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Hamara Prayavaran

जल के बारे में सोचने पर आपके मस्तिष्क में क्या चित्र बनते हैं? आप नदी, जलप्रपात, वर्षा की रिमझिम, अपने नल के जल के बारे में सोचने लगते हैं... बच्चे वर्षा से भरे गड्ढे में कागज़ की नाव तैराकर बहुत खुश होते हैं। दोपहर तक गड्ढे में जमा जल गायब हो जाता है। वह जल कहाँ चला जाता है?


शब्दावली

थलशाला :

यह छोटे, घर के पौधे रखने का कृत्रिम आहाता होता है।


क्रियाकलाप 

अपनी थलशाला बनाएँ

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थलशाला

एक बड़े ज़ार के एक चौथाई भाग में मिट्टी भरकर उसे अच्छी तरह दबा दें। इसके ऊपर ह्यूमस की एक पतली परत लगाएँ। पहले सबसे बड़े पौधे लगाएँ तदुपरांत उसके चारों ओर छोटे पौधों को व्यवस्थित करें। इसमें जल की फुहार छिड़के ज़ार को बंद कर दें। पत्तियों एवं मिट्टी के द्वारा वाष्पित जल, संघनित होकर जल की बूँदों के रूप में नीचे गिरता है।


सूर्य के ताप के कारण जल वाष्पित हो जाता है। ठंडा होने पर जलवाष्प संघनित होकर बादलों का रूप ले लेता है। यहाँ से यह वर्षा, हिम अथवा सहिम वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरता है।

जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है, उस को जल चक्र कहते हैं (चित्र 5.1)।

हमारी पृथ्वी थलशाला के समान है। जो जल, शताब्दियों पूर्व उपस्थित था, वही आज भी मौज़ूद है। जिस जल का प्रयोग आज हम हरियाणा के खेत में सिंचाई के लिए कर 

रहे हैं, हो सकता है कि वह सैंकड़ों वर्ष पहले अमेज़न नदी में बहता हो।

अलवण जल के मुख्य स्रोत नदी, ताल, सोते एवं हिमनद हैं। महासागरों एवं समुद्रों का जल, लवणीय होता है। इसमें अधिकांश नमक-सोडियम क्लोराइड या खाने में उपयोग किया जाने वाला नमक होता है।

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चित्र 5.1 : जल चक्र


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चित्र 5.2 : विश्व – प्रमुख समुद्र, झीलें एवं नदियाँ

 जल का वितरण

हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी की सतह का तीन-चौथाई भाग जल से ढँका हुआ है। यदि धरती पर थल की अपेक्षा जल अधिक है, तो अनेक देशों में जल की कमी का सामना क्यों करना पड़ता है?

क्या पृथ्वी पर मौज़ूद संपूर्ण जल हमारे लिए उपलब्ध है? निम्नलिखित तालिका में जल वितरण का प्रतिशत दिया गया है।

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साधारण क्रियाकलाप द्वारा जल के वितरण को प्रदर्शित किया जा सकता है (क्रियाकलाप बॉक्स देखें)।


क्या आप जानते हैं ?

‘लवणता’ 1000 ग्राम जल में मौज़ूद नमक की मात्रा होती है। महासागर की औसत लवणता, 35 भाग प्रति हज़ार ग्राम है।


क्या आप जानते हैं ?

इजराइल के मृत सागर में 340 ग्राम प्रति लीटर लवणता होती है। तैराक इसमें प्लव कर सकते हैं, क्योंकि नमक की अधिकता इसे सघन बना देती है।


क्रियाकलाप

दो लीटर जल लें। मान लें, यह पृथ्वी की सतह पर जल की संपूर्ण मात्रा है। बर्तन से 12 चम्मच जल मापकर दूसरे कटोरे में रखें। बर्तन से जल निकालने के बाद शेष जल, लवणीय जल को दर्शाता है, जो महासागर एवं समुद्र में पाया जाता है। यह जल उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है। यह लवणीय जल (नमक युक्त) होता है।

कटोरेे में निकालकर रखा गया 12 चम्मच जल, पृथ्वी पर मौज़ूद संपूर्ण अलवण जल की मात्रा को दर्शाता है। चित्र में इस जल के वितरण को दर्शाया गया है। आप स्वयं देखें कि आप जल की कितनी मात्रा का उपभोग कर सकते हैं।

 

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अलवण जल का वितरण

जीवन के लिए जल अत्यधिक आवश्यक है। प्यासे होने पर केवल जल ही हमारी प्यास बुझा सकता है। एेसे में आपको क्या एेसा नहीं लगता कि लापरवाही से जल का उपयोग करने पर हम बहुमूल्य संसाधन को बरबाद करते हैं?

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जल हमारे लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

जल संरक्षण की कुछ विधियाँ सुझाइए

(क) अपने घर में (ख) स्कूल में


महासागरीय परिसंचरण

समुद्री तट पर नंगे पैर चलने से कुछ जादुई-सी अनुभूति होती है। पुलिन पर नम बालू, ठंडी पवन, समुद्री पक्षी, वायु में लवणीय गंध एवं लहरों का संगीत; सब कुछ सम्मोहित करने वाला प्रतीत होता है। ताल एवं झील के शांत जल के विपरीत महासागरीय जल हमेशा गतिमान रहता है। यह कभी शांत नहीं रहता है। महासागरों की गतियों को इस प्रकार वर्गीकृत कर सकते हैं जैसे–तरंगें, ज्वार-भाटा एवं धाराएँ।


क्या आप जानते हैं ?

22 मार्च ‘विश्व जल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जब जल संरक्षण की विभिन्न विधियों को प्रबलित किया जाता है।

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चित्र 5.3 : प्रशांत महासागर

तरंगें

समुद्र तट पर गेंद से खेलते समय जब गेंद जल में गिर जाती है, तो क्या होता है? यह दृश्य बहुत ही मनोरंजक होता है कि कैसे तरंगों के साथ गेंद तट पर वापस लौट आती है। जब महासागरीय सतह पर जल लगातार उठता और गिरता रहता है, तो इन्हें तरंगें कहते हैं।


क्या आप जानते हैं ?

जब समुद्री सतह पर पवन बहती है, तब तरंगें उत्पन्न होती हैं। जितनी ही तेज़ पवन बहती है, तरंगें भी उतनी ही बड़ी होती जाती हैं।

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चित्र 5.4 : तरंगें

तूफ़ान में तेज़ वायु चलने पर विशाल तरंगें उत्पन्न होती हैं। इनके कारण अत्यधिक विनाश हो सकता है। भूकंप, ज्वालामुखी उद्गार, या जल के नीचे भूस्खलन के कारण महासागरीय जल अत्यधिक विस्थापित होता है। इसके परिणामस्वरूप 15 मीटर तक की ऊँचाई वाली विशाल ज्वारीय तरंगें उठ सकती हैं, जिसे सुनामी कहते हैं। अब तक का सबसे विशाल सुनामी 150 मीटर मापा गया था। ये तरंगें 700 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं। 2004 के सुनामी से भारत के तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक विनाश हुआ था। सुनामी के बाद अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में इंदिरा प्वाइंट डूब गया था।


क्या आप जानते हैं ?

सुनामी जापानी भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ है– "पोताश्रय तरंगें" क्योंकि सुनामी आने पर पोताश्रय नष्ट हो जाते हैं।


सुनामी – पृथ्वी का तांडव

26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में सुनामी तरंगों अथवा पोताश्रय तरंगों के कारण अत्यधिक विनाश हुआ। ये तरंगें उस भूकंप का परिणाम थीं, जिसका अधिकेंद्र सुमात्रा की पश्चिमी सीमा पर था। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9.0 मापी गई थी। भारतीय प्लेट, बर्मा प्लेट के नीचे धँस गई थी और समुद्र तल में अकस्मात् गति उत्पन्न हो गई, इस कारण यह भूकंप आया। महासागरीय तल लगभग 10-20 मीटर तक विस्थापित हो गया और नीचे की दिशा में झुक गया। इस विस्थापन के कारण निर्मित अंतराल को भरने के लिए विशाल मात्रा में महासागरीय जल उसी ओर बहनेलगा। फलस्वरूप, दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया के समुद्री तटों से जल हटने लगा। भारतीय प्लेट के बर्मा की प्लेट के नीचे चले जाने पर जल वापस समुद्र तट की ओरलौटा। यह सुनामी लगभग 800 कि.मी./घंटे की गति से आया, जिसकी तुलना व्यावसायिक वायुयानों की गति से की जा सकती है और इसके परिणामस्वरूप हिंद महासागर के कुछ द्वीप पूर्णत: डूब गए। भारतीय सीमा का धुर दक्षिणी बिंदु, इंदिरा प्वाइंट जो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित पूरी तरह से डूब गया। जब सुमात्रा में भूकंप के अधिकेंद्र से तरंगें सुमात्रा की तरफ से अंडमान द्वीप समूह एवं श्रीलंका की ओर बढ़ीं, तरंगों की लंबाई कम हो गई। जल की गहराई भी कम होने के साथ-साथ इनकी गति भी 700-900 कि.मी./घंटे से 70 कि.मी./घंटे तक कम हो गई। समुद्र तट से सुनामी तरंगें 3 कि.मी. तक की गहराई तक गईं, जिनके फलस्वरूप 10,000 से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो गई और एक लाख से अधिक घर प्रभावित हुए। भारत मेंआंध्र प्रदेश के तटीय प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुदुच्चेरी तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सर्वाधिक प्रभावित हुए।

यद्यपि पहले से भूकंप का अनुमान लगाना संभव नहीं है, फिर भी बड़ी सुनामी के संकेत तीन घ्ांटे पहले मिल सकते हैं। प्रशांत महासागर में प्राथमिक चेतावनी की एेसीप्रणालियाँ क्रियाशील हैं, लेकिन हिंद महासागर में ये सुविधाएँ नहीं है। प्रशांत महासागर की तुलना में हिंद महासागर में सुनामी कभी-कभी ही आती हैं, क्योंकि यहाँ भूकंपी क्रिया बहुत कम होती है।

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तमिलनाडु के तट पर सुनामी द्वारा विनाश

दिसंबर 2004 में जिस सुनामी ने दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया के तटों पर तबाही मचाई वह पिछले कई सौ वर्षों की सर्वाधिक विनाशकारी सुनामी थी। हिंद महासागर में निरीक्षण, आरंभिक चेतावनी की प्रणालियों एवं हिंद महासागर के तटीय निवासियों में जागरूकता की कमी के कारण जीवन एवं संपत्ति की अत्यधिक क्षति हुई।
सुनामी आने का प्रथम संकेत यह होता है कि तटीय क्षेत्र से जल में तेजी से कमी आती है और फिर विनाशकारी तरंगें उठने लगती हैं। जब तट पर एेसा हुआ था, तो लोग ऊँचे स्थानों पर न जाकर उस अचंभे को देखने के लिए तट पर एकत्र होने लगे। इसके फलस्वरूप जब सुनामी की विशाल तरंग आई, तो बड़ी संख्या में उत्सुक खड़े दर्शकों की मृत्यु हो गई।


ज्वार-भाटा

दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना ‘ज्वार-भाटा’ कहलाता है। जब सर्वाधिक ऊँचाई तक उठकर जल, तट के बड़े हिस्से को डुबो देता है, तब उसे ज्वार कहते हैं। जब जल अपने निम्नतम स्तर तक आ जाता है एवं तट से पीछे चला जाता है, तो उसे भाटा कहते हैं।

सूर्य एवं चंद्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह पर ज्वार-भाटे आते हैं। जब पृथ्वी का जल चंद्रमा के निकट होता है उस समय चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से जल अभिकर्षित होता हैं, जिसके कारण उच्च ज्वार आते हैं। पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिनों में सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी तीनों एक सीध में होते हैं और इस समय सबसे ऊँचे ज्वार उठते हैं। इस ज्वार को बृहत् ज्वार कहते हैं। लेकिन जब चाँद अपने प्रथम एवं अंतिम चतुर्थांश में होता है, तो चाँद एवं सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशाओं से महासागरीय जल पर पड़ता है, परिणामस्वरूप, निम्न ज्वार-भाटा आता है। एेसे ज्वार को लघु ज्वार-भाटा कहते हैं।

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चित्र 5.5 : लघु ज्वार-भाटा एवं बृहत् ज्वार-भाटा

उच्च ज्वार नौसंचालन में सहायक होता है। ये जल-स्तर को तट की ऊँचाई तक पहुँचाते हैं। ये जहाज़ को बंदरगाह तक पहुँचाने में सहायक होते हैं। उच्च ज्वार मछली पकड़ने में भी मदद करते हैं। उच्च ज्वार के दौरान अनेक मछलियाँ तट के निकट आ जाती हैं। इसके फलस्वरूप मछुआरे बिना कठिनाई के मछलियाँ पकड़ पाते हैं। कुछ स्थानों पर ज्वार-भाटे से होने वाले जल के उतार-चढ़ाव का उपयोग विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।


क्रियाकलाप

एक बाल्टी को नल के पानी से तीन-चौथाई भरें। बाल्टी के एक ओर निमज्जन छड़ डालकर पानी को गर्म करें। दूसरी ओर फ्रिज से निकली बर्फ़ डालें। एक बूँद लाल स्याही डालकर संवहन की प्रक्रिया के द्वारा धारा के मार्ग का निरीक्षण कीजिए।


महासागरीय धाराएँ

महासागरीय धाराएँ, निश्चित दिशा में महासागरीय सतह पर नियमित रूप से बहने वाली जल की धाराएँ होती हैं। महासागरीय धाराएँ गर्म या ठंडी हो सकती हैं। सामान्यत: गर्म महासागरीय धाराएँ, भूमध्य रेखा के निकट उत्पन्न होती हैं एवं ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती हैं। ठंडी धाराएँ, ध्रुवों या उच्च अक्षांशों से उष्णकटिबंधीय या निम्न अक्षांशों की ओर प्रवाहित होती हैं। लेब्राडोर महासागरीय धाराएँ, शीत जलधाराएँ होेती हैं; जबकि गल्फस्ट्रीम गर्म जलधाराएँ होती हैं। महासागरीय धाराएँ, किसी क्षेत्र के तापमान को प्रभावित करती हैं। गर्म धाराओं से स्थलीय सतह का तापमान गर्म हो जाता है। जिस स्थान पर गर्म एवं शीत जलधाराएँ मिलती हैं, वह स्थान विश्वभर में सर्वोत्तम मत्स्यन क्षेत्र माना जाता है। जापान के आस-पास एवं उत्तर अमेरिका के पूर्वी तट इसके कुछ उदाहरण हैं। जहाँ गर्म एवं ठंडी जलधाराएँ मिलती हैं, वहाँ कुहरे वाला मौसम बनता है। इसके फलस्वरूप नौसंचालन में बाधा उत्पन्न होती है।

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चित्र 5.6 : महासागरीय धाराएँ

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1. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए–

(क) वर्षण क्या है?

(ख) जल चक्र क्या है?

(ग) लहरों की ऊँचाई प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?

(घ) महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?

(च) ज्वार-भाटा क्या हैं तथा ये कैसे उत्पन्न होते हैं?

(छ) महासागरीय धाराएँ क्या हैं?

2. कारण बताइए–

(क) समुद्री जल नमकीन होता है।

(ख) जल की गुणवत्ता का ह्रास हो रहा है।

3. सही () उत्तर चिह्नित कीजिए–

(क) वह प्रक्रम जिस में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागर, वायुमंडल एवं स्थल के बीच चक्कर लगाता रहता है?

(i) जल चक्र (ii) ज्वार-भाटा (iii) महासागरीय धाराए

(ख) सामान्यत: गर्म महासागरीय धाराएँ उत्पन्न होती हैं :

(i) ध्रुवों के निकट (ii) भूमध्य रेखा के निकट (iii) दोनों में से कोई नहीं

(ग) दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना कहलाता है?

(i) ज्वार-भाटा (ii) महासागरीय धाराएँ (iii) तरंगें

4. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए–

(क) कैस्पियन सागर (i) विशालतम झील

(ख) ज्वार-भाटा (ii) जल में आवधिक चढ़ाव एवं उतार

(ग) सुनामी (iii) तीव्र भूकंपी तरंगें

(घ) महासागरीय धाराएँ (iv) निश्चित मार्ग में प्रवाहित होने वाली जल-धाराएँ

(v) जल चक्र

5. आओ खेलें–

जासूस बनिए

(क) निम्नलिखित अँग्रेज़ी के प्रत्येक वाक्य में एक नदी का नाम ढूँढ़ें।

Example: Mandira, Vijayalakshmi and Surinder are my best friends

Answer: Ravi

(a) The snake charmer’s bustee, stables where horses are housed and the piles of wood, all caught fire accidentally. (Hint: Another name for River Brahmputra)

(b) The conference manager put pad, material for reading and a pencil for each participant. (Hint: A distributary on the Ganga-Brahmputra delta)

(c) Either jealousy or anger cause a person’s fall (Hint: Name of a juicy fruit!)

(d) Bhavani germinated the seeds in a pot (Hint: Look for her in West Africa)

(e) “I am a zonal champion now” declared the excited athlete. (Hint: The river that has the biggest basin in the world)

(f) The tiffin box rolled down and all the food fell in dusty pot holes. (Hint: Rises in India and journeys through Pakistan)

(g) Malini leaned against the pole when she felt that she was going to faint. (Hint: Her delta in Egypt is famous)

(h) Samantha mesmerised everybody with her magic tricks. (Hint: London is situated on her estuary)

(i) “In this neighbourhood, please don’t yell! Owners of these houses like to have peace”. Warned my father when we moved into our new flat”. (Hint: colour!)

(j) ‘Write the following words, Marc!’ “On”, “go”, “in”…….. said the teacher to the little boy in KG Class. (Hint: Rhymes with ‘bongo’)

Now make some more on your own and ask your classmates to spot the hidden name. You can do this with any name: that of a lake, mountains, trees, fruits, school items etc.

जासूसी करते रहिए

(ख) एटलस की सहायता से, 5(i) में खोजी गयी सभी नदियों को विश्व के रूपरेखा मानचित्र में बनाइए।