंकों की एक संख्या का अंकीय मूल 5 है। उस संख्या से 10 अधिक संख्या का अंकीय मूल क्या होगा?
2. कोई भी संख्या लिखिए। 11 को बार-बार जोड़कर संख्याओं का अनुक्रम बनाइए। संख्याओं के इस अनुक्रम का अंकीय मूल क्या होगा? अपने अवलोकन को साझा कीजिए।
3. संख्या 9a + 36b + 13 का अंकीय मूल क्या होगा?
4. जाँच द्वारा अनुमान लगाइए यदि निम्नलिखित के मध्य कोई प्रतिरूप बन रहा हो अथवा संबंध हो।
- (i) एक संख्या और उसके अंकीय मूल की अनुरूपता या समता
- (ii) किसी संख्या का अंकीय मूल तथा शेषफल जो संख्या को 3 अथवा 9 से विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
5.3 छुपे हुए अंकों की पहेली
पिछले वर्ष आपने गूढ़कलन (क्रिप्टारिथ्म) पहेलियाँ देखी थीं। जहाँ प्रत्येक अक्षर एक अंक होता है, प्रत्येक अंक को अधिकतम एक अक्षर द्वारा दर्शाया जाता है और संख्या का पहला अंक कभी भी 0 नहीं होता।
? नीचे दिए गए गूढ़कलन को हल कीजिए।
आइए, अब गुणन से संबंधित कुछ गूढ़ समीकरणों को हल करने का प्रयास करते हैं।
? VPQ×8 = RS
गुना कहता है, "ओह, इसका अर्थ है कि एक 2 अंकों वाली संख्या को 8 से गुणा करने पर एक 2 अंकों वाली संख्या प्राप्त होगी। मैं जानता हूँ कि 10 * 8 = 80 परंतु 10 और 80 का इकाई अंक समान है, जिसकी हमें आवश्यकता नहीं हैं। इसी तर्क से PQ, 11 नहीं हो सकता क्योंकि P और Q भिन्न-भिन्न अंक हैं। 12 * 8 = 96 सभी प्रतिबंधों को पूरा करता है। क्या PQ, 13 हो सकता है? विचार कीजिए।
यह संभव नहीं है क्योंकि 13 * 8 = 104 होता है। 12 से बड़ी सभी 2 अंकों की संख्याओं का 8 के साथ गुणनफल करके 3 अंकों की संख्या प्राप्त होती है।
? इसे हल करने का प्रयास कीजिए - GH*H = 9K
इसका अर्थ है कि किसी 2 अंकों की संख्या को 1 अंक की संख्या से गुणा करने पर 90 के दशक की 2 अंकों वाली अन्य संख्या प्राप्त होती है। इस गूढ़ समीकरण में इकाई के अंकों के संगत अक्षरों को देखिए। नीचे दिए गए विकल्पों में से इस प्रश्न का उत्तर छाँटिए।
11 * 9 = 99, 12 * 8 = 96, 46 * 2 = 92, 24 * 4 = 96, 47 * 2 = 94
31 * 3 = 93, 16 * 6 = 96
? एक अन्य प्रश्न BYE × 6 = RAY
अंशु कहता है, "चूँकि गुणनफल एक तीन अंकों वाली संख्या है अतः B, 2 या उससे अधिक नहीं हो सकता। यदि B = 2 अर्थात 200 तब गुणनफल 1200 से अधिक होगा। अतः B = 1 होगा।"
? आप 'Y' के विषय में क्या कह सकते हैं? कौन-से अंक संभव हैं या नहीं है?
Y, 7 अथवा उससे अधिक नहीं हो सकता क्योंकि, यदि Y = 7 होगा तो 170 * 6 = 1020 होगा परंतु हमें गुणनफल 3 अंको की संख्या चाहिए। संख्याओं और संक्रियाओं से संबंधित प्रतिरूपों, गुणधर्मों व तर्कशक्ति के प्रयोग से हम गूढ़ समीकरण हल कर सकते हैं।
Y सम संख्याओं और संक्रियाओं से संबंधित प्रतिरूप, गुणों और तर्क का उपयोग गूढ़कलन को हल करने में कर सकते हैं।
? निम्नलिखित को हल कीजिए।
(i) UT * 3 = PUT (ii) AB * 5 = BC (iii) L2N * 2 = 2NP (iv) X4 * 4 = ZX (v) PP*QQ = PRP (vi) JK * 6 = KKK? आइए, पता लगाएँ
1. यदि 31z5, 9 का गुणज है जहाँ z एक अंक है तब 2 का मान क्या होगा? व्याख्या कीजिए कि यहाँ इस प्रश्न के दो उत्तर क्यों हैं?
2. स्नेहल पुष्टि करता है- "मैं एक संख्या लेता हूँ जिसे 12 से विभाजित करने पर शेषफल 8 प्राप्त होता है। मैं एक और संख्या लेता हूँ जो 12 के गुणज से 4 कम है। इनका योगफल सदैव 8 का गुणज होगा।" उसकी पुष्टि की जाँच कीजिए और अपने निष्कर्ष का सत्यापन कीजिए।
3. 3 के दो गुणजों का योग कब 6 का गुणज होता है और कब नहीं? विभिन्न संभावित स्थितियों को व्याख्या कीजिए और प्रतिरूप का सामान्यीकरण कीजिए।
4. श्रीलथा कहती हैं, "मेरे पास एक संख्या है जो 9 से विभाज्य है। यदि मैं इस संख्या के अंकों को उल्टे क्रम में लिखूँ तब भी वह 9 से विभाज्य है।"
- (i) जाँच कीजिए कि क्या उसका अनुमान 9 के कोई किसी भी गुणज के लिए सत्य है।
- (ii) क्या कोई अन्य अंक में परिवर्तन संभव है जिससे कि प्राप्त संख्या अभी भी 9 का गुणज है?
5. यदि 48a23b, 18 का एक गुणज है तो a और b के सभी संभव मानों के युग्मों की सूची बनाइए।
6. यदि 3p7q8, 44 से विभाज्य है p और q के सभी संभव मानों के युग्मों की सूची बनाइए।
7. तीन क्रमागत संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनमें पहली संख्या 2 का गुणज है दूसरी संख्या 3 का गुणज है और तीसरी संख्या 4 का गुणज है।
8. 45,000 और 47,000 के बीच 36 के पाँच गुणज लिखिए। अपनी विधि को अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
9. पाँच क्रमागत सम संख्याओं के अनुक्रम में मध्य की संख्या 5p है। अनुक्रम में अन्य चार संख्याओं को p के पदों में व्यक्त कीजिए।
10. एक 6 अंकों की संख्या लिखिए जो 15 से विभाज्य है तथा अंकों को उल्टे क्रम में लिखने पर प्राप्त संख्या 6 से विभाज्य है।
11. दीपक पुष्टि करता है कि "11 के कुछ गुणज ऐसे हैं जिन्हें दोगुना करने पर भी वह 11 के गुणज रहते हैं परंतु 11 के अन्य गुणज दोगुना करने पर भी 11 के गुणज नहीं रहते हैं।" यदि उसका अनुमान सही है तो जाँच कीजिए तथा अपने निष्कर्ष की व्याख्या कीजिए।
12. निर्धारित कीजिए कि नीचे दिए गए कथन 'सदैव सत्य', 'कभी-कभी सत्य' अथवा 'कभी सत्य नहीं'। अपने तर्क को स्पष्ट कीजिए।
- (i) 6 के गुणज और 3 के गुणज का गुणनफल 9 का गुणज होता है।
- (ii) तीन क्रमागत सम संख्याओं का योग 6 से विभाज्य होगा।
- (iii) यदि abcdef, 6 का एक गुणज है तो badcef भी 6 का एक गुणज होगा।
- (iv) 8 (7b - 3) - 4(11b + 1)12 का एक गुणज है।
13. किन्हीं 3 संख्याओं का चयन कीजिए। इनका योग कब 3 से विभाज्य होगा? सभी संभावित स्थितियों का अन्वेषण कीजिए और व्यापकीकरण कीजिए।
14. क्या दो क्रमागत पूर्णांकों का गुणनफल सदैव 2 का गुणज होता है? क्यों? तीन क्रमागत पूर्णांकों के गुणनफल के विषय में आपका क्या विचार है? क्या यह सदैव 6 का गुणज है? क्यों अथवा क्यों नहीं? आप चार क्रमागत पूर्णांकों के गुणनफल के विषय में क्या कह सकते हैं? पाँच क्रमागत पूर्णांकों के गुणनफल के विषय में आपका क्या विचार है?
15. गूढ़ समीकरण को हल कीजिए।
- (i) EF*E = GGG
- (ii) WOW × 5 = MEOW
16. नीचे दिए गए कौन-से वेन आरेख 4, 8 और 32 के गुणजों के बीच संबंधों को दर्शाते हैं?
• हमने विभाज्यता के विभिन्न गुणों को पता लगाया और सीखा कि-
- यदि a, b से विभाज्य है, तो व के सभी गुणज b से विभाज्य होंगे।
- यदि a, b से विभाज्य है, तो a, b के सभी गुणनखंडों से विभाज्य होगा।
- यदि a, m को विभाजित करता है और a, n को विभाजित करता है, तो a, m + n और m-n को विभाजित करता है।
• उपर्युक्त सभी के माध्यम से एवं बीजगणित, दृश्यांकन, उदाहरण और प्रति उदाहरण का उपयोग करके हमें गणितीय सोच और तर्कशक्ति से हमें अवगत कराया गया।
नवकांकरी को सालू माने आटा, चर-पर या नवकांकरी के नाम से भी जाना जाता है। यह परंपरागत भारतीय पट्ट खेल है जो 'नाइन मेन्स मोरिस' अथवा 'मिल्स इन दी वेस्ट' के समान ही है। यह दो खिलाड़ियों के लिए एक युक्ति खेल होता है जिसमें लक्ष्य तीन मोहरों की पंक्ति (एक रेखा में रखकर) बनाकर प्रतिद्वंदी के मोहरों को समाप्त करना या उसकी चाल को रोकना होता है।
खेल के नियम
1. प्रत्येक खिलाड़ी 9 मोहरों से प्रारंभ करता है। खिलाड़ी चिह्नित प्रतिच्छेदन (रंगीन गोले) पर बारी-बारी से अपने मोहरें रखते हैं। एक प्रतिच्छेद पर अधिकतम एक मोहरा रख सकते हैं।
2. एक बार जब सभी मोहरे रख दिए जाते हैं तो खिलाड़ी बारी-बारी से अपनी मोहरों में से एक को आसन्न रिक्त प्रतिच्छेदों (रंगीन गोले) पर ले जाकर तीन की एक रेखा बनाते हैं। यह रेखा क्षैतिज या उर्ध्वाधर हो सकती है।
3. एक बार जब कोई खिलाड़ी अपने मोहरों के साथ एक रेखा बना लेता है तो वह प्रतिद्वंदी के मोहरों में से एक को हटा सकता है जब तक कि वह उसकी पंक्तियों में से किसी एक का भाग न हो।
यदि प्रतिद्वंदी के पास 3 से कम मोहरें रह गई हों अथवा वह कोई चाल न चल सके तो वह खिलाड़ी जीत जाता है।


