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Chapter 12

भवानीप्रसाद मिश्र

1

भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ था। साहित्य के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में जिन कवियों की सक्रिय भागीदारी थी, उनमें ये प्रमुख हैं। उनकी मुख्य रचनाएँ-गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, कवितांतर, शतदल, गांधी- पंचशती, त्रिकाल संध्या आदि हैं। बुनी हुई रस्सी (कविता संग्रह) पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है।

भवानीप्रसाद मिश्र ने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में कार्य किया और सन् 1952-55 तक हैदराबाद से प्रकाशित हिंदी की लोकप्रिय साहित्यिक पत्रिका कल्पना का संपादन भी किया। सन् 1955-58 के बीच वे आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से संबद्ध रहे। उन्होंने संपूर्ण गांधी वाङ्मय का भी संपादन किया। सन् 1985 में उनका निधन हो गया।

भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में सक्रिय रूप से भाग लिया जिसके चलते ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तीन वर्ष के लिए कारावास का दंड दिया। 1942 के स्वाधीनता आंदोलन के समय जेल में रहते हुए ही उन्होंने 'घर की याद' कविता लिखी। परिवार की स्मृति ही इस कविता की केंद्रीय संवेदना है। कारावास के समय घर को याद करते हुए कवि की स्मृति में उनके परिजन एक-एक करके सम्मिलित होते चले जाते हैं। कवि सावन के बादल द्वारा परिवार को संदेश भेज रहा है और उससे आग्रह करता है कि वह उन्हें जेल के कष्टों के विषय में न बताए और सांत्वना दे।

आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा प्राण मन घिरता रहा है, रात-भर गिरता रहा है,

अब सबेरा हो गया है, कब सबेरा हो गया है, ठीक से मैंने न जाना, बहुत सोकर सिर्फ माना-

क्योंकि बादल की अँधेरी, है अभी तक भी घनेरी, अभी तक चुपचाप है सब, रातवाली छाप है सब,

गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर,

बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर कि मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो,

घर कि घर में चार भाई, मायके में बहिन आई, बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर!

मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें, काम में झंझा लरजता, बोल में बादल गरजता,

आज गीता-पाठ करके, दंड दो सौ साठ करके, खूब मुगदर हिला लेकर, मूठ उनकी मिला लेकर,

जब कि नीचे आए होंगे, नैन जल से छाए होंगे, हाय, पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है,

पिताजी ने कहा होगा, हाय, कितना सहा होगा, कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता, कहाँ हूँ,

गिर रहा है आज पानी, याद आता है भवानी, उसे थी बरसात प्यारी, रात दिन की झड़ी झारी,

खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह, बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता,

तुझे बतलाता कि बेला ने फलानी फूल झेला, तू कि उसके साथ जाती, आज इससे याद आती,

मैं न रोऊँगा -कहा होगा, और फिर पानी बहा होगा, दृश्य उसके बाद का रे, पाँचवें की याद का रे,,

भाई पागल, बहिन पागल, और अम्मा ठीक बादल, और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला,

शर्म से रो भी न पाएँ, खूब भीतर छटपटाएँ, आज ऐसा कुछ हुआ होगा आज सबका मन चुआ होगा।

तू जरा-सा दुख कितना, सह सकेगा क्या कि इतना, और इस पर बस नहीं है, बस बिना कुछ रस नहीं है,

हवा आई उड़ चला तू, लहर आई मुड़ चला तू, लगा झटका टूट बैठा, गिरा नीचे फूट बैठा,

तू कि प्रिय से दूर होकर, बह चला रे पूर होकर, दुख भर क्या पास तेरे, अश्रु सिंचित हास तेरे !

पिताजी का वेश मुझको, दे रहा है क्लेश मुझको, देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे,

एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए, एक हल्की चोट लग ले, दूध की नदी उमग ले,

एक टहनी कम न हो ले, कम कहाँ कि ख़म न हो ले, ध्यान कितना फिक्र कितनी, डाल जितनी जड़ें उतनी !

इस तरह का हाल उनका, इस तरह का ख्याल उनका, हवा, उनको धीर देना, यह नहीं जी चीर देना,

कह न देना मौन हूँ मैं, खुद न समझें कौन हूँ मैं, देखना कुछ बक न देना, उन्हें कोई शक न देना,

आज का दिन दिन नहीं है, क्योंकि इसका छिन नहीं है, एक छिन सौ बरस है रे, हाय कैसा तरस है रे,

घर कि घर में सब जुड़े हैं, सब कि इतने कब जुड़े हैं, चार भाई चार बहिनें भुजा भाई प्यार बहिनें,

और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी, माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर,

माँ कि जिसकी स्नेह-धारा का यहाँ तक भी पसारा, उसे लिखना नहीं आता, जो कि उसका पत्र पाता।

और पानी गिर रहा है, घर चतुर्दिक् घिर रहा है, पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर,

पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, जो अभी भी दौड़ जाएँ, जो अभी भी खिलखिलाएँ,

चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें, खेलते या खड़े होंगे, नजर उनको पड़े होंगे।

पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, रो पड़े होंगे बराबर, पाँचवें का नाम लेकर,

पाँचवाँ मैं हूँ अभागा, जिसे सोने पर सुहागा, पिताजी कहते रहे हैं, प्यार में बहते रहे हैं,

आज उनके स्वर्ण बेटे, लगे होंगे उन्हें हेटे, क्योंकि मैं उन पर सुहागा बँधा बैठा हूँ अभागा,

और माँ ने कहा होगा, दुख कितना बहा होगा आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी,

वह तुम्हारा मन समझकर, और अपनापन समझकर, गया है सो ठीक ही है यह तुम्हारी लीक ही है,

पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता, इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे,

अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है, एक-से बादल जमे हैं, गगन-भर फैले रमे हैं,

ढेर है उनका, न फाँकें, जो कि किरनें झुकें-झाँकें, लग रहे हैं वे मुझे यों, माँ कि आँगन लीप दे ज्यों;

गगन-आँगन की लुनाई दिशा के मन में समाई दश-दिशा चुपचाप है रे, स्वस्थ की लय छाप है रे

झाड़ आँखें बंद करके साँस सुस्थिर मंद करके, हिले बिन चुपके खड़े हैं, क्षितिज पर जैसे जड़े हैं

एक पंछी बोलता है, घाव उर के खोलता है, आदमी के उर बिचारे, किसलिए इतनी तृषा रे,

हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें,

मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है, किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है,

किंतु उनसे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना, उन्हें कहना लिख रहा उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ,

काम करता हूँ कि कहना, नाम करता हूँ कि कहना, चाहते हैं लोग, कहना मत करो कुछ शोक, कहना,

और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं, वजन सत्तर सेर मेरा, और भोजन ढेर मेरा,

कूदता हूँ, खेलता हूँ, दुख डटकर ठेलता हूँ, और कहना मस्त हूँ मैं, यों न कहना अस्त हूँ मैं,

हाय रे, ऐसा न कहना, है कि जो वैसा न कहना, कह न देना जागता आदमी से भागता

हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।

अभ्यास

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

  1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?
  2. (क) विदेश से मित्र के लिए

    (ख) यद्धभमि से जनता के लिए

    ( ग) जेल से परिवार के लिए

    (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए

  3. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
  4. (क) उत्साह और आवेग

    (ख) भय और क्रोध

    (ग) साहस और उमंग

    (घ) चिंता और बेचैनी

  5. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?
  6. (क) कमजोर और निष्क्रिय

    (ख) स्नेहमयी और दृढ़

    (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय

    (घ) सरल और उदासीन

  7. "वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?
  8. (क) कर्मठ और सृजनशील

    (ख) साहसी और पराक्रमी

    (ग) दृढ़ और संवेदनशील

    (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय

  9. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है?
  10. (क) पिता की कठोरता

    (ख) पिता की भावुकता

    (ग) वर्षा की तीव्रता

    (घ) पिता की निर्बलता

  11. "बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर" पंक्ति में 'परिताप' शब्द से क्या संकेत मिलता है?
  12. (क) घर का समृद्ध होना

    (ख) घर की सजावट

    (ग) घर में दुख का वातावरण

    (घ) घर की शांति

  13. "और कहना मस्त हूँ मैं" पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?
  14. (क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है।

    (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।

    (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है।

    (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।

  15. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?
  16. (क) घर की शांति और सुरक्षा

    (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध

    (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया

    (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

  1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
  2. "दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
  3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
  4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
  5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?

विधा से संवाद

कविता का सौंदर्य

" गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर"

उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यहाँ शब्दों का चयन और संयोजन इस प्रकार किया गया है कि कविता में ध्वन्यात्मकता और नाद सौंदर्य की सृष्टि हुई है। शब्दों के ऐसे प्रयोग से कविता आकर्षक बनती है। कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे जीवंत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं। ऐसी कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता से ऐसी विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

विशेषताएँ

  • स्मति और दश्य बिंब
  • लोकभाषा की सहजता
  • पंक्तियों का दोहराव
  • आलंकारिक प्रयोग
  • प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन
  • संबोधनात्मकता

कविता की संरचना

'घर की याद' कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें।

(संकेत- पानी का गिरना, सबेरा होना)

विषयों से संवाद

  • कविता में चित्रित 'घर' एक भौतिक स्थान से बढ़कर भावनाओं और संबंधों के केंद्र के रूप में चित्रित हुआ है। वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन-सी नापसंद?
  • कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
  • कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।
  • भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से 'भारत का स्वतंत्रता संग्राम' विषय पर लेख लिखिए।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

  1. "आज सबका मन चुआ होगा।"
  2. उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द कवि की क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा का शब्द है। कविता में स्थानीय भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। कविता से कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई है। उनमें रेखांकित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।

    • एक छिन सौ बरस है रे
    • तुझे बतलाता कि बेला/ने फलानी फूल झेला
    • और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला
    • मन कि बड़ का झाड़ जैसे
  3. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
  4. (क ) “बहत पानी गिर रहा है"

    • 'पानी' शब्द है --- संज्ञा
    • 'बहुत' शब्द है --- विशेषण
    • 'गिर रहा है' है --- क्रिया

    (ख) “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा"

    • 'बुढ़ापा' शब्द है --
    • 'व्यापा' शब्द है --
    • 'जिनको' शब्द है --
  5. (ग) “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह"
    • 'खुले' शब्द है --
    • 'वह' शब्द है --
    • 'बदन' शब्द है --
    • 'फिरता' शब्द है --
विशेषता विशेषता का अर्थ उदाहरण 1 उदाहरण 2
चित्रात्मक भाषा शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली।
संवादात्मकता कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।
विरोधाभास एक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना। झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।
व्यंग्य वह शैली जिसमें मजाक, हास्य या कटाक्ष (चुभते हुए संकेतों) के माध्यम से किसी दोष, कुरीति, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है। भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते।
संघर्ष दो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना। उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़)
अतिशयोक्ति किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।
संदेह/उलझन जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता। सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है?

कहानी की रचना

प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।

विषयों से संवाद

कहानी का समय और समाज

'दो बैलों की कथा' कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।

इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-

कहानी में से वाक्य स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
  1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।
  1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
  1. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।
  1. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
  1. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।
  1. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।
  1. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।
  1. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
  1. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।
  1. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
  1. साँड़ पूरा हाथी है... पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।
  1. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।

पशुओं के लिए कानून

नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

"मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख़्तियार है?"

"जाकर थाने में रपट कर दूँगा।"

"मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।"

  1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
  2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
  3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।

(संकेत- "थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम... है। हमारे साथ अन्याय हुआ है...।")

हमारी धरोहर और संस्कृति

  1. "वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!"
  2. कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

  3. "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।"
  4. "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।

    " हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

  5. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता"
    • खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
    • भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?

अलग-अलग और साथ-साथ

"दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।"

  1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत- धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
  2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
  3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
  4. (संकेत- क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)

  5. "दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।"
  6. कहानी में अनेक स्थानों पर 'मूक-भाषा' का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

  7. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।

भारतीय सांकेतिक भाषा

आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी (लिंक) पर जाकर भारतीय सांकेतिक भाषा सीख सकते हैं-

https://www.youtube.com/@ISLRTC

https://islrte.nic.in/

मार्ग खोजेंगे कैसे?

"सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।"

  1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
  2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
  3. (संकेत – ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)

  4. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।

सृजन

  1. हीरा और मोती की दैनंदिनी

  2. कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।

    कैसे लिखें-

    • "आज का दिन..." से आरंभ करें।
    • भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)।
    • अंत में आशा या संकल्प लिखें।

    (संकेत- "आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।")

  3. आज के समाचार

    मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
  4. कैसे लिखें-

    • शीर्षक दें।
    • घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)।
    • परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।
    • (संकेत-शीर्षक 'दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ')

  5. कहानी का नया अंत

  6. यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।

    कैसे लिखें-

    • बैलों की नई जगह।
    • झरी की स्थिति।

    (संकेत- "हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।")

  7. चित्रकथा लेखन

    नीचे 'दो बैलों की कथा' की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।
  8. कैसे लिखें-

    • हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
    • दृश्य का क्रम - बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी।

(संकेत- चित्र 4: "अब हम आजाद हैं।")

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भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

मेरे शब्द

कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।

भाषा गढ़ते मुहावरे

"लोग आ-आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।"

'मन फीका करना' एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका होना, जी खट्टा होना आदि। 'दो बैलों की कथा' कहानी में कई मुहावरे हैं जिनसे यह कहानी जीवंत हो गई है। ऐसी भाषा को ही मुहावरेदार भाषा कहा जाता है।

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-

  1. "झरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।"
  2. "उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।"
  3. "झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।"
  4. "मोती दिल में ऐंठकर रह गया।"
  5. "आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।"
  6. "जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।"
  7. "अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।"
  8. "तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।"

गतिविधियाँ

नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-

  1. 1. कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र
  2. "बाल-सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।"
    • मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।
    • हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
  3. बाल सभा में भाषण
  4. मान लीजिए कि आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है- 'पशुओं के अधिकार'। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
  5. शीर्षक
  6. इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
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मेरी पहेली

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-

हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी

भाषा संगम

"कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।"

नीचे 'बैल' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

बैल (हिंदी); वृषभः (संस्कृत); बओलद, बल्द (पंजाबी); बैल (उर्दू); दोंद (कश्मीरी); ढ़गो (सिंधी); बैल (मराठी); बळद (गुजराती); बैल (कोंकणी); गोरु (नेपाली); बलद (बांग्ला); षाँड़, बलध (असमिया); शन लाबा (मणिपुरी); बलद (ओड़िआ); एंददु (तेलुगु); एरिदु/कालैमाहु (तमिल); काळ (मलयालम); एत्तु (कन्नड़)।

  • इनके अतिरिक्त यदि आप 'बैल' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

खोजबीन

दो बैलों की कथा

https://youtu.be/cq0Lgg7iM14?si=57ztfQc-VHE5cxvO

कथा सम्राट- प्रेमचंद

https://www.youtube.com/watch?v-3314rJcclul&ab channel-NCERTOFFICIAL

प्रेमचंद का बचपन और बच्चों की कहानियाँ
https://www.youtube.com/watch?v-bg0MzrE36Dg&t-187s&
ab_channelNCERTOFFICIAL

शब्द-संपदा

निरापद — आपत्ति से रहित, निर्विघ्न, सुरक्षित
सहिष्णुता/सहिष्णुत्व — सहनशीलता, क्षमा
विषाद — उदासी, अवसाद, जड़ता, मन उचट जाना
पराकाष्ठा — अंतिम सीमा, चरम कोटि या सीमा,
कदाचित् — कभी, शायद
पछाईं/पछाँह — पश्चिमी प्रदेश का, पश्चिम दिशा
चौकस — चौकन्ना, सावधान, ठीक
डील — शरीर की ऊँचाई-चौड़ाई आदि, कद, देह, शरीर
विग्रह — अलगाना, फैलाना, फूट पैदा करना, खंड, भाग, विस्तार
विनोद — परिहास, मनोरंजन, हटाना, क्रीड़ा, कौतूहल
आत्मीयता — अपनापन, मैत्री
नाँद— मिट्टी का एक बड़ा और चौड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा-पानी आदि दिया जाता है, हौदी
गोईं/गुइयाँ — खेल का साथी, सखी
पगहिया/पगहा/पघा— ढोर (पशु) बाँधने की रस्सी
कनखियों/कनखी— आँख की कोर, तिरछी निगाह से देखना, आँख का इशारा
चरनी — मेंड़दार लंबा चबूतरा जिस पर गाय-बैल को चारा पानी दिया जाता है, गाय-बैल को चारा-पानी देने के लिए गाड़ी हुई नाँद
गाँव — फंदेदार रस्सी जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है
प्रतिवाद— विरोध, खंडन, वादी की बात के विरोध में कही जाने वाली बात
ताकीद — किसी कार्य के लिए बार-बार चेताने की क्रिया
टिटकार/टिटकारना — 'टिक-टिक' शब्द करके घोड़े, बैल आदि को चलने के लिए प्रेरित करना
तेवर — क्रोधभरी दृष्टि, कोप प्रकट करने वाली तिरछी नजर, भौंह
थान — पशुओं के बाँधे जाने की जगह, बँधी हुई लंबाई का कपड़े का बड़ा टुकड़ा
बरकत— वृद्धि, बढ़ती, सौभाग्य, लाभ, प्रभाव
बेतहाशा — बहुत तेजी से, बदहवास होकर (भागना), बिना सोचे-विचारे
व्याकुल — घबड़ाया हुआ, हतबुद्धि, व्यग्र, अभिभूत, भीत
रगेदता/रगेदना— भगाना, खदेड़ना, दौड़ाना
तजुरबा/तजरबा — अनुभव
मल्लयुद्ध — कुश्ती, बाहुयुद्ध
ग्रास — कौर, निवाला, आहार, निगलना, ग्रहण
मेंड़ — खेत की सीमा, सिंचाई आदि के लिए उसके चारों ओर बनाया हुआ मिट्टी का घेरा
खुर — नख, चारपाई के पाये का निचला हिस्सा
काँजीहौस/काँजीहाउस ['काइन हाउस'] — वह बाड़ा जिसमें दूसरे का खेत आदि खाने वाले या अनाथ चौपाए (पशु) बंद किए जाते और कुछ दंड लेकर छोड़े या नीलाम किए जाते हैं
साबिका/साविका — वास्ता, सरोकार, काम (पड़ना, होना)
तृप्ति — भोजन आदि की प्राप्ति से उत्पन्न संतोष या तृप्त होने का भाव
दहक — आग का दहकना, लपट, ज्वाला
उजड्डपन — अशिष्टता, उदंडता, उच्छृंखलता
बूते/बूता — सामर्थ्य, बल, शक्ति, बस
आजमाई/आजमाना — परीक्षार्थ प्रयोग करना, परीक्षा, जाँच करना
चेत — होश, संज्ञा, याद, ज्ञान, चित्त, मन, इच्छा, सावधानी
डुग्गी — चमड़े से मढ़ा चौड़े मुँह का छोटा बाजा
उन्मत्त — मतवाला, सनकी
नीलाम — बिक्री की एक रीति जिसमें सबसे अधिक दाम बोलने वाले के हाथ माल बेचा जाता है, बोली बोलकर बेचना
अख्तियार/इख़्तियार — पसंद करना या इसका अधिकार, वश, विचाराधिकार, ग्रहण