मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव
प्रस्तावना
8.1 घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव
8.2 औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव
8.3 वाहितमल उपचार में सूक्ष्मजीव
8.4 बायोगैस के उत्पादन में सूक्ष्मजीव
8.5 जैव नियंत्रण कारक के रूप में सूक्ष्मजीव
8.6 जैव उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव
असूक्ष्म पादपों तथा प्राणियों के अतिरिक्त इस पृथ्वी पर जीव विज्ञानी तंत्र के प्रमुख घटक सूक्ष्मजीव हैं। कक्षा 11 में आपने जीवित जीवों में पाई जाने वाली विविधता के बारे में अध्ययन किया होगा। क्या आपको याद है; जीवित जीवों में कौन से जगत के अंतर्गत सूक्ष्मजीवी जीव आते हैं? वे कौन से जीव हैं, जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शीय माना जाए? सूक्ष्मजीव सर्वव्यापी होते हैं। यह मृदा, जल, वायु, हमारे शरीर के अंदर तथा अन्य प्रकार के प्राणियों तथा पादपों में पाए जाते हैं। जहाँ किसी प्रकार जीवन संभव नहीं है जैसे — गीज़र के भीतर गहराई तक (तापीय चिमनी) जहाँ ताप 100OC तक बढ़ा हुआ रहता है, मृदा में गहराई तक, बर्फ की पर्तों के कई मीटर नीचे तथा उच्च अम्लीय पर्यावरण जैसे स्थानों पर भी पाए जाते हैं। सूक्ष्मजीव विविध रूपायित- प्रोटोजोआ, जीवाणु, कवक तथा सूक्ष्मदर्शीय पादपों एवं प्राणियों से होते हैं। विषाणु, विरायड तथा प्रायोन भी प्रोटीनीय संक्रमित कारक हैं। कुछ सूक्ष्मजीवियों को चित्र 8.1 तथा 8.2 में दिखाया गया है।
जीवाणु तथा अधिकांश कवकों के समान सूक्ष्मजीवियों को पोषक मीडिया (माध्यमों) पर उगाया जा सकता है, ताकि वृद्धि कर यह कालोनी का रूप ले लें और इन्हें नग्न नेत्र से देखा जा सके (चित्र 8.3)। एेसे संवर्धनजन सूक्ष्मजीवियों पर अध्ययन के दौरान काफी लाभदायक होते हैं।
चित्र 8.3 (अ) पैट्री प्लेटों में वृद्धि कर रही जीवाणुओं की कालोनियाँ (ब) पैट्री प्लेटों में वृद्धि कर रही कवकीय कालोनियाँ
इस पुस्तक के 8वें अध्याय में, आपने पढ़ा होगा कि सूक्ष्मजीवी मनुष्यों में बहुत से रोग उत्पन्न करते हैं। ये पशुओं तथा पादपों में भी रोग उत्पन्न करते हैं; परंतु इससे आपको यह नहीं समझ लेना चाहिए कि सभी सूक्ष्मजीव हानिप्रद हैं। अधिकांशतः सूक्ष्मजीव मनुष्यों के लिए कई प्रकार से लाभप्रद हैं। मानव कल्याण के प्रति सूक्ष्मजीवों के कुछ अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदानों पर निम्नलिखित पृष्ठाें में परिचर्चा की गई है।
8.1 घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हम प्रतिदिन सूक्ष्मजीवियों अथवा उनसे व्युत्पन्न उत्पादों का प्रयोग करते हैं। इसका सामान्य उदाहरण दूध से दही का उत्पादन है। सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टोबैसिलस तथा अन्य जिन्हें सामान्यतः लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (एल ए बी) कहते हैं; दूध में वृद्धि करते हैं और उसे दही में परिवर्तित कर देते हैं। वृद्धि के दौरान लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया अम्ल उत्पन्न करता है जो दुग्ध प्रोटीन को स्कंदित तथा आंशिक रूप में पचा देता है। दही की थोड़ी सी मात्रा निवेश द्रव्य अथवा आरंभक के रूप में ताजे दूध में मिलाया जाता है। इस निवेशद्रव्य में लाखों-करोड़ों की संख्या में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया होते हैं जो उपयुक्त ताप पर कई गुना वृद्धि करते हैं और परिणामस्वरूप दूध को दही में बदल देते हैं। इतना ही नहीं; विटामिन बी 12 की मात्रा बढ़ने से पोषण संबंधी गुणवत्ता में भी सुधार हो जाता है। हमारे पेट में भी, सूक्ष्मजीवियों द्वारा उत्पन्न होने वाले रोगों को रोकने में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया एक लाभदायक भूमिका का निर्वाह करते हैं।
दाल-चावल का बना ढीला-ढाला आटा जिसका प्रयोग ‘डोसा’ तथा ‘इडली’ जैसे आहार को बनाने में किया जाता है। वह भी बैक्टीरिया द्वारा किण्वित होता है? इस आटे की फूली उभरी शक्ल CO2 गैस के उत्पादन के कारण होती है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन सा उपापचयी पथ CO2 के निर्माण में कार्य कर रहा है? क्या आप जानते हैं कि किण्वन की क्रिया के लिए यह बैक्टीरिया कहाँ से आ रहे हैं। ठीक इसी प्रकार ढीला-ढाला आटा जिसका प्रयोग ब्रैड बनाने में किया जाता है उसमें बैकर यीस्ट (सैकरोमाइसीज़ सैरीवीसी) का प्रयोग किया जाता है। पारंपरिक पेय तथा आहारों की एक बड़ी संख्या सूक्ष्मजीवियों द्वारा किण्वित कराकर तैयार की जाती हैं। दक्षिण भारत के कुछ भागों में एक पारंपरिक पेय ‘टोडी’ है। इसे ताड़वृक्ष के तने के स्राव को किण्वित कराकर तैयार किया जाता है। सूक्ष्मजीवियों का प्रयोग किण्वित मत्स्य (मछली), सोयाबीन तथा बाँस प्ररोह आदि के भोजन तैयार करने में किया जाता है। ‘पनीर’ या ‘चीज’ एक प्राचीन भोज्य पदार्थ है। इसे तैयार करने में सूक्ष्मजीवियों का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न किस्मों के पनीर अपनी गठनसंरचना, सुगंध तथा स्वाद जैसे अभिलक्षणों से पहचाने जाते हैं; विशेष सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से आते हैं। उदाहरण के लिए ‘स्विस चीज’ में पाए जाने वाले बड़े-बड़े छिद्र प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई नामक बैक्टीरियम द्वारा बड़ी मात्रा में उत्पन्न CO2 के कारण होते हैं। ‘रॉक्यूफोर्ट चीज’ एक विशेष प्रकार के कवक की वृद्धि से परिपक्व होते हैं जिससे विशेष सुगंध आने लगती है।

चित्र 8.4 किण्वक (फरमैंटर)

चित्र 8.5 किण्वन संयंत्र
8.2 औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव
यहाँ तक कि उद्योगों में भी सूक्ष्मजीवियों का प्रयोग बहुत से उत्पादों के संश्लेषण में किया जाता है जो कि मनुष्य के लिए काफी मूल्यवान होते हैं। मादक पेय तथा प्रतिजैविक (एेंटीबॉयटिक) इसके कुछ उदाहरण हैं। व्यावसायिक पैमाने पर सूक्ष्मजीवियों को पैदा करने के लिए बड़े बर्तन की आवश्यकता होती है जिसे फरमैंटर या किण्वक कहते हैं (चित्र 8.4)।
8.2.1 किण्वित पेय
सूक्ष्मजीव विशेषकर यीस्ट का प्रयोग प्राचीन काल से वाइन, बियर, ह्विस्की, ब्रांडी या रम जैसे पेयों के उत्पादन में किया जाता आ रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वही यीस्ट सैकेरोमाइसीज़ सैरीबिसी(जो सामान्यतः ब्रीवर्स यीस्ट के नाम से भी प्रसिद्ध है;) ब्रैड बनाने तथा माल्टीकृत धान्यों तथा फलों के रसों में एेथानॉल उत्पन्न करने में प्रयोग किया जाता है। क्या आपको वे उपापचयी अभिक्रियाएँ याद हैं जिसके परिणामस्वरूप यीस्ट द्वारा एेथानॉल उत्पादित होता है। विभिन्न प्रकार के एल्कोहलीय पेय की प्राप्ति। किण्वन तथा विभिन्न प्रकार के संसाधन (आसवन अथवा उसके बिना) कच्चे पदार्थों पर निर्भर करती है; वाइन तथा बियर का उत्पादन बिना आसवन के; जबकि ह्विस्की, ब्रांडी तथा रम किण्वित रस के आसवन द्वारा तैयार किए जाते हैं। किण्वन संयंत्र (प्लांट) का फोटोग्राफ चित्र 8.5 में दिखाया गया है।
8.2.2 प्रतिजैविक (एेंटीबॉयोटिक)
सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रतिजैविकों (एेंटीबॉयोटिकों) का उत्पादन 20वीं शताब्दी की अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण खोज और मानव समाज के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। एेंटी एक ग्रीक भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ खिलाफ तथा बॉयो का अर्थ जीवन है। दोनाें को मिला देने से इसका अर्थ ‘जीवन के खिलाफ’ हुआ (रोग जो जीवों से उत्पन्न होते हैं उनके संदर्भ में) जबकि मनुष्यों के संदर्भ में यह जीवन के खिलाफ न होकर जीवन के प्रति माने जाते हैं। प्रतिजैविक (एेंटीबॉयोटिक) एक प्रकार के रसायनिक पदार्थ हैं, जिनका निर्माण कुछ सूक्ष्मजीवियों द्वारा होता है। यह अन्य (रोग उत्पन्न करने वाले) सूक्ष्मजीवियों की वृद्धि को मंद अथवा उन्हें मार सकते हैं।
8.2.3 रसायन, एंजाइम तथा अन्य जैवसक्रिय अणु

चित्र 8.6 वाहित मल उपचार संयंत्र का वायुवीय टैंक
8.3 वाहितमल उपचार में सूक्ष्मजीव

चित्र 8.7 वाहित मल उपचार संयंत्र का आकाशी चित्र
8.4 बॉयोगैस के उत्पादन में सूक्ष्मजीव

