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1. स्वदेेश

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं।
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।

जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

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जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥

जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥

उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।

है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।।
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।

वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
- गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
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कवि से परिचय

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(1883–1972)

'स्वदेश' कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' हिंदी के उन कवियों में से हैं जिन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना प्रारंभ कर खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ। उन्होंने स्वयं कहा, “सरकारी नौकरी के कारण 'सनेही' के अतिरिक्त मुझे दूसरा उपनाम 'त्रिशूल' रखना पड़ा।" राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के साथ-साथ उन्होंने किसान, मजदूर, सामाजिक कुरीतियों आदि विषयों पर प्रभावकारी कविताएँ लिखी हैं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र, कृषक क्रंदन इनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।


पाठ से

आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

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मेरी समझ से

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
    1. "वह हृदय नहीं है पत्थर है" इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-
      • सामाजिकता से
      • संवेदनहीनता से
      • कठोरता से
      • नैतिकता से
    2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
      • देश की प्रगति
      • देश के प्रति प्रेम
      • देश की सुरक्षा
      • देश की स्वतंत्रता
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    3. "हम हैं जिसके राजा-रानी" - इस पंक्ति में 'हम' शब्द किसके लिए आया है?
      • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
      • देश की शासन व्यवस्था के लिए
      • देश के समस्त नागरिकों के लिए
      • देश के सभी प्राणियों के लिए
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    4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
      • जिसमें साहस की कमी है
      • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
      • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
      • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
  2. हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
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    मिलकर करें मिलान

    कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

    क्रम स्तंभ 1 स्तंभ 2
    1. जिसने साहस को छोड़ दिया,
    वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
    1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
    2. जो जीवित जोश जगा न सका,
    उस जीवन में कुछ सार नहीं।
    2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
    3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
    जिस पर है दुनिया दीवानी।
    3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
    4. सब कुछ है अपने हाथों में,
    क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
    4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
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पंक्तियों पर चर्चा

कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

  1. "निश्चित है निस्संशय निश्चित,
    है जान एक दिन जाने को।
    है काल-दीप जलता हरदम,
    जल जाना है परवानों को।"
  2. "सब कुछ है अपने हाथों में,
    क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
    वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
    जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।"
  3. "जो भरा नहीं है भावों से,
    बहती जिसमें रस-धार नहीं।
    वह हृदय नहीं है पत्थर है,
    जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।"
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सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

  1. "हम हैं जिसके राजा-रानी" पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
  2. 'संसार-संग' चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति 'संसार-संग' नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
  3. "उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।" पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
  4. कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप 'देश-प्रेम' से क्या समझते हैं? बताइए।
  5. यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
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अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

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  1. "जिसने कि खजाने खोले हैं" अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
  2. "जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े" पंक्ति में 'उगे-बढ़े' किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
  3. "वह हृदय नहीं है पत्थर है" पंक्ति में 'हृदय' के लिए 'पत्थर' शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
  4. कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?
    (संकेत- पत्थर- जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।.)
  5. देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
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कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी।"
Image8 इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।

'दाना-पानी' और 'राजा-रानी' इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना' कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।

  1. शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
  2. कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
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आपकी कविता

देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-

Image9 वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
......................................
......................................
......................................

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भाषा की बात

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  1. शब्द से जुड़े शब्द

    नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'स्वदेश' से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए -

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    स्वदेश
  2. विराम चिह्नों को समझें

    Image11 "जो चल न सका संसार-संग"
    “बहती जिसमें रस-धार नहीं"
    “पाया जिसमें दाना-पानी"
    "हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
    "हम हैं जिसके राजा-रानी"
    “जिससे न जाति-उद्धार हुआ"

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    कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत- 'जो चल न सका संसार के संग')

  3. शब्द-मित्र

    "है जान एक दिन जाने को"
    "है काल-दीप जलता हरदम"
    उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में 'है' शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि 'है' का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
    'जान एक दिन जाने को है।’
    'काल-दीप हरदम जलता है।'

    • अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें 'है' शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।
    • अब नीचे दी गई पंक्तियों में 'है, हैं' शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।
    • "जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
      जिस पर है दुनिया दीवानी।"
  4. समानार्थी शब्द

    कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

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कविता का शीर्षक

"वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।"
इस कविता का शीर्षक है 'स्वदेश'। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

पाठ से आगे
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आपकी बात

  1. नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (v) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप 'स्वदेश प्रेम' की श्रेणी में रखना चाहेंगे?
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  3. अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
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हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।"

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देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।

आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?

  • विद्यार्थी       ..................................................................
  • अध्यापक    ..................................................................
  • कृषक        ..................................................................
  • चिकित्सक   ..................................................................
  • वैज्ञानिक     ..................................................................
  • श्रमिक        ..................................................................
  • पत्रकार       ..................................................................

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अपनी भाषा अपने गीत

  1. कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
  2. किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
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तिरंगा झंडा - कब प्रसन्न और कब उदास

राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।

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झरोखे से

आपने देश-प्रेम से संबंधित 'स्वदेश' कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े 'खादी' से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत' का एक अंश पढ़िए।

खादी गीत
खादी के धागे-धागे में
अपनेपन का अभिमान भरा,
माता का इसमें मान भरा,
अन्यायी का अपमान भरा;
खादी के रेशे-रेशे में
अपने भाई का प्यार भरा,
माँ-बहनों का सत्कार भरा,
बच्चों का मधुर दुलार भरा;
खादी की रजत चंद्रिका जब,
आकर तन पर मुस्काती है,
तब नवजीवन की नई ज्योति
अंतस्तल में जग जाती है;
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साझी समझ

आपने 'स्वदेश' कविता और ‘खादी गीत' का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत' पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।

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खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं-