स्पर्श भाग 2

Book: स्पर्श भाग 2

Chapter: 4. Mathilisharan Gupt - Manushyata

Subject: Hindi - Class 10th

Q. No. 1 of Exercise

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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,


सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।


अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,


दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ है।

कवि कहता है कि मनुष्य को धन-संपत्ति के घमंड में अंधा होकर सब कुछ भूल नहीं जाना चाहिए। धन-संपत्ति तो तुच्छ वस्तु है इसका कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। अपने आप को धन का स्वामी समझकर गमन करना बेकार है। मनुष्य को सदा याद रखना चाहिए कि संसार में कोई भी अनाथ नहीं है ईश्वर सबके साथ है। ईश्वर अत्यंत दयालु और गरीबों के दोस्त हैं। वह सदा आपकी सहायता करते हैं। जो मनुष्य स्वयं को गरीब समझकर सदा परेशान रहते हैं और उस ईश्वर पर विश्वास नहीं करते वह बहुत दुर्भाग्यशाली होते हैं। कवि पुनः कहता है कि इस संसार में सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों की सहायता के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दें।


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