3 एक आशीर्वाद
तेरे स्वप्न बड़े हों
भावना की गोद से उतरकर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
चांद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें
हँसें
मुसकराएँ
गाएँ
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
उँगली जलाएँ
अपने पाँवों पर खड़े हों।
जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों।
- दुष्यंत कुमार
लेखक से परिचय
दुष्यंत कुमार हिंदी के लोकप्रिय रचनाकारों में से एक हैं। इनका जन्म बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। बहुत कम समय में ही इन्होंने हिंदी साहित्य को विविधतापूर्ण रचनाओं एवं जीवंत भाषा से समृद्ध किया। साये में धूप इनका सर्वाधिक चर्चित गज़ल संग्रह है। इनका संपूर्ण रचना-संसार दुष्यंत कुमार रचनावली चार खंडों में प्रकाशित है।
आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
- निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर
भी हो सकते हैं।
- कविता में किसे संबोधित किया गया है?-
- युवा वर्ग को
- नागरिकों को
- बच्चों को
- श्रमिकों को
- तेरे स्वप्न बड़े हों" पंक्ति में 'स्वप्न' से क्या आशय है?
- कल्पना की उड़ान भरना
- आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना
- बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना
- बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
- "उँगली जलाएँ" पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है-
- चुनौतियों को स्वीकार करना
- प्रकाश का प्रसार करना
- अग्नि के ताप का अनुभव करना
- कष्टों से नहीं घबराना
- "अपने पाँवों पर खड़े हों" पंक्ति से क्या आशय है?
- अपने पैरों पर खड़े होना
- सफलता प्राप्त करना
- कठिनाइयों का सामना करना
- आत्मनिर्भर होना
- हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भों से मिलाइए।
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|---|
| 1. | भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें | विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना |
| 2. | हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ | सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें। कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें। |
| 3. | चांद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें | भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना |
| 4. | ... हँसें/मुसकराएँ/गाएँ | असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-
- "जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों” - "जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें"
- "चांद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें"
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
- कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?
- "हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ/ उँगली जलाएँ” पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने
के लिए ललक की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों?
(संकेत- योजना, प्रयास आदि) - कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?
- यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हों तो आप किसे और क्या आशीर्वाद देंगे और क्यों?
कविता की रचना
इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देंगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
सृजन
इस कविता के आरंभ में एक ही संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न'। इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे- चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है। आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए।

बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
कविता का शीर्षक
इस कविता का शीर्षक 'एक आशीर्वाद' है जो कविता में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति या शब्द चुनेंगे और क्यों?
भाषा की बात
- नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'स्वप्न' से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-
- कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए हैं। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ न देते हों-
| शब्द | अन्य शब्द | |||
|---|---|---|---|---|
पृथ्वी |
धरा | वसुधा | अवनि | सुता |
चाँद |
मधुकर | शशि | निशाकर | मयंक |
तारे |
नक्षत्र | सोम | तारक | उडुगण |
रोशनी |
प्रकाश | लालिमा | उजाला | आलोक |
स्वप्न |
सपना | इच्छा | यथार्थ | कल्पना |
दीया |
दीन | ज्योति | दीपक | प्रदीप |
आना-जाना
'आना' और 'जाना' दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। कक्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम 'आना' और दूसरे समूह का नाम 'जाना' होगा। अब अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।
डायरी
हँसें-मुसकराएँ-गाएँ
अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुस्कराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?
आपकी बात
- कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का आशीर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
- आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते हैं, उन्हें लिखिए।
सपनों की बातें
(क) आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक परची पर लिखें। परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी परची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए-
- किस तरह के प्रयत्न करने होंगे?
- किस तरह से योजना बनानी होगी?
- किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?
- लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?
हमारे सपने
आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को जानते-समझते हैं। वे उन्हें पूरा करने के लिए यथासंभव प्रयत्न करते हैं। अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपने और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं? नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए। आप इस तालिका को और बढ़ा सकते हैं।
| घर के सदस्यों के सपने | |
|---|---|
| माता | |
| पिता | |
| दादा | |
| दादी | |
| नाना | |
| नानी | |
| बहन | |
| भाई | |
सबके सपने
प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत-से लोग सहयोग देते हैं, जैसे-शाक विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी आदि। इनमें से किसी एक से साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते हैं? उनकी एक सूची भी बनाइए।
झरोखे से
आपने पढ़ा कि 'एक आशीर्वाद' कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। अब आप पढ़िए सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेरक उद्बोधन जिसमें वे न केवल सपने देखने की बात करते हैं, बल्कि सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रिया के विषय में भी बताते हैं-

सपनों की उड़ान
सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। अपने सपने पूरे करने के लिए आपको जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है। आज जितनी संभावनाएँ हैं, उतनी अब तक के समूचे इतिहास में पहले कभी नहीं थीं। इक्कीसवीं सदी ऐसे अनुभव पैदा कर रही है जिन्हें मानव के विकास की पिछली बीस शताब्दियों में असंभव समझा जाता था। ऐसे माहौल में जब प्रौद्योगिकी और नित नई खोजों के बल पर मानव सभ्यता तरक्की करती जा रही है, इंसान में छिपी संभावनाओं का भी तेजी से विस्तार होता जा रहा है। लेकिन इन अवसरों का अनुभव करने के लिए हमारे पास जो समय है वह उतना का उतना ही है और आज के युवा इसी दुविधा में हैं। युवा चाहते हैं कि उनके सामने जितने किस्म के अनुभव उपलब्ध हैं, वह सबका फायदा उठा सकें, जो कि उन्हें मिलना भी चाहिए लेकिन जैसे-जैसे दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे हमें खुद को कुछ खास विषयों के संकरे दायरे में सीमित कर लेना पड़ रहा है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करना सही है। मेरा सपना है कि संसार के हर युवा को संसार के वह सारे अनुभव मिल सकें जिसकी उन्हें चाह हो। लेकिन इसे कैसे संभव बनाया जा सकता है? इसे संभव बनाने के दो तरीके हैं। एक तो यह कि हम कुछ ऐसा करें कि हमारे पास जो समय उपलब्ध है उसे हम बढ़ा सकें। दूसरा यह कि हमारे पास जो समय है हम उतने ही समय में जितना काम कर सकते हैं, जितना कुछ हासिल कर सकते हैं उसकी मात्रा बढ़ा दें। इन दोनों जीवन-लक्ष्यों को कैसे प्राप्त किया जाए, यह समझ लेने से दूसरी हर चीज तक पहुँचने के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएँगे। यही वह लंबी छलांग है जिसका मानवता को अब तक इंतजार था और जो हमें विकास क्रम के अगले चरण तक पहुँचा सकती है।
- डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
साझी समझ
आपने 'एक आशीर्वाद' कविता पढ़ी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उपर्युक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
खोजबीन के लिए
कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष यात्रा के बारे में लिखा है। उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या-क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़िए।
