अध्याय-6
एक टोकरी भर मिट्टी
किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब यही उसकी पोती इस वृद्धावस्था में एकमात्र आधार थी। जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी और जब से उसने अपने श्रीमान् पड़ोसी की इच्छा का हाल सुना, तब से वह मृतप्राय हो गई थी। उस झोंपड़ी में उसका ऐसा कुछ मन लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए, तब वे अपनी ज़मींदारी चाल चलने लगे। बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया। बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी।
एक दिन श्रीमान् उस झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतने में वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान् ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहाँ से हटा दो। पर वह गिड़गिड़ाकर बोली, "महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।" ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा, "जब से यह झोंपड़ी छूटी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैंने बहुत कुछ समझाया, पर वह एक नहीं मानती। यही कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी। अब मैंने यह सोचा कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिट्टी ले जाऊँ!" श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। अपने आंतरिक दुख को किसी तरह सँभाल कर उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और हाथ से उठाकर बाहर ले आई। फिर हाथ जोड़कर श्रीमान् से प्रार्थना करने लगी कि, "महाराज, कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।" ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए। पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है। फिर तो उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा, पर जिस स्थान पर टोकरी रखी थी, वहाँ से वह एक हाथ भी ऊँची न हुई। वह लज्जित होकर कहने लगे कि, "नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।"
यह सुनकर वृद्धा ने कहा, "महाराज, नाराज न हों... आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।"
ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे पर वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
- माधवराव सप्रे
लेखक से परिचय
हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में 'एक टोकरी भर मिट्टी' का भी उल्लेख आता है। इसके लेखक माधवराव सप्रे हैं। ऐसा माना जाता है कि ये लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिंदी में आए थे। इनकी मातृभाषा मराठी थी। इनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था। इन्होंने लोकमान्य तिलक के चर्चित ग्रंथ गीता-रहस्य का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया था। स्वदेशी आंदोलन और बायकॉट इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।
'एक टोकरी भर मिट्टी' जैसी कहानियाँ केवल घटनाएँ नहीं सुनातीं, बल्कि मिट्टी से उठते हुए उन प्रश्नों को उठाती हैं जो हमारे सामाजिक ताने-बाने में गाँठ बनकर अटके हैं।
पाठ से
आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से चर्चा करें। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?- झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी
- झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी
- वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
- वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
(2) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
- क्रोध और झगड़ा करके
- अदालत से अनुमति लेकर
- विनती और नम्रता से
- चुपचाप उठाकर ले गई
- दया
- लगाव
- गुस्सा
- डर
- दुखद
- सुखद
- प्रेरणादायक
- सकारात्मक
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए।
| क्रम | वाक्य | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| 1 | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। |
• वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। • वृद्धावस्था में पोती का सहारा वृद्धा थी। |
| 2 | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। |
• ज़मींदार ने वकीलों से सलाह लेकर झोंपड़ी पर न्यायपूर्वक कब्जा किया। • ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया। |
| 3 | आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। |
• वृद्धा ने ज़मींदार को कमजोर साबित करने के लिए टोकरी उठाने को कहा। • वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4 | ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। |
• धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। • संपत्ति के घमंड को भूलकर ज़मींदार अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहे थे। |
| 5 | कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। |
• वृद्धा ने अपने व्यवहार पर पछताकर ज़मींदार से क्षमा माँगी। • अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी। |
| 6 | उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? |
• वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। • वृद्धा ने ज़मींदार की उम्र और शक्ति पर व्यंग्य करते हुए यह बात कही। |
| 7 | कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। |
• वृद्धा ने चतुराई से ज़मींदार को शर्मिंदा करने की योजना बनाई। • वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8 | उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। |
• झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। • झोंपड़ी में जाकर वृद्धा डर गई कि ज़मींदार उसे फिर से बाहर निकाल देगा और रोने लगी। |
(ख)अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।- (क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
- (ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
- (ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
- (घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा...” यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
- (ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
- (च) "उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।" ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?
अनुमान और कल्पना से
- (क) यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?
- (ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?
- (ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
- (घ) "झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है..."। यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेत - मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)
बदली कहानी
कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती-
- यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता
- यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता
- यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता
- यदि ज़मींदार एक स्त्री होती
- यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती
अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-| इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी | यहाँ “कि” एक संयोजक के रूप में प्रयोग हुआ है। संयोजक का अर्थ होता है मिलाने वाला। संयोजक शब्दों या वाक्यों को जोड़ने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। यह हमें बताता है — क्या कहा गया, क्या सोचा गया, क्या देखा गया आदि। |
| ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ बुढ़िया की झोंपड़ी थी | यहाँ “की” एक संबंधसूचक कारक शब्द है। इसका प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम का किसी अन्य शब्द के साथ संबंध बताने के लिए किया जाता है। अन्य संबंधकारक शब्द हैं — का और के। |
अब नीचे दिए गए वाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए-:
- 1.वृद्धा ने कहा .................वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
- 2.वह अपनी पोती ................. चिंता में दुखी हो गई थी।
- 3.वृद्धा ने प्रार्थना ................. टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।
- 4.पोती हमेशा कहती थी .................वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
- 5.झोंपड़ी................. मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
- 6.उसे विश्वास था ................. मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
- 7.वृद्धा .............. आँखों से आँसुओं ..............धारा बहने लगी।
- 8.उसने यह सोचा .............. झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
- 9.वृद्धा के मन .............. पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
- 10.ज़मींदार इतने लज्जित हुए .............. टोकरी उठाने की बात मान ली।
- 11.उस झोंपड़ी .............. हर दीवार वृद्धा .............. यादों से भरी थी।
मुहावरे
" बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।"
(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।
(ख) 'बाल' शब्द से जुड़े मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य:
- बाल बाँका न होना - कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना। पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।
- बाल बराबर - बहुत सूक्ष्म। बहुत महीन या पतला।
- बाल बराबर फर्क होना - ज़रा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अंतर होना।
- बाल-बाल बचना - कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।
काल
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए:
- (क) वह गिड़गिड़ाकर बोली।
- (ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
- (ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
- (घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
- (ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
वचन की पहचान
"उनके मन में कुछ दया आ गई।"
"उनकी आँखें खुल गईं।"
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्दों में क्या अंतर है और क्यों? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।
आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थ में अंतर आ जाता है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरिए-
- (क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर.................. । (गई/गईं)
- (ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर.................. । (बोली/बोलीं)
- (ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया ..................। (है/हैं)
- (घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी ..................। (थी/थीं)
- (ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले ।.................. (आई/आईं)
- (च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला.................. । (गई/गईं)
- (छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए.................. (है/हैं)
| विशेषता | कहानी से उदाहरण |
|---|---|
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली-कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | |
| 2. वर्णनात्मकता - लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठक दृश्य को देख सकता है।- | |
| 3. भावात्मकता - कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। | |
| 4. संवादात्मकता-पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | |
| 5. नाटकीयता -कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं| | |
| 6. चरित्र चित्रण- पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। |
शब्दकोश का उपयोग
आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए-
धनी, शोभायुक्त, शोभावान्, संपत्तिशाली, संपन्न, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द।| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थ |
|---|---|
| 1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए | |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | अविवाहित लड़की, एक राशि का नाम, लड़की, बड़ी इलायची। |
| 3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद, अंतःपुर, पत्नी, उतरने की जगह। |
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। । | काल, बहुत अधिक समय, सौभाग्य का समय, संसार, जगत, राज्यकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर, अतिकाल |
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा, आलंबन, पात्र (नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला। |
भावों की पहचान
"कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी..."
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए-
| क्रम पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| 1. वह लज्जित होकर कहने लगे- 'नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।' | ममता/स्नेह |
| 2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। | दुख/पीड़ा |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई। | विनम्रता/विनय |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | अहंकार/घमंड |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | बोध / आत्मज्ञान |
| 6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | आस्था/विश्वास |
| 7. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | जुड़ाव/मोह |
| 8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | करुणा/दया |
| 9. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | क्रूरता /अन्याय |
| 10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | लज्जा / पछतावा |
वाक्य विस्तार
'वृद्धा पहुँची।'
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं
'वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची।'
अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे- 'थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची।'
अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
- 1. एक झोंपड़ी थी।
- 2. श्रीमान् टहल रहे थे।
- 3. वह खाने लगेगी।
- 4. वृद्धा भीतर गई।
- 5. आगे बढ़े।
संवाद फोन पर
(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
(ख) कल्पना कीजिए कि ज़मींदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।
उदाहरण-
- मित्र - इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है?
- ज़मींदार • मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।
पोती की भावनाएँ
"मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।"
(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए-
2 मई - आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया...
पाठ से आगे
आपकी बात
- (क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
- (ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।
- (ग) कहानी में ज़मींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
- (घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
न्याय और समता
कहानी में आपने पढ़ा कि एक ज़मींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया।
- (क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।
- (ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
- (ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।" इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
घर-घर की कहानी
क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं।
अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए। कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।
न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता
"बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।"
कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
उदाहरण-- सार्वजनिक शिकायत सुविधा- भारत सरकार की इस वेबसाइट पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायतें कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
- जनसुनवाई - प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभकिया हुआ है। इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
- सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ- भारत सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है-
आज की पहेली
नीचे दिए गए अक्षरों से सार्थक शब्द बनाइए-
1. ट् क ई ओ=
टोकरी2. य् आ द =—————
3. ई ल व क् =————
4. झ् ओ ई प ड् अं =————
5. ज द् आ म् ई र अं =————
6. त् आ इ औ क ल् =————
खोजबीन के लिए
हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तकें आज भी उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है जो आज भी विश्व में मनोरंजन और ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से पढ़ी-पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।