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अध्याय-6
जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा

पिछले अध्याय में हमने देखा कि किस प्रकार बीजगणित में प्रतिरूपों और संबंधों के विषय में सामान्य कथनों को संक्षिप्त रूप में लिखने के लिए अक्षर प्रतीकों का उपयोग किया जाता है। बीजगणित का उपयोग अनुमानों तथा निष्कर्षों (जैसा कि आपने पूर्व अध्याय में ऐसे अनेक गुणों को देखा था) को सही सिद्ध करने और विभिन्न प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए भी किया जा सकता है।

वितरण गुणधर्म, गुणन और योग के मध्य संबंध दर्शाने का एक गुण है जिसे बीजगणित का उपयोग करके संक्षेप में समझाया गया है। इस अध्याय में हम विभिन्न प्रकार के गुणन प्रतिरूपों का अन्वेषण करेंगे। साथ ही यह समझेंगे कि बीजगणितीय भाषा में वितरण गुणधर्म का उपयोग करके इन गुणन प्रतिरूपों को किस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है।

6.1 गुणन के कुछ गुणधर्म

गुणनफलों में वृद्धि

दो संख्याओं के गुणन पर विचार कीजिए, मान लीजिए यह 23 × 27 है।

? 1. यदि पहली संख्या (23) में 1 की वृद्धि की जाए तो गुणनफल में कितनी वृद्धि होगी?

? 2. यदि दूसरी संख्या (27) में 1 की वृद्धि की जाए तो गुणनफल में क्या परिवर्तन होगा?

? 3. जब दोनों संख्याओं में 1 की वृद्धि की जाए तब गुणनफल में क्या परिवर्तन होगा?

? क्या आपको कोई ऐसा प्रतिरूप दिखाई देता है जो किन्हीं दो संख्याओं के गुणनफल के हमारे अवलोकन को सामान्यीकृत करने में सहायक हो?

आइए, पहले एक सरल समस्या पर विचार करते हैं- 27 में 1 की वृद्धि करने पर गुणनफल में वृद्धि ज्ञात कीजिए। गुणनफल की परिभाषा (और क्रमविनिमेय गुण) से यह स्पष्ट है कि गुणनफल में 23 की वृद्धि होती है। इसे गुणन के वितरण गुणधर्म से भी देखा जा सकता है। यदि a, b, c तीन संख्याएँ हैं तब-

Screenshot 2026-03-23 154350 a (b+c) = ab + ac

इस गुणधर्म को एक चित्र का उपयोग करके स्पष्ट रूप में दर्शाया जा सकता है-

Screenshot 2026-03-23 154444

इसे योग पर गुणन का वितरण गुणधर्म कहते हैं। सर्वसमिका a(b + c) = ab + ac के लिए a = 23 b = 27 व c = 1 का उपयोग करने पर हमें प्राप्त होता है-

Screenshot 2026-03-24 093548

स्मरण रखिए कि यहाँ पर a(b + c) और 23 (27+ 1) का अर्थ क्रमशः a(b + c) एवं 23(27 + 1) है। हम प्रायः कोष्ठकों के पूर्व अथवा बाद में '×' चिह्न नहीं लिखते हैं ठीक वैसे ही जैसे 5a, xy आदि व्यंजकों में होता है।

इसी प्रकार हम वितरण गुणधर्म का प्रयोग करके (a + b)c का प्रसार भी नीचे दिए अनुसार कर सकते हैं-

  1. (a + b)c = c(a + b) (गुणन की क्रमविनिमेयता)

  2. = ca + cb (वितरणात्मकता)

  3. = ac + bc (गुणन की क्रमविनिमेयता)

वितरण गुणधर्म का प्रयोग करके हम सामान्यतः यह ज्ञात कर सकते हैं कि यदि गुणनफल में एक या दोनों संख्याओं में 1 की वृद्धि कर दी जाए तो गुणनफल में कितनी वृद्धि होगी। मान लीजिए प्रारंभ में दो संख्याएँ व और b हैं। यदि उनमें से एक संख्या (मान लीजिए b) में 1 की वृद्धि कर दी जाए तो हमें प्राप्त होता है -

Screenshot 2026-03-24 094005

आइए, अब हम देखते हैं कि क्या होगा यदि किसी गुणनफल में दोनों संख्याओं में 1 की वृद्धि कर दी जाए। हम देखते हैं कि यदि गुणनफल ab में a और b दोनों में 1 की वृद्धि कर दी जाए तो हमें (a + 1)(b + 1) प्राप्त होगा।

? हम इसका प्रसार किस प्रकार करें?



मान लीजिए (a + 1) एक एकल पद है। तब वितरण गुणधर्म से हमें प्राप्त होता है-

(a + 1) (b + 1) = (a + 1) b + (a + 1) 1

वितरण गुणधर्म का पुनःउपयोग करने पर हमें प्राप्त होता है-

Screenshot 2026-03-24 141240
यदि a = 23 और b = 27 है तो हमें प्राप्त होता है- Screenshot 2026-03-24 141731

इस प्रकार जब a और b में से प्रत्येक में 1 की वृद्धि की जाती है तब गुणनफल ab में a + b + 1 की वृद्धि होती है।

? यदि हम पहले (b + 1)को एकल पद मानकर (a + 1)(b + 1) का प्रसार करें तब हमें क्या प्राप्त होता? इसे हल का प्रयास कीजिए?

? यदि किसी गुणनफल की पहली संख्या में 1 की वृद्धि और दूसरी संख्या में 1 की कमी की जाए तो हमें क्या प्राप्त होगा? क्या उनके गुणनफल में कोई परिवर्तन होगा?

आइए, पुनः दो संख्याओं a और b का गुणनफल ab लेते हैं। यदि a में 1 की वृद्धि और b में 1 की कमी की जाए तो उनका गुणनफल (a + 1)(b - 1) होगा। इसका प्रसार करने पर हमें प्राप्त होता है-

Screenshot 2026-03-24 143848 Screenshot 2026-03-24 143932

? क्या गुणनफल में सदैव वृद्धि होगी? ऐसे तीन उदाहरणों का पता लगाइए जहाँ गुणनफल घटता है।

? क्या होगा जब a और b ऋणात्मक पूर्णांक हों?

उपर्युक्त प्रत्येक स्थिति में a और b के लिए विभिन्न मान प्रतिस्थापित करके जाँच कीजिए। उदाहरण के लिए a = - 5 b = 8 ,a = - 4 ,b = - 5 इत्यादि।

हमने देखा कि पूर्णांक भी वितरण गुणधर्म को संतुष्ट करते हैं अर्थात यदि x, y और 2 कोई तीन पूर्णांक हैं तो x(y + z) = xy + xz होगा।

इस प्रकार गुणनफल में वृद्धि के लिए हमारे पास जो व्यंजक हैं वे तब भी मान्य होंगे जब अक्षर-संख्याओं (चर) का मान ऋणात्मक पूर्णांक हों।

याद कीजिए कि यदि किन्हीं दो बीजीय व्यंजकों में अक्षर संख्याओं को संख्याओं से -परिवर्तन करने पर उनके मान समान रहते हैं तो वे व्यंजक समान होते हैं। ये संख्याएँ कोई भी पूर्णांक हो सकती हैं। दो गणितीय व्यंजकों की समानता व्यक्त करने वाले गणितीय कथनों को सर्वसमिकाएँ कहते हैं, जैसे -

  1. a(b+8)=ab+8a,

  2. (a + 1)(b - 1) = ab + b - a - 1 , आदि

? यदि दो संख्याओं में से एक में m और दूसरी में n की वृद्धि कर दी जाए तो उनके गुणनफल में कितना परिवर्तन होगा?

यदि a और b गुणा की जाने वाली प्रारंभिक संख्याएँ हैं तो वृद्धि के पश्चात वे a + m और b + n बन जाती हैं।

  1. (a+m)(b+n)=(a+m)b+(a+m)n

  2. = ab + mb + an +mn

अतः गुणनफल में वृद्धि an + bm + mn है।

ध्यान दीजिए कि यह गुणनफल (a + m) के प्रत्येक पद का (b + n) के प्रत्येक पद से गुणनफल का योग है।

Screenshot 2026-03-24 151658

इस सर्वसमिका को निम्न प्रकार से दर्शाया जा सकता है-

Screenshot 2026-03-24 154204

? इस सर्वसमिका का उपयोग यह ज्ञात करने के लिए किया जा सकता है कि जब गुणा की जाने वाली संख्याओं में किसी भी मात्रा में वृद्धि या कमी की जाती है तो उनके गुणनफल में क्या परिवर्तन होता है। क्या आप समझ सकते हैं कि एक संख्या या दोनों संख्याओं में कमी करने पर इस सर्वसमिका का प्रयोग किस प्रकार किया जा सकता है?

आइए, उदाहरण के लिए उस स्थिति पर पुनर्विचार करें जब एक संख्या में 1 की वृद्धि और दूसरी संख्या में 1 की कमी की जाती है। आइए, गुणनफल (a + 1) (b-1) को (a + 1) (b + (- 1)) के रूप में लिखते हैं। सर्वसमिका 1 में m = 1 और n = - 1 लेने पर हमें प्राप्त होता है

ab + (1) * b + a(- 1) + (1)(- 1) = ab + b - a - l

यह वही व्यंजक है जो हमें पूर्व में प्राप्त हुआ था।

? सर्वसमिका 1 का प्रयोग करके ज्ञात कीजिए कि गुणनफल में किस प्रकार परिवर्तन होता है जब

  1. (i) एक संख्या में 2 की कमी की जाती है और दूसरी संख्या में 3 की वृद्धि की जाती है।

  2. (ii) दोनों संख्याओं में से एक में 3 की कमी तथा दूसरी में 4 की कमी की जाती है।

? व्यवकलन (घटाव) को योग (जोड़) में परिवर्तन किए बिना गुणनफल ज्ञात कीजिए एवं उत्तरों की जाँच कीजिए।

इसे व्यापकीकृत करते हुए हम गुणनफल (a + u) (b-v) नीचे दिए अनुसार प्राप्त कर सकते हैं-

  1. (a + u) (b-v) = (a + u) b-(a + u) v

  2. = ab + ub - (av + uv)

  3. = ab + ub - aν – uν

जाँच कीजिए कि यह सर्वसमिका 1 में m = u और n = -v लेने के समान ही है।

सर्वसमिका 1 के अनुसार गुणनफल (a + u) (b-v), a + u के प्रत्येक पद (a और u) का b - v के प्रत्येक पद (b और -v) से गुणनफल का योग है। ध्यान दीजिए कि गुणनफल में पदों के चिह्न, पूर्णांक गुणनफल के सामान्य नियमों का उपयोग करके निर्धारित किए जा सकते हैं।

Screenshot 2026-03-24 155223

अब आप समझ गए होंगे कि पूर्णांक गुणन के नियम किस प्रकार हमें एक ही सर्वसमिका का उपयोग करके विभिन्न प्रश्नों को हल करने में सहायक सिद्ध होते हैं!


? विस्तार कीजिए (i) (a-u) (b + v), (ii) (a – u) (b - v)

हमें प्राप्त होता है-
  1. (a-u) (b + v) = ab - ub + av - uv और

  2. (a-u) (b-v) = ab - ub – av + uv

वितरण गुणधर्म एक कोष्ठक के भीतर दो पदों तक सीमित नहीं है।

? उदाहरण 1 (3a)/2 (a - b + 1/5)को विस्तारित रूप में लिखिए।

3a/2 (a – b + 1/5) = (3a/2 × a ) – (3a/2 × b) + (3a/2 × 1/5)

इन पदों को नीचे दिए गए अनुसार इस प्रकार सरलीकृत किया जा सकता है

3a/2 × a =3/2 × (a × a)

घातांक संकेतन का उपयोग करके हम लिख सकते हैं-
  1. 3/2 × (a × a ) = 3/2 a2

  2. 3a/2 × b =3/2 × (a × b) = 3/2 ab

  3. 3a/2 × 1/5= (3/2× 1/5) a = 3/10a

? क्या किन्हीं भी दो पदों का योग करके एकल पद प्राप्त किया जा सकता है?

उदाहरण के लिए क्या 3/2a² और 3/10 a का योग करके एकल पद प्राप्त किया जा सकता है?

हम देखते हैं कि दोनों पदों की चर संख्याएँ पूर्णतया समान न होने से उन्हें एक ही पद में सरलीकृत नहीं किया जा सकता है। अतः व्यंजक का और अधिक सरलीकरण करना संभव नहीं है।

स्मरण कीजिए कि समान चर संख्या वाले पदों को समान पद कहते हैं।

? उदाहरण 2 — (a + b) (a + b) का - विस्तार कीजिए।

यहाँ (a + b) (a + b) = (a + b) a + (a + b) b = a × a + b × a + ab + b × b

  1. = a²+ ba + ab + b²

चूँकि ba = ab हमारे पास समान चर संख्या ab वाले दो पद हैं (अथवा जो समान पद हैं) अतः उन्हें जोड़ा जा सकता है-

  1. ba + ab = ab + ab = 2ab

अतः हमें प्राप्त होता है-

(a + b)(a + b) = a² + 2ab + b²

? उदाहरण 3 - (a + b) (a²+2ab+b²) का विस्तार कीजिए।

(a+b) (a²+2ab+b²) = (a+b) a² + (a + b) * 2ab + (a + b) c

= (a * a²) + b * a² + (a * 2ab) + (b * 2ab) + ab²+ (b * b²)

इन पदों को नीचे दिए गए प्रकार से सरलीकृत किया जा सकता है

a * a² = a³ (क्यों?) ba² = a²b

अतः (a + b)(a² + 2ab + b²) = a³ + a²b + 2a²b + 2ab² + ab² + b³

हम देखते हैं कि a²b और 2a²b में समान चर संख्याएँ (या समान पद) हैं। अतः इन्हें जोड़ा जा सकता है-

a²b + 2a²b = (1 + 2)a²b = 3a²b

इसी प्रकार ab² और 2ab² समान पद हैं अतः इन्हें जोड़ा जा सकता है-

ab² + 2ab² = (1 + 2)ab² = 3ab²

हमें प्राप्त होता है-

(a + b)(a² + 2ab + b²) = a³ + 3a²b + 3ab² + b³

इतिहास की एक झलक

अनेक प्राचीन सभ्यताओं विशेषकर प्राचीन मिस्र, मेसोपोटामिया, यूनान, चीन और भारत में गणितज्ञों की गणनाओं में योग पर गुणन का वितरण गुणधर्म अंतर्निहित था। उदाहरण के लिए गणितज्ञ यूक्लिड (ज्यामितीय रूप में) और आर्यभट्ट (बीजगणितीय रूप में) ने अपने गणितीय और वैज्ञानिक कार्यों में वितरण नियम का एक अंतर्निहित विधि से व्यापक रूप में उपयोग किया। वितरण गुणधर्म का स्पष्ट कथन सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त ने अपनी रचना ब्राह्मस्फुटसिद्धांत (श्लोक 12.55) में दिया था। इसमें उन्होंने गुणन के लिए इस गुणधर्म के उपयोग को 'खंड गुणनम' (भागों से गुणा) कहा था। उनके श्लोक में कहा गया- "गणक को दो या दो से अधिक भागों में विभाजित किया जाता है जिनका योग इसके समान होता है; गुण्य (multiplicand) को इनमें से प्रत्येक से गुणा किया जाता है और परिणामों को जोड़ा जाता है।" अर्थात यदि दो भाग हैं तो अक्षर प्रतीकों का उपयोग करने पर यह सर्वसमिका (a + b) c = ac + bc के समान है। आगामी श्लोक (श्लोक 12.56) में ब्रह्मगुप्त इस वितरण गुणधर्म का उपयोग करके शीघ्र गुणन करने की विधि का वर्णन करते हैं जिसका विस्तारपूर्वक अध्ययन हम अगले भाग में करेंगे।

? आइए, पता लगाएँ

1. निम्नांकित गुणन जाल का अवलोकन कीजिए। जाल के अंतर्गत दी गई प्रत्येक संख्या दो संख्याओं के गुणन से बनी है। यदि 3 × 3 फ्रेम की मध्य संख्या व्यंजक pq द्वारा दर्शाई गई है जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है तो जाल में अन्य संख्याओं के लिए व्यंजक लिखिए।

Screenshot 2026-03-23 153613 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा 2. निम्नलिखित गुणनफलों का विस्तार कीजिए। (i) (3 + u)(v - 3) (ii) 2/3 * (15 + 6a) (iii) (10a + b)(10c + d) (iv) (3 - x)(x - 6) (v) (- 5a + b)(c + d) (vi) (5 + z)(y + 9)

3. ऐसे तीन उदाहरण दीजिए जिनमें दो सख्याओं में से एक संख्या में 2 की वृद्धि की जाए और दूसरी संख्या में 4 की कमी की जाए तो भी उनके गुणनफल अपरिवर्तित रहें।

4. विस्तार कीजिए (i) (a + ab - 3b²)(4 + b) और (ii) (4y + 7)(y + 11z - 3)

5.विस्तार कीजिए (i) (a−b) (a+b) (ii) (a - b)(a² + ab + b²) और

(iii) (a - b)(a³ + a²b + ab² + b³) क्या इनमें आपको कोई प्रतिरूप दिखाई देता है? आपको दिखाई देने वाले प्रतिरूप में अगली सर्वसमिका क्या होगी? क्या आप इसकी जाँच सर्वसमिका को विस्तारित करके कर सकते हैं?

वितरण गुणधर्म के प्रयोग से शीघ्र गुणन

वितरण गुणधर्म का उपयोग विशिष्ट प्रकार की संख्याओं के गुणा के लिए शीघ्र गुणन विधियाँ विकसित करने के लिए किया जा सकता है।

जब गुणा की जाने वाली संख्याओं में से एक संख्या 11, 101, 1001............. है।

? किसी संख्या को 11 से गुणा करने पर एक ही चरण में गुणनफल ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित गुणन का उपयोग कीजिए।

(i) 3874 × 11 (ii) 5678 × 11

आइए, पहला गुणन करते हैं

3874 * 11 = 3874(10 + 1) = 38740 + 3874

Screenshot 2026-03-25 103005

ध्यान दीजिए कि अंक किस प्रकार जोड़े जा रहे हैं।

आइए, एक 4 अंकीय संख्या dcba लेते हैं। इसमें हजार के स्थान पर d, सैकड़ा के स्थान पर c, दहाई के स्थान पर 6 और इकाई के स्थान पर a है।

dcba (10+1)=dcba × 10+ dcba

Screenshot 2026-03-23 153659

गुणनफल को एक पंक्ति में प्राप्त करने में इसका प्रयोग किया जा सकता है।

Screenshot 2026-03-25 103207

? किसी संख्या (कितने भी अंकों की कोई संख्या) को 11 से गुणा करने का सामान्य नियम बताइए तथा गुणनफल को एक पंक्ति में लिखिए।

गणना कीजिए- (i) 94 * 11 (ii) 495 * 11 (iii) 3279 * 11 (iv) 4791256 * 11

? किसी संख्या को 101 से गुणा करने के लिए भी क्या हम ऐसा ही नियम बना सकते हैं?

? 3874 को 101 से गुणा कीजिए।

आइए, एक 4 अंकीय संख्या dcba लेते हैं।

dcba × 101 = dcba×(100+1) = dcba × 100+ dcba

Screenshot 2026-03-25 103653

? उपर्युक्त व्यंजक का प्रयोग 3874 * 101 का मान (गुणनफल) एक पंक्ति में ज्ञात करने के लिए कीजिए।

? किसी संख्या को 101 से एक ही पंक्ति में गुणा करने और गुणनफल को लिखने का सामान्य नियम क्या हो सकता है? 1001, 10001, ........ से गुणा करने के लिए इस नियम का विस्तार कीजिए।

? उपर्युक्त नियम का प्रयोग करके निम्नलिखित का गुणनफल ज्ञात कीजिए।

(i) 89 * 101 (ii) 949 * 101 (iii) 265831 * 1001 (iv) 1111 * 1001 (v) 9734 * 99 (vi) 23478 * 999

दो संख्याओं को सरलता से गुणा करने के लिए वितरण गुणधर्म लागू करने की ऐसी विधियों पर ब्रह्मगुप्त (628 सामान्य संवत्), श्रीधराचार्य (750 सामान्य संवत्) और भास्कराचार्य (लीलावती, 1150 सामान्य संवत्) के प्राचीन गणितीय ग्रंथों में विस्तार से चर्चा की गई है। ब्रह्मगुप्त ने अपने ग्रंथ ब्राह्मस्फुटसिद्धांत (श्लोक 12.56) में वितरण गुणधर्म का उपयोग करके शीघ्र गुणन के लिए ऐसी विधियों को इष्टगुणन कहा है।

6.2 वितरण गुणधर्म की विशेष स्थितियाँ

दो संख्याओं के योग या अंतर का वर्ग

? 60 इकाई भुजा वाले एक वर्ग का क्षेत्रफल 3600 वर्ग इकाई (60² ) है और 5 इकाई भुजा वाले एक वर्ग का क्षेत्रफल 25 वर्ग इकाई (5 ²) है। क्या हम इसका उपयोग करके 65 इकाई भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं?

आकृति में दर्शाए अनुसार 65 इकाई भुजा वाले वर्ग को 4 भागों में विभाजित किया जा सकता है जिसमें 60 इकाई भुजा वाला वर्ग, 5 इकाई भुजा वाला वर्ग और 60 एवं 5 इकाई भुजा वाले दो आयत हैं। 65 इकाई भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल उस वर्ग के सभी घटकों के क्षेत्रफलों का योग है। दी गई आकृति में क्या आप चारों भागों का क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं?

हमें प्राप्त होता है -

65² = (60 + 5)² = 60² + 5² + 2(60 * 5)

= 3600 + 25 + 600 = 4225 वर्ग इकाई

Screenshot 2026-03-25 104659

वितरण गुणधर्म का उपयोग करके (60 + 5)(60 + 5) को गुणा कीजिए।

(60 + 5)(60 + 5) = 60 * 60 + 5 * 60 + 60 * 5 + 5 * 5

= 60²+ 2(60 * 5) + 5²

? यदि हम 65² को (30 + 35) ² या (52 + 13) ² लिखें तब क्या होगा? आकृतियाँ बनाइए और प्राप्त क्षेत्रफल की जाँच कीजिए।

आइए, दो संख्याओं के योग का वर्ग (a + b)² के लिए सामान्य व्यंजक देखते हैं।

वितरण गुणधर्म का उपयोग करते हुए (a + b² को इस प्रकार विस्तारित कर सकते हैं-

Screenshot 2026-03-25 105339 Screenshot 2026-03-25 105415

= a² + 2ab + b²

इसे हम उदाहरण 2 में पहले ही देख चुके हैं।

सर्वसमिका 1A (a + b)² = a² + 2ab + b²

? यदि a और b कोई दो पूर्णांक हैं तो क्या (a + b)² का मान a² + b² से सदैव बड़ा ही होगा?

यदि नहीं तो यह कब बड़ा होगा?

? 104² , 37² का मान ज्ञात करने के लिए सर्वसमिका 1A का उपयोग कीजिए।

(संकेत - 104 और 37 को उन संख्याओं के योग या अंतर में विघटित कीजिए जिनके वर्गों की गणना करना सरल हो।

? सर्वसमिका 1A का उपयोग करके निम्नलिखित के लिए व्यंजक लिखिए?

(i) (m + 3)² (ii) (6 + p)²

? (6x + 5²) का विस्तारित रूप लिखिए।

वितरण गुणधर्म का प्रयोग सर्वसमिका का प्रयोग

(6x + 5)²= (6x + 5)(6x + 5)

= (6x * 6x) + (5 * 6x) + (6x * 5) + 5 * 5

= (6x)² + 2(6x * 5) + 5²

= 36x² + 60x + 25

(6x + 5)² = (6x)²+ 5² + 2(6x * 5)

= 36x ² + 25 + 60x



यदि आपको सामान्य नियम का स्मरण रखने अथवा उसका उपयोग करने में कठिनाई होती है तो ऐसी स्थिति में आप गुणा करने के लिए वितरण गुणधर्म का उपयोग कर सकते हैं और वांछित परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

? सर्वसमिका और वितरण गुणधर्म दोनों का उपयोग करके (3j + 2k)² को विस्तारित कीजिए।

? क्या हम 60² (=3600) और 5 ² (=25) का उपयोग करके (60 - 5) ² अथवा 55² का मान ज्ञात कर सकते हैं? आइए, इसे ज्यामिति के माध्यम से एक 60 इकाई भुजा वाले वर्ग के अंतर्गत 55 इकाई भुजा के वर्ग को बनाकर हल करने का प्रयास करते हैं।

55 इकाई भुजा के वर्ग का क्षेत्रफल (60 - 5) ² = 55 ² है।

60 इकाई भुजा वाले वर्ग के क्षेत्रफल में से 60 और 5 इकाई भुजा वाले दो आयतों के क्षेत्रफलों को घटाकर हम 55 इकाई भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं जो 60² - (60 * 5) - (5 * 60) है। ऐसा करने पर हम 5 इकाई भुजा वाले छोटे वर्ग के क्षेत्रफल को दो बार घटा देते हैं। वास्तविक क्षेत्रफल प्राप्त करने के लिए हम इस व्यंजक का क्या उपयोग कर सकते हैं।

हम इस व्यंजक में 5 इकाई भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल पुनः जोड़ सकते हैं। इस प्रकार हम इस क्षेत्रफल को केवल एक बार घटाएँगे।

अतः

(60 - 5)² = 60² - (60 * 5) - (5 * 60) + 5 ²

  1. = 3600-300-300+25

  2. = 3025

55 इकाई भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल 3025 वर्ग इकाई है।

हमने देखा कि (a + b)² का विस्तार करने पर हमें क्या प्राप्त होता है। (a – b)² का विस्तारित रूप क्या है?

वितरण गणधर्म का उपयोग करने पर

(ab)²= (a - b) x (a−b)

= (a)²-ba-ab + (b)²

= a²-2ab+b²

? (a - b)² का विस्तार ज्ञात करने के लिए हम (a + b)² के विस्तार का उपयोग भी कर सकते हैं। विचार कीजिए कि कैसे?

संकेत - (a - b)² = (a + (- b))²

अब हम प्रत्यक्ष रूप से (a + b)² के विस्तार का उपयोग कर सकते हैं।

( a + (- b)² = (a)² + (- b)² + 2(a)(- b)

सर्वसमिका 1B (a - b)²= a²+ b² - 2ab

? ज्यामिति का उपयोग करके 55² की भाँति (a - b)² का विस्तारित रूप लिखिए।

? सर्वसमिका (a - b)² का उपयोग करके (a) 99² और (b) 58² का मान ज्ञात कीजिए।

? सर्वसमिका 1B और वितरण गुणधर्म दोनों का उपयोग करके निम्नलिखित का विस्तार कीजिए।

(i) (b-6)² (ii) (- 2a + 3)² (iii) (7y-3/4z)²

जाँच प्रतिरूप

प्रतिरूप 1

निम्नलिखित प्रतिरूप को देखिए।

  1. 2 (2²+ 1²) = 3² + 1²

  2. 2 (3² + 1²) = 4² + 2²

  3. 2 (6² + 5²) = 11² + 1²

  4. 2(5² + 3² ) = 8² + 2²

? प्राकृत संख्याओं का एक युग्म लीजिए। इनके वर्गों का योगफल ज्ञात कीजिए। क्या आप इस योग को दो वर्गों के योग के रूप में लिख सकते हैं?

इसे अन्य संख्याओं के युग्मों के साथ ज्ञात करने का प्रयास कीजिए। क्या आपने किसी प्रतिरूप का पता लगाया?

ध्यान दीजिए - 2 (5 ² + 6²) = (6 + 5) ² + (6 - 5) ²

? क्या नीचे दी गई सर्वसमिकाएँ उपर्युक्त प्रतिरूप को समझाने में सहायक हैं?

  1. (a + b)² = a² + 2ab + b²

  2. (a - b)² = a² - 2ab + b²

  3. (a + b)² + (a - b)²= (a² + 2ab + b²) + (a² - 2ab + b²)

समान पदों को जोड़ने पर a² + a² = 2a², b² + b² = 2b² और 2ab - 2ab = 0

हमें प्राप्त होता है-

2(a² + b²) = (a + b)² + (a - b)²

प्रतिरूप 2

? यहाँ एक संबंधित प्रतिरूप दिया गया है। बीजगणित का उपयोग करके इस प्रतिरूप की व्याख्या करने का प्रयास यह निर्धारित करने के लिए कीजिए कि क्या यह प्रतिरूप सदैव लागू होता है?

  1. 9 × 9 – 1 × 1= 10 × 8

  2. 8 × 8 – 6 × 6 = 14 × 2

  3. 7 × 7 – 2 × 2 = 9 × 5

  4. 10 × 10 – 4 × 4 = 14 × 6

यहाँ पर प्रतिरूप a² - b² = (a + b)(a - b) प्रतीत होता है।

क्या यह एक वास्तविक सर्वसमिका है? वितरण गुणधर्म का उपयोग करने पर हमें प्राप्त होता है-

(a + b)(a - b) = a² - ab + ba - a²

समान पदों को जोड़ने पर हम देखते हैं - ab + (- ab) = 0

सर्वसमिका 1C (a + b)(a - b) = a² - b²

आप यह सर्वसमिका पूर्व में ही 'आइए, पता लगाएँ 5 (i)' में देख चुके थे।

? सर्वसमिका 1C का उपयोग करके 98 × 102 और 45 × 55 की गणना कीजिए।

? ज्यामितीय रूप से दर्शाइए कि (a + b)(a - b) = a² - b² है।

Screenshot 2026-03-25 120359

श्रीधराचार्य (750 सामान्य संवत्) ने सर्वसमिका 1C का उपयोग करके संख्याओं के वर्गों की गणना शीघ्रता से करने की एक रोचक विधि दी है। इस सर्वसमिका के निम्नलिखित संशोधित रूप पर विचार कीजिए-

a² = (a + b)(a - b) + b²

? यह सर्वसमिका सत्य क्यों है?

अब, उदाहरण के लिए a = 31 और b = 1 लेकर 31² ज्ञात किया जा सकता है।

  1. 31² = (31 + 1)(31 - 1) + 1²

  2. = 32 × 30 + 1

  3. = 961

a = 197 और b = 3 लेकर 197 ² ज्ञात किया जा सकता है।

  1. 197² = (197 + 3)(197 - 3) + 3²

  2. = 200 * 194 + 9

  3. = 38809

? आइए, पता लगाएँ

1. कौन-सा व्यंजक बड़ा है- (a - b)² अथवा (b - a)² ? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

2. 100 को दो वर्गों के अंतर के रूप में व्यक्त कीजिए।

3. अब तक सीखी गई सर्वसमिकाओं का उपयोग करके 406 ² ,72 ², 145², 1097² और 124² का मान ज्ञात कीजिए।

4. क्या प्रतिरूप 1 और 2 केवल गणन की संख्याओं के लिए ही मान्य हैं? क्या ये ऋणात्मक पूर्णांकों के लिए भी लागू होते हैं? भिन्नों के विषय में इन प्रतिरूपों के लिए क्या कहा जा सकता है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

6.3 त्रुटि को पहचान कर सुधारिए

निम्नलिखित कुछ बीजीय व्यंजकों को उनके सरलतम रूपों में विस्तारित और सरलीकृत किया गया है।

  1. (i) प्रत्येक सरलीकरण की जाँच कीजिए और देखिए कि क्या कोई त्रुटि है?

  2. (ii) यदि कोई त्रुटि है तो व्याख्या कीजिए कि क्या त्रुटि हुई है।

  3. (iii) इसके पश्चात सही व्यंजक लिखिए।
Screenshot 2026-03-25 121558

6.4 इस ओर या उस ओर, सभी रास्ते खाड़ी की ओर

नीचे दी गई आकृति में प्रतिरूप का अवलोकन कीजिए। इस आकृति में क्रम में आने वाली अगली आकृति बनाइए। इसमें कितने वृत्त हैं? दसवें चरण में आकृति में कुल कितने वृत्त होंगे? चरण k में प्राप्त आकृति में वृत्तों की संख्या के लिए व्यंजक लिखिए।

Screenshot 2026-03-25 121712

इस प्रतिरूप की व्याख्या करने की अनेक विधियाँ हैं। आगे कुछ संभावनाएँ दी गई हैं-

Screenshot 2026-03-25 121801 Screenshot 2026-03-25 121829

क्या आपकी विधि इनमें से किसी विधि के समान है अथवा यह भिन्न है? हमारे द्वारा पहचाना गया प्रत्येक व्यंजक भिन्न प्रतीत होता है परंतु क्या वे वास्तव में भिन्न हैं? चूँकि वे एक ही प्रतिरूप का वर्णन करते हैं अतः वे सभी समान होने चाहिए। आइए, प्रत्येक व्यंजक को हल करें और ज्ञात करें।

Screenshot 2026-03-25 121953

सही प्रकार से हल करने पर सभी विधियों से एक समान k² + 2k उत्तर प्राप्त होता है। व्यंजक k² + 2k इस प्रतिरूप के चरण पर वृत्तों की संख्या को दर्शाता है।

गणित में किसी भी प्रतिरूप के अवलोकन के प्रायः अनेक प्रकार होते हैं और एक ही समस्या को समझने और हल करने के भी विभिन्न प्रकार होते हैं। ऐसी विधियाँ खोजने के लिए प्रायः अधिक रचनात्मकता और कल्पनाशीलता की आवश्यकता होती है। यद्यपि इनमें से एक या दो प्रकार ही आपके लिए रुचिपूर्ण हो सकते हैं परंतु अन्य प्रकारों को खोजना भी मनोरंजक और ज्ञानवर्धक हो सकता है।

? चरण 15 में वृत्तों की संख्या ज्ञात करने के लिए उपर्युक्त सूत्र का उपयोग कीजिए।

? नीचे दिए गए चित्र में वर्गाकार टाइल्स से बने प्रतिरूप पर विचार कीजिए।

Screenshot 2026-03-25 122402

? प्रत्येक आकृति में कितनी वर्गाकार टाइल्स हैं?

? अनुक्रम के चरण 4 में कितनी वर्गाकार टाइल्स हैं? दसवें चरण में कितनी वर्गाकार टाइल्स हैं?

? चरण n में टाइल्स की संख्या के लिए एक बीजीय व्यंजक लिखिए। अपनी विधियाँ कक्षा में साझा कीजिए। क्या आप उत्तर प्राप्त करने की एक से अधिक विधियाँ खोज सकते हैं?

? नीचे दी गई आकृति में छायांकित (आंतरिक) भाग का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। सभी 4 आयतों की विमाएँ समान हैं।

Screenshot 2026-03-25 123024 तडांग की विधि

कुल क्षेत्र एक वर्ग है जिसकी भुजा (m + n) है और जिसका क्षेत्रफल (m + n)² है।

कुल क्षेत्रफल में से 4 आयतों का क्षेत्रफल घटाने पर आंतरिक छायांकित क्षेत्र का क्षेत्रफल प्राप्त होगा जो (m + n)² - 4mn है। Screenshot 2026-03-25 123050 युसुफ की विधि

छायांकित क्षेत्र एक वर्ग है जिसकी भुजा की लंबाई (n - m) है। अतः इसका क्षेत्रफल (n - m)² है।

? दोनों व्यंजकों का विस्तार करके जाँच कीजिए कि

(m + n)² - 4mn = (n - m)² है।

? आकृति में तिरछी रेखाओं वाले भाग का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। यहाँ तीनों आयतों की भुजाएँ समान हैं (चित्र 1)।

Screenshot 2026-03-25 123342 अनुषा की विधि
  1. आवश्यक क्षेत्रफल = क्षेत्रफल (ABCD) - क्षेत्रफल (EFGH)

  2. ABCD का क्षेत्रफल = x²

  3. EFGH का क्षेत्रफल = xy

  4. आवश्यक क्षेत्रफल = x²- xy
Screenshot 2026-03-25 123613 वैष्णवी की विधि
  1. QS = y + x + y

  2. = x +2y

  3. PQSR का क्षेत्रफल = x (x + 2y)
आवश्यक क्षेत्रफल = PQSR का क्षेत्रफल- (तीनों आयतों का क्षेत्रफल)
  1. = x(x + 2y) - 3xy
Screenshot 2026-03-25 124036 आदित्य की विधि

आवश्यक क्षेत्रफल JKLM के क्षेत्रफल का 2 गुना है।

  1. JK = x – y/2 , KM = x

क्षेत्रफल (JKML)= x((x - y)/2))

आवश्यक का क्षेत्रफल = 2 × JKML का क्षेेत्रफल

= 2x [(x – y)/2] = x (x – y)

? व्यंजकों को विस्तारित करके सत्यापित कीजिए कि तीनों व्यंजक समतुल्य हैं। यदि x = 8 और y = 3 हों तो छायांकित भाग का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।

? दी गई आकृति में असतत रेखा अथवा बिंदीदार रेखा से घिरे भाग के क्षेत्रफल के लिए व्यंजक लिखिए। उत्तर प्राप्त करने के लिए एक से अधिक विधियों का उपयोग कीजिए। p = 6 r = 3.5 और s = 9 प्रतिस्थापित करके क्षेत्रफल की गणना कीजिए।

Screenshot 2026-03-25 134354

? आइए, पता लगाएँ

1. सुझाई गई सर्वसमिका का उपयोग करके गुणनफलों की गणना कीजिए।

  1. (i) 46² का मान, (a + b)² के लिए सर्वसमिका 1A का उपयोग करते हुए

  2. (ii) 397 * 403 का मान, (a + b)(a - b) के लिए सर्वसमिका 1C का उपयोग करते हुए

  3. (iii) 91² का मान, (a - b)² के लिए सर्वसमिका 1B का उपयोग करते हुए

  4. (iv) 43 * 45 का मान, (a + b)(a - b) के लिए सर्वसमिका 1C का उपयोग करते हुए

2. निम्नलिखित प्रत्येक गुणनफल को ज्ञात करने के लिए उपयुक्त सर्वसमिका अथवा वितरण गुणधर्म का उपयोग कीजिए।

  1. (i) (p - 1)(p + 11)

  2. (ii) (3a - 9b)(3a + 9b)

  3. (iii) - (2y + 5)(3y + 4)

  4. (iv) (6x + 5y)²

  5. (v) (2x - 1/2)²

  6. (vi) (7p)(3r)(p + 2)

3. प्रत्येक कथन के लिए उपयुक्त बीजीय व्यंजक या व्यंजकोंकी पहचान कीजिए।

  1. (i) एक वर्ग संख्या से दो अधिक व्यंजक
2 + s      (s + 2)²      s² + 2       s² + 4     2s²       2²s    
  1. (ii) दो क्रमागत संख्या के वर्गों का योग
m² + n²      (m + n)²      m² + 1        m² + (m + 1²)      m² + (m - 1)²       (m + (m + 1))²      (2m)² + (2m + 1)²     

4. किसी कालदर्शक में संख्याओं के 2 गुणा 2 वर्ग पर विचार कीजिए जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

Screenshot 2026-03-25 140450

प्रत्येक विकर्ण पर स्थित संख्याओं के गुणनफल ज्ञात कीजिए - 4 * 12 = 48 , 5 * 11 = 55 ऐसा ही अन्य 2 गुणा 2 वर्गों के लिए कीजिए। विकर्णों के गुणनफल के विषय में आप क्या अवलोकित करते हैं? समझाइए कि ऐसा क्यों होता है।

संकेत – प्रत्येक 2 गुणा 2 वर्ग में संख्याओं को इस प्रकार नामांकित कीजिए।

a (a+1)
a+7 (a+8)

5. सत्यापित कीजिए कि निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं।

  1. (i) (K + 1)(K + 2) - (K + 3) का मान सदैव 2 होता है।

  2. (ii) (2q + 1)(2q - 3) का मान 4 का गुणज है।

  3. (iii) सम संख्याओं के वर्ग 4 के गुणज होते हैं और विषम संख्याओं के वर्ग 8 के गुणजों से 1 अधिक होते हैं।

  4. (iv) (6n + 2)² - (4n + 3)² का मान एक वर्ग संख्या से 5 कम होता है।

6. एक संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है और दूसरी संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 5 प्राप्त होता है। इनके योग, अंतर और गुणनफल को 7 से भाग देने पर शेषफल क्या प्राप्त होगा?

7. तीन क्रमागत संख्याओं का चयन कीजिए। मध्य वाली संख्या का वर्ग कीजिए और शेष दो संख्याओं के गुणनफल को घटाइए। यही प्रक्रिया अन्य संख्याओं के समूहों के साथ भी दोहराइए। आपको कौन-सा प्रतिरूप दिखाई देता है? इसे बीजगणितीय समीकरण के रूप में किस प्रकार लिखेंगे? समीकरण के दोनों पक्षों का विस्तार करके जाँच कीजिए कि यह एक सही सर्वसमिका है।

8. निम्नलिखित चरणों को दर्शाने वाला बीजीय व्यंजक क्या है?

किन्हीं दो संख्याओं को जोड़िए। इस योगफल को दोनों संख्याओं के योगफल के आधे से गुणा कीजिए। सिद्ध कीजिए कि यह परिणाम दोनों सख्याओं के योग के वर्ग का आधा होगा।

9. कौन-सा व्यंजक बड़ा है? गुणनफल की पूर्ण गणना किए बिना ज्ञात कीजिए।

  1. (i) 14 * 26 या 16 * 24

  2. (ii) 25 * 75 या 26 * 74

10. धौली में एक छोटा पार्क बनाया जा रहा है। इसकी योजना चित्र में दर्शाई गई है। दो वर्गाकार भूखंडों में जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल g ^ 2 वर्ग फुट है, जहाँ हरियाली होगी। शेष संपूर्ण क्षेत्र (w फुट चौड़ा) एक पैदल मार्ग है जिस पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र के लिए एक व्यंजक लिखिए जिस पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है।

11. नीचे दर्शाए गए प्रत्येक प्रतिरूप के लिए-

  1. (i) अनुक्रम में अगली आकृति बनाइए।

  2. (ii) चरण 10 में कितनी मूल इकाइयाँ होंगी?

  3. (iii) चरण y में मूल इकाइयों की संख्या का वर्णन करने के लिए एक व्यंजक लिखिए।
Screenshot 2026-03-25 141420

सारांश

• हमने वितरण गुणधर्म का विस्तार करके दो व्यंजकों जिनमें से प्रत्येक में दो पद हैं, का गुणनफल किया है। इसके लिए सामान्य समीकरण है
(a + b) × (c + d) ac + ad + bc + bd

• हमने उपर्युक्त सर्वसमिका के लिए कुछ विशेष स्थितियाँ देखी हैं।

  1. • (a + b²)= a² + 2ab + b²

  2. • (a - b)² = a² - 2ab + b²

  3. • (a + b)(a - b) = a² - b²

हमने विभिन्न प्रतिरूपों पर विचार किया और बीजगणित का उपयोग करके इन्हें किस प्रकार समझा जाए, इस पर अन्वेषण किया। हमने देखा कि प्रायः किसी समस्या को हल करने और एक ही सही उत्तर पर पहुँचने की कई विधियाँ होती हैं। एक ही समस्या को विभिन्न विधियों से हल करना एक रचनात्मक प्रक्रिया है।



पहेली का समय !
सिक्कों का एकत्रीकरण

नीचे बाईं ओर दी गई आकृति में दर्शाए अनुसार 10 सिक्कों को एक त्रिभुज में व्यवस्थित कीजिए। इसके पश्चात एक बार में एक सिक्के का स्थान परिवर्तित कर त्रिभुज को उल्टा (ऊपर से नीचे की ओर) करना है। इसके लिए कितनी चालें आवश्यक हैं? चालों की न्यूनतम संख्या क्या होगी?

3 सिक्कों के त्रिभुज को सिक्के की एक ही चाल से (ऊपर से नीचे) पलटा जा सकता है। और 6 सिक्कों के त्रिभुज को 2 सिक्कों के स्थान परिवर्तित करके पलटा जा सकता है।

Screenshot 2026-03-25 142615

10 सिक्कों वाले त्रिभुज को केवल 3 चालों में पलटा जा सकता है। क्या आपको पता चला कि यह कैसे हुआ? 15 सिक्कों वाले अगले बड़े त्रिभुज को पलटने के लिए न्यूनतम आवश्यक चालों का पता लगाइए। बड़ी त्रिभुजाकार संख्याओं के लिए भी यही प्रयास कीजिए।

क्या ऐसी किसी भी त्रिकोणीय व्यवस्था के लिए आवश्यक सिक्कों की चालों की न्यूनतम संख्या की गणना करने की कोई सरल विधि है?

Screenshot 2026-03-25 142714