इकाई चार

पादप कार्यकीय (शरीर क्रियात्मकता)

अध्याय 11

पौधों में परिवहन

अध्याय 12

खनिज पोषण

अध्याय 13

उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

अध्याय 14

पादप में श्वसन

अध्याय 15

पादप वृद्वि एवं परिवर्धन

एक समय के पश्चात जैव संरचना का वर्णन एवं जीवित जैविकों की विभिन्नता (विवरण) का अंत दो अलग रूप में हुआ जो जीव विज्ञान में स्पष्ट रूप से परस्पर विरोधी परिप्रेक्ष्य के थेयह दो परिप्रेक्ष्य शुरूआती दौर पर जीवन स्वरूप एवं प्रतिभास के संगठन के दो स्तरों पर आधारित थाइसमें एक को जैव स्वरूप संगठन के स्तर पर वर्णित किया गया जबकि दूसरे को संगठन के कोशिकीय एवं अणु स्तर में वर्णित किया गयापरिणामस्वरूप पहला परिस्थिति-विज्ञान तथा इससे संबंधित विज्ञान के अंतर्गत था जबकि दूसरा शरीर विज्ञान एवं जैव-रसायन शास्त्र के रूप में स्थापित हुआपुष्पी पादपों में शरीर वैज्ञानिक प्रक्रमों का वर्णन एक उदाहरण के तौर पर है, जिसे इस खंड के अध्यायों में दिया गया हैपादपों में खनिज पोषण, प्रकाश-संश्लेषण, परिवहन, श्वसन तथा पादप वृद्वि एवं परिवर्धन को अंततः आण्विक भाषा में ही कोशिकीय कार्यविधि और यहाँ तक कि जैविक स्तर को संदर्भित किया गया हैजहाँ भी औचित्यपूर्ण पाया गया है, वहाँ पर पर्यावरण के संदर्भ में शरीर वैज्ञानिक प्रक्रम के संबंधों की भी चर्चा की गई हैI

मेलविन कैलविन का जन्म अप्रैल 1911 में मिनसोटा (यू.एस.ए.) में हुआ था और आपने मिनसोटा विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त कीआपने बर्कले की केलीफोर्निया यूनीवर्सिटी के रसायन शास्त्र के प्रोफेसर के पद पर सेवाएं प्रदान की I


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मेलविन कैलविन

(1911 - )

द्वितीय विश्व युद्व के ठीक बाद, जब पूरा विश्व हिरोशिमा-नागासाकी की विस्फोटक घटना से रेडियोधर्मिता के दुष्प्रभाव को देखकर दुःख से स्तब्ध था, तब मेलविन और उनके सहकर्मी ने रेडियोधर्मिता के लाभदायक उपयोगों को प्रकट कियाआपने जे.ए. बाशाम के साथ मिलकर C14 के साथ कार्बनडाइअॉक्साइड के लेबलप्रविध द्वारा कच्ची सामग्री जैसे कार्बनडाइअॉक्साइड जल एवं खनिजो जैसे तत्वों से तथा शर्करा रचना से ग्रीन प्लांट्स (हरित पादपों) में प्रतिक्रिया का अध्ययन किया थामेलविन ने प्रस्तावित किया कि पौधे प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं, जिसके लिए एक वर्णक अणुओं के संगठित एेरे (समूह) तथा अन्य तत्वों में एक इलेक्ट्रॉन को स्थानांतरित करते हैंप्रकाश-संश्लेषण में कार्बन के स्वांगीकरण के पाथवे के प्रतिचित्रण करने पर आपको 1961 में नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ

मेलविन के द्वारा स्थापित किए गए प्रकाश-संश्लेषण के सिद्वांत, आज भी, ऊर्जा एवं पदार्थो के लिए पुनः स्थापन योग्य संसाधनों के अध्ययन तथा सौर-ऊर्जा अनुसंधान में आधारभूत अध्ययनों के लिए भी उपयोग किया जाता हैं


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अध्याय 11

पौधों में परिवहन

11.1 परिवहन के माध्यम

11.2 पादप-जल संबंध

11.3 लंबी दूरी तक जल का परिवहन

11.4 वाष्पोत्सर्जन

11.5 खनिज पोषकों का उद्ग्रहण एवं परिवहन

11.6 फ्लोएम परिवहनः उद्गम से झुंड तक प्रवाह

क्या आपको कभी आश्चर्य नहीं हुआ है कि वृक्षों की सबसे ऊँची शिखर तक पानी कैसे पहुँचता है, या फिर इस बात के लिए कि पदार्थ एक कोशिका से दूसरी कोशिका की ओर कैसे बढ़ जाते हैं और ये पदार्थ समान प्रकार से एक दिशा में चलते हैं? क्या इन तत्वों को आगे बढ़ने के लिए उपापचयी ऊर्जा की आवश्यकता होती है? पेड़-पौधों को जंतुओं की अपेक्षा कहीं अधिक दूरी तक अणुओं को ले जाने की आवश्यकता होती है जबकि उनमें किसी प्रकार का परिवहन तंत्र नहीं होताजड़ों द्वारा ग्रहण किया गया पानी पौधों के सभी भागों तक पहुँचता है, जो बढ़ते हुए तने के अग्र भाग तक जाता हैपत्तियों द्वारा संपन्न प्रकाश-संश्लेषण के परिणामस्वरूप उत्पन्न उत्पाद भी पौधों के सभी अंगों तक पहुँचते हैं और मृदा की गहराई में अंतःस्थापित जड़ों के शीर्ष तक जाते हैंयह गतिशीलता लघु दूरी तक, कोशिका के अंदर या झिल्लिका के आर-पार और ऊतक के अंतर्गत एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक बनी रहती हैपेड़-पौधों में होने वाली इस परिवहन विधि को समझने के लिए, हमें सबसे पहले कोशिका की आधारभूत बनावट तथा पौधे की शरीर-रचना विज्ञान के बारे में मूल जानकारी को पुनः स्मरण करना होगा और इसके साथ ही साथ हमें विसरण, विभव एवं आयन के बारे में जानकारी भी प्राप्त करनी होगी I

जब हम पदार्थों के परिवहन की बात करते हैं तो सबसे पहले हमें यह पारिभाषित करना आवश्यक होता है कि हम किस प्रकार की गति और किन पदार्थों की चर्चा कर रहे हैंपुष्पीय पौधों में जिन पदार्थों का परिवहन होता है, उनमें जल, खनिज पोषक, कार्बनिक पोषक एवं पौधों के वृद्धि नियामक मुख्य हैंकम दूरी तक पदार्थों की गति, प्रसरण एवं साइटोप्लाजमिक धारा सक्रिय परिवहन की मदद से हो सकता हैलंबी दूरी के लिए परिवहन, संवहनीय तंत्र (जाइलम तथा फ्लाएेम) द्वारा संपन्न होता है और इसे स्थानांतरण कहा जाता है I

एक महत्त्वपूर्ण पहलू जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है; वह परिवहन की दिशा हैमूलीय पादपों में जाइलम परिवहन (पानी और खनिजों का) आवश्यक रूप से एक दिशात्मक अर्थात् मूल से तने तक होता हैकार्बनिक और खनिज पोषकों का परिवहन बहुदिशात्मक होता हैप्रकाश-संश्लेषिक पत्तियों द्वारा संश्लेषित कार्बनिक यौगिकों को
पौधे के सभी अंगों जिनमें भ्ांडार अंग भी सम्मिलित हैं, तक पहुँचाया जाता हैबाद में भंडार अंगों से इन्हें पुनः परिवहनित किया जाता हैजड़ों द्वारा खनिज पोषक तत्वों को जड़ों द्वारा ग्रहण करके उसे तने, पत्तियों एवं वृद्धि क्षेत्रों तक भेजा जाता हैजब किसी पौधे का कोई भाग जरावस्था को प्राप्त करता है तो उसे क्षेत्र के पोषकों को वापस लेकर वृद्धि करने वाले क्षेत्रों की ओर भेज दिया जाता हैहार्मोन या पादप वृद्धि नियामक तथा अन्य रसायन-उत्तेजक भी परिवहनित किए जाते हैं, यद्यपि इनकी मात्रा बहुत कम होती हैकई बार ये एक ध्रुवीय या एक दिशायी होते हैं और संश्लेषित स्थान से दूसरे भागों तक परिवहनित होते हैंअतः एक पुष्पीय पौधे में यौगिकों का आवामगन काफी जटिल (लेकिन संभवतः बहुत क्रमानुसार) और विभिन्न दिशाओं में होता हैप्रत्येक अंग कुछ पदार्थों को ग्रहण करता है तथा कुछ दूसरों को देता है I

11.1 परिवहन के माध्यम

11.1.1 विसरण

विसरण द्वारा गति निष्क्रिय होती है तथा यह कोशिका के एक भाग से दूसरे भाग तक या कोशिका से अन्य कोशिका तक कम दूरी तक या एेसा कह सकते हैं कि पत्तियों के अंतरकोशिकीय स्थान से बाह्य पर्यावरण तक कुछ भी हो सकती हैइसमें ऊर्जा का व्यय नहीं होताविसरण में अणु अनियमित रूप से गति करते हैं, परिणामस्वरूप पदार्थ उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र में जाते हैंविसरण एक धीमी प्रक्रिया है तथा वह जीवित तंत्र पर निर्भर नहीं करतीविसरण गैस द्रव में स्पष्ट परिलक्षित होती है जबकि ठोस में ठोस का विसरण कुछ अंश तक ही संभव हैपौधों के लिए विसरण अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पादप शरीर में गैसीय गति का यह अकेला माध्यम है

विसरण की दर सांद्रता की प्रवणता, उन्हें अलग करने वाली झिल्ली की पारगम्यता, ताप तथा दाब से प्रभावित होती है

11.1.2 सुसाध्य विसरण

जैसा पहले बताया गया है कि विसरण उत्पन्न करने के लिए प्रवणता का पहले से उपस्थित रहना अत्यंत आवश्यक हैविसरण की दर पदार्थों के आकार पर निर्भर करती हैयह तो पहले से ही स्पष्ट है कि लघु पदार्थ तेज गति से विसरण करते हैंकिसी भी पदार्थ का विसरण झिल्ली के प्रमुख सहभागी लिपिड (Lipid) में घुलनशीलता पर निर्भर करता हैलिपिड में घुलनशील पदार्थ झिल्लिका के माध्यम से तेजी से विसरित होते हैंजिस पदार्थ का अंश या मोइटी (Moiety) जलरागी होता हैवह झिल्लिका के आर-पार कठिनाई से गुजरता हैअतः उनकी गति को सुगम बनाने की आवश्यकता होती हैएेसे अणु को आर-पार करने के लिए झिल्लिका प्रोटीन स्थान उपलब्ध कराती हैवे सांद्रता प्रवणता स्थापित नहीं कर पाते, जबकि अणुओं के विसरण के लिए सांद्रता प्रवणता निश्चित तौर पर पहले से ही उपस्थित होनी चाहिए, भले ही उन्हें प्रोटीन से मदद मिल रही होयह प्रक्रिया ही सुसाध्य विसरण कहलाती है

सुसाध्य विसरण में पदार्थों को झिल्ली के आर-पार करने में विशिष्ट प्रोटीन मदद करती है और इसमें एटीपी ऊर्जा का भी व्यय नहीं होतासुसाध्य विसरण निम्न से उच्च सांद्रता में पूर्ण परिवहन नहीं कर सकता है, अतः इस कारण ऊर्जा निवेश की आवश्यकता होती हैपरिवहन की गति दर तब अधिकतम होती है जब प्रोटीन के सभी संवाहकों का प्रयोग पूर्णरूप से होसुसाध्य विसरण अति विशिष्ट होता हैयह कोशिकाओं को पदार्थों के उद्ग्रहण के लिए चयन करने की छूट प्रदान करता हैयह निरोधकों के प्रति संवेदनशील होता है, जो प्रोटीन की पार्श्व शृंखला से प्रतिक्रिया करती है

अणुओं को आर-पार जाने के लिए झिल्लिका में मौजूद प्रोटीन रास्ता बनाती हैकुछ रास्ते हमेशा खुले होते हैं तथा कुछ नियंत्रित हो सकते हैंकुछ बड़े होते हैं, जो विभिन्न प्रकार के अणुओं को पार जाने की छूट देते हैंपोरिन एक प्रकार की प्रोटीन है जो प्लास्टिड माइटोकोंड्रिया तथा बैक्टीरिया की बाह्य झिल्ली में बड़े आकार के छिद्रों का निर्माण करती है ताकि झिल्ली में से होकर प्रोटीन के छोटे साइज के अणु भी उसमें से गुजर सकें

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चित्र 11.1 सुसाध्य विसरण

चित्र 11.1 प्रदर्शित करता है कि बाह्यकोशिकीय अणु परिवहन प्रोटीन पर बंधित रहते हैं और यही परिवहन प्रोटीन बाद में घूर्णत होकर कोशिका के भीतर अणु को मुक्त कर देती हैउदाहरण के तौर पर जलमार्ग - जो आठ तरह के विभिन्न एक्वापोरिन से बना होता हैI

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11.1.2.1 निष्क्रिय सिमपोर्ट तथा एंटीपोर्ट

कुछ वाहक या परिवहन प्रोटीन विसरण की अनुमति तभी देते हैं, जब दो तरह के अणु एक साथ चलते हैंसिमपोर्ट में, दोनों अणु एक ही दिशा में झिल्लिका को पार करते हैं, जबकि एेंटीपोर्ट में वे उलटी दिशा में चलते हैं (चित्र 11.2)जब एक अणु दूसरे अणु से स्वतंत्र होकर झिल्लिका को पार करता है, तब इस विधि को यूनिपोर्ट कहते हैं


11.1.3 सक्रिय परिवहन

सक्रिय परिवहन सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध अणुओं को पंप करने में ऊर्जा का उपयोग करता हैसक्रिय परिवहन विशिष्ट झिल्लिका प्रोटीन द्वारा पूर्ण किया जाता हैअतः झिल्लिका के विभिन्न प्रोटीन सक्रिय तथा निष्क्रिय दोनों परिवहन में मुख्य भूमिका निभाते हैं पंप एक तरह का प्रोटीन है जो पदार्थों को झिल्लिका के पार कराने में ऊर्जा का प्रयोग करती हैये पंप प्रोटीन पदार्थों का कम सांद्रता से अधिक सांद्रता तक परिवहन करा सकते हैंपरिवहन की गति अधिकतम तब होती है जब परिवहन करने वाले सभी प्रोटीन का प्रयोग हो रहा हो या वह संतृप्त ही क्यों न होएंजाइमों की भांति वाहक प्रोटीन झिल्लिका के पार करने वाले पदार्थों के प्रति बहुत अधिक विशिष्ट होती हैंये प्रोटीन निरोधक के प्रति भी संवेदनशील होती है जो पार्श्व शृंखला से प्रतिक्रिया करते हैं


11.1.4 विभिन्न परिवहन विधियों की तुलना

तालिका 11.1 में भिन्न-भिन्न परिवहन तंत्र की तुलना की गई हैजैसा कि स्पष्ट हो चुका है कि झिल्लिका की प्रोटीन सुसाध्य विसरण एवं सक्रिय परिवहन के लिए उत्तरदायी होती है तथा इस प्रकार यह उच्च वर्णात्मक होने के सामान्य लक्षण जैसे संतृप्त होना, निरोधकों के प्रति अनुक्रिया तथा हार्मोनीय नियंत्रण प्रदर्शित करते हैंलेकिन विसरण चाहे सुसाध्य हो या नहीं, प्रवणता के अनुसार होता है तथा ऊर्जा का उपयोग नहीं करता I

तालिका 11.1 विभिन्न परिवहन तंत्रों की तुलना

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11.2 पादप-जल संबंध

पौधों के शारीरिक क्रियाकलाप के लिए जल अनिवार्य है और यह सभी जीवित प्राणियों के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता हैयह वह माध्यम उपलब्ध कराता है जिसमें सभी पदार्थ घुलनशील होते हैंजीव द्रव्य में हजारों तरह के अणु पानी में घुले होते हैं और निलंबित रहते हैंएक तरबूज के अंतर्गत 92 प्रतिशत से अधिक भाग पानी का होता है तथा ज्यादातर शाकीय पौधों में शुष्क पदार्थ केवल 10 से 15 प्रतिशत होता है, बाकी जल होता हैहालांकि यह बात बिल्कुल सच है कि एक पौधे में जल का वितरण भिन्न-भिन्न होता है, काष्ठ वाले भाग में थोड़ा कम होता है तथा नरम भाग में बहुत ज्यादा एक बीज सूखा सा दिख सकता है; परंतु फिर भी उसमें पानी की कुछ मात्रा होती है अन्यथा वह जीवित नहीं रहेगा और श्वसन भी नहीं करेगा

स्थलीय पौधे प्रतिदिन भारी मात्रा में पानी ग्रहण करते हैं; लेकिन पत्तियों से इनका अधिकतर भाग वाष्पोत्सर्जन द्वारा हवा में उड़ जाता हैमक्के का एक परिपक्व पौधा एक दिन में लगभग तीन लीटर पानी अवशोषित करता है जबकि सरसों का पौधा लगभग पांच घंटे में अपने वजन के बराबर पानी अवशोषित कर लेता हैपानी की इस उच्च मात्रा की मांग के कारण, यह आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कृषि एवं प्राकृतिक पर्यावरण में पौधे की वृद्धि एवं उत्पादकता को सीमित करने वाला सीमाकारी कारक प्रायः जल ही होता है I

11.2.1 जल विभव या जल अंतःशक्ति

पादप-जल संबंध की व्याख्या करने के लिए कुछ विशेष मानक शब्दों की समझ अध्ययन को आसान बना देती हैजल विभव जल की गति या परिवहन को समझने के लिए आधारभूत धारणा हैविलेय विभव या विलेय अंतःशक्ति तथा दाब विभव या दाब अंतःशक्ति जल विभव को सुनिश्चित करने वाले दो मुख्य कारक हैं I

जल के अणुओं में गतिज ऊर्जा पाई जाती हैद्रव तथा गैस की अवस्था में वे अनियमित गति करते हुए पाए जाते हैं, यह गति तीव्र तथा स्थिर दोनों तरह की हो सकती हैकिसी तंत्र में यदि अधिक मात्रा में जल हो तो उसमें अधिक गतिज ऊर्जा तथा जल विभव होगाअतः यह सुनिश्चित है कि शुद्ध जल में सबसे ज्यादा जल विभव होगायदि कोई दो अंतर्विष्ट जल तंत्र संपर्क में हाें तो पानी के अणु के अनियमित गति के कारण जल के वास्तविक गति की त्वरित गति ज्यादा ऊर्जा वाले भाग से कम ऊर्जा वाले भाग में होगीअतः पानी उच्च जल विभव वाले अंतर्विष्ट जल के तंत्र से कम जल विभव वाले तंत्र की ओर जाएगापदार्थ की गति की यह प्रक्रिया ऊर्जा की प्रवणता के अनुसार होती है और विसरण कहलाती हैजल विभव को ग्रीक चिन्ह Psi या Ψ से चिह्नित किया गया है और इसे पासकल्स जैसी दाब इकाई में व्यक्त किया गया हैपरंपरा के अनुसार शुद्ध जल के जल विभव को एक मानक ताप पर जो किसी दाब में नहीं है, पर शून्य माना गया है I

यदि कुछ विलेय शुद्ध जल में घोले जाते हैं, तो घोल में मुक्त पानी के अणु कम हो जाते हैंजल की सांद्रता (स्वतंत्र ऊर्जा) घट जाती है और जल विभव भी कम हो जाता हैइसीलिए सभी विलेयनों में शुद्ध जल की अपेक्षा जल विभव निम्न होता हैइस निम्नता का परिमाण एक विलेय के द्रवीकरण के कारण है जिसे विलेय विभव कहा जाता है (या Ψs) Ψs सदैव नकारात्मक होता है, जब विलेय के अणु अधिक होते हैं तो Ψs अधिक नकारात्मक होता है वायुमंडलीय दबाव पर विलेय या घोल का जल विभव Ψs = विलेय विभव Ψs होता है I

यदि घोल या शुद्ध जल पर वायुमंडलीय दबाव से अधिक दबाव लगाया जाए तो उसका जल विभव बढ़ जाता हैयह एक जगह से दूसरी जगह पानी पंप करने के बराबर होता हैक्या आप सोच सकते हैं कि हमारे शरीर के किस तंत्र में दाब निर्मित होता है? जब विसरण के कारण पौधे की कोशिका में जल प्रवेश करता है और वह कोशिका भित्ति की ओर बढ़ा देता है और कोशिका को स्फीत बना (फुला) देता है (चित्र 11.2)यह दाब विभव को बढ़ा देता हैदाब विभव ज्यादातर सकारात्मक होता हैहालाँकि पौधों में नकारात्मक विभव या जाइलम के जल खंड में तनाव एक तने में जल के परिवहन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता हैदाब विभव को Ψp से चिह्नित किया गया हैकोशिका का जल विभव, विलेय एवं दाब विभव दोनों ही से प्रभावित होता हैइन दोनों के बीच संबंध निम्न प्रकार से होता हैः

Ψs = Ψs + Ψp

11.2.2 परासरण

पौधे की कोशिका, कोशिका झिल्ली या एक कोशिका भित्ति से घिरी होती हैयह कोशिका भित्ति जल एवं विलयन में पदार्थों के लिए मुक्त रूप से पारगम्य होती हैअतः यह परिवहन या गति के लिए बाधक नहीं होती हैएक पौधे की कोशिकाओं में प्रायः एक केंद्रीय रसधानी होती है, जिसका रसधानीयुक्त रस कोशिका के विलेय विभव में भागीदारी करता हैपादप कोशिका में कोशिका झिल्ली तथा रसधानी की झिल्ली, टोनोप्लास्ट, दोनों एक साथ कोशिका के भीतर एवं बाहर अणुओं की गति निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैंI

परासरण विशेष रूप से एक विभेदक वर्णात्मक या पारगम्य झिल्लिका के आर-पार जल के विसरण के लिए संदर्भित किया जाता हैपरासरण स्वतः ही प्रेरित बल की अनुक्रिया से पैदा होता हैपरासरण की दिशा एवं गति दाब प्रवणता एवं सांद्रता प्रवणता पर निर्भर करती हैजल अपने उच्च रासायनिक विभव (या सांद्रता) से निम्न रासायनिक विभव में तब तक संचारित होता है जब तक कि साम्यता पर न पहुँच जाएसाम्यता पर दो कक्षों का जल विभव लगभग एक समान होना चाहिएI

आपने विद्यालय में पहले के चरणों में एक आलू का परासरणमापी (अॉस्मोमीटर) बनाया होगायदि आलू के कंद को पानी में रखा जाता है तो आलू के कंद की गुहा में रखा शर्करा का सांद्र घोल परासरण के द्वारा पानी को एकत्र कर लेता हैI

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चित्र 11.3 का अध्ययन करें, जिसमें दो कक्षों अ एवं ब में रखे गये विलयनों को भरकर वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा अलग-अलग किया गया है

(अ) किस कक्ष के घोल में एक निम्नतर जल विभव है?

(ब) किस कक्ष के घोल में निम्नतर विलेय विभव है?

(स) परासरण किस दिशा में संपन्न होगा?

(द) किस विलयन का उच्च विलेय विभव उच्चतर होगा?

(य) साम्यता के समय किस कक्ष में जल विभव निम्नतर होगा?

(र) यदि एक कक्ष में Ψ का मान -2000 kPa है और दूसरे में -1000 kpa है तो किस कक्ष में उच्चतर Ψ होगा?

आइए, एक दूसरे प्रयोग की चर्चा करें, जहां शर्करा के विलेयन को एक कीप में लिया गया है, जो एक बीकर में रखे गए पानी से वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा अलग है(चित्र 11.4)(आप इस प्रकार की झिल्लिका एक अंडे से प्राप्त कर सकते हैंआप अंडे के एक सिरे पर छोटा सा छेद करके सारा पीला एवं श्वेत पदार्थ (योल्क एवं एल्बूमिन) निकाल लें और फिर अंडे के कवच को कुछ घंटों के लिए तनु नमक के अम्ल (Hcl) में छोड़ देंअंडे का कवच घुल जाएगा और उसकी झिल्ली साबुत प्राप्त हो जाएगी) पानी कीप की ओर गति करेगा और कीप में घोल का स्तर बढ़ जाएगा यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक कि साम्यता की स्थिति नहीं आ जाती यदि किसी कारणवश, शर्करा झिल्ली के माध्यम से बाहर निकल आएं तब क्या कभी साम्यता की स्थिति आएगी?

कीप के ऊपरी भाग पर बाहरी दाब डाला जा सकता है ताकि झिल्लिका के माध्यम से कीप में पानी विसरित न होयह दाब पानी को विसरित होने से रोकता हैविलेय सांद्रता अधिक होने पर पानी को विसरित होने से रोकने के लिए अधिक दबाव की भी आवश्यकता होगीसंख्यात्मक आधार पर परासरण दाब परासरण विभव के बराबर होता है लेकिन इसका संकेत विपरीत होता हैपरासरण दबाव में प्रयुक्त दाब सकारात्मक होता है जबकि परासरण विभव नकारात्मक होता है

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चित्र 11.4 परासरण का एक प्रद्रर्शनएक कीप में शर्करा विलयन भर कर, पानी से भरे बीकर में उल्टा रखा गया है जिसका मुख अर्ध पारगम्य झिल्ली से बंद है(अ) जल झिल्ली को पार करते हुए विसरण से कीप के घोल कर स्तर बढ़ाएगा (जैसा की तीर के निशान दिखा रहे हैं) (ब) कीप में जल के बहाव को रोकने के लिए दाब का इस्तेमाल किया जा सकता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है

11.2.3 जीवद्रव्यकुंचन

पादप कोशिकाओं (या ऊतकों) में जल की गति के प्रति व्यवहार करना उसके आस-पास के घोल पर निर्भर करता हैयदि बाहरी घोल कोशिका द्रव्य के परासरण दाब को संतुलित करता है तो उसे हम समपरासारी कहते हैंयदि बाहरी विलेयन कोशिका द्रव्य से अधिक तनुकृत है तो उसे अल्पपरासरी कहते हैं और यदि बाहरी विलेयन बहुत अधिक सांद्रतायुक्त होता है तो इसे अतिपरासारी कहते हैंकोशिकाएं अल्पपरासारी घोल में फूलती हैं और अतिपरासारी में सिकुड़ती हैंI

जीवद्रव्यकुंचन तब होता है जब कोशिका से पानी बाहर गति कर जाए तथा पादप कोशिका की कोशिका झिल्ली सिकुड़कर कोशिका भित्ति से अलग हो जाती हैयह तब होता है, जब एक कोशिका (या ऊतक) को अतिपरासारी घोल में डाला जाता हैसबसे पहले जीवद्रव्य से पानी बाहर आता है फिर रसधानी सेजब कोशिका से विसरण द्वारा पानी निकल कर बाह्यकोशिका द्रव्य में जाता है, तब जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से अलग हो जाती है और इसे कोशिका का जीवद्रव्य कुंचन कहा जाता हैजल का परिवहन झिल्ली के आर-पार उच्चतर जल विभव क्षेत्र (अर्थात् कोशिका) निम्नतर जल विभव क्षेत्र में कोशिका के बाहर (चित्र 11.5) जाता है

जीवद्रव्यकुंचित कोशिका में कोशिका भित्ति एवं संकुचित जीवद्रव्य के बीच की जगह को कौन भरता है?

जब कोशिका (या ऊतकों) को समपरासारी घोल में रखा जाता है तो जल का कुल प्रभाव अंदर या बाहर की ओर नहीं होता है यदि बाह्य घोल जीवद्रव्य के परासारी दाब को संतुलित रखता है तो इसे समपरासारी कहते हैंकोशिकाओं में जब जल अंदर और बाहर समान रूप से प्रवाहित होता है तो कोशिकाएं साम्यावस्था में कही जाती हैं तब कोशिका को ढीला (फ्लोसिड) कहा जाता है I

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जीवद्रव्यसंकुचन की प्रक्रिया प्रायःप्रतिवर्ती होती हैजब कोशिकाओं को अल्परासारी घोल (उच्च जल विभव या जीवद्रव्य की तुलना में तनुकृत) विलेयन में रखा जाता है तो कोशिका में जल विसरित होता है और जीवद्रव्य को भित्ति के विरुद्ध दबाव बनाने का कारण बनता है जिसे स्फीति दाब कहा जाता हैपानी घुसने के कारण जीव द्रव्य द्वारा प्रकट किए गए कठोर भित्ति के विपरीत दाब को दाब विभव या Yp कहते हैंकोशिका भित्ति की दृढ़ता के कारण कोशिका नहीं फटती हैयह स्फीति दाब अंततः कोशिकाओं के विस्तार एवं फैलाव के लिए उत्तरदायी होता है

एक ढीली कोशिका का Ψp क्या होगा? 

पौधे के अलावा किस जीव में कोशिका भित्ति होती है?

11.2.4 अंतःशोषण

अंतःशोषण एक विशेष प्रकार का विसरण हैजब ठोस एवं कोलाइडस द्वारा पानी को अवशोषित किया जाता है तो इसके कारण उसके आयतन में विशाल रूप से वृद्धि होती हैअंतःशोषण के प्रतिष्ठित उदाहरणों में बीजों और सूखी लकड़ियों द्वारा जल का अवशोषण हैफूली हुई लकड़ी या काष्ठ के द्वारा पैदा किए गए दाब का प्रयोग आदि मानव द्वारा बड़ी चट्टानों एवं पत्थरों को तोड़ने के लिए किया जाता थायदि अंतःशोषण के द्वारा दाब नहीं होता तो नवोद्भिद खुली जमीन पर उभरकर नहीं आ पाते, वे संभवतः बाहर आकर स्थापित नहीं हो पाते I

अंतःशोषण भी एक प्रकार का विसरण है, क्योंकि जल की गति सांद्रण प्रवणता के अनुसार हैबीज या अन्य एेसी ही सामग्रियों में पानी लगभग नहीं के बराबर है अतः ये आसानी से जल का अवशोषण कर लेते हैंअवशोषक तथा अंतःशोषित होने वाले द्रव के बीच जल विभव प्रवणता आवश्यक हैइसके अतिरिक्त, कोई भी पदार्थ जो किसी भी द्रव को अंतःशोषित करता हो, अवशोषक और द्रव के बीच बंधुता होना पहली शर्त हैI

11.3 लंबी दूरी तक जल का परिवहन

प्रारंभिक अवस्था में आपने एक प्रयोग किया होगाइस प्रयोग के दौरान आपने रंगीन पानी में सफेद फूल सहित टहनी को डाला होगा तथा उसके रंग के परिवर्तन को भी देखा होगाटहनी के कटे छोर को कुछ घंटे तक घोल में रहने के बाद आपने निश्चित ही उस क्षेत्र को ध्यान से देखा होगा जिसमें से रंगीन पानी का परिवहन होता हैयह प्रयोग आसानी से दर्शाता है कि पानी के परिवहन का रास्ता संवहनी बंडल मुख्यतः जाइलम हैअब हम लोगों को और आगे बढ़ना हैपौधों में पानी तथा अन्य पदार्थों के परिवहन की प्रक्रिया को समझना है

लंबी दूरी तक पदार्थों का परिवहन केवल विसरण द्वारा नहीं हो सकता हैविसरण एक धीमी प्रक्रिया हैयह छोटी दूरी तक अणुओं को पहुँचाने में कारगर हैउदाहरण के लिए : एक प्रारूपिक पादप कोशिका (लगभग 50µm) के आर-पार अणु को गति करने के लिए लगभग 2.5s समय लगता हैइस दर पर आप क्या गणना कर सकते हैं कि पौधों के अंदर 1m की दूरी तय करने में अणुओं को विसरण के द्वारा कितना समय लगेगा?

बड़े एवं जटिल जीवों में बहुधा पदार्थों का परिवहन लंबी दूरी तक होता हैकभी-कभी उत्पादन या अवशोषण एवं संग्रहण के स्थान एक दूसरे से काफी दूर होते हैं, अतः विसरण एवं सक्रिय परिवहन काफी नहीं हैइसलिए विशिष्ट व्यापक दूरी का परिवहन तंत्र आवश्यक हो जाता है ताकि आवश्यक पदार्थ निश्चित रूप से तीव्र गति से पहुंच सकेंजल, खनिज तथा भोजन सामूहिक प्रणाली द्वारा परिवहन करते हैंसामूहिक या थोक प्रवाह में पदार्थों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन, दो बिंदुओं के बीच दाब की भिन्नता के परिणामस्वरूप होता हैसामूहिक प्रवाह की यह विशिष्टता है कि पदार्थ चाहे घोल हो या निलंबन नदी के प्रवाह की तरह ही बहता हैयह विसरण से भिन्न होता है, जहाँ पर विभिन्न पदार्थ अपनी सांद्रता प्रवणता के अनुसार स्वतंत्र रूप से परिवहनित किए जाते हैंथोक प्रवाह को तो घनात्मक जलीय दाब प्रवणता या ऋणात्मक जलीय दाब प्रवणता (जैसेः पुआल के द्वारा चूषण) के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है I

पदार्थों की पादपों के संवहनी ऊतकों के द्वारा थोक या सामूहिक गति को स्थानांतरण कहते हैंक्या आपको याद है कि जब आपने ऊँचे पादपों की जड़ों, तनों तथा पत्तियों के अनुप्रस्थ काट (क्रास सेक्शन) को देखा था और उसकी संवहनी प्रणाली का अध्ययन किया था? उच्च पादपों में बहुत ही उच्च विशेषीकृत संवहनी ऊतक - जाइलम और फ्लोएम होते हैंजाइलम मुख्य रूप से जल, खनिज लवणों, कुछ कार्बनिक नाइट्रोजन तथा हार्मोन को जड़ से वायवीय भाग तक स्थानांतरित करता हैफ्लोएम मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार के कार्बनिक एवं अकार्बनिक विलेयनों को पत्तियों से पादपों के विभिन्न भागों में स्थानांतरित करता है I

11.3.1 पौधे जल को कैसे अवशोषित करते हैं?

हम सभी जानते हैं कि जड़ें पेड़ों के लिए ज्यादातर जल को अवशोषित करती हैं, इसीलिए हम जल को मृदा में डालते हैं न कि पत्तियों परजल और खनिज तत्वों के अवशोषण की जिम्मेदारी विशेष रूप से मूल रोमों की होती है जो कि जड़ों के अग्र शीर्ष भाग पर लाखों की संख्या में पाए जाते हैंमूल रोम पतली भित्ति वाले होते हैं जो अवशोषण के लिए व्यापक रूप से क्षेत्र प्रदान करते हैंजल, खनिज-विलेय के साथ मूल रोम से होकर शुद्ध रूप से विसरण प्रक्रिया के द्वारा अवशोषित किया जाता हैएक बार जब मूल रोम द्वारा जल अवशोषित कर लिया जाता है तब वह जड़ों की गहरी पर्तों में दो भिन्न पथों से गति करता हैदो भिन्न पथ निम्न हैंः

एपोप्लास्ट पथ

सिमप्लास्ट पथ

एपोप्लास्ट निकटवर्ती कोशिका भित्ति का तंत्र हैजड़ों के अंतस्त्वचा में मौजूद कैस्पेरी पट्टी को छोड़कर पूरे पौधे में फैला रहता है (चित्र 11.6)जल का एपोप्लास्टिक परिवहन केवल अंतरकोशिकीय जगहों और कोशिकाओं की भित्ति में उत्पन्न होता हैएपोप्लास्ट के माध्यम से होने वाला परिवहन कोशिका झिल्ली को पार नहीं करता हैयह गति प्रवणता पर निर्भर करती है एपोप्लास्ट जल के परिवहन में कोई भी बाधा नहीं डालता है और जल परिवहन सामूहिक प्रवाह के माध्यम से होता रहता हैजैसे ही जल अंतरकोशिकी गुहा या वातावरण में वाष्पित होता है तो एपोप्लास्ट के सतत जल प्रवाह में तनाव उत्पन्न हो जाता हैअतः आसंजक एवं संशक्ति शीलता के कारण जल का सामूहिक प्रवाह होता है I

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सिमप्लास्टिक तंत्र अंतः संबंधित जीव द्रव्य का तंत्र हैपड़ोसी कोशिकाएं कोशिका लड़ी से जुड़ी होती हैं जो कि जीव द्रव्य तंतु तक विस्तृत रूप से फैली रहती हैंसिमप्लास्टिक परिवहन में जल कोशिकाओं के जीव द्रव्य के माध्यम से तथा अंतरकोशिकी परिवहन में यह जीव द्रव्य तंतु के माध्यम से आगे बढ़ता हैजल कोशिकाओं के अंदर कोशिका झिल्ली के माध्यम से प्रवेश करता है, अतः इस प्रकार का परिवहन अपेक्षाकृत धीमा होता हैसिमप्लास्टिक को परिवहन में कोशिका द्रव्यी प्रवाहन सहायता करता हैआप कोशिका द्रव्यी प्रवाहन को हाइड्रिला की पत्ती के कोशिका में देखा होगा, क्लोरोप्लास्ट का परिवहन प्रवाह के कारण आसानी से दिखाई पड़ सकता हैI

जड़ों में अधिकतर जल प्रवाह एपोप्लास्ट के माध्यम से उत्पन्न होता है चूँकि वल्कुट-कोशिकाएँ ढीली गठित होती है अतः जल की गति मेें किसी प्रकार का प्रतिरोध उत्पन्न नही होताहालाँकि वल्कुट की आंतरिक सीमा, सीमा अंतःत्वचा, पानी के लिए अप्रवेश्य होती हैएेसा सुवेरिनमय मैट्रिक्स के कारण होता है जिसे कैस्पेरी पट्टी कहा जाता हैपानी का अणु पर्त को भेदने के असमर्थ होता है, अतः इन्हें असुवेरिनमय कोशिका भित्ति क्षेत्र की ओर पुनः झिल्लिका के माध्यम से कोशिका के अंदर भेजा जाता हैइसके बाद जल सिमप्लास्ट के द्वारा गतिशील होता है और पुनः झिल्ली को पार करता है ताकि जाइलम कोशिकाओं तक पहुँच सकेजल की गति मूलपरत से अंतःकोशिका तक सिमप्लास्टिक होती हैयही एक रास्ता है जिससे पानी तथा अन्य विलेय वैस्कुलर सिलिंडर में प्रवेश करते हैंI

एक बार जाइलम माध्यम के भीतर पहुँचने पर जल पुनः कोशिकाओं के बीच तथा उसके आर-पार जाने के लिए स्वतंत्र हो जाता हैनई जड़ों में जल सीधे जाइलम वाहिकाओं या/और वाहिनिकाओं में प्रवेश करता है ये जीवन रहित नालियाँ हैं और एक प्रकार से एपोप्लास्ट का हिस्सा भी हैंमूल संवहनी तंत्र में जल तथा खनिज आयनों का मार्ग निम्न चित्र में संक्षेपीकृत किया गया है (चित्र 11.7)

कुछ पौधों में अतिरिक्त संरचनाएं जुड़ी होती हैं जो उन्हें जल (एवं खनिजों) के अवशोषण में मदद करती हैंमाइकोराइजा जड़ के साथ फफूँदी (कवक) का सहजीवी संगठन हैफफूँदी या कवक तंतु नई जड़ों के आस-पास नेटवर्क (बनाते) हैं या वे मूल कोशिका में प्रवेश कर जाते हैंकवक तंतु का एक बड़ा व्यापक तल क्षेत्र होता है जो भूमि से खनिज आयन एवं जल को मूल से अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेता हैये कवक जड़ को जल एवं खनिज उपलब्ध कराते हैं और बदले में जडें़ भी माइकोराइजी को शर्करा तथा नाइट्रोजन समाहित यौगिक प्रदान करते हैंकुछ पौधों का माइकोराइजा के साथ का अविकल्पी संबंध होते हैंउदाहरण के लिए माइकोराइजा की उपस्थिति के बिना चीड़ का बीज न तो अंकुरित हो सकता है और न ही स्थापित हो सकता हैI


11.3.2 पौधों में जल का ऊपर की ओर गमन

हमने अभी देखा कि पौधे मृदा से जल का केसे अवशोषण करते हैं और संवहनी ऊतकों में इसे कैसे पहुँचाते हैंअब हम यह जानने व समझने का प्रयास करेंगे कि जल पौधे के विभिन्न भागों तक कैसेे पहुँचता है यह जल का चलन क्रियाशील है या अभी भी निष्क्रिय है? चूँकि जल पेड़ के तने में गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध गति करता है तो इसके लिए ऊर्जा कौन देता है?

11.3.2.1 मूल दाब

जैसे कि मृदा के विभिन्न आयन सक्रियता के साथ जड़ों के संवहनी ऊतकों में परिवहनित होते हैं तो जल भी इसी प्रक्रिया का अनुसरण (अपनी विभव प्रवणता से) करता है तथा जाइलम के अंदर दाब बढ़ाता हैयह घनात्मक दाब ही मूल दाब कहलाता है और तने में कम ऊँचाई तक जल को ऊपर भेजने के लिए उत्तरदायी होता हैहम कैसे देख सकते हैं कि मूलदाब विद्यमान हैइसके लिए एक छोटा सा नरम तने वाला पौधा चुनें और जिस दिन वातावरण पर्याप्त आर्द्रता पूर्ण हो, उस दिन प्रातःकाल के समय तने के नीचे क्षैतिज दिशा में उसे तीखे ब्लेड से काट देंआप जल्द ही देखेंगे कि उस कटे हुए तने पर द्रव की कुछ मात्रा ऊपर की ओर उठ आती हैयह द्रव सकारात्मक मूल दाब के कारण आता हैयदि आप उस तने में एक रबर की पतली नली चढ़ा दें तो आप वास्तव में स्राव की दर माप सकते हैं और स्रावित द्रव के कारकों की संरचना जान सकते हैंमूल दाब का प्रभाव रात तथा सुबह के समय भी देखा जा सकता है, जब वाष्पीकरण की प्रक्रिया कम होती है और अतिरिक्त पानी घास के तिनकों की नोक पर विशेष छिद्रों से स्रावित जल बूंदों के रूप में लटकने लगता हैइस प्रकार द्रव के रूप में पानी का क्षय बिंदुस्राव (गटेशन) कहलाता है I

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चित्र 11.7 जल एवं आयन का सिंप्लास्टिक एवं एपोलास्टिक पथ तथा जड़ों में प्रवाह


जल परिवहन की कुल क्रिया में मूल दाब केवल एक साधारण दाब ही प्रदान कर पाता हैयह उच्च वृक्षों में जल के चलन में इसकी कोई बड़ी भूमिका नहीं होती हैमूल दाब का व्यापक योगदान जाइलम में पानी के अणुओं को निरंतर कड़ी के रूप में स्थापित रखने में हो सकती है जो कि अक्सर वाष्पोत्सर्जन के द्वारा पैदा किए गए वृहत् तनावों के कारण टूटती रहती हैअधिकांश जल को परिवहन करने में मूल दाब का कोई अर्थ नहीं हैअधिकतर पौधों की आवश्यकता वाष्पोत्सर्जनित खिंचाव से पूरी हो जाती है

11.3.2.2 वाष्पोत्सर्जन खिंचाव

प्राणियों की भांति पौधों में परिसंचरण तंत्र नहीं होता, इसके बावजूद, जाइलम के माध्यम से जल का ऊपरी बहाव पर्याप्त उच्च दर से, लगभग 15 मीटर प्रति घंटे तक हो सकता हैयह गति कैसे होती है? यह एक पेंचीदा सवाल आज तक सवाल ही बना हुआ हैपौधे के द्वारा पानी ऊपर की ओर ‘धकेला’ जाता है या फिर ऊपर से खींचा जाता हैअधिकतर शोधकर्ता सहमत हैं कि पौधों द्वारा पानी मुख्यतः खींचा जाता है और इसकी संचालन शक्ति पत्तियों में वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया का परिणाम हैइसे जल परिवहन का संयंजन-तनाव वाष्पोत्सर्जन खिंचाव मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता हैपरंतु इस वाष्पोत्सर्जन खिंचाव को कौन जनित कर रहा है?

पौधों में जल अस्थायी हैप्रकाश-संश्लेषण एवं वृद्धि के लिए पत्तियों में पहुँचने वाले पानी का एक प्रतिशत से भी कम प्रयोग किया जाता हैपानी की अधिकतर मात्रा पत्तियों से रंध्र द्वारा उड़ा दी जाती हैंजल की यही क्षति वाष्पोत्सर्जन कहलाती है

आपने पिछली कक्षाओं में वाष्पोत्सर्जन का अध्ययन एक स्वस्थ पादप को पॉलीथिन के अंदर रखकर और उसके अंदर की सतह पर जल की सूक्ष्म बूंदों का अवलोकन करके किया होगाआप पत्ती से पानी की इस कमी की प्रक्रिया को कोबाल्टक्लोराइड पेपर द्वारा कर सकते हैं, जिसका रंग पानी अवशोषित करने पर बदल जाता है

11.4 वाष्पोत्सर्जन (ट्रांसपिरेशन)

वाष्पोत्सर्जन, पौधों द्वारा जल का वाष्प के रूप में परिवर्तन तथा इससे उत्पन्न क्षति हैमुख्यतः यह पत्तियों में पाए जाने वाले रंध्रों से होता हैवाष्पोत्सर्जन में पानी का वाष्प बनकर उड़ने के अलावा अॉक्सीजन एवं कार्बनडाइअॉक्साइड का आदान-प्रदान भी पत्तियों में उपस्थित रंन्ध्रों के द्वारा होता है सामान्यतः ये रंध्र दिन में खुले रहते हैं और रात में बंद हो जाते हैंरंध्र का बंद होना और खुलना रक्षक कोशिकाओं के स्फीति (टरगर) में बदलाव से होता हैप्रत्येक रक्षक कोशिका की आंतरिक भित्ति रंध्रछिद्र की तरफ काफी मोटी एवं तन्यतापूर्ण होती हैरंध्र को घेरे दो रक्षक कोशिकाओं में जब स्फीति दाब बढ़ता है तो पतली बाहरी भित्तियाँ बाहर की ओर उभरती है और अंदरूनी भित्ति को अर्धचंद्राकार स्थिति में आने को मजबूर करती हैरंध्र छिद्र के खुलने में रक्षक कोशिका की भित्तियों में उपस्थित सूक्ष्म सूत्राभ (माइक्रोफिबरिल) भी सहायता करता हैसेलुलोज सूक्ष्मसूत्राभ का अभिविन्यास अरीय क्रम से होता है न कि अनुदैर्घ्य क्रम से, जो रंध्रछिद्र को आसानी से खोलता हैपानी की कमी होने पर जब रक्षक कोशिका की स्फीति समाप्त होती है (या जल तनाव खत्म होता है) तो तन्य आंतरिक भित्तियाँ पुनः अपनी मूल स्थिति में जाती हैं, तब रक्षक कोशिकाएँ ढीली पड़ जाती हैं और रंध्र छिद्र बंद हो जाते हैंसामान्य तौर पर एक पृष्ठधारी (प्रायःद्विबीजपत्री) पत्ती के निचली ओर अधिक संख्या में रंध्र होते हैं जबकि एक द्विपार्श्वीय (प्रायः एक बीजपत्री) पत्ती में रंध्रों की संख्या दोनों तरफ लगभग बराबर होती हैI

वाष्पोत्सर्जन कई बाहरी कारकों जैसे कि ताप, प्रकाश, आर्द्रता एवं वायु की गति से प्रभावित होता है-वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले अन्य पादप कारक जैसे कि रंध्रों की संख्या एवं वितरण, खुले रंध्रों का प्रतिशत, पौधों में पानी की उपस्थिति तथा वितान रचना आदि हैI

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जाइलम रस का वाष्पोत्सर्जित रूप से ऊपर चढ़ना मुख्य रूप से पानी के निम्न भौतिक गुणों पर निर्भर करता हैः

सासंजन - जल के अणुओं के बीच आपसी आकर्षण

आसंजन - जल अणुओं का ध्रुवीय सतह की ओर आकर्षण (जैसे कि वाहिकीय तत्वों की सतह)

पृष्ठ तनाव - पानी के अणु का द्रव अवस्था में गैसीय अवस्था की अपेक्षा एक दूसरे से अधिक आकर्षित होना

पानी की ये विशिष्टताएँ उसे उच्च तन्य सामर्थ्य प्रदान करती हैं, जैसे एक केशिकात्व खिंचाव शक्ति से प्रतिरोध की क्षमता तथा उच्च केशिकात्व अर्थात् किसी पतली नलिका में चढ़ने की क्षमतापौधों में केशिकात्व को लघुव्यास वाले वाहिकीय, तत्व जैसे ट्रैकीड एवं वाहिका तत्व से भी सहायता मिलती है

प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के लिए जल की आवश्यकता होती हैजाइलम वाहिकाएँ पानी को जरूरत के अनुसार जड़ से पत्ती की शिराओं तक पहुँचाती हैंलेकिन वह कौन सी शक्ति है, जो पानी के अणुओं को पत्ती के मृदूतक तक जरूरत के अनुसार खींच लाती हैंजैसे ही वाष्पोत्सर्जन होता है और चूँकि पानी की पतली परत कोशिकाओं के ऊपर लगातार होती है, अतः यह जाइलम से पत्ती तक पानी के अणुओं को खींचने में प्रतिफलित होता हैअधोरंध्री गुहिका तथा अंतरा कोशिका जगत के बजाय वातावरण में जलवाष्प की सांद्रता कम होती है, अतः पानी पास की हवा में विसरित हो जाता है और यह खिंचाव पैदा करता है (चित्र 11.9)मापन से स्पष्ट होता है कि वाष्पोत्सर्जन द्वारा पैदा किया गया बल पानी को जाइलम के आकार के स्तंभ में 130 मीटर की ऊँचाई तक खींचने के लिए पर्याप्त होता है

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11.4.1 वाष्पोत्सर्जन एवं प्रकाश-संश्लेषणः एक समझौता

वाष्पोत्सर्जन में एक से अधिक उद्देश्य निहित होते हैं जो कि निम्नलिखित हैंः

पौधों में अवशोषण एवं परिवहन के लिए वाष्पोत्सर्जन खिंचाव पैदा करना

प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के लिए पानी का संभरण

मृदा से प्राप्त खनिजों का पौधों के सभी अंगों तक परिवहन करना

पत्ती के सतह को वाष्पीकरण द्वारा 10 से 15 डिग्री तक ठंडा रखना

कोशिकाओं को स्फीत रखते हुए पादपों के आकार एवं बनावट को नियंत्रित रखना

एक सक्रिय प्रकाश-संश्लेषण में रत पौधे को जल की अत्यंत ही आवश्यकता रहती हैप्रकाश-संश्लेषण में उपलब्ध जल सीमाकारी हो सकता है, जिसे वाष्पोत्सर्जन और प्रभावित करता हैवर्षावनों में आर्द्रता इसी जल-चक्र के कारण वातावरण में तथा पुनः मृदा में देखी गई है

सी-4 (C4) प्रकाश-संश्लेषण तंत्र का क्रम-विकास, संभवतः कार्बन-डाइअॉक्साइड की उपलब्धता को बढ़ाने तथा पानी की क्षति को कम करने की रणनीति के तहत हुआ हैC4 पौधे, C3 की तुलना में कार्बन (शर्करा बनाने में) को सुस्थिर बनाने में दोगुना सक्षम होते हैंC4 पौधे C3 पौधे से समान मात्रा के कार्बन डाइअॉक्साइड के यौगिकीरण हेतु आधी मात्रा में जल को खोते (कम करता) हैं

11.5 खनिज पोषक का उद्ग्रहण एवं संचरण

पौधे अपनी कार्बन एवं अधिकतर अॉक्सीजन की आवश्यक मात्रा वातावरण में उपलब्ध कार्बन डाइअॉक्साइड से प्राप्त करते हैं; हालाँकि उनकी शेष पोषण की आवश्यकता हाइड्रोजन हेतु मृदा से प्राप्त जल तथा खनिजों से पूरी होती है

11.5.1 खजिन आयनों का उद्ग्रहण

जल के समान, सभी खनिज तत्व जड़ों द्वारा निष्क्रियता विधि द्वारा अवशोषित नहीं किए जा सकतेइसके लिए दो कारक जिम्मेदार होते हैं(i) मृदा के अंदर खनिजों का आवेशित रूप में रहना है जोकि कोशिका भित्ति को पार नहीं कर सकते हैं और (ii) मृदा के अंतर्गत खनिजों की सांद्रता, जड़ों के अंदर की सांद्रता से प्रायः कम होती हैइसीलिए अधिकतर खनिज जड़ों में बाह्य त्वचा की कोशिकाओं की कोशिका द्रव्य में सक्रिय अवशोषण के द्वारा प्रवेश करते हैंइसमें एटीपी के रूप में ऊर्जा की आवश्यकता होती हैआयन का सक्रिय उद्ग्रहण मूल में जल विभव प्रवणता के लिए अंशतः जिम्मेदार होता है, अतः परासरण द्वारा जल के प्रवेश के लिए भी कुछ आयन बाह्य त्वचा कोशिका में निष्क्रिय रूप से भी संचलन करते हैंमूल रोम कोशिका की झिल्ली में पाए जाने वाले विशिष्ट प्रोटीन, आयन को मृदा से सक्रिय पंप द्वारा बाह्य त्वचा की कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य में भेजती हैंसभी कोशिकाओं की भांति अंतःत्वचा में भी कोशिका की झिल्ली में कई परिवहन प्रोटीन पाए जाते हैंवे कुछ विलेय को झिल्ली के आर-पार आने जाने देते हैं लेकिन अन्य को नहींअंतःत्वचा की कोशिकाओं के परिवहन प्रोटीन नियंत्रण बिंदु होते हैं, जहाँ पौधे विलेय की मात्रा एवं प्रकार को जाइलम में पहुँचाते हैं तथा समायोजित करते हैं यहाँ ध्यान दें कि मूल अंतःत्वचा में सुबेरित की पट्टी होने के कारण एक दिशा में ही सक्रिय परिवहन करने की क्षमता होती है

11.5.2 खनिज आयनों का स्थानांतरण

जब आयन सक्रिय या निष्क्रिय उद्ग्रहण से या फिर दोनों की सम्मिश्रित प्रक्रिया के माध्यम से जाइलम में पहुँच जाते हैं, तब उनका परिवहन पादप तने एवं सभी भागों तक वाष्पोत्सर्जन प्रवाह के माध्यम से होता है I

खनिज तत्वों के लिए मुख्य कुंड पौधों की वृद्धि का क्षेत्र होता है जैसे कि शिखाग्र एवं पार्श्व विभाज्योतक, तरुण-पत्तियाँ, विकासशील फूल, फल एवं बीज तथा भंडारण अंगखनिज आयनों का विसर्जन महीन शिराओं के अंतिम छोर पर कोशिकाओं के द्वारा विसरण एवं सक्रिय उद्ग्रहण से होता है I

खनिज आयनों को जल्दी ही पुनःसंघटित विशेष रूप से पुराने जरावस्था वाले भाग से किया जाता हैपुरानी तथा मरती हुई पत्तियाँ अपने भीतर के खनिजों को नई पत्तियों में निर्यातित कर देती हैंठीक इसी प्रकार से पत्तियाँ पर्णपाती वृक्ष से झड़ने के पहले अपने खनिज तत्वों को अन्य भागों को दे देती हैंजो पदार्थ प्रायः त्वरित संचारित या संघटित होते हैं; वे हैं फॉस्फोरस, सल्फर, नाइट्रोजन तथा पोटैशियमकुछ तत्व जो कि संचरनात्मक कारक होते हैं, जैसे कि कैल्सियम, इन्हें पुनःसंघटित नहीं किया जाता है जाइलम स्राव का विश्लेषण यह दर्शाता है कि कुछ नाइट्रोजन अकार्बनिक आयनों के रूप में तथा इसका अत्यधिक भाग कार्बनिक एमिनो अम्ल तथा संबंधित कारकों के रूप में ढोए जाते हैंइसी तरह फॉस्फोरस एवं सल्फर भी कार्बनिक यौगिकों के रूप में पहुँचाए जाते हैंइसके अलावा जाइलम एवं फ्लोएम के बीच भी पदार्थों का आदान-प्रदान होता हैअतः हम स्पष्ट रूप से अंतर नहीं कर पाते कि जाइलम केवल अकार्बनिक पोषकों का परिवहन करता है तथा फ्लोएम कार्बनिक पदार्थों का, जैसा कि पहले विश्वास किया जाता था I

11.6 फ्लोएम परिवहनः उद्गम से कुंड की ओर प्रवाह

आहार मुख्यतः शर्करा वाहिका ऊतक के फ्लोएम द्वारा उद्गम से कुड की ओर परिवहनित किया जाता हैसामान्यतः स्रोत को पौधे का वह हिस्सा माना जाता है जहाँ आहार संश्लेषित होता है, जैसे कि पत्तियाँ और कुंड (सिंक)यह वह भाग है, जहाँ भोजन एकत्र होता हैलेकिन यह स्रोत और कुंड अपनी भूमिकाएँ मौसम एवं जरूरत के अनुसार बदल भी सकते हैंजड़ों में एकत्र की गई शर्करा वसंत के आरंभ में आहार का स्रोत बन जाती हैइस समय पादपों पर नई कलियाँ कुंड का काम करती हैं प्रकाश-संश्लेषण साधनों की वृद्धि एवं परिवर्धन हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती हैचूँकि स्रोत और कुंड का संबंध परिवर्तनशील है, अतःगति की दिशा ऊपर या नीचे की ओर अर्थात् दोतरफा हो सकती हैजाइलम के साथ यह विपरीत है, जहाँ गति सदैव नीचे से ऊपर की ओर एक दिशा में होती हैयद्यपि, वाष्पोत्सर्जन का जल एकतरफा प्रवाह करता है किंतु फ्लोएम के रस में भोजन का परिवहन सभी दिशाओं में हो सकता है जब तक स्रोत और कुंड शर्करा का उपयोग संग्रहण तथा अपादान में सक्षम हों I

फ्लोएम रस में मुख्यतः जल और शर्करा होता है, लेकिन अन्य शर्कराएँ, हार्मोन तथा एमीनो अम्ल आदि भी फ्लोएम के द्वारा स्थानांतरित होते हैं

11.6.1 दाब प्रवाह या सामूहिक प्रवाह परिकल्पना

स्रोत से कुंड की ओर शर्करा के स्थानांतरण के लिए आवश्यक स्वीकृत क्रियाविधि को दाब प्रवाह परिकल्पना कहते हैं (चित्र 11.10) जैसे ही स्रोत पर ग्लूकोज (प्रकाश-संश्लेषण द्वारा) संश्लेषित होता है, शर्करा (एक डाइसैकेराइड) में बदल दिया जाता हैइसके बाद यह शर्करा सखी कोशिकाओं में तथा बाद में सक्रिय परिवहन द्वारा जीवंत फ्लोएम चालन नलिका कोशिका में संचरित होती है स्रोत पर लदान (लोडिंग) की यह प्रक्रिया फ्लोएम में एक अतिपरासारी अवस्था को पैदा कर देता है I

निकटवर्ती जाइलम जल परासरण के द्वारा फ्लोएम में चला जाता हैजब परासरणी दाब फ्लोएम में बनता है तो फ्लोएम रस निम्न दाब के क्षेत्र में चला जाता हैकुंड पर परासरणी दबाव निश्चित रूप से घटना चाहिएएक बार फिर फ्लोएम रस से शर्करा को बाहर करने तथा उस कोशिका तक जहाँ शर्करा ऊर्जा, स्टार्च या सेलुलोज में बदलती है, ले जाने के लिए सक्रिय परिवहन आवश्यक होता हैजैसे ही शर्कराएँ हटती हैं, परासरणी दाब घटता है और जल फ्लोएम से बाहर चला जाता है I

सारांश में फ्लोएम शर्कराओं का परिवहन स्रोत से शुरू होता है, जहाँ शर्कराओं को एक चालानीनलिका में (सक्रिय परिवहन द्वारा) लादा जाता हैफ्लोएम की यह लदान एक जल विभव प्रवणता की शुरूआत करता है जो कि फ्लोएम में सामूहिक प्रवाह को सुगम बनाता है I

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चित्र 11.10 स्थानांतरण की प्रक्रिया की आरेखीय प्रस्तुति

फ्लोएम ऊतक सीव ट्यूब कोशिकाओं (चालानी नलिका कोशिका) से बना होता है जो लंबी स्तंभ की रचना करता है, जिसके अंतिम भित्ति में छिद्र होता है, जिन्हें चालनी पट्टिका कहते हैं कोशिका द्रव्यी तंतु चालनी पट्टिका के छिद्र में प्रवेशित होती है तथा सतत तंतु बनाती है जैसे ही द्रवस्थैतिक दबाव फ्लोएम के चालनी नलिका में बढ़ता है दाब प्रवाह शुरू हो जाता है तथा द्रव (रस) फ्लोएम से चलन करता हैइस बीच कुंड पर आने वाले शर्करा को फ्लोएम से सक्रिय रूप से तथा शर्करा के रूप में बाहर किया जाता हैफ्लोएम में विलेय की क्षति से एक उच्च जल विभव पैदा होता है और पानी अंत में जाइलम के पास आ जाता है I

एक साधारण प्रयोग, जिसे गिर्डलिंग कहा जाता है, उसका प्रयोग भोजन के परिवहन में होने वाले ऊतक को पहचानने में किया गयापेड़ के स्तंभ पर छाल का एक वलय (रिंग) फ्लोएम तक सावधानीपूर्वक हटाया जाता हैनीचे की तरफ अब भोजन की गति न होने के कारण वलय के ऊपर की छाल कुछ सप्ताह के बाद फूल जाती हैयह साधारण प्रयोग दर्शाता है कि फ्लोएम ऊतक भोजन के स्थानांतरण के लिए उत्तरदायी है तथा परिवहन की दिशा एकदिशीय है, अर्थात् मूल की तरफइस प्रयोग को आसानी से किया जा सकता है I


सारांश

पौधे विभिन्न अकार्बनिक तत्वों (आयन) एवं लवणों को अपने आस-पास के पर्यावरण से, विशेषकर, हवा, पानी तथा मृदा से लेते हैंइन पोषकों की गति पर्यावरण से पौधों में, तथा एक पौधे की कोशिका से दूसरे पौधे की कोशिका तक, आवश्यक रूप से झिल्ली के आर-पार परिवहन के द्वारा होती हैकोशिका झिल्ली के आर-पार परिवहन, विसरण, सुसाध्य परिवहन या सक्रिय परिवहन के द्वारा होता हैमूल के द्वारा अवशोषित खनिज एवं पानी को जाइलम के द्वारा संचारित किया जाता है तथा पत्तियों के द्वारा संश्लेषित कार्बनिक पदार्थ पादप के विभिन्न भागों में फ्लोएम के द्वारा परिवहन किए जाते हैं

निष्क्रिय परिवहन (विसरण, परासरण) तथा सक्रिय संचरण, जीवों में पोषकों को झिल्लिकाओं के आर-पार संचरित करने के दो तरीके हैंनिष्क्रिय परिवहन में विसरण के द्वारा झिल्ली के आर-पार बिना ऊर्जा व्यय किए पोषकों की गति सांद्रता प्रवणता के अनुसार होती है पदार्थों का विसरण आकार तथा उसके जल में या कार्बनिक विलेयन में घुलनशीलता पर निर्भर करता हैपरासरण एक विशेष प्रकार का विसरण है, जिसमें जल वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली के पार जाता है तथा दाब एवं सांद्रता प्रवणता पर निर्भर करता हैसक्रिय परिवहन में एटीपी की ऊर्जा, अणुओं को सांद्रण प्रवणता के विरूद्ध झिल्ली के पार पंप करती हैजल विभव पानी की स्थितिज ऊर्जा है जो जल के अणुओं की गति में सहायता करती हैयह विलेय अंतःशक्ति तथा दाब अंतःशक्ति द्वारा निर्धारित होती हैकोशिका का यह परासरणीय व्यवहार आस-पास के विलेयनों पर निर्भर करता हैयदि कोशिका के आस-पास का विलयन अतिपरासारी है तो जीवद्रव्य कुंचित हो जाता हैबीजों एवं शुष्क काष्ठों द्वारा जल का अवशोषण विशेष प्रकार के विसरण से होता है जिसे अंतःशोषण कहते हैं

उच्च पौधों में, वाहिका तंत्र जाइलम और फ्लोएम स्थानांतरण के लिए उत्तरदायी होता हैजल खनिज तथा पोषक पादप शरीर के अंदर केवल विसरण द्वारा संचारित नहीं हो सकते हैं, इसलिए ये सामूहिक प्रवाह तंत्र द्वारा संचरित होते हैंतत्वों का सामूहिक रूप में एक जगह से दूसरी जगह परिवहन दो बिंदुओं के बीच दाब के अंतर के कारण होता है

मूल रोमों द्वारा अवशोषित जल जड़ों की गहराई में दो अलग-अलग पथों से जाता हैउदाहरणार्थ - एपोप्लास्ट तथा सिमप्लास्टमृदा से विविध आयन तथा जल तने की कम ऊँचाई तक मूलदाब से परिवहित किए जाते हैंवाष्पोत्सर्जन खिंचावमंडल पानी के परिवहन का सर्वाधिक स्वीकृत रूप हैवाष्प के रूप में पादप के विभिन्न भागों द्वारा पानी का क्षय रंध्रों द्वारा होता हैताप, प्रकाश, आर्दΡता, वायु की गति वाष्पोत्सर्जन की दर को प्रभावित करती हैपानी की अधिक मात्रा पादप की पत्तियों के शीर्ष से बिंदुस्राव के द्वारा निकाला जाता हैपादपों में भोजन मुख्यतः शर्करा का परिवहन उद्गम से कुंड तक के लिए फ्लोएम जिम्मेवार होता हैफ्लोएम में स्थानांतरण द्विदिशायी होता है तथा उद्गम तथा कुंड संबंध वैविध्यपूर्ण होते हैंफ्लोएम में स्थानांतरण दाब-प्रवाह परिकल्पना के द्वारा वर्णित किया गया है

अभ्यास

1. विसरण की दर को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

2. पोरीन्स क्या है? विसरण में ये क्या भूमिका निभाते हैं?

3. पादपों में सक्रिय परिवहन के दौरान प्रोटीन पंप के द्वारा क्या भूमिका निभाई जाती है, व्याख्या करें?

4. शुद्ध जल का सबसे अधिक जल विभव क्यों होता है, वर्णन करें?

5. निम्न के बीच अंतर स्पष्ट करेंः-

(क) विसरण एवं परासरण (ख) पाष्पोत्सर्जन एवं वाष्पीकरण

(ग) परासारी दाब तथा परासारी विभव (घ) विसरण एवं अंतःशोषण

(च) पादपों में पानी के अवशोषण का एपोप्लास्ट और सिमप्लास्ट पथ

(छ) बिंदुस्राव एवं परिवहन (अभिगमन)

6. जल विभव का संक्षिप्त वर्णन करेंकौन से कारक इसे प्रभावित करते हैं? जल, विभव, विलेय विभव तथा दाब विभव के आपसी संबंधों की व्याख्या करें

7. तब क्या होता है जब शुद्ध जल या विलेयन पर पर्यावरण के दाब की अपेक्षा अधिक दाब लागू किया जाता है?

8. (क) रेखांकित चित्र की सहायता से पौधों जीवद्रव्य कुंचन की विधि का वर्णन उदाहरण देकर करें

(ख) यदि पौधे की कोशिका को उच्च जल विभव वाले विलेयन में रखा जाए तो क्या होगा?

9. पादप में जल एवं खनिज के अवशोषण में माइक्रोराइजलीय (कवकमूल सहजीवन) संबंध कितने सहायक हैं?

10. पादप में जल परिवहन हेतु मूलदाब क्या भूमिका निभाता है?

11. पादपों में जल परिवहन हेतु वाष्पोत्सर्जन खिंचावमंडल की व्याख्या करेंवाष्पोत्सर्जन क्रिया को कौन सा कारक प्रभावित करता है, पादपों के लिए कौन उपयोगी है?

12. पादपों में जाइलम रसारोहण के लिए जिम्मेदार कारकों की व्याख्या करें

13. पादपों में खनिजों के अवशोषण के दौरान अंतःत्वचा की आवश्यक भूमिका क्या होती है?

14. जाइलम परिवहन एकदिशीय तथा फ्लोएम परिवहन द्विदिशीय होता है? व्याख्या करें

15. पादपों में शर्करा के स्थानांतरण के दाब प्रवाह परिकल्पना की व्याख्या कीजिए

16. पाष्पोत्सर्जन के दौरान रक्षकद्वार कोशिका खुलने एवं बंद होने के क्या कारण हैं?