बहुत से लोग पक्षी पालते हैं

(क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपने विचार लिखिए।


(ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।


बहुत सारे लोग घर में पक्षियों को पालते हैं| जैसे कबूतर, तोता, चिड़िया। घर में वह उन्हें खाने-पीने की सभी चीजें देते हैं। फिर चाहे तोते की मनपसंद हरी मिर्च हो या फिर चिड़ियों को दाना। इन सभी चीजों के बावजूद पक्षियों को पालना ठीक नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि भले ही आप घर में उन्हें खाने-पीने की सभी चीजें दे रहे हों लेकिन उनकी आजादी आपने उनसे छीन ली है। पक्षी बेजुबान होते हैं इसलिए वह अपनी तकलीफ किसी से नहीं कह सकते बस पिंजरे में बंद एक सीमित दायरे में घूमकर परतंत्र जीवन जीते रहते हैं| इसलिए पक्षियों को घर में न पालना ही उनके लिए ठीक है।


(ख) मेरे पास भी एक तोता था जिसका नाम मैंने गोलू रखा था। उसके लिए एक खूबसूरत सा पिंजरा लेकर आए। गर्मियों का मौसम था इसलिए मुझे उसकी चिंता सता रही थी। मैंने अपने कई दोस्तों को देखा है वह खुद तो कूलर या फिर एसी में सोते थे लेकिन अपने पक्षी को छांव में टांग देते थे। इसलिए मैं हमेशा सोचती थी कि जब भी मैं पक्षी पालूंगी तो उसे वहीं पर रखूंगी जहां पर मैं रह रही हूं। जैसे ही मैं तोते को घर लेकर आई उसके पिंजरे में पानी और अमरूद रखा। अमरूद इसलिए क्योंकि जितने शौक से तोता मिर्च खाता है उतने ही शौक से अमरूद। तोते की तबीयत खराब न हो गर्मी की वजह से इसलिए मैं उसे अपने कमरे में ले आई। मेरा कमरा एसी की वजह से ठंडा था। तोता तब तक मुझे पहचानता नहीं था। इसलिए थोड़ा परेशान दिखा हालांकि थोड़ी देर बाद उसे लगा कि वह सुरक्षित है। काफी देर तक कुछ नहीं खाया लेकिन बाद में जब उसने पिंजरे में रखा अपना पसंदीदा अमरूद देखा और खाया, तो मेरी जान में जान आई। अब वह तोता मेरे पास नहीं है। एक दिन पिंजरा खुला छूट गया और झट से वह उड़ गया। भले ही वह हम लोगों का नाम लेने लगा था। उससे अपना नाम सुनकर मैं खुश हो जाती थी लेकिन सुकून इस बात का है कि वह अब आजाद है।


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