अध्याय 14
निगमित संप्रेषण तथा जनसंपर्क
अधिगम उद्देश्य
इस अध्याय को पढ़ने के बाद शिक्षार्थी —
- निगमित संप्रेषण तथा निगम के अर्थ, महत्त्व और कार्यक्षेत्र को समझ सकेंगे,
- निगमित संप्रेषण और जनसंपर्क के लिए आवश्यक प्रकार्यों और कौशलों को समझ सकेंगे,
- जनसंपर्क के क्षेत्रों और सिद्धांतों को समझ सकेंगे।
प्रस्तावना
प्रत्येक विचार, तथ्य अथवा सम्मति गतिहीन होती है, जब तक उसे संप्रेषित न किया जाए या समझा न जाए। जानकारी के बल पर चलने वाले आज के समाज में यह बार-बार स्वीकार किया गया है कि संप्रेषण का महत्त्व रोटी, कपड़ा और मकान जैसा है। इस अध्याय में हम संप्रेषण पर विचार करेंगे, क्योंकि यह संगठनों और व्यापारिक संस्थानों से संबंधित है। निगमित संप्रेषण को प्रबंधन के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में माना जाता है। इसे विकसित होने में वर्षों का समय लगा है ।
निगमित संप्रेषण को सभी आंतरिक और बाह्य संप्रेषणों के प्रबंधन और संगठन में सम्मिलित गतिविधियों के समूह के रूप में वर्णित किया गया है, जिनका डिज़ाइन अनुकूल प्रांरभिक बिंदुओं के सृजन के लिए बनाया जाता है।
निगमित संप्रेषण किसी भी संगठन में विविध प्रकार के विशेषज्ञों और संवाददाताओं द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होता है। यह लोगों, संगठन की प्रक्रियाओं, लोगों की गतिविधियों और संचार माध्यमों से संबंधित है।
महत्त्व
किसी संगठन की सफलता का प्रमुख आधार जनता का बोध होता है। संगठन के बारे में जनसाधारण, प्रतिद्धंदी तथा कर्मचारीगण जो धारणा रखते हैं, वही उसकी प्रतिष्ठा, उसकी स्थिति और अंततः उसकी सफलता को परिभाषित करती है । निगमित संप्रेषण का प्राथमिक उद्देश्य अपने सभी साझेदारों के समक्ष अपना दृष्टिकोण (सच्चा अथवा अन्य प्रकार का) स्थापित करना है। निगमित संप्रेषण का महत्वपूर्ण उद्देश्य है, ‘विश्व आपको किस रूप में देखता है, इसका नियंत्रण करना।’ उदाहरण के लिए संकट के समय, यह महत्वपूर्ण नहीं कि वास्तव में क्या हुआ, महत्वपूर्ण है कि जनता और कर्मचारियों की संकट के बारे में समझ तथा संगठन द्वारा उसका सामना कैसे किया गया है । यही संगठन के प्रति उसकी प्रतिक्रिया निर्धारित करेगा। यदि कंपनी स्वंय को स्थिर, प्रतिष्ठित और शांत रूप में प्रस्तुत नहीं करती और आक्रामक व्यवहार दर्शाती है तो उसके साझेदार प्रश्न उठा सकते हैं।
कंपनी का भविष्य जनता के मूल्यांकन से प्रभावित होता है कि क्या आक्रामक व्यवहार आवश्यक था या नहीं। निगमित संप्रेषण दल के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के व्यवहार के प्रति साझेदारों की प्रतिक्रिया कैसी होगी। उन्हें प्रेस विज्ञप्तियों, संवाद पत्रों, विज्ञापनों और संप्रेषण के अन्य माध्यमों द्वारा सुनिश्चित करना होगा कि जनता वही जानकारी प्राप्त करे जो संगठन उन्हें देना चाहता है।
जनसंपर्क किसी भी संगठन का महत्वपूर्ण प्रकार्य या गतिवििध है, अतः इसका दायित्व किसी प्रभावी और अनुभवी अधिकारी को सौंपना चाहिए। प्रत्येक जनसंपर्क कार्यक्रम के उद्देश्य, नीति और योजना भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए कंपनी की सकारात्मक छवि सृजित करना, कंपनी के संकट को निपटाना, कर्मचारियों को प्रेरित करना, किसी उत्पाद के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना, उत्पाद का विज्ञापन करना और किसी घटना की पूर्व सूचना देना। जनसंपर्क ऊपर वर्णित प्रत्येक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न योजनाएँ बनाता है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं — किसी भी कार्यक्रम से पहले पत्रकार सम्मेलन, प्रेस विज्ञप्ति पार्टी व स्नेह मिलन आदि । जनसंपर्क तथा विज्ञापन और संचार माध्यम परस्पर संबंधित हैं, अतः इनके कुछ लक्षण और गतिविधियाँ समान हो सकती हैं।
मूलभूत संकल्पनाएँ
निगमित संप्रेषण — निगमित संप्रेषण स्थानीय और वैश्विक स्तर पर कर्मचारियों, उपभोक्ताओं, नियोजकों तथा अन्य व्यक्तियों के साथ संप्रेषण का सक्षम और प्रभावी मार्ग है। कर्मचारियों की उत्पादकता और लोगों के सशक्तिकरण की आवश्यकता के लिए प्रंबधकों का मुख्य सरोकार निगमित संप्रेषण दल के उपयोग से संबंधित होता है, परंतु अकसर जिसकी आवश्यकता होती है वह सभी की सर्वसाधारण आवश्यकता अर्थात संप्रेषण है। इसे निम्नलिखित अध्ययन द्वारा दर्शाया गया है—
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वर्ष 1990 के एक अध्ययन के दौरान जब औद्योगिक अभियंताओं के एक समूह से पूछा गया कि उत्पादकता को कैसे बेहतर किया जा सकता है तो सर्वेक्षण के प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में संप्रेषण का मुद्दा मुख्य रूप से उभरकर आया। 88 प्रतिशत से अधिक अभियंताओं की दृढ़ मान्यता थी कि संप्रेषण और व्यापार के विभिन्न घटकों में समन्वयन की कमी से उत्पादकता में कमी आती है ( ‘पी और क्यू सर्वेक्षण’ 1990)। |
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मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी.ई.ओ.) भी संप्रेषण के महत्त्व को पहचानते हैं। एफ़ॉस्टर हिगिंस एंड कंपनी ने जो कि कर्मचारी हितों के लिए परामर्श देने वाली फर्म है, अपने अध्ययन में पाया कि संर्वेक्षण किए गए 97 प्रतिशत मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का मानना है कि कर्मचारियों के साथ संप्रेषण करने से रोज़गार तुष्टि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त 79 प्रतिशत का सोचना है कि संप्रेषण से कनिष्ठ कर्मचारी को लाभ पहुँचता है। आश्चर्यजनक यह था कि इसके बावजूद केवल 22 प्रतिशत ही सप्ताह में एक या अधिक बार कर्मचारियों के साथ संप्रेषण करते हैं (फार्नहाम 1989)। स्रोत— http://findarticles.com/p/articles/mi_m1038/is_n5_v36/ai_14723295/ |
जनसंपर्क
जनसंपर्क एक कला भी है और विज्ञान भी। इसमें कला का सौंदर्य और भावात्मकता तथा विज्ञान की पद्धति है। यह भिन्न लोगों के लिए भिन्न अर्थ वाला हो सकता है। यद्यपि भारत और पूरे विश्व में ही इसका उद््भव हाल ही में हुआ है, पर इसका उपयोग सरकार, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों तथा अन्य संस्थानों में हो रहा है। जनसंपर्क तकनीकें, पद्धतियाँ और प्रथाएँ, संस्था अनुसार परिवर्तित होती हैं।
आर्थर डब्ल्यू. पेज के अनुसार ‘जन अनुमोदन प्राप्त करने का आधारभूत तरीका है कि उसके योग्य बनो’।
जनसंपर्क की निम्नलिखित परिभाषाओं से आपको इसकी प्रकृति और कार्य क्षेत्र का कुछ अनुमान होगा —
‘जनसाधारण के दो समूहों के बीच संबंधों और संपर्कों के बंध स्थापित करना।’
‘किसी संगठन और उसके लोगों के बीच आपसी समझ स्थापित करने और उसे बनाए रखने के लिए विवेकशील, सुनियोजित और दीर्घकालिक प्रयास करना।’
‘किसी गतिवििध, कारण, आंदोलन, संस्थान, उत्पाद या सेवा प्राप्त करने के लिए जानकारी, अनुनय, समायोजन और संपर्कों द्वारा प्रयास जनसंपर्क कहलाता है।’
किसी भी पेशे में आचार संहिता नीति अत्यंत आवश्यक होती है। जनसंपर्क व्यावसायिक इस आवश्यकता के अपवाद नहीं हैं। उन्हें आने वाली घटनाओं के बारे में जानकारी या ज्ञान होता है, परंतु इस जानकारी के व्यावसायीकरण के दबाव या प्रलोभन से हर कीमत पर बचना चाहिए। अपने ग्राहक या कर्मचारियों के हितों के लिए काम करते हुए जनसंपर्क व्यावसायिकों को सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आचार संहिता नीति और आचार संहिता का पालन कर रहे हैं, जिससे कि उन पर सट्टेबाज या जोड़-तोड़ करने वालों का लेबल न लगे।
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निगमित संप्रेषण प्राथमिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सृजित करता है—
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निगमित संप्रेषण के प्रकार्य
निगमित संप्रेषण एक स्वस्थ संगठनात्मक परिवेश का निर्माण करता है। किसी भी संगठन/संस्थान में कर्मचारियों, साझेदारों, संचार माध्यमों और ग्राहकों में जानकारी साझा करने के अतिरिक्त विशेषज्ञों और सामान्य जानकारी रखने वाले व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार के लोगों में जानकारी का प्रसार करना होता है। निगमित संप्रेषण ब्रांड का सृजन और रख-रखाव करता है और संगठन की प्रतिष्ठा का भी ध्यान रखता है। यह कंपनी के ब्रांड को संगठन के भीतर और बाहर दर्शाता है, अतः निगमित संप्रेषण का प्रक्रम संगठन और बाहरी संस्थाओं के मध्य संपर्क सुनिश्चित करता है। आजकल इसका उपयोग एक सकारात्मक निगमित छवि प्रदर्शित करने, साझेदारों के साथ मज़बूत संबंध निर्मित करने, जनता को नए उत्पाद और उपलब्धियों की जानकारी देने के लिए जन-संपर्क साधन के रूप में किया जाता है। साझेदारों के साथ मधुर और स्वीकारात्मक संबंध,एक सकारात्मक निगमित छवि बनाए रखने में मदद करता है। चाहे वह निगमित संस्था, कंपनी, संगठन, संस्थान, गैर-सरकारी संगठन अथवा एक सरकारी प्रतिष्ठान हो — सभी को सम्मानजनक छवि और प्रतिष्ठा की आवश्यकता होती है। प्रतिस्पर्धा में वृद्धि, जानकारी की उपलब्धता और संचार माध्यमों की बहुलता ने अधिकांश संगठनों के लिए ‘‘प्रतिष्ठा प्रबंधन’’ को प्राथमिक बना दिया है। इसे निगमित संप्रेषकों द्वारा व्यावसायिक तरीके से संभाला जाता है। संकट नियंत्रण के लिए कार्य करना, वैश्विक संप्रेषण और समझ के लिए विवेकपूर्ण दृष्टिकोण बनाना और जटिल संप्रेषण साधनों और प्रौद्योगिकियों को उपयोग में लाना, निगमित संप्रेषण के महत्वपूर्ण प्रकार्य हैं।
जनसंपर्क के प्रकार्य
निगमित जनसंपर्क विभाग और जनसंपर्क एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले प्रकार्यों में से बहुत से प्रकार्य एक जैसे होते हैं। नीचे इनके अधिकांश समान प्रकार्य दिए जा रहे हैं —
1. जनसंपर्क नीति — निगमित जनसंपर्क नीति को विकसित और अनुशासित करना और इसे शीर्ष प्रबंधकों और सभी विभागों के साथ साझा करना। जनसंपर्क एजेंसियाँ भी यही कार्य करती हैं।
2. वक्तव्य और प्रेस विज्ञप्तियाँ — जनसंपर्क कार्मिकों द्वारा निगमित वक्तव्य, प्रेस विज्ञप्तियाँ और अधिकारियों के भाषण आदि तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रम में वे कंपनी, उत्पाद या नीतियों की सकारात्मक छवि को निर्मित और प्रस्तुत करते हैं।
3. प्रचार करना — संचार माध्यमों और समुदायों को कंपनी की गतिविधियों और उत्पादों संबंधी घोषणाएँ प्रेषित करना । प्रोत्साहन अभियानों की योजनाएँ बनाकर संचार माध्यमों द्वारा उनका प्रचार करना भी एक अत्यावश्यक प्रकार्य है। व्यापक रूप से प्रेस और लोगों की पूछताछ का उत्तर देना भी इसका एक प्रकार्य है।
4. संबंध बनाना — जनसंपर्क कार्मिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सरकारी इकाइयों के साथ स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर संबंध बनाएँ। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे समाज के साथ ‘‘अच्छे पड़ोसियों’’ जैसे संबंध बनाएँ। इसमें पर्यावरण संरक्षण मानकों का अनुपालन, स्थानीय लोगों को रोज़गार के अवसर देना, इलाके के विकास कार्यक्रमों में सहयोग करना और भाग लेना आदि शामिल हैं। कंपनी, साझेदारों और अन्य निवेशकों के मध्य संप्रेषण और संबंध बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण प्रकार्य है। कभी-कभी जनसंपर्क एजेंसियों को वार्षिक / त्रैमासिक रिपोर्ट भी तैयार करनी पड़ सकती है और साझेदारों के साथ बैठकर योजनाएँ भी तैयार करनी पड़ सकती हैं।
5. प्रकाशन — कभी-कभी जनसंपर्क एजेंसियों को संस्थानिक पत्रिकाएँ तैयार करने और प्रकाशित करने का काम भी करना होता है।
जनसंपर्क गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्र
1. प्रेस से संबंध — जनसंपर्क व्यक्तियों को प्रेस के सभी स्तरों अर्थात् संपादक से संवाददाता तक, मधुर संबंध रखने होते हैं। प्रेस और जनसंपर्क दोनों अपनी रोजी-रोटी के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अच्छी लिखी हुई और सही समय पर प्रेस विज्ञप्तियाँ उपलब्ध कराना, संवाददाता को उनके लेख लिखने में मदद करना, आसान उपलब्धता, प्रेस की आलोचना से दूर रहना, पक्षपात और कुछ पत्रों का अनुचित पक्ष लेने से बचना, प्रेस संबंधों की कुछ विशेषताएँ हैं। जनसंपर्क कर्मी को संगठन के उत्पाद या सेवाओं की जानकारी के प्रसार के समय संगठन की संस्कृति को सामने लाना चाहिए। पत्रकारों को व्यापार में बने रहने के लिए समाचार चाहिए और जनसंपर्क को प्रचार चाहिए। इस प्रकार दोनों के मध्य लेन-देन रहता है। जनसंपर्क और प्रेस की इस अंतर निर्भरता को समझना चाहिए।
2. विज्ञापन देना — एक उत्पाद स्वयं के गुणों के आधार पर नहीं बिकता, इसका विज्ञापन करना पड़ता है। विज्ञापन करने का उद्देश्य जानकारी फैलाना, लोगों को उत्पाद के उपभोग के लिए राजी करना या प्रभावित करना हो सकता है। विज्ञापन देेने के लिए बहुत से संचार माध्यम हैं, जैसे – समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी. और कई अन्य। सामान्यतः जनसंपर्क व्यक्ति विज्ञापन के लिए बजट और माध्यम तय करते हैं।
3. प्रकाशन — विवरणिकाएँ, फ़ोल्डर, प्रचार पुस्तिका (पैम्फ़्लेट) परिपत्र, संस्थानिक पत्रिकाएँ और इसी प्रकार की सामग्री को प्रकाशित करने का दायित्व जनसंपर्क विभाग का होता है। सामग्री तैयार करते समय सरलता, स्पष्टता, लागत, संगठन की सही छवि और उसके आकर्षक होने का ध्यान रखना चाहिए।
4. अन्य संचार माध्यमों से समन्वयन — अन्य श्रव्य-दृश्य संचार माध्यमों, फि़ल्मों, प्रदर्शनियों, विज्ञापन पट्टों, कठपुतली और लोकगीतों का उपयोग जनसंपर्क विभाग के प्रचालनों के दायरे में आते हैं। अच्छी सार्वजनिक बातचीत और फ़ोन पर शिष्ट बातचीत भी संगठन की सकारात्मक छवि में योगदान दे सकती है, क्योंकि बोले गए शब्द अभी भी संप्रेषण के सबसे पुराने तरीकों में से एक हैं। उन्हें अन्य प्रचार माध्यमों जैसे – रेडियो और दूरदर्शन से भी अच्छे संबंध बनाए रखने होते हैं।
5. जनसंपर्क के संघटक — स्थानीय प्रेस के साथ-साथ जनसंपर्क व्यक्तियों को स्थानीय समाज, वित्तीय विश्लेषकों, बैंक वालों, प्रमुख बड़े संस्थानों, शेयर धारकों और संभावित निवेशकों से भी संबंध बनाकर रखने होते हैं। आंतरिक जनसंपर्क गतिविधियों में अधिकारियों सहित सभी कर्मचारियों और अन्य वरिष्ठ कार्मिकों से संबंध बनाए रखना शामिल है, जिससे जनसंपर्क कर्मी को सभी जानकारी मिलती है, इससे उसे संगठन में होने वाली सभी घटनाओं की जानकारी रहती है।
जनसंपर्क के सात सिद्धांत
आर्थर पेज ने अपने दर्शन के क्रियान्वयन के माध्यम के रूप में जनसंपर्क के सात सिद्धांतों को अभ्यास में लिया—
- सच बताइए — जनता को जानने दीजिए कि क्या हो रहा है और कंपनी के चरित्र, विचारों एवं प्रथाओं का यथार्थ चित्र प्रस्तुत कीजिए।
- काम द्वारा सिद्ध कीजिए — संगठन के प्रति जनता की धारणा 90 प्रतिशत उससे बनती है जो वह करता है और 10 प्रतिशत उससे जो वह कहता है।
- ग्राहकों की सुनिए — कंपनी को अच्छी सेवा देने के लिए यह समझना आवश्यक है कि जनता क्या चाहती है और उसकी क्या आवश्यकताएँ हैं। कंपनी के उत्पादों, नीतियों और प्रथाओं के बारे में मिली जन प्रतिक्रिया को शीर्ष निर्णयकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों को सूचित करते रहिए।
- आने वाले कल के लिए प्रबंध कीजिए — जनता की प्रतिक्रिया का पूर्वानुमान लगाइए और कठिनाई पैदा करने वाले तरीकों को हटा दीजिए। प्रतिष्ठा बनाइए ।
- जनसंपर्क को इस तरह संचालित कीजिए जैसे कि सारी कंपनी उस पर निर्भर करती है — निगमित संबंध एक प्रबंधन प्रकार्य है। किसी भी निगमित नीति को यह जाने बिना कि उसका जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा लागू नहीं करना चाहिए। जनसंपर्क व्यावसायिक एक नीति निर्माता होता है जो कि विविध प्रकार की निगमित संप्रेषण गतिविधियों को संभालने के योग्य होता है।
- इसे समझें कि कंपनी का वास्तविक चरित्र उसके लोगों द्वारा प्रदर्शित होता है — एक कंपनी के बारे में सबसे सशक्त राय — अच्छी या बुरी — उसके कर्मचारियों के शब्दों और कार्यों से ही बनती है, परिणामस्वरूप प्रत्येक कर्मचारी — सक्रिय अथवा सेवानिवृत्त— जनसंपर्क में शामिल होता है। निगमित संप्रेषण का उत्तरदायित्व है कि प्रत्येक कर्मचारी की क्षमता को बढ़ाएँ और ग्राहकों मित्रों, साझेदारों और सार्वजनिक अधिकारियों के प्रति ईमानदार, ज्ञानवान दूत बने।
- शांत, धैर्यवान और प्रसन्नचित्त रहिए — जानकारी और जनसंपर्कों के दृढ़ और तार्किक ध्यान के साथ अच्छे जनसंपर्क के लिए आधार तैयार कीजिए। वर्तमान के विवादास्पद 24-घंटे के समाचार चक्रों और भारी संख्या में निगरानी रखने वाले संगठनों के रहते यह कठिन हो सकता है, परंतु याद रखिए कि जब संकट खड़ा होता है तो ठंडे दिमाग वाले ही सर्वश्रेष्ठ संप्रेषण करते हैं।
आंतरिक संप्रेषण — यह संप्रेषण संगठन के नियोक्ता और कर्मचारियों के मध्य होता है। यह किसी संगठन को बाँधे रखने, कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने, पारदर्शिता को प्रोत्साहित करने और धीरे-धीरे होने वाली क्षति को कम करने में एक महत्वपूर्ण साधन समझा जाता है। किसी कंपनी की अधिकांश आंतरिक समस्याओं का मूल कारण अप्रभावी संप्रेषण होता है।
आंतरिक संप्रेषण भिन्न दिशाओं में बहता है — ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज, विकर्ष, संगठन के ढाँचे के आर-पार। आंतिरक संप्रेषण औपचारिक अथवा अनौपचारिक हो सकता है। यह नियोजन, निर्देशन समन्वयन, प्रेरणा इत्यादि जैसे प्रबंधकीय प्रकार्यों को करने में मदद करता है। व्यापक नीतियाँ और उद्देश्य प्रबंधन के शीर्ष से नीचे के स्तरों तक पहुँचते हैं। संदेश संप्रेषित करने के लिए लिखित और मौखिक दोनों संचार माध्यम उपयोग में लाए जाते हैं। लिखित संचार माध्यमों में निर्देश, आदेश, पत्र, ज्ञापन, संस्थानिक जर्नल, पोस्टर, बुलेटिन बोर्ड, सूचना रैक, पुस्तिकाएँ, नियमावलियाँ, गतिविधि रिपोर्ट आदि सम्मिलित हैं।
बाह्य संप्रेषण — यह संप्रेषण संगठन के सदस्यों और बाहरी दुनिया के बीच होता है। बाह्य संप्रेषण भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सकारात्मक छवि का सृजन करने, ब्रांड संरक्षण और जनसंपर्क बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण प्रकार्यों के योग्य बनाता है और इनमें वृद्धि करता है। वैश्विक समाज में बाह्य संप्रेषण विपणन में भी मदद करता है।
बाह्य संप्रेषण, संगठन के बाहर सरकार, उसके विभागों, ग्राहकों, वितरकों, अंतरनिगमित संस्थाओं, जनसाधारण इत्यादि को संदेश संप्रेषित करने से संबंधित है। बाह्य संप्रेषण जनता के साथ अच्छे संबंधों को प्रोत्साहित करता है। कुछ तथ्यों और जानकारियों का बाहरी व्यक्तियों के साथ साझा आदान-प्रदान किया जाना चाहिए। लिखित और मौखिक दोनों संचार माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है। लिखित संचार माध्यमों में पत्र, ज्ञापन, संस्थानिक पत्रिकाएँ, पोस्टर, बुलेटिन, वार्षिक रिपोर्ट आदि सम्मिलित होते हैं।
संप्रेषण गतिविधियों के दो प्रमुख क्षेत्र हैं—
1. संदेश बनाना
2. संदेश संप्रेषित करना
संदेश बनाते समय अंग्रेज़ी के अक्षर C से प्रारंभ होने वाले संप्रेषण के सात शब्दों को ध्यान में रखना चाहिए–
1. संक्षिप्त (Conciseness) — यह सूचित किया जाना चाहिए कि संदेश संक्षिप्त हो, जिससे पाठकों का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
2. मूर्तता (Concreteness) — संदेश ठोस होना चाहिए, जिसमें कही जाने वाली सब बातों का अर्थ हो, परंतु वह लंबाई में छोटा हो।
3. स्पष्टता (Clarity) — संदेश सदैव उपयुक्त और सुस्पष्ट अर्थ देने वाला होना चाहिए, जो विविधता उत्पन्न न करे और पाठक को उलझन में न डाले।
4. संपूर्ण (Completeness) — यह भी महत्वपूर्ण है कि संदेश पूर्ण अर्थ देने वाला हो तथा पाठक को पर्याप्त जानकारी दे सके।
5. शिष्टाचार (Courtesy) — अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि संदेश प्रेषक की शिष्ट अभिव्यक्ति पर बल देना चाहिए। उसे अपने पाठकों को समुचित सम्मान, शुभकामनाएँ तथा उनके हित की बातें करनी चाहिए।
6. परिशुद्धता (Correctness) — संदेश के सही होने की जाँच की जानी चाहिए और इसमें व्याकरण की कोई त्रुटि नहीं होनी चाहिए।
7. सोच-विचार (Consideration) — संदेश को पूरे सोच-विचार के साथ तैयार किया जाना चाहिए । इसमें अपनी अभिवृत्ति पर बल दें न कि ‘मैं’ और ‘हम’ जैसे शब्दों पर।
स्रोत– http://www.articleclick.com/Article Importance-of-communication-in-organisation/914799
आवश्यक ज्ञान एवं कौशल
कौशल आपको एक बेहतर और प्रभावी संप्रेषक बनने में सक्षम बनाते हैं। ये आपको संदेशों को बनाने और सफलता पूर्वक संप्रेषित करने में सहायता करते हैं। श्रवण कौशल स्वयं सीखे जाते हैं, अंतर्वैयक्तिक कौशल, बातचीत के कौशल और संपर्क स्थापना कौशल, सफल और प्रभावी लोगों का अवलोकन करके सीख सकते हैं। प्रस्तुतीकरण कौशलों में सॉफ़्टवेयर-हार्डवेयर का उपयोग शामिल होता है, जिसमें औपचारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार उच्चारण निष्प्रभावन, सार्वजनिक भाषण, टेलीफ़ोन शिष्टाचार, आधारभूत लेखन कौशल, निर्णय लेना और तनाव प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम होते हैं। समय प्रबंधन के लिए भी कुछ प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है। बहुत से कार्यप्रबंधक इसे अनुभव द्वारा भी विकसित कर लेते हैं।
1. श्रवण कौशल — श्रवण एक सक्रिय प्रक्रिया है, जिसके तीन भाग होते हैं। सुनना, समझना और प्रतिक्रिया । सुनना आपके शरीर का एक भौतिक पहलू हैं जिसमें ध्वनियों को ग्रहण करना और उनका अर्थ निकालना शामिल होता है। आप बातचीत के हिस्से के रूप में ये शब्द सुन सकते हैं। सुनना,ध्यान से सुनने से भिन्न है और यह कौशल का पहला भाग है। समझना वह है जहाँ आपका मस्तिष्क आप द्वारा सुने गए शब्दों का प्रक्रमण करके पूरी बातचीत के संदर्भ में उनके अर्थ निकालता है। इस स्तर पर आपको जानकारी संप्रेषित होती है। आपने जो सुना उसे आप समझ लेते हैं, तो आखिरी भाग प्रतिक्रिया या उत्तर देना होता है । बातचीत में प्रतिक्रिया करना प्रदर्शित करता है कि जो कहा गया आपने उसे सुना है और आप वक्ता के उद्देश्य को समझते हैं। प्रतिक्रिया में आप द्वारा समझी गई जानकारी पर क्रिया करने हेतु निर्णय लेना और संभवतः अपने विचार या टिप्पणियों के साथ उत्तर देना सम्मिलित हो सकता है।
3. समझौते के कौशल — समझौते की प्रक्रिया वह है, जिसमें किसी मुद्दे या सौदे के संदर्भ में दोनाें पक्षाें में कुछ बिंदुओं पर असहमति होती है। समझौते द्वारा प्रत्येक पक्ष दूसरे को मनाने का प्रयास करता है। यहाँ सामान्यतः उससे अधिक मुद्दे और तथ्य होंगे, जिनका ऐसे सौदे में उपयोग किया जा सकता है, दोनों पक्ष इसके लिए पूरी तरह तैयार होने चाहिए। अच्छे समझौते द्वारा यह संभव है कि दोनों पक्ष एक सुखद सौदे पर पहुँच जाएँ। यदि ठीक से होता है तो प्रत्येक समझौता एक-दूसरे के साथ रियायत के साथ व्यापार करने वाला होगा। अच्छे समझौते करने वालों को बैठक से पहले सभी संभावित परिवर्ती कारकों पर विचार कर लेना चाहिए, यह गणना या आकलन करना चाहिए कि प्रत्येक परिवर्ती पर कितनी लागत आएगी और उसके बाद यह निर्णय लेना चाहिए कि समझौता न होने पर वह किस परिवर्ती कारक का उपयोग करना पसंद करेगा/करेगी और अन्य लोग किसके लिए तैयार होंगे।
4. प्रस्तुतीकरण कौशल — यह कौशल विचारों और जानकारी को संप्रेषित करने में प्रयुक्त होता है। प्रस्तुतीकरण में वक्ता का व्यक्तित्व सामने आता है और यह सभी भागीदारों के बीच तुरंत पारस्परिक संवाद करने की अनुमति देता है। एक अच्छे प्रस्तुतीकरण में सम्मिलित हैं — विषय-वस्तु, रूपरेखा, पैकेजिंग और मानवीय तत्व। विषय-वस्तु में वह जानकारी होती है जिसकी लोगों को आवश्यकता होती है। जानकारी उतनी होनी चाहिए, जितनी एक बैठक में श्रोता ग्रहण कर सकें। रूपरेखा में एक औचित्यपूर्ण प्रारंभ, बीच का भाग और अंत होना चाहिए। यह क्रम से व्यवस्थित होना चाहिए ताकि श्रोता इसे समझ सकें। प्रस्तुतकर्ता को ध्यान रखना चाहिए कि वह श्रोताओं का ध्यानाकर्षित कर सके। पैकेजिंग का अर्थ विषय-वस्तु के सही उपयोग से है। प्रस्तुतीकरण कौशलों में सॉफ़्टवेयर, सॉफ़्टवेयर के प्रयोग के साथ पी.पी.टी. (पावर प्वाइंट टेक्नोलॉजी) जैसी प्रौद्योगिकियों के उपयोग की बहुत गुंजाइश है।
5. मानवीय तत्व — एक अच्छा प्रस्तुतीकरण याद रखा जाता है, क्योंकि उसके साथ एक व्यक्ति जुड़ा होता है। आपको फिर भी श्रोताओं की आवश्यकताओं का विश्लेषण करने और एक उपागम का चयन करने की ज़रूरत है। उदाहरण के लिए बहुत से दफ़्तरों में कर्मचारियों के जन्मदिवसों अथवा अन्य अवसरों पर कार्ड भेजे जाते हैं। कार्ड के साथ यदि वरिष्ठ व्यक्ति उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई देते हैं तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है।
6. तालमेल स्थापित करना — ‘‘तालमेल किसी संबंध में विश्वास और सामंजस्य को स्थापित करना है।” अन्य लोगों का समर्थन और सहयोग प्राप्त करने की कला का यह एक मुख्य तत्व है। संप्रेषण का 93 प्रतिशत आपके हावभाव और बात करने के ढंग से (तुल्यरूप संप्रेषण) संप्रेषित होता है। संदेश का केवल 7 प्रतिशत भाग ही शब्दों (अंकीय संप्रेषण) द्वारा पहुँचाया जाता है। संप्रेषण के चेतन और अचेतन दोनों स्तरों पर कार्य करने की योग्यता विकसित कर, आप सीखेंगे कि कैसे कम अवधि में भी किसी के साथ गहन संपर्क, विश्वास और सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। हममें से अधिकांश एक विशेष प्रकार के लोगों के साथ संपर्क बना पाते हैं, परंतु विशेषज्ञ संप्रेषक में व्यापक श्रेणी के लोगों के साथ संपर्क स्थापित करने की क्षमता होती है।
7. प्रभावी निर्णय लेना — निणर्य लेना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है साथ ही, प्रत्येक सफल व्यक्ति के पास यह कौशल होना ज़रूरी है। निर्णय लेने में मानवीय और भौतिक तत्त्व सम्मिलित होते हैं। इन सभी घटकों का आकलन या वरीयता निर्धारित कर, परिणाम का पूर्वानुमान लगाकर सभी संबंधित पक्षों के अधिकतम हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने चाहिए। उदाहरण के लिए विद्यार्थियों के रूप में आपको कुछ जेब खर्च मिलता है। इसको खर्च करने के बहुत से विकल्प होते हैं, जैसे – खाद्य पदार्थ, सिनेमा, मित्रों/परिवार के सदस्यों के लिए उपहार, अध्ययन सामग्री की फ़ोटो कॉपी करवाना इत्यादि । आप स्वयं की संतुष्टि के लिए और अपनी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए इसे किस प्रकार खर्च करते हैं, यह आपके निर्णय लेने के कौशल पर निर्भर करेगा। आपके पास हर सप्ताह अपनी अभिरुचियों को पूरा करने और समय बिताने के अन्य कार्यों के लिए कुछ घंटे होते हैं। महत्वपूर्ण गतिविधियों का क्रम तय करने की योग्यता आपको गतिविधियों के चयन का निर्णय लेने में मार्गदर्शन करेगी। निगमित प्रतिष्ठानों में प्रबंधकों के सामने प्रभावी निर्णय लेने की चुनौती होती है, क्योंकि उन्हें दक्षता, लाभ, साझेदारों, कर्मचारियों और मालिकों की संतुष्टि के बीच संतुलन बनाने की समस्या का समाधान करना पड़ता है।
8. टेलीफ़ोन शिष्टाचार, मौलिक लेखन कौशल (ई-मेल, टिप्पणियाँ इत्यादि लिखना), सार्वजनिक व्याख्यान कौशल — आपको इन तीनों कौशलों का अनुभव होना चाहिए। हो सकता है अब तक आपको इनमें काफ़ी अच्छी प्रवीणता प्राप्त हो गई हो। टेलीफ़ोन शिष्टाचार का अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। इससे दूसरे व्यक्ति को अच्छा लगता है। मौलिक लेखन कौशल आपकी भाषा की पाठ्यचर्या का हिस्सा है। आप में से अनेकों ने वाक््पटुता (एलोक्यूशन) प्रतियोगिताआें में भाग लिया होगा, पुरस्कार जीते होंगे और अच्छे वक्ताओं, व्याख्याताओं के भाषण सुने होंगे। निगमित संप्रेषक के रूप में आपको अपने व्यापार की सफलता के लिए इन्हें विकसित कर प्रयोग में लाना है।
9. उच्चारण निष्प्रभावन — भाषा सांस्कृतिक प्रभाव के अनुरूप उसी लहज़े में बोली जाती है। हम सभी ने भारतीयों, अंग्रेज़ों, अमेरिकनों, ऑस्ट्रेलिया वासियों और अन्य अंग्रेज़ों के विभिन्न उच्चारणों का अनुभव किया है। इन सभी के उच्चारणों में अंतर है। उच्चारण निष्प्रभावन में व्यक्ति शब्दों का उच्चारण इस प्रकार करता है कि संप्रेषक को सुनने वाला समझ जाता है कि क्या बोला गया है। ऐसा करने के कई अन्य कारण हैं, जैसे – व्यक्तिगत और व्यावसायिक अवसरों में वृद्धि करना, अपनी कंपनी की व्यावसायिक छवि में सुधार करना, व्यापक वार्तालाप, प्रस्तुतीकरणों और टेलीफ़ोन वार्ताओं में व्यस्त रखना, सामाजिक व्यावसायिक दोनों प्रकार से अधिक आत्मविश्वासी और प्रभावी होना, श्रोताओं के साथ अधिक समझ बनाना।
10. समय प्रबंधन — समय अद्वितीय और मूल्यवान संसाधन है, जिसकी विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यकता होती है जैसे – अपना काम करने, अपने लक्ष्य पूरे करने, अपने प्रियजनों के साथ समय बिताने और उस सबका आनंद लेने के लिए जो जीवन में आपको मिलता है। अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समय का उपयोग करना एक कौशल है। यदि यह आपके पास नहीं है तो इसे विकसित किया जा सकता है। इस कौशल को सीखने या सुधारने के तरीके हैं। समय प्रबंधन, सिद्धांतों, प्रचालनों, कौशलों, साधनों और कार्य करने की पद्धतियों का समूह है, जो आपको जीवन की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से समय का अधिक मूल्य प्राप्त करने में सहायक है। इससे प्रक्रमों और साधनों का विकास होता है, जिससे क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होती है। समय प्रबंधन हममें से प्रत्येक को सुधारने और अधिक उत्पादक बनने और व्यक्तिगत रूप से पूर्ण होने योग्य बनाता है, अतः तार्किक रूप से पूरे संगठन में अच्छे या बुरे समय प्रबंधन के प्रभाव व्यापक रूप से होते हैं। समय प्रबंधन से तनाव कम होता है।
11. तनाव प्रबंधन — यद्यपि हममें से अधिकांश प्रतिदिन किसी न किसी प्रकार के तनाव का अनुभव करते हैं, चाहे वह केवल विद्यालय समय पर पहुँचने, परीक्षा की तैयारी करने, किसी विशेष अवसर पर आकर्षक दिखने का प्रयास करने जैसा ही हो, परंतु कुछ लोग ही जानते हैं कि वास्तव में तनाव क्या होता है। तनाव क्या है? एक परिस्थिति जो दबाव अथवा चिंता पैदा करती है, तनाव कहलाती है। तनाव हमारे जीवन की विभिन्न माँगों, परिवर्तनों और घटनाओं के प्रति भौतिक, मानसिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया होती है। कुछ मामलों में तनाव हमें वह कार्य पूरा करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करता है, जिसे हम कठिन समझते हैं, जिससे हम स्वयं पर और अपनी उपलब्धि पर गर्व कर सकें। तनाव के लक्षण उस समय प्रकट होने प्रारंभ होते हैं, जब हम अनुभव करते हैं कि जीवन की आवश्यकताएँ उन्हें पूरा करने की हमारी क्षमताओं से अधिक होती जा रही हैं। इससे पहले कि तनाव कोई हानि पहुँचाए, हमें इसे कम करने, नियंत्रित करने और इसके नकारात्मक पाश्वर् प्रभावों के प्रति जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए। तनाव प्रबंधन का तात्पर्य आपके अपने विचारों, अपनी भावनाओं, अपने कार्यक्रमों, अपने पर्यावरण और आपके द्वारा समस्याओं से निपटने के तरीके से संबंधित है। अंतिम लक्ष्य एक संतुलित जीवन है, जहाँ काम, संबंधों, विश्राम और मनोरंजन के लिए समय हो साथ ही तनाव सहने और आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए लचीलापन हो।
जनसंपर्क के काम में संदेश तैयार करने के अलावा उसे उपयुक्त संचार माध्यम द्वारा संप्रेषित करने तथा लक्षित श्रोताओं की विशेषताओं को ध्यान में रखना होगा। भाषा का उपयोग लक्षित समूह पर निर्भर करेगा। जनसंपर्क से जुड़े व्यक्तियों को अपनी मनोवृत्ति और अंतर्वैयक्तिक कौशलों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
संप्रेषण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग
कार्यक्षेत्र
- निगमित कार्यालयों और अन्य संगठनों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के मध्य होने वाले सभी संप्रेषण कार्य
- साझेदारों, संचार माध्यमों, प्रेस, गैर-सरकारी संगठनों, सरकार, ग्राहकों और जनसाधारण से संप्रेषण करने के लिए जनसंपर्क अधिकारी। जनसंपर्क बाहरी एजेंसियों के साथ काम करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
- संचार माध्यमों और प्रौद्योगिकियों के उपयोग में नवाचारी
प्रमुख शब्द |
संप्रेषण, विस्तार, निगमित संप्रेषण, आंतरिक और बाह्य संप्रेषण, जनसाधारण का बोध, सूचना और संप्रेषण प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.), सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.), तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, उच्चारण निष्प्रभावन, श्रवण कौशल, बातचीत करने के कौशल, अंतर्वैयक्तिक कौशल, प्रस्तुतीकरण कौशल, संपर्क स्थापित करने के कौशल, जनसंपर्क, विज्ञापन, जनसाधारण बोध।
पुनरवलोकन प्रश्न
1. आज के समय में निगमित संप्रेषण का क्या महत्त्व है?
2. निगमित संप्रेषण के प्रकार्यों के नाम लिखिए।
3. आंतरिक और बाह्य संप्रेषणों की तुलना कीजिए।
4. संप्रेषण के कार्यक्षेत्र में क्रांति लाने वाले एक मात्र कारक का वर्णन कीजिए।
5. मौखिक और शब्दोत्तर कौशलों की सूची बनाइए और प्रत्येक वर्ग से किन्हीं तीन को संक्षिप्त रूप में समझाइए।
6. आज के जनसंपर्क के अर्थ और महत्त्व को समझाइए।
7. आपके विचार से जनसंपर्क के कौन से दो क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं और क्यों?
8. जनसंपर्क कार्य के सिद्धांत क्या हैं?
9. निगमित संप्रेषण, जनसंपर्क और संचार माध्यमों में परस्पर क्या संबंध है?
दत्तकार्य
1. निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित एक जनसंपर्क ऐजेंसी का केस अध्ययन तैयार कीजिए —
(i) ग्राहक की कंपनी में स्थिति का वर्णन
(ii) परिस्थिति को तय करने के लिए उद्देश्य बनाना
(iii) उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कार्य योजना का अध्ययन—
(क) लक्षित समूह की स्थिति का निर्धारण।
(ख) संदेश चयन
(ग) संचार माध्यम का चयन
(घ) सर्जनात्मकता और नवाचार
(ङ) संसाधन आकलन
(च) जन-शक्ति पुनरवलोकन
(iv) योजना के क्रियान्वयन और उसके बाद के परिणामों को समझना।
2. किसी पुस्तक/पत्रिका या किसी अन्य स्रोत से एक केस अध्ययन तैयार कीिजए।
संदर्भ
http://www.awpagesociety.com/site/resources/page_principles
http://www.abbyeagle.com/nlp/seminar–rapport.php